आयशा

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@DevilNo786

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जीवन यात्रा
लोग आज कल किताबों के 2 पन्ने भी नहीं पढ़ पाते और उठा के किताब रख देते है और मोबाइल पकड़ लेते है। हम आधिकारिक रूप से एक रीडिंग संकट में हैं कुछ लोग मुझसे पूछ रहे थे कि यदि हम बुक रीडिंग न करे सिर्फ विडियोज से ज्ञान ले तो क्या हमारा मस्तिष्क कमजोर हो जाएगा? आजकल बच्चे रीड बहुत कम करते है या नहीं कर रहे हैं तो क्या इसका प्रभाव उनके विकास पर गलत पड़ेगा? आइए, पहले इस स्थिति पर एक नजर डालते हैं। आज के हर उम्र के बच्चे अब पहले की तुलना में कम पढ़ रहे हैं, और पढ़ने में उन्हें पहले जैसा आनंद भी नहीं मिल रहा। जो बच्चे कहते थे कि उन्हें पढ़ना पसंद है 2005 में यह संख्या 51% थी, जो 2025 में घटकर 32% रह गई है। वहीं, जो बच्चे प्रतिदिन पढ़ते थे 2005 में 38% थे, जो 2025 में केवल 18% रह गए हैं। क्या यह स्थिति चिंताजनक है? क्या बुक्स रीड करना सच में आवश्यक है? थोड़ा विचार करें जब पहले पुस्तकें नहीं थीं, तब लोगों का मस्तिष्क बिना पढ़े कैसे तीक्ष्ण था? एरिस्टोटल, प्लेटो और गौतम बुद्ध जैसे महान चिंतकों के पास तो पुस्तकें ही नहीं थीं, फिर भी उनकी बुद्धि असाधारण थी। लेकिन यहीं पर एक महत्वपूर्ण बात छिपी है। वास्तव में समस्या न पढ़ने में नहीं है, बल्कि गहन अध्ययन और ध्यान-एकाग्रता में है। पुराने समय में भले ही पढ़ने के लिए पुस्तकें सीमित थीं या थी ही नहीं लेकिन उस समय गहरा ध्यान, लंबी एकाग्रता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति मौजूद थी। माध्यम अलग था पढ़ने की जगह सुनना, याद रखना और विचार-विमर्श करना प्रमुख थे। आज समस्या यह नहीं है कि लोग पुस्तकें नहीं पढ़ रहे; असली समस्या यह है कि गहराई से सीखना कम हो गया है। आज का वातावरण त्वरित मनोरंजन, छोटी-छोटी सूचनाओं और लगातार विचलनों से भरा हुआ है, जिसके कारण ध्यान की अवधि घटती जा रही है और सोच सतही होती जा रही है। मस्तिष्क के समुचित विकास के लिए तीन चीजें अत्यंत आवश्यक हैं 1. एकाग्रता 2. कल्पनाशक्ति 3. गहन चिंतन रीडिंग इन तीनों को स्वाभाविक रूप से विकसित करता है, इसलिए यह एक प्रभावी माध्यम है। हालांकि यह एकमात्र मार्ग नहीं है; यदि कोई व्यक्ति गहराई से संवाद करता है, लिखता है या लंबे समय तक ध्यान लगाकर सीखता है, तो वह भी अपने मस्तिष्क का विकास कर सकता है। लेकिन यह स्पष्ट है कि त्वरित मनोरंजन वाले माध्यम जैसे छोटे वीडियो इन गुणों का विकास नहीं करते। यही कारण है कि यह स्थिति एक साधारण रीडिंग संकट नहीं, बल्कि सोच और समझ की गहराई में आ रहे गिरावट का संकेत है। यदि हमने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ जानकारी तो बहुत रखेंगी, लेकिन उसे समझने और सही रूप से उपयोग करने की क्षमता कमजोर होती चली जाएगी। इसीलिए सबसे सही और आरामदायक विकल्प रीडिंग ही है दिमाग को दुरुस्त रखने की या तो फिर आप दूसरे माध्यम अपनाइए जैसे लर्निंग + मेमोराइजिंग + डिस्कशन पर फोकस करे एक साथ। रोज किताबें पढ़िए और अपनी बुद्धि को तेज करिए। जीवन यात्रा...🚶🏻‍♂️
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जीवन यात्रा
जीवन यात्रा@jeevanyatraa·
सफल लोग: - बहुत पढ़ते हैं - शिकायत नहीं करते - दूसरों को दोष नहीं देते - मजबूत सीमाएँ तय करते हैं - ध्यान भटकने से बचते हैं - जीवन का स्पष्ट उद्देश्य रखते हैं - अपनी समस्याओं की जिम्मेदारी लेते हैं - समय और ऊर्जा का सही प्रबंधन करते हैं असफल लोग: - इन सबका उल्टा करते हैं
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जीवन यात्रा
बुद्ध पूर्णिमा की अनेकानेक बधाईयां एवं शुभकामनाएं। बुद्धम् शरणम् गच्छामि अप्प दीपो भव! अर्थात् अपने दीपक स्वयं बनो! Be the light unto yourself पूर्णिमा की उजली रात को गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ ऐसा कहा जाता है। कथा यह भी कहती है कि उनका जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों ही उसी पूर्णिमा की रात और उसी मास में हुए। यह ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह सत्य हो या न हो, इसका आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। यह कथा केवल एक व्यक्ति गौतम बुद्ध की नहीं है यह बुद्धत्व की अवस्था का संकेत देती है। बुद्धत्व यानी जागृति की वह अवस्था, जो पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह जन्म लेती है, धीरे-धीरे परिपक्व होती है, और अंततः उसी पूर्णता में विलीन हो जाती है। पूर्णिमा का चंद्रमा यहाँ एक प्रतीक है मौन का, शांति का, स्थिरता का, संतुलन का। यह एक काव्यात्मक अस्तित्व का प्रतीक है संगीत का, प्रेम का, और उस रहस्यमय चमत्कार का जिसे शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। बुद्ध कोई जटिल धार्मिक सिद्धांत नहीं देते। वे केवल एक बात कहते हैं सहज बनो। यही तुम्हारा सच्चा धर्म है अपनी स्वाभाविकता में जीना। उन्होंने स्वतंत्रता से गहरा प्रेम किया इतना कि उन्होंने कभी किसी को अनुयायी बनने के लिए प्रेरित नहीं किया। क्योंकि किसी को अनुयायी बनाना, उसकी स्वतंत्रता और गरिमा को सीमित करना है। इसलिए उन्होंने केवल सह-यात्रियों को स्वीकार किया वे लोग जो स्वयं की खोज में उनके साथ चलना चाहते थे, न कि उनके पीछे। अपने अंतिम क्षणों में उन्होंने कहा था “यदि मैं फिर लौटूंगा, तो मैत्रेय बनकर लौटूंगा।” और मैत्रेय का अर्थ है मित्र। यही बुद्ध का सार है: न कोई बंधन, न कोई अंधानुकरण केवल जागरूकता, स्वतंत्रता और मित्रता का मार्ग। अप्प दीपो भव! जीवन यात्रा... 🚶🏻‍♂️
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जीवन यात्रा
पढ़ना इस धरती पर टालमटोल का सबसे महिमामंडित रूप है। सेल्फ-हेल्प इंडस्ट्री ने तुम्हें एक खूबसूरत झूठ बेच दिया है कि लीडर्स रीडर्स होते हैं। तो तुम पढ़ते हो। और पढ़ते हो। और पढ़ते ही रहते हो। दुनिया भर में किताबों का मार्केट लगभग $120-150 बिलियन (₹10-12 लाख करोड़) के आसपास माना जाता है। तुमने बिज़नेस पर 200 किताबें पढ़ लीं, फिर भी तुम्हारा अपना कोई बिज़नेस नहीं है। तुमने कॉन्फिडेंस पर 10 किताबें पढ़ लीं, फिर भी तुम ऑनलाइन पोस्ट करने से डरते हो। तुमने थिंक एंड ग्रो रिच की हर पेज को हाइलाइट कर दिया, फिर भी तुम आज भी पैसे की कमी में हो। इस बारे में कोई बात नहीं करता। पढ़ना ही एक ऐसी लत है जिसे समाज इनाम देता है। किसी को बताओ कि तुमने 6 घंटे ट्विटर पर बिताए, वो तुम्हें जज करेंगे लेकिन उसी पर्सन को बताओ कि तुमने 6 घंटे पढ़ने में बिताए, वो तुम्हारी तारीफ करेंगे। लेकिन दिमाग के स्तर पर नतीजा एक जैसा ही होता है तुमने सिर्फ़ उपभोग किया तुमने कुछ बनाया नहीं। तुम्हें लगता है कि तुम आगे बढ़े हो लेकिन तुम वहीं के वहीं हो। इसे मैं नॉलेज ट्रैप कहता हूँ। यह एक भ्रम है जिसमें हमें लगता है कि किसी चीज़ को समझ लेना, उसे करने के बराबर है यह टालमटोल का सबसे चालाक रूप है, क्योंकि यह प्रोडक्टिव लगता है तुम किताब बंद करते हो और खुद को ज्यादा समझदार महसूस करते हो। तुम्हें लगता है कि तुमने कुछ हासिल कर लिया। तुम्हारा दिमाग वही रिवार्ड केमिकल्स रिलीज करता है, जो असल में काम करने पर करता इसलिए तुम असली काम कभी करते ही नहीं क्योंकि तुम्हारे दिमाग को उसका इनाम पहले ही मिल चुका होता है। साइकोलॉजी में इसे इल्यूजन ऑफ कॉम्पिटेंस या झूठी समझदारी कहते है। तुम्हारा दिमाग तुम्हें धोखा देता है कि तुम आगे बढ़ रहे हो लेकिन असली प्रोग्रेस कुछ कर के हो होगी। सेल्फ-हेल्प इंडस्ट्री यह तुमसे पहले समझ चुकी थी। उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि तुम जो पढ़ते हो उसे लागू करते हो या नहीं उन्हें बस इतना चाहिए कि तुम किताब खत्म करो और अगली खरीद लो। तुम्हारा बदलाव उनका प्रोडक्ट नहीं है। तुम्हारा कंजम्प्शन ही उनका प्रोडक्ट है। जो इंसान एक किताब पढ़कर उसे लागू करता है, वह हर बार उस इंसान से आगे निकल जाएगा जो सौ किताबें पढ़ता है। एक्शन के बिना ज्ञान सिर्फ़ एक मनोरंजन है, जिसने ग्रेजुएशन कैप पहन रखी है। सबसे खतरनाक इंसान वह नहीं है जिसने शेल्फ की हर किताब पढ़ ली हो बल्कि वह है जिसने एक चैप्टर पढ़ा, किताब बंद की और जाकर काम शुरू कर दिया। तुम्हें एक और किताब की जरूरत नहीं है तुम्हें वही करना है जो आखिरी किताब ने तुम्हें करने को कहा था। जीवन में एक सरल नियम अपनाओ जो भी पढ़ो, उसमें से जो सही लगे उसे केवल समझो मत उसे सीखो और अप्लाई करके देखो। यदि असफल हो जाओ तो उसे फीडबैक मानो। देखो कहाँ कमी रह गई ज्ञान में, कौशल में या निरंतरता में फिर उस कमी को सुधारो और दोबारा प्रयास करो। यही वास्तविक प्रगति का चक्र है: सीखो - करो - असफल हो - सुधारो - दोहराओ क्योंकि अंत में जीवन में आगे वही बढ़ता है, जो पढ़ी हुई चीजों को अपने आचरण में उतारता है। जीवन यात्रा... 🚶🏻‍♂️
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim और कॉंग्रेस की कोई गलती नहीं है I पढा जाना चाहिए I
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim गांधी,नेहरु,पटेल और पुरे कॉंग्रेस से यह गलती हो गई की गद्दारी करने के बावजूद तुम्हें yahan रहने दिया I और कॉंग्रेस की कोई गलती है I समझा Radical Islamists @Indic_Muslim 😡😡
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim अब तुम्हारे जैसे जाहिल जैसे से पूछकर कॉंग्रेस अपना चुनावी रणनीति बनाएगी I 😂🤣 तुम्हारा नेता तेजस्वी ने तुम्हरी पार्टी AIMIM के सदर Owaisi को Exteremist यानी Radical Islamists बोला था उसके बारे में क्यूँ नहीं बोलता रे जाहिल !!😡😡
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim अरे 2 कौड़ी के जाहिल छपरी !! राहुल जी सिर्फ सांसद नहीं नेता प्रतिपक्ष हैं और parliamentary democracy में नेता प्रतिपक्ष defacto Prime Minister होता है I
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim @bobby_shabnam और @Indic_Muslim जैसे लोगों के खून में सिर्फ जहर भरा हुआ है, इनका हिसाब चुकाते चुकाते कॉंग्रेस खाक हो जाएगी I इन्हीं लोगों के खुश करने के कॉंग्रेस 55 सीट पर आ गयी थी I आज यही लोग कॉंग्रेस को गाली दे रहे हैं I Meanwhile Gaddari is ........... 🥲🥲
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim नौटंकी मत करो पंडित !! शर्म नहीं आ रही तुमको जिस कॉंग्रेस ने तुमको पहचान दी,आज उसी कॉंग्रेस को गाली देने वाले 2 कौड़ी के छपरी स्वघोषित X छपरी नेता को समर्थन कर रहा है I और तो और वीरता,त्याग,तपस्या के प्रतीक भगवा धारण कर रो रहे हो I अपनी नहीं तो भगवा का ही सम्मान कर लो 😡
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim जिस ममता बनर्जी जी के इतना उसी ममता बनर्जी जी ने बाजपेई जी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी , रे जाहिल 😡😡 राहुल जी के पास कौन सी सम्पत्ति है रे जाहिल 😡😡 छपरी कहीं का
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim शर्म करो X के 2 कौड़ी छपरी नेता (leader) 😡😡 तुम लोग के कारण हीं हम मोमिनो को ग़द्दार समझा जाता है I जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो I अरे X के छपरी नेता तुम्हरी हरकत के कारण पूरे कौम को सुनना पडता है I ग़द्दार कहीं के 😡😡
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Indic_Muslim हमने जिन्ना को वोट कर मजहब के नाम पर पाकिस्तान बना दिया पर उसी कॉंग्रेस ने हमारी गलती के बाबजूद हमें इस देश में बराबर का नागरिक का दर्जा दिया,जिस मुसलामानों के हितैसी कारण कॉंग्रेस को तुष्टीकरण का आरोप लगा,देश के सत्ता से बाहर हो गए ,आज के छपरी अब्दुल उसी कॉंग्रेस को गाली दे रहे
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Kumar Shyam
Kumar Shyam@thekumarshyam·
देश है या धर्मशाला? _ जब मुसलमानों ने भारत बॉंटा तो वो अपने नए मुल्क़ पाकिस्तान उस भाव से नहीं गए जिस भावातिरेक से उन्होंने पाकिस्तान मॉंगा था। वो गए उससे बड़ी संख्या में यहीं रह गए। जनसंख्या की पूर्ण अदला-बदली नहीं हुई। मुसलमानों की दृष्टि से देखें तो सॉंप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी। जो यहॉं रहे, वो कृतज्ञ और साहचर्य भाव से नहीं बल्कि ठसक और ऑंख दिखाकर रहे। संविधान, क़ानून और सरकार को बंधक बनाकर रहे। जो आज भी यथावत है। तब के कर्णधार गांधी और नेहरू का मानना था कि इस ख़ूनी बंटवारे के बाद भी यह देश मुसलमानों का भी उतना ही है जितना हिन्दुओं का है। पाकिस्तान से आए कटे-पीटे हिंदू शरणार्थियों को दिल्ली में कोई छत मयस्सर नहीं हुई क्योंकि उन कर्णधारों का मानना था कि पाकिस्तान गए मुसलमान जब लौटकर आऍंगे तब वो बेचारे कहॉं रहेंगे? पाकिस्तान चले गए मुसलमानों के ख़ाली घरों में पाकिस्तान से जान बचाकर आए हिंदुओं को शरण नहीं मिली। अपने ही मुल्क़ में अपमानित और हतोत्साहित हिंदू सड़कों पर सोने के लिए विवश हुए। तब 12 अक्टूबर 1947 को गांधी ने लिखा— "दिल्ली में सर्दियॉं आने वाली हैं। खुले आसमान के नीचे सोने वाले शरणार्थियों को मैं सलाह देना चाहता हूँ कि वह रात में अपनी रजाइयों को ओढ़ने के बाद उनके ऊपर अख़बार के काग़ज़ बिछा लें ताकि ओस से उनकी रजाइयॉं ना भीगें।" जब पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने यह फ़रमान जारी किया कि पाकिस्तान के नागरिकों को भारत शीघ्रातिशीघ्र छोड़ना होगा तब जो दृश्य उभरकर सामने आ रहे थे, वह कम से कम चौंकाने वाले तो नहीं थे। बरसों से पाकिस्तान-बांग्लादेश के नागरिक यहॉं रह रहे हैं, बिना नागरिकता। वोट देते हैं, राशन पाते हैं और शादियॉं करके घर बसाए बैठे हैं। कोई 17 साल से बैठा है तो कोई 40 साल से। जैसे यह देश नहीं कोई धर्मशाला हो! क्योंकि बंटवारे के बाद देश-निर्माण की नींव में मूलभूत चूके हुई थीं। जिनका ख़ामियाजा आज हम भुगत रहे हैं। जब इस घुसपैठ के विरुद्ध सीएए और एनआरसी जैसे क़दम उठाए जाते हैं तब भारत के मुसलमान सड़कें घेर लेते हैं। 'काग़ज़ नहीं दिखाऍंगे' का नारा बुलंद करते हैं, क्योंकि काग़ज़ है ही नहीं! यदि दृष्टि फैलाकर देखेंगे तो भारत में उभरी सांप्रदायिकता का मूल समझ पाऍंगे। हिंदू अच्छे होने का दंश ढोते-ढोते थक गया है। वह प्रतिक्रिया नहीं करेगा तो अस्तित्व खो देगा। यही सत्य है। इसमें तौला-माशा भी अंतर हो तो कुछ बरस और प्रतीक्षा कर लो! बंगाल के चुनाव परिणाम इस दिशा में अहम साबित होंगे। [कुमार श्याम]
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
एक secular democratic देश में गंगा जमुनी तहजीब पर थप्पड़ मारता डरा हुआ अब्दुल के मौलाना !! 😱😱😅😅😂😂😂🤣🤣🤣 पूरा वीडियो देखें !! 👇👇👇
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@Momin_586 क्या कट्टर जिहादी मोमिन बनेगा तु !! 😂🤣 क्या इस्लाम हमें इजाजत देता है कोई मोमिन काफ़िरों की तारीफ करे ? 🤔🤔 फिर क्यूँ तु गुमराह हो रहा है ? 🤔🤔 या हिन्दुओं को खुश करने के लिए अलतकिया कर रहे हो 🤔🤔 अल्लाह के आजाब से डरों Islamists जिहादी मोमिन 😡😡
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𝑴𝒐𝒎𝒊𝒏
𝑴𝒐𝒎𝒊𝒏@Momin_586·
मुहब्बत समेत लेती है ज़माने भर के रंजो गम। सुना है दोस्त अच्छे हो तो कांटे भी नहीं चुभते। दोस्ती किसी वजह या मकसद से नहीं होती लेकिन जब हो जाती है तो जिंदगी जीने की वजह और मकसद दोनों बन जाती है। कितनी अच्छी हो जाती है न जिंदगी जब दोस्त, मुहब्बत और हमसफर तीनों एक जैसे हमदर्द हो।
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
@AmjadAsR कट्टर Islamists मोमिन !! 1857 ईस्वी की क्रांति में मुसलमानों ने साथ दिया लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी है अपने मजहब के लिए 1947 मे मुसलामानों ने भारत को भारत को विभाजित कर दिया I
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NATION MUSLIM 🌍
NATION MUSLIM 🌍@AmjadAsR·
कुछ अंधभक्तों को लगता है कि मुसलमानों ने हमें दिया ही क्या है! जबकि देश को आजाद कराने में मुसलमानों का ही सबसे बड़ा योगदान रहा है ☝️
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आयशा
आयशा@DevilNo786·
"भाजपा और संघ से जुड़ा हर व्यक्ति पागलपन की पराकाष्ठाओं को पार करके अब उन्मादी हो चुका है। उनमें से ही एक राजनाथ सिंह हैं" ~ यति नरसिंहानंद
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