Captain Arvind Kumar
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Captain Arvind Kumar
@CaptainArvindK
Vice-Chairman-Central War Room | General Secretary & PCC Member @INCRajasthan | Shaurya Chakra
Sikar, Rajasthan Katılım Şubat 2022
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AICC मध्यप्रदेश प्रभारी, राजस्थान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतू विधायक आदरणीय श्री हरिश चौधरी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
प्रभु से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु प्रदान करें।
आप निरंतर जनसेवा के पथ पर अग्रसर रहकर नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें।
सादर शुभकामनाएँ।

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3 मई 2026 को 22 लाख 79 हज़ार छात्रों ने NEET-UG की परीक्षा दी थी। उन बच्चों ने सिर्फ़ एक एग्ज़ाम नहीं दिया था, उन्होंने अपने परिवार की उम्मीदें, सालों की मेहनत और अपना भविष्य दाँव पर लगाया था। किसी पिता ने खेत बेचे, किसी माँ ने गहने गिरवी रखे, किसी परिवार ने EMI पर कोचिंग करवाई, सिर्फ़ इसलिए कि उनका बच्चा डॉक्टर बन सके। लेकिन इस देश की व्यवस्था ने उनकी मेहनत को एक मज़ाक बनाकर रख दिया। NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी क्योंकि देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा जयपुर की एक प्रिंटिंग प्रेस से निकलकर सीकर, झुंझुनू, नागौर, देहरादून और केरल तक व्हाट्सऐप पर बिक रही थी — दो दिन पहले ₹5 लाख में, एक दिन पहले ₹30,000 में। यह परीक्षा नहीं थी, यह करोड़ों सपनों की खुलेआम नीलामी थी।
2016, 2021, 2024 और अब 2026 — चार बार NEET का पेपर लीक हो चुका है। अब इसे लापरवाही कहना भी झूठ होगा; यह सरकार की नाकामी, भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत और छात्रों के भविष्य के साथ संगठित धोखा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में कहा था कि उनकी सरकार युवाओं के सपनों को पंख देगी, लेकिन आज उन्हीं सपनों को माफियाओं के हाथ बेच दिया गया है और सरकार हर बार CBI जाँच का ढोंग करके अपनी ज़िम्मेदारी से भाग जाती है। अगर हर बार पेपर लीक हो रहा है, तो आखिर सरकार कर क्या रही है? अगर कानून इतने सख़्त हैं, तो माफिया हर साल और ताकतवर कैसे हो रहे हैं? क्यों NTA के बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती? क्यों हर बार छात्रों को दोबारा परीक्षा देने की सज़ा मिलती है, लेकिन सिस्टम बच जाता है?
2015 से अब तक देश में 50 से ज़्यादा सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं और 1.4 करोड़ से अधिक युवाओं का भविष्य बर्बाद हो चुका है। BJP शासित राज्यों में पिछले सात वर्षों में लगभग 70 पेपर लीक के मामले सामने आए, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता इतनी गहरी है कि हर घोटाले के बाद सिर्फ़ प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है, “सख़्त जाँच” का वादा होता है और फिर अगली परीक्षा के साथ अगला लीक सामने आ जाता है। व्यापम से लेकर #NEET तक, इस देश का छात्र लगातार सिस्टम से हार रहा है। Public Examinations Act 2024 बनाकर सरकार ने दावा किया कि अब पेपर लीक रुकेंगे, लेकिन जब करोड़ों में बिकने वाले पेपर माफिया खुले घूम रहे हों, तब ₹1 करोड़ जुर्माने और 10 साल की सज़ा की बातें सिर्फ़ राजनीतिक दिखावा लगती हैं। देश का युवा पूछ रहा है — सरकार का असली एक्शन प्लान क्या है?
क्या परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी? क्या डिजिटल और प्रिंटिंग सुरक्षा सुधरेगी? क्या छात्रों को मानसिक और आर्थिक नुकसान का कोई मुआवज़ा मिलेगा? या फिर हमेशा की तरह सरकार अगली जाँच, अगली समिति और अगले पेपर लीक का इंतज़ार करेगी? आज सिर्फ़ NEET के छात्र नहीं टूटे हैं, बल्कि हर वह युवा टूट चुका है जो UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहा है। इस सरकार ने युवाओं से उनका भरोसा छीना है, उनकी मेहनत का अपमान किया है और उनके भविष्य को एक ऐसी मंडी बना दिया है जहाँ ईमानदार छात्र नहीं, बल्कि भ्रष्ट नेटवर्क जीतता है।
#NEETUG #paperleak

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NEET 2026 के पेपर लीक की खबर सुनी।
परीक्षा नहीं - NEET अब नीलामी है।
कई सवाल परीक्षा से 42 घंटे पहले WhatsApp पर बिक रहे थे।
22 लाख से ज़्यादा बच्चे साल भर रात-रात भर आँखें जलाकर पढ़ते रहे और एक रात में उनका भविष्य बाज़ार में सरेआम नीलाम हो गया। यह पहली बार नहीं है। 10 साल में 89 पेपर लीक - 48 बार दोबारा परीक्षा। हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी।
मोदी जी, जब आप अपनी हर नाकामी का बिल जनता पर डालते हैं, तो ग़रीब के बच्चों का भविष्य भी उसी बिल में आता है।
22 लाख बच्चों का भरोसा टूटा है। और मोदी सरकार से बड़ा ख़तरा भारत के युवाओं के सपनों के लिए कोई नहीं।
मैं भारत के युवा के साथ हूँ। यह वक़्त बेहद मुश्किल है - मैं जानता हूँ। लेकिन यह व्यवस्था ऐसे नहीं रहेगी। हम मिलकर इसे बदलेंगे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी किसानों से खेत में खाद न डालने की अपील कर रहे हैं, ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे। लेकिन विडंबना देखिए, अपनी सत्ता की फसल को लहलहाने के लिए वे खुद इन 'ज़हरीली खादों' का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
- सांप्रदायिकता की खाद: ध्रुवीकरण और धर्म के नाम पर समाज को बांटकर वोटों की फसल काटना।
- जांच एजेंसियों की खाद: ED, CBI और IT के ज़रिए विपक्ष की राजनीतिक ज़मीन को बंजर करना।
- नफरत की खाद: RSS की संकीर्ण और विभाजनकारी विचारधारा से अपनी जड़ों को सींचना।
- रेवड़ियों की खाद: चुनाव के ऐन मौके पर महिलाओं के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने जैसी योजनाओं से मतदाता को लुभाना।
- कॉर्पोरेट की खाद: इलेक्टोरल बॉन्ड और पूंजीपतियों के चंदे से अपनी पार्टी की तिजोरी भरना।
- गोदी मीडिया की खाद: प्रोपेगेंडा और झूठ के ज़रिए जनता की आंखों पर पर्दा डालना।
- संविधान विरोधी खाद: संस्थाओं को पंगु बनाकर लोकतंत्र की गरिमा को खत्म करना।
सबसे बड़ा सवाल है कि मोदी जी को केमिकल खाद से 'धरती माँ' और खेती की बर्बादी तो साफ़ दिख रही है, लेकिन क्या वे उस पीड़ा को महसूस कर पा रहे हैं, जो उनकी इस ज़हरीली राजनीति से 'भारत माता', देश के संविधान और लोकतंत्र को हो रही है? या फिर वे RSS की विचारधारा और बड़े उद्योगपतियों के बहकावे में इतने मदहोश हैं कि उन्हें देश की संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की बर्बादी का अहसास तक नहीं हो रहा?
जिस किसान के खेत और बीज को वे कृषि कानूनों के ज़रिए कॉर्पोरेट का गुलाम बनाने वाले थे, आज उन्हें 'प्राकृतिक खेती' का ज्ञान देना सिर्फ एक छलावा है। जब तक राजनीति की खाद नहीं बदलेगी, तब तक लोकतंत्र की फसल कभी स्वस्थ नहीं हो सकती।
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान की आशंका के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से ईंधन खपत कम करने, अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने और एक साल के लिए सोना खरीदना टालने का आग्रह किया।
प्रधानम का यह बयान चुनाव परिणामों के बाद आया। जब BJP ने 2024 में अपना पूर्ण बहुमत गँवाया, तभी सरकार को "आर्थिक संकट" की गंभीरता का एहसास हुआ। यह साबित करता है कि राजनीतिक अस्तित्व, आर्थिक विवेक से पहले आता है। मोदी की अपील में देशभक्ति की भाषा है, लेकिन उसके पीछे की नीति में वर्गीय पक्षपात, जवाबदेही का अभाव और राजनीतिक सुविधावाद है। तीन मूल प्रश्न जो अनुत्तरित हैं:
1. क्यों? — जब GDP 7%+ बढ़ रही है, तो जनता को "त्याग" क्यों करना पड़े?
2. किसके लिए? — यह त्याग मध्यम वर्ग से क्यों माँगा जाए, उच्च वर्ग से क्यों नहीं?
3. जवाबदेही कब? — सरकारी अपव्यय, भव्य आयोजनों और लावारिस विकास योजनाओं का हिसाब कौन देगा?
वास्तविकता यह है कि नवंबर 2025 में IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘C’ ग्रेड देते हुए संकेत दिया कि राष्ट्रीय लेखांकन और मुद्रास्फीति के आँकड़े असंगठित क्षेत्र और आम लोगों की वास्तविक खपत को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं कर रहे। 2024 की चौथी तिमाही और 2025 की पहली तिमाही में रुपये पर अवमूल्यन का दबाव बढ़ा, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 के लगभग $706 अरब से घटकर मार्च 2025 तक $668 अरब रह गया। FY2024/25 में शुद्ध FDI लगभग शून्य के करीब पहुँच गया — ऊँचे शेयर मूल्यांकन, बढ़ते विनिवेश और निवेशकों के घटते भरोसे के कारण।
इसके बावजूद सरकार लगातार “विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” बनने का राजनीतिक उत्सव मनाती रही। अप्रैल 2025 में मोदी सरकार ने यह दावा बड़े गर्व से दोहराया कि भारत ने नाममात्र GDP के आधार पर जापान को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन यह उपलब्धि आम नागरिक के जीवन में कहाँ दिखाई देती है? बेरोज़गारी, महँगाई, आय असमानता और घटती क्रय-शक्ति के बीच यह दावा केवल एक सांख्यिकीय विजय जैसा लगता है — ऐसी विजय जिसका लाभ जनता को नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रचार को मिलता है।
यदि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक अस्थिरता के दीर्घकालिक प्रभाव जारी रहते हैं, तो वास्तविक GDP वृद्धि FY2025/26 में 6.6% और FY2026/27 में 6.2% तक सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में सरकार का जनता से “राष्ट्रहित में त्याग” माँगना तब तक नैतिक रूप से खोखला लगेगा, जब तक वह स्वयं सत्ता के अपव्यय, कॉरपोरेट पक्षपात और दिखावटी विकास राजनीति पर अंकुश लगाने की ईमानदार शुरुआत नहीं करती।
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मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।
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Heartiest congratulations to Hon. @TVKVijayHQ on taking oath as the Chief Minister of Tamil Nadu 🎉
A historic moment that reflects the faith, aspirations and hope of the people of Tamil Nadu for a progressive future.
Together, @INCIndia and @TVKVijayHQ remain committed to working for the welfare, development and aspirations of the people of Tamil Nadu, with unity and public service at the core.

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मातृ दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि उस अनमोल रिश्ते का सम्मान है, जिसके बिना जीवन की कल्पना अधूरी है।
माँ वह पहली गुरु होती है, जो हमें बोलना, चलना, संस्कार और प्रेम का अर्थ सिखाती है। वह अपने बच्चों के सपनों के लिए अपने हर सुख का त्याग कर देती है, बिना किसी शिकायत के। माँ की ममता में वह शक्ति होती है, जो टूटे हुए मन को संभाल ले और कठिन से कठिन परिस्थिति में भी हिम्मत देना सिखा दे।
समाज की नींव एक सशक्त माँ से ही मजबूत होती है। क्योंकि एक माँ केवल एक बच्चे का पालन-पोषण नहीं करती, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को आकार देती है। उसके दिए हुए संस्कार ही आने वाली पीढ़ियों को संवेदनशील, जिम्मेदार और मानवता से भरपूर बनाते हैं।
माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है — वह बिना किसी अपेक्षा के सिर्फ देना जानती है। शायद इसलिए दुनिया में माँ का स्थान सबसे ऊँचा माना गया है।
इस Mother's Day पर उन सभी माताओं को प्रणाम, जो अपने प्रेम, त्याग और आशीर्वाद से इस दुनिया को बेहतर बना रही हैं।
माँ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि पूरे जीवन की सबसे सुंदर अनुभूति है। 💖

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पटना में कल अपने रोज़गार का हक़ मांगते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बिहार पुलिस ने बेरहमी से पीटा - फिर से।
बेरोज़गार युवाओं को BJP का जवाब - लाठी।
भारत में आज सबसे बड़ी बीमारी बेरोज़गारी है और इसकी सबसे भयंकर मार बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रही है।
लाखों युवा डिग्री और क़ाबिलियत हाथ में लेकर दर-दर भटक रहे हैं। मगर BJP की सरकार को न इनकी परवाह है, न आपकी। जब युवा सड़कों पर उतरकर अपना हक़ मांगते हैं, उनके हाथ में रोज़गार नहीं - पीठ पर लाठियां रख दी जाती हैं।
भारत का युवा BJP के झूठ से तंग आ चुका है - वो अब चुप नहीं बैठेगा। और, कांग्रेस उनके साथ हर मोड़ पर खड़ी है।
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आज ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ है।
उन 26 निर्दोष पर्यटकों को नमन, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में अपनी धर्म के आधार पर पहचाने गए और गोलियों से भून दिए गए। उन सैनिकों को नमन जो देश की सीमाओं पर अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं। उन पूँछ और राजौरी के आम नागरिकों को नमन, जो पाकिस्तान के मोर्टार शेलिंग में मारे गए, जिनके घर, गुरुद्वारे, स्कूल और चर्च तबाह किए गए।
ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया — यह भारत की सैन्य क्षमता और इरादे का प्रमाण था।
लेकिन श्रद्धांजलि के साथ-साथ जवाबदेही भी जरूरी है।
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जिन नामों की पहचान की गई , जैसे हाफिज सईद और उसका करीबी सहयोगी सैफुल्लाह खालिद कासुरी , वे अब भी पाकिस्तान में सुरक्षित बताए जाते हैं। इसी तरह TRF से जुड़े साजाद गुल पर पहले से गंभीर आरोप होने के बावजूद, आतंकी नेटवर्क सक्रिय कैसे रहा?
पहलगाम हमले की पैटर्न को देखें —2016 का उरी हमला, पुलवामा 2019 और लद्दाख 2020 की उसी श्रृंखला का हिस्सा है । हर बार इंटेलिजेंस विफलता और हर बार मुख्य षड्यंत्रकारी सुरक्षित।
क्या हम हर बार बड़ा सैन्य जवाब देकर उन आतंकियों को भुला देते हैं जिन्होंने हत्याएं कीं?
सरकार की तैयारियां भी सवालिया निशान में है। पाकिस्तान की ओर से भारी शेलिंग में कई नागरिकों की मौत हुई, धार्मिक स्थल और शैक्षणिक संस्थान क्षतिग्रस्त हुए। सीमावर्ती इलाकों में नागरिक सुरक्षा, बंकर व्यवस्था, राहत और त्वरित पुनर्वास को लेकर सरकार पूरी तरह तैयार नहीं दिखी।
#पाकिस्तान ने जानबूझकर शंभू मंदिर जम्मू, पूँछ का गुरुद्वारा, और ईसाई कॉन्वेंट को निशाना बनाया — यह सांप्रदायिक एकता तोड़ने की सुनियोजित रणनीति थी।
आंकड़ों के अनुसार कुल 21 नागरिक और 8 सैनिक एवं अर्धसैनिक बल के जवान इस संघर्ष में शहीद हुए। कशमीर वैली में लोग मरते रहे और सरकार ने उनकी सुध नहीं ली।
24 अप्रैल को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष के सांसदों ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की गलत धारणा थी कि आतंकवादी पर्यटकों को निशाना नहीं बनाएंगे — क्योंकि पर्यटन कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
यह एक भयावह बौद्धिक विफलता है।
#पहलगाम हमले की पूरी रणनीति ही यही थी — उस "सामान्यता की आख्यान" को ध्वस्त करना जिसे भारत सरकार 𝟐𝟎𝟏𝟗 के बाद से कश्मीर के बारे में बना रही थी। पर्यटकों को मारना उस कथा पर सबसे करारा प्रहार था।
22 अप्रैल को तीनों सुरक्षा परतें — भारतीय सेना की 3 RR बटालियन, CRPF की 116वीं बटालियन, और J&K पुलिस एक साथ विफल हुईं। हमलावर सेना की वर्दी में आए, #बैसरन तक बिना पकड़े पहुँचे, और भागने में भी कामयाब रहे।
शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब आतंक के आकाओं को सजा मिलेगी।

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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस खेल कूद प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री अमीन पठान जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
@aminpathan54

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गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन 🙏
राष्ट्रकवि टैगोर की अमर रचनाओं ने गुलामी के अंधकार में भारतवासियों के मन में स्वतंत्रता, आत्मगौरव और देशप्रेम का नया उत्साह जगाया। उनका साहित्य केवल कला नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है, जिसने पूरे विश्व को भारतीय मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की महानता से परिचित कराया।
उनकी कविता, उनका दर्शन, और उनका मानवतावाद — आज भी हर उस इंसान का मार्गदर्शन करता है जो सत्य, स्वतंत्रता और संवेदना में विश्वास रखता है।

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डॉ. नारायण सुब्बाराव हार्डिकर जी को उनकी 136वीं जयंती पर कोटिश: नमन। 🙏
7 मई 1889 को धारवाड़ में जन्मे डॉ. हार्डिकर ने 1923 में कांग्रेस सेवा दल की नींव रखी, जो आज़ादी की लड़ाई का सबसे अनुशासित जन-संगठन बना।
सेवा दल को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण की पाठशाला बनाया।
उनका मानना था, अनुशासन, सेवा भाव, और सामुदायिक जिम्मेदारी के बिना स्वराज का कोई अर्थ नहीं।
आज जब लोकतंत्र पर संकट के बादल हैं, जब संवैधानिक मूल्यों को चुनौती दी जा रही है, तब डॉ. हार्डिकर का वह मंत्र और भी प्रासंगिक हो जाता है कि जन-संगठन ही असली ताकत है।

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आज जब हम पंडित मोतीलाल नेहरू जी की जयंती मनाते हैं, तो यह केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि नहीं है — यह उस वैचारिक आधार को प्रणाम है जिस पर आज की भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था खड़ी है।
पंडित जी का बचपन राजस्थान के खेतड़ी (झुंझुनू) में बीता, इसलिए राजस्थान के लोगों से उनका एक अलग ही नाता है। उनके बड़े भाई नंदलाल नेहरू, जयपुर रियासत की दूसरी सबसे बड़ी जागीर खेतड़ी के दीवान थे। खेतड़ी की गलियों में जीवन की पहली पाठशाला देखने वाले मोतीलाल आगे चलकर दूरदर्शी नेतृत्व के प्रतीक बने और अपने निर्णयों से देश की राजनीत को नए आयम दिए ।

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Some in the Congress, and others, are gloating about TMC’s loss.
They need to understand this clearly - the theft of Assam and Bengal’s mandate is a big step forward by the BJP in its mission to destroy Indian democracy.
Put petty politics aside. This is not about one party or another. This is about 🇮🇳.
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