
Mαԋҽɳԃɾα ʂαɾαɳ ℕ𝕒𝕘𝕠𝕦𝕣
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Mαԋҽɳԃɾα ʂαɾαɳ ℕ𝕒𝕘𝕠𝕦𝕣
@Copmahi21
👨✈️देश का सिपाही / लोकसेवक 🙏 ✈️✍️ निवासी _ मेड़ता नागौर/ देवनिर्मितं देशं हिन्दूस्थानं पचक्षते।🚩 वीर तेजाजी ❣️ 🚩तेजल तपधारी -खरनाल #भाईचारा ग्रुप




















क्या थानेदार साहब अब प्यार से पूछेंगे? आपका खोपड़ा खराब है क्या? असल में जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में एक वकील के साथ थानेदार साहब द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की घटना सामने आने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को कोर्ट में तलब कर फटकार पिलाई थी। निर्देश दिए थे कि पुलिस वालों को सॉफ्ट स्किल की ट्रेनिंग दी जाए। मतलब किससे कैसे बात करनी है, यह सिखाया जाए। दिनभर यह सब हुआ और शाम को राजस्थान के डीजीपी साहब ने भी प्रदेश के तमाम पुलिस अफसरों को लाइन पर ले लिया और उन्हें समझाया कि थाने में आने वालों से थोड़ा अच्छा व्यवहार होना चाहिए। अब पुलिस को माननीय न्यायालय के निर्देशों की पालना तो करनी ही है। इसलिए 6 दिसंबर को जोधपुर के मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग देना तय कर लिया गया है क्योंकि एक सप्ताह में पुलिस कमिश्नर महोदय को माननीय उच्च न्यायालय में रिपोर्ट भी पेश करनी है। दो घंटे के इस ट्रेनिंग सेशन में पुलिस कमिश्नर से लेकर पुलिस कांस्टेबल तक सभी शामिल होंगे। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम की बहनों के अलावा मनोवैज्ञानिक, मोटिवेशनल स्पीकर्स और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी अच्छे व्यवहार की ट्रेनिंग देंगे। अब सवाल ये है कि क्या जोधपुर पुलिस ने या राजस्थान पुलिस ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार का कोई मनोवैज्ञानिक अध्ययन करवाया है? क्या इस बात की पड़ताल करवाई गई है कि थाने में आने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार होता है और खराब व्यवहार होता है तो क्यों होता है? व्यवहारिक बात यह है कि 2 दिन में यह सब संभव ही नहीं हो पाता। फिर क्या पुलिस हवा में तीर चला रही है? सिर्फ हाई कोर्ट में पालना रिपोर्ट पेश करने के लिए औपचारिकता पूरी कर रही है? क्या 2 घंटे के प्रवचनों से किसी का व्यवहार सुधर सकता है? भले ही पुलिस वाले हों या वकील या कोई और। सभी सामाजिक प्राणी हैं और उसी समाज का अभिन्न अंग है जिसको पुलिस के व्यवहार से शिकायत रहती है। यह किसी 2 घंटे के सेशन से सुधर जाए, इसकी संभावना कम ही नहीं बल्कि शून्य ही है। कायदे से तो हाईकोर्ट को इस जल्दबाजी के लिए एक बार फिर से पुलिस कमिश्नर को तलब कर फटकार ही लगानी चाहिए। इतने गंभीर विषय में ऐसी औपचारिकता और कैजुअल अप्रोच स्वीकार्य ही नहीं होनी चाहिए। पहले समस्या का विस्तृत अध्ययन करना जरूरी है और उसके बाद पूरे राजस्थान के पुलिसकर्मियों का एक ट्रेंनिंग शेड्यूल बनाने की जरूरत है। ऐसा नहीं बिल्कुल भी नहीं है कि सिर्फ जोधपुर के किसी एक थाने या अनेक थानों में परिवादियों, फरियादियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता है। यह पूरे राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे पुलिस सिस्टम की समस्या है। आप पुलिस वालों को छुट्टी नहीं देते हैं, उन्हें हार्ड ड्यूटी के बदले में उचित पारिश्रमिक नहीं देते हैं, उनकी मांगे नहीं सुनी जाती हैं, वे कभी मेस का बहिष्कार करते हैं तो कभी होली का बहिष्कार करते हैं लेकिन फिर भी उनकी सुनवाई नहीं होती और उन्हें यह शिकायत रहती है कि वे अनुशासन से बंधे हुए हैं इसलिए हड़ताल नहीं कर सकते। लेकिन इस सब का फ्रस्ट्रेशन तो पैदा होता ही है और यह या तो घर पर निकलता है या फिर थाने में शिकायत/गुहार लेकर आने वालों पर। एक बात और, आप पुलिस से बहुत ज्यादा अच्छे व्यवहार की उम्मीद भी नहीं कर सकते। पुलिस को बहुत ज्यादा अच्छा व्यवहार करने के लिए कहा जाएगा या मजबूर किया जाएगा तो फिर पुलिस का वह डर भी नहीं रहेगा जो होना जरूरी है। @PoliceRajasthan







