गुजरात के खेड़ा जिले की एक पंचायत की महिला सदस्यों ने विकास को लेकर अपनी जो भावनाएं व्यक्त की थीं, उनसे पता चलता है कि जमीनी अनुभव से निकली वाणी कैसे वेद-वाक्य बन जाती है। इसके बारे में हर देशवासी को जरूर जानना चाहिए…
जब निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की सहभागिता बढ़ती है तो व्यवस्थाओं में भी संवेदनशीलता आती है। जल जीवन मिशन सहित हमारी कई योजनाओं की सफलता इसका बड़ा उदाहरण है।