OBC वर्गीकरण
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OBC वर्गीकरण
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OBC आरक्षण के समान वितरण के लिए रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट लागू हो.








उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय की नई ललकार! अब समय आ गया है कि "सामाजिक न्याय समिति" की रिपोर्ट को तत्काल लागू किया जाए। उत्तर प्रदेश में OBC के 27% आरक्षण को तीन हिस्सों में बाँटकर प्रत्येक वर्ग को उसका वास्तविक हिस्सा मिले: पिछड़ा वर्ग: 7% अत्यंत पिछड़ा वर्ग: 9% सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग: 11% यह नारा सिर्फ़ रिपोर्ट लागू करने का नहीं है, बल्कि उस हर वर्ग की आवाज़ है जो अब तक विकास की धारा से वंचित रहा, जिनका हक़ अब तक दूसरे लोग खा गए।अब यह अन्याय बंद होगा… अब हक़ और हिस्सेदारी का दौर शुरू होगा… अब कोई पीछे नहीं रहेगा…आइए इस लड़ाई को और मज़बूत करें और न्याय की मांग को हर कोने तक पहुँचाएँ। यही है सच्चा लोकतंत्र, यही है सामाजिक न्याय की ललकार। #SuheldevBharatiyaSamajParty #SangathanSeShakti #SamajikNyay #27PercentReservation #OBCRepresentation #NyayKiLadai #AwazUthao




जनसंख्या से अधिक संवैधानिकपद राजनीतिकपद सरकारी नौकरियों में पद प्राप्त किए आज साधन संपन्न लोगों ने 😡 #मूल_ओबीसी_मांगे_वर्गीकरण #रोहिणी_कमीशन_लागू_करो #OBC_का_वर्गीकरण_करो @ashokgehlot51 @HansrajMeena @BhajanlalBjp @VasundharaBJP @Rajendra4BJP @DRGEDAR @daulat_pensia


राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग, जयपुर के तत्वावधान में आज चितौड़गढ़ जिला कलेक्टर सभागार में पंचायतीराज एवं नगर निकाय संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनैतिक प्रतिनिधित्व विषय पर आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में सहभागिता की। इस संवाद कार्यक्रम के माध्यम से ओबीसी समाज की भागीदारी, संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय स्वशासन में सशक्त प्रतिनिधित्व जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम में आयोग के सदस्य श्री मोहन मोरवाल जी, जिला अध्यक्ष श्री रतन गाडरी जी, पूर्व जिलाध्यक्ष श्री मिट्ठूलाल जी जाट सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह जनसंवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी एवं मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। @BhajanlalBjp @RajCMO @BJP4Rajasthan @BJP4India #chittorgarh




जिस सीकर के शिक्षक ने व्हिसलब्लोअर बनकर साहस और नैतिक कर्तव्य का परिचय दिया, उसे तो सीकर से जोड़ने की ज़रूरत नहीं समझी गई, लेकिन सीकर को पेपर लीक का एपिसेंटर बताने में कोई कमी नहीं रखी गई। अब जब सीबीआई जाँच में पी.वी. कुलकर्णी के उन खुलासों का ज़िक्र हो रहा है जिनके अनुसार 2019 से ही NEET पेपर्स तक पहुँच उपलब्ध थी, तो फिर पुणे–लातूर को एपिसेंटर क्यों नहीं कहा जा रहा? अपराध की न तो कोई भौगोलिक पहचान होती है, न किसी समुदाय या शहर से उसका चरित्र निर्धारित होता है। अपराध हमेशा व्यक्तिगत आचरण का प्रश्न होता है। इसे किसी एक शहर या समुदाय से जोड़ना न केवल संकुचित दृष्टि है, बल्कि भ्रामक नैरेटिव गढ़ने जैसा है।और नैरेटिव तो यह भी हो सकता है कि किसी नेशनल कोचिंग के इशारे पर लोकल कोचिंग संस्थानों को बदनाम करने के लिए ऐसी कहानी रची गई हो।




बीच बाजार सरेआम गुंडागर्दी और हत्या का प्रयास करने वाले आदतन अपराधियों के सामने पुलिस क्यों नतमस्तक है ?








