🇮🇳 محمد⸙چاند⸙خان

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@ChaandK007

أشهدُ أنْ لا إلهَ إلاَّ اللهُ وأشهدُ أنَّ محمّداً رسولُ الله ●Social Activist, ●Political Debate●YouthVoice●Political Thinker

In Your heart Katılım Şubat 2022
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🇮🇳 محمد⸙چاند⸙خان
ज़माने से अली वालों की सुल्तानी नही जाती। इसी बायेस मुनाफिक़ की परेशानी नहीं जाती।। अली के मुंकिरो की आक़िबत पहचान लो मोहसिन। वो मरते हैं तो उनकी शक्लें पहचानी नही जाती।। #Salam_Ya_Hussain
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Wasim Champarni
Wasim Champarni@Wasim_Shaikh22·
ये छोटका मदनी कौन है ? PM ? CM ? DM ? Election Commission of India ? Justice of the Supreme Court ? Justice of the High Court ? इन्हे में से कोई नहीं, तो फिर संवेधानिक भारत में किसी राजनितिक पार्टी से जवाब माँगना सही है ? बंद करो बे नाटक
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Zubair Memon
Zubair Memon@ZubairMemonPune·
Very bad assesment and Untimed letter issued, but now it's high time we see the real faces and recognize them.
Jamiat Ulama-i-Hind@JamiatUlama_in

*सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को जमीयत उलेमा-ए-हिंद का नोटिस, 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब* नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी घोषित सिद्धांतगत और संगठनात्मक नीति के तहत मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी से हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आज़ादी के तुरंत बाद कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक, दिनांक 17 और 18 अगस्त 1951, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। इस नीति की पुष्टि बाद की अनेक बैठकों में भी बार-बार की जाती रही है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें। इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा के पक्षधर हों। जमीयत के अनुसार हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है। इसी संदर्भ में उनसे कहा गया है कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित उत्तर केंद्रीय कार्यालय को भेजें और यह स्पष्ट करें कि उक्त कदम किन उद्देश्यों, परिस्थितियों और आधारों पर उठाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने बयान में पुनः दोहराया है कि वह अपने अकाबिर द्वारा निर्धारित सिद्धांतगत रुख, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा सांप्रदायिक राजनीति के हर स्वरूप के विरोध के अपने रुख पर पूरी दृढ़ता के साथ कायम है। --------- प्रिय संपादकगण इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित करने की कृपा करें भवदीय नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद

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Aadil Mansoori | عادل منصوري
पेंग्विन की वीडियो देख कर पूरी दुनिया भावुक हो कर रोने लगी, गाज़ा की वीडियो देखते ही आगे स्क्रॉल कर देते हैं 💔
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AMAAN
AMAAN@amaan_tweets313·
@ChaandK007 समझदार को इशारा काफी!
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Wasim Champarni
Wasim Champarni@Wasim_Shaikh22·
कौम के लिए सिरदर्द बनी JUM असली लड़ाई MIM से नहीं है, बल्कि यहां इमरान प्रतापगढ़ी के आगे बढ़ने से जलन है। क्योंकि पूरी ज़िंदगी कांग्रेस के लिए ही प्रचार- किया गया, तो फिर इमरान के आगे बढ़ने पर सवाल खड़े हो गए। तभी से सेक्युलर बनने की होड़ लगी हुई है, लेकिन कांग्रेस अब भी इन्हें
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Ansar Imran SR
Ansar Imran SR@ansarimransr·
देशव्यापी NRC की मांग करने वाले आज किसी और को सांप्रदायिक का सर्टिफिकेट दे रहे हैं! वाह गजब
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Zakir Ali Tyagi
Zakir Ali Tyagi@ZakirAliTyagi·
जमियत उलेमा ए हिंद ने AIMIM पार्टी को सांप्रदायिक पार्टी कहकर संबोधित किया है, साथ AIUDF चीफ़ जनाब बदरूद्दीन अजमल साहब को AIMIM के साथ गठबंधन करने पर नोटिस भी जारी कर दिया है। यह पत्र कहां से लिखकर कॉपी पेस्ट किया गया है इस पर बात नहीं करूंगा लेकिन इतना कहने में कोई हर्ज नहीं कि @JamiatUlama_in द्वारा @asadowaisi की पार्टी AIMIM को सांप्रदायिक पार्टी करार देना घोर निंदनीय है और सवाल खड़े करता है। जमियत उलेमा ए हिंद ने हज़ारों काम ऐसे किए है जिनके लिए दिल में इज़्ज़त और सम्मान है, और हर व्यक्ति के दिल में जमियत के प्रति इज़्ज़त व सम्मान होना भी चाहिए। लेकिन सम्मान करते हुए यह सवाल भी पूछा जाना चाहिए और जमियत को बताना चाहिए कि AIMIM कैसे सांप्रदायिक पार्टी है और जमियत को यह ठेकेदारी किसने दी कि कौन पार्टी सांप्रदायिक है कौन सांप्रदायिक नहीं? ईद मिलन समारोह में मोहन भागवत के सामने खाना परोसने वाली जमियत को पहले ख़ुद बताना चाहिए कि मोहन भागवत कौन है? आख़िर क्या वजह है कि मौलाना अरशद मदनी साहब और मौलाना महमूद मदनी साहब अलग- अलग नाम से जमियत उलेमा ए हिंद चला रहे हैं? क्यों एक तंजीम में बंटवारा हुआ? आखिर क्या वजह रही कि दोनों जमियत की विचारधारा अलग अलग बनती जा रही है? AIMIM पार्टी से हज़ार तरह की असहमतियां हो सकती हैं लेकिन बावजूद इसके बिना साबित किए सांप्रदायिक पार्टी कहकर ख़ुद को अच्छा ठेकेदार बताना और बनाने की कोशिश करना बिल्कुल सही नहीं, जमियत का बदरुद्दीन अजमल को भेजा गया नोटिस और AIMIM पर को गई घटियां टिप्पणी निंदनीय है, जमियत को अब साबित करना चाहिए कि AIMIM किस आधार पर सांप्रदायिक पार्टी है, अन्यथा इस नोटिस और बयान को माफ़ी मांगते हुए वापस लिया जाना चाहिए।
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Zakir Ali Tyagi
Zakir Ali Tyagi@ZakirAliTyagi·
जमियत उलेमा ए हिंद द्वारा @asadowaisi की पार्टी AIMIM को सांप्रदायिक पार्टी कहकर संबोधित करना बहुत ही ज़्यादा शर्मनाक हैं, अब जमियत उलेमा ए हिंद ने मजबूर कर दिया है कि उनकी कुंडलियों पर लिखा जाएं और बोला जाएं।
Jamiat Ulama-i-Hind@JamiatUlama_in

*सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को जमीयत उलेमा-ए-हिंद का नोटिस, 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब* नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी घोषित सिद्धांतगत और संगठनात्मक नीति के तहत मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी से हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आज़ादी के तुरंत बाद कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक, दिनांक 17 और 18 अगस्त 1951, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। इस नीति की पुष्टि बाद की अनेक बैठकों में भी बार-बार की जाती रही है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें। इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा के पक्षधर हों। जमीयत के अनुसार हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है। इसी संदर्भ में उनसे कहा गया है कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित उत्तर केंद्रीय कार्यालय को भेजें और यह स्पष्ट करें कि उक्त कदम किन उद्देश्यों, परिस्थितियों और आधारों पर उठाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने बयान में पुनः दोहराया है कि वह अपने अकाबिर द्वारा निर्धारित सिद्धांतगत रुख, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा सांप्रदायिक राजनीति के हर स्वरूप के विरोध के अपने रुख पर पूरी दृढ़ता के साथ कायम है। --------- प्रिय संपादकगण इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित करने की कृपा करें भवदीय नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद

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جاويد اختر خان
جاويد اختر خان@AKHTAR100375·
घर के बाहर ढ़ूंढ़ रहे हो दुश्मन को होता है हर वार हमेशा अंदर से!!!
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Shad Roaman
Shad Roaman@Bihari_Ladka57·
जमीयत उलेमा ए हिंद का अध्यक्ष महमूद मदनी 2006 से पहले तो सेक्यूलरों का आड़ सहलाता था फिर सेक्यूलरों ने खुश हो कर उसे राजसभा भेज दिया तब से इसका बाप और ये सेक्यूलरों का आड़ पूरा नटी तक चूसे रहते है। मदनी जैसे तथाकथित रहनुमा की वजह से ही मुसलमान हर क्षेत्र में आज हाशिए पे है।
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Aas Mohd Saifi
Aas Mohd Saifi@yuva_aas·
एक मुसलमान जो बचे हुए तरबूजों को सड़को पर खड़ी गायों को खिला रहा है। ये गायों के नाम पर नफ़रत फैलाने वालों के मुंह पर तमाचा है..!
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Ansar Imran SR
Ansar Imran SR@ansarimransr·
जमीयत उलेमा ए हिंद ने किसी को सांप्रदायिक बताया है और मौलाना बदरुद्दीन अजमल को नोटिस भी भेजा है! वाह गजब!!! खैर छोड़ो ज्यादा बोलूंगा तो विवाद होगा
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Aas Mohd Saifi
Aas Mohd Saifi@yuva_aas·
क्या असदुद्दीन ओवैसी सांप्रदायिक है, या उनकी पार्टी AIMIM सांप्रदायिक है। 2 बाते है, यह तो आपका लेटर RSS मुख्यालय से छप कर आया है, या कांग्रेस पार्टी ने आपको लिफाफा भिजवाया है..!
Jamiat Ulama-i-Hind@JamiatUlama_in

*सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को जमीयत उलेमा-ए-हिंद का नोटिस, 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब* नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी घोषित सिद्धांतगत और संगठनात्मक नीति के तहत मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी से हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आज़ादी के तुरंत बाद कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक, दिनांक 17 और 18 अगस्त 1951, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। इस नीति की पुष्टि बाद की अनेक बैठकों में भी बार-बार की जाती रही है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें। इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा के पक्षधर हों। जमीयत के अनुसार हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है। इसी संदर्भ में उनसे कहा गया है कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित उत्तर केंद्रीय कार्यालय को भेजें और यह स्पष्ट करें कि उक्त कदम किन उद्देश्यों, परिस्थितियों और आधारों पर उठाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने बयान में पुनः दोहराया है कि वह अपने अकाबिर द्वारा निर्धारित सिद्धांतगत रुख, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा सांप्रदायिक राजनीति के हर स्वरूप के विरोध के अपने रुख पर पूरी दृढ़ता के साथ कायम है। --------- प्रिय संपादकगण इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित करने की कृपा करें भवदीय नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद

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Mohd Shadab Khan
Mohd Shadab Khan@VoxShadabKhan·
जमियत उलेमा ए हिंद वाले भाई साहब हमें अनब्लॉक करो, आपकी तारीफ में मेरे पास कुछ शब्द हैं, आप तक पहुंचाना है।
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وفاءآعظمی WafaAzmi 🇦🇪🇮🇳
जब तक कोई भी व्यक्ति जो अपने आप को पत्रकार कहता है मुस्लिम लीडरशिप के एजेंडे पे नहीं है उसको ऐक रुपया भी कम्युनिटी के नाम पे कम्युनिटी से मांगने का बिल्कुल अधिकार नहीं है ये टोटल वेस्ट ऑफ़ रिसोर्सेज है
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Aas Mohd Saifi
Aas Mohd Saifi@yuva_aas·
कुछ दिनों X पर एक–एक दिन में कई–कई अकाउंट सस्पेंड हो रहे हैं , वजह पता नहीं मुझे नहीं लगता ये अकाउंट सरकार के कहने पर सस्पेंड हो रहे हैं, क्योंकि इसमें कई सारे छोटे और अनवेरिफाइड अकाउंट भी शामिल हैं, जो सरकार के खिलाफ नहीं लिखते थे। एक वजह ये भी हो सकती है कि वो बार–बार X के नियमों को तोड़ रहे हो, लेकिन क्या नियम तोड़े हैं ये भी साफ नहीं बता रहा X X पर कुछ भी पारदर्शी नहीं है..!
Aas Mohd Saifi tweet media
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