@ranvijaylive ऐसा थोड़े ही है की #aamirkhan साहब ने डिलीट कर दिया तो क्या पब्लिक उनकी इतनी अच्छी creation को कैसे भूल सकती है ॥
ये लीजिए पब्लिक demand पर:
बाद में मुझसे ना कहना घर पलटना ठीक है,
वैसे सुनने में यही आया है रस्ता ठीक है।
शाख से पत्ता गिरे,
बारिश रुके,
बादल छटें,
मैं ही तो सब कुछ गलत करता हूँ अच्छा ठीक है।
एक तेरी आवाज़ सुनने के लिए ज़िंदा है हम,
तू ही जब ख़ामोश हो जाए तो फिर क्या ठीक है।।
- तहजीब हाफी
जोधपुर में दो बहनों ने गैंगरेप से परेशान होकर आत्महत्या कर ली, पूरा मामला ऐसा है 👇
बड़ी बहन को महिपाल नाम के आदमी ने अपने प्रेम जाल में फंसाया. फिर उसका अश्लील वीडियो बना लिया.
इसके बाद महिला को ब्लैकमेल कर महिपाल और उसके 6 दोस्त रेप करने लगे. करीब 4 साल तक ये चला.
इस बीच वीडियो वायरल करने के नाम पर महिला से पैसे भी वसूले गए. ब्लैकमेलिंग और शोषण से परेशान महिला ने 20 मार्च को फांसी लगा ली.
इसके बाद महिला की छोटी बहन मुकदमा लिखवाने पुलिस के चक्कर काटने लगी.
वहीं, महिपाल और गैंग अब छोटी बहन को वीडियो वायरल कर समाज में परिवार की छवि खराब करने की धमकी देने लगे.
महिपाल और गैंग ने वीडियो डिलीट करने के बहाने छोटी बहन को बुलाया, और उसका भी गैंगरेप किया.
छोटी बहन ने 11 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी, लेकिन कोई खास एक्शन नहीं हुआ.
उल्टा महिपाल और उसके दोस्त छोटी बहन को धमकाते रहे कि पुलिस उनके साथ है, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा.
इससे तंग आकर छोटी बहन जहर खाकर पानी की टंकी पर चढ़ गई. जब तक अस्पताल ले जाते, उसकी मौत हो गई.
इस तरह 2 महीने से कम वक्त में 2 बहनों ने गैंगरेप की वजह से आत्महत्या कर ली.
कानूनी आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में एक बहुत बड़ा प्रतिशत ऐसे अपराधियों का होता है जो पीड़िता के करीबी, रिश्तेदार या जानने वाले होते हैं।
रहे हैं यह रिश्ते बनते ही इसलिए कि बीच में अड़चन ना आये
हजारों मुकदमे रेप/बलात्कार के दर्ज होते हैं वो ही मुकदमे थाने की चौखट से निकलकर पेसो से समझौते में तब्दील हो जाते है और सबसे ज्यादा मामले भी पारिवारिक सदस्यों से निकलते हैं
हवस के इतने भूखे की स्वयं की गौत्र की लड़कियों से शारीरिक संबंध बना लिये सगौत्र के लड़कों के संग सो गयी वो भी पारिवारिक सदस्य....
सेक्स का वो नशा की धर्मभाई/ धर्म की बहनें बनाकर जिस्मों से खेल लिये जिन रिश्तों को मान मर्यादा से देखा जाता है लोग उन्ही का सहारा लेकर हमबिस्तर हो
फतेह तुम्हारी हों
राब्ता तो वक्त की धूल में कहीं खो गया, पर उस मिठाई का हक मैं आज भी रखता हूँ। तुम्हारी बुलंदी सिर्फ तुम्हारी नहीं, उन खामोश दुआओं की भी जीत होगी जो अरसे से तुम्हारे हक में मांगी गई हैं।"
मसला राब्ते का नही मिठाई का है जो तुम्हारी फतेह पर उस शहर
नयी मंजिल की तलाश थी सो बिछड़ गए
मै तो कामयाब न हो सका तेरा क्या हुआ....
अरसे बाद हम उसी राह पे मिले जहां पहली दफा मिले थे मैंने इशारों-इशारों में ही इस्तकबाल किया... कामयाबी की राह में थके हुए फुर्सत मिली तो भटक के हमारे सामने की मेड़ पर आ बैठे मगर गुफ्तगू नहीं हो सकी