डेढ़ कवि

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@Dedhkavi

अनुभव, निजी-मत व विचारधारा के आधार पर अपनों से अपनी बात।

भावनाओं में Katılım Mart 2022
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
यह संसार, यहाँ के लोग, मैं, मेरा एक सच, मेरा एक व्यवहार और तुम्हारे साथ मेरा व्याकुल अंतर्मन!
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
ग़र उसे उससे ज़्यादा तुम्हारी फ़िकर नहीं है, तो यह जो भी है, पर प्यार नहीं है।
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
आप भावुक नहीं, मूर्खता के चरम पर हैं यदि आप एक ही व्यक्ति को दुबारा आपको बेइज्जत करने का मौका दे रहे हैं।
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
@jaynildave साथ मिले या ना मिले रहना अकेले ही पड़ता है इसलिए जो मन करे वो चुनो।
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oliver
oliver@jaynildave·
@Dedhkavi Kabhi kabhi lagta hai sath chahiye, kabhi kabhi lagta hai akela hi rehna hai thodi der ke liye
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
कभी-कभी हमें सिर्फ़ साथ चाहिए होता है, इसलिए एक उम्र बाद फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि जिनके साथ बैठे हैं वो पसंद हैं या नहीं।
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जौली ♡☾
जौली ♡☾@blackbindigirl·
@Dedhkavi Par pasand hona to zaruri hai na,bina pasand ke kab tak sath reh sakte😓
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
@Tonishark3 वापस मोह-माया में भेजना चाहते हैं आप।
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
तुम्हें जो प्यार के कायदे सिखा रहा हूँ, अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार रहा हूँ।
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डेढ़ कवि@Dedhkavi·
मिलने वाले अब, मुझ तक नहीं आते, टकराकर इनपर, अपनी बात लिख जाते हैं, वर्षों से मैंने चारों ओर 'दीवारें' खड़ी कर रखी हैं, जो मुझे सुनती हैं, समझती हैं और बहस नहीं करती।
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
आदि से अनंत की वेदनाएं सहता हूँ मैं क्यों भविष्य या भूत में नहीं रहता हूँ। ना कि कल कैसा होगा, कितना धन अर्जित होगा, कितनी ऊर्जा बची रहेगी, कब तक स्वांस थमी रहेगी। भविष्य सैर कराता है अंत दिशा की ओर, इस जीवन की माया से उस सागर की ओर। मोह भंग नहीं करता, प्रेमरंग में बहता हूँ।
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
भूत बताता है रहस्य जन्मों के, कब कितने युद्ध लड़े, किस युग मे षणयंत्र रचे, दर्शन कब हुए प्रभु महात्म्य के, बुद्धि व्यापकता एवं आध्यात्म के। कितने तड़पे रोगी बनकर, कितने काटे धड़ से सर, भाल पकड़ कर, भाव जकड़कर, वर्तमान में रहता हूँ। मैं क्यों भविष्य या भूत में नहीं रहता हूँ।
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जौली ♡☾
जौली ♡☾@blackbindigirl·
@Dedhkavi Aese pyaar bhare tweet jisko bhej sakun,wo Banda to mai bhi deserve karti🥹🏃‍♀️
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डेढ़ कवि
डेढ़ कवि@Dedhkavi·
यदि ये नभ, सूर्य, धरा, पवन व ऋतुएँ आदि से यहीं थी तो निश्चित है कि तुम भी यहाँ इससे पहले थी! इसी प्रकार मेरे साथ, मेरे प्रेम में, व्याकुल और तृप्त, आगे भी रहोगी किसी अन्य काल में, अंत तक!
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डेढ़ कवि@Dedhkavi·
पहले लोगों का चिंतन व्यक्तित्व पर होता था और अब छवि पर होता है। पहले लोग संसार के हित के लिए जीवन समर्पित करते थे और अब स्वयं को संसार समर्पित करते हैं। जीवन का सार यही है कि 'सुख-दुःख' जो जहाँ ढूंढ पाए और जिसे जहाँ मिल जाए।
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