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हे परम प्रियतम पूर्णतम पुरषोत्तम श्री कृष्ण।
तुम से विमुख होने के कारण अनादिकाल से
हमनें , हमने अनन्तानन्त दुख पाये एवं पा रहे हैं। पाप करते करते अन्त: करण इतना मलिन हो चुका कि रसिकों द्वारा यह जानने पर भी, की तुम अपनी भुजाओं को अपनी वात्सलल्यमयी दृष्टी से मेरी प्रतीक्षा कर रहे हो,तुम्हारी शरण में नहीं आ पाता
हे अशरण शरण‼️तुम्हारी कृपा के बिना तुम्हें कोई जान भी तो नहीं सकता ।ऐसी स्थिति में, हे अकारण करुण पतितपावन श्री कृष्ण । तुम अपनी अहैतुकी कृपा से ही हमको अपना लो ।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻#ऊंनमोभगवतेवासुदेवाय🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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