रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India

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@DefenceMinIndia

Office of the Raksha Mantri/ Defence Minister of India

South Block, New Delhi Katılım Eylül 2017
286 Takip Edilen1.4M Takipçiler
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भारत की defence preparedness और strategic autonomy के लिए यह ज़रूरी है कि भारत ड्रोन मैनुफैक्चरिंग में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने। इस काम में देश को आप सभी की ज़रूरत है। सरकार की तरफ़ से आपको हर तरह का समर्थन प्राप्त होगा। हम सबको मिलकर मिशन मोड में काम करना होगा ताकि अगले कुछ वर्षों में भारत, indigenous drone manufacturing का ग्लोबल हब बन जाये: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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जब हम सभी मिलकर काम करेंगे, तभी एक मजबूत innovation ecosystem बनेगा। यदि हम सभी मिलकर पूरी शक्ति और समर्पण के साथ आगे बढ़ें, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुँच पाएंगे: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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यह आत्मनिर्भरता सिर्फ़ प्रोडक्ट के स्तर पर ही नहीं बल्कि component के स्तर पर भी ज़रूरी है। यानि ड्रोन के mould से लेकर, software, engine और batteries सभी भारत में ही बने। यह काम आसान नहीं है क्योंकि अधिकांश देशों में जहाँ ड्रोन्स बनते हैं वहाँ कई critical components एक देश विशेष से import किए जाते हैं: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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आज जब पूरी दुनिया रूस और यूक्रेन के साथ-साथ ईरान-इज़राइल के बीच ज़ारी संघर्ष को देख रही है तो हम साफ़ देख सकते हैं कि future warfare में ड्रोन्स और काउंटर ड्रोन technologies की बहुत बड़ी भूमिका है। आज भारत में एक ऐसे ड्रोन मैनुफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण की ज़रूरत है, जिसमें हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हों: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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कई बार बड़ा परिवर्तन एक छोटे विचार और छोटे प्रयास से ही शुरू होता है। इसलिए जो अपने-अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं, यह मानकर चलिए कि आपकी आज की छोटी शुरुआत कल बड़ी सफलता में बदल सकती है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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इनमें से 58 prototypes को procurement के लिए clearance मिल चुका है, जिनकी approximate value लगभग 3,853 करोड़ रूपये है। 45 procurement contracts भी साइन किए जा चुके हैं, जिनकी value करीब 2326 करोड़ रूपये है। ये आंकड़े बताते हैं कि आज innovation धीरे-धीरे products और technologies के रूप में सामने आ रहा है, और इसमें हमारे start-ups और MSMEs की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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अगर हम iDEX की अब तक की प्रगति देखें, तो यह पहल काफी प्रभावी साबित हुई है। मुझे यह बताते हुए ख़ुशी भी हो रही है और गौरव की अनुभूति भी हो रही है, कि पिछले माह यानि फरवरी 2026 के अंत तक, करीब 676 start-ups, MSMEs और individual innovators इससे जुड़ चुके हैं, 548 contracts sign हुए हैं और 566 challenges launch किए जा चुके हैं: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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iDEX और ADITI, एक game changer initiative के रूप में हमारे सामने आए हैं। इसके माध्यम से start-ups, innovators और MSMEs को यह अवसर मिलता है कि वे armed forces की जरूरतों के लिए, नए solutions develop करें। जब defence services को किसी खास technology या capability की requirement होती है, तो हमारे young innovators, उस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश करते हैं। अगर उनका solution सफल होता है, तो आगे उसके development और procurement का रास्ता भी खुलता है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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पिछले लगभग एक दशक में इस sector में काफी विस्तार हुआ है। यह वृद्धि बताती है कि हमारे प्रयासों के फलस्वरूप देश में, entrepreneurship की भावना लगातार बढ़ रही है और छोटे उद्योग अब आर्थिक विकास में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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अगर मैं आँकड़ों की बात करूँ, तब भी यह परिवर्तन साफ दिखाई देता है। 2012-13 के आसपास देश में MSMEs की संख्या करीब 4.67 करोड़ थी। लेकिन आज, हाल के आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या लगभग 8 करोड़ के आसपास पहुँच गई है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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एक दशक में, सरकार ने MSME sector को मजबूत बनाने के लिए, कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 2014 के बाद, हमारे प्रधानमंत्री जी ने, इस sector के विस्तार पर लगातार ध्यान दिया है। MSMEs के registration और identification को आसान बनाने के लिए, Udyam Portal और Udyam Assist Portal जैसे digital platforms शुरू किए गए हैं। ताकि छोटे industries को, formal economy से जोड़कर, उनतक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा सके: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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आज भी भारत की GDP में industry का योगदान लगभग 15–16% के आसपास है, जो यह दिखाता है कि MSMEs के आगे बढ़ने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। विशेष रूप से manufacturing के विस्तार के माध्यम से, अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है। अब इस दिशा में आगे बढ़ने की जिम्मेदारी उद्योग जगत और innovators पर है। ये हम सबका राष्ट्र धर्म है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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हमारी MSMEs को, Industry 4.0 के adoption की ओर आगे बढ़ना होगा। जब Horizontal और Vertical, दोनों तरह का integration होता है, तब एक मजबूत innovation ecosystem तैयार होता है: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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MSMEs की क्षमता में कैसे वृद्धि हो, इसके लिए एक और महत्वपूर्ण विचार, integration का भी है। यह integration, दो तरीके से हो सकता है- Horizontal और Vertical. यदि हम horizontal integration की बात करें, तो इसका अर्थ है कि अलग-अलग क्षेत्रों के MSMEs आपस में जुड़ें, एक-दूसरे के अनुभव से सीखें और मिलकर काम करें। वहीं vertical integration का मतलब है कि MSMEs बड़े-बड़े उद्योगों के साथ मिलकर, नई-नई technology domains के साथ जुड़ें और Artificial Intelligence, Automation, Robotics और additive manufacturing जैसे क्षेत्रों में अपनी expertise develop करें: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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आज के समय में, Automation, Artificial Intelligence, Robotics और Additive Manufacturing जैसे innovations, पूरी दुनिया में manufacturing को बदल रहे हैं। इसके साथ-साथ digital twins और simulation technologies भी नई संभावनाएँ खोल रही हैं। Digital twin यानी कि किसी real system का, virtual model तैयार किया जाए। इस तरह की तमाम technologies, हमें complex systems को समझने और बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है। इसलिए यह आवश्यक है कि हमारे MSMEs और start-ups इन technologies के साथ जुड़ें। ताकि उनके resources और उनकी क्षमता का optimum utilization हो सके: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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छोटे और मध्यम उद्योग, यानी MSMEs हमारी अर्थव्यवस्था की backbone हैं। इसलिए इस sector को बढ़ावा देने के लिए, अलग-अलग policies और योजनाएँ बनाई गईं। आज जब हम, advanced manufacturing, Artificial Intelligence और नई technologies की बात करते हैं, तब भी MSMEs इस परिवर्तन की प्रक्रिया में, एक अहम भागीदार बनकर सामने आते हैं: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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चाहे अर्थव्यवस्था कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, MSMEs हमेशा innovation, रोजगार सृजन और स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं: रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh
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