आयशा retweetledi

लोग आज कल किताबों के 2 पन्ने भी नहीं पढ़ पाते और उठा के किताब रख देते है और मोबाइल पकड़ लेते है। हम आधिकारिक रूप से एक रीडिंग संकट में हैं
कुछ लोग मुझसे पूछ रहे थे कि यदि हम बुक रीडिंग न करे सिर्फ विडियोज से ज्ञान ले तो क्या हमारा मस्तिष्क कमजोर हो जाएगा?
आजकल बच्चे रीड बहुत कम करते है या नहीं कर रहे हैं तो क्या इसका प्रभाव उनके विकास पर गलत पड़ेगा? आइए, पहले इस स्थिति पर एक नजर डालते हैं।
आज के हर उम्र के बच्चे अब पहले की तुलना में कम पढ़ रहे हैं, और पढ़ने में उन्हें पहले जैसा आनंद भी नहीं मिल रहा। जो बच्चे कहते थे कि उन्हें पढ़ना पसंद है 2005 में यह संख्या 51% थी, जो 2025 में घटकर 32% रह गई है। वहीं, जो बच्चे प्रतिदिन पढ़ते थे 2005 में 38% थे, जो 2025 में केवल 18% रह गए हैं।
क्या यह स्थिति चिंताजनक है? क्या बुक्स रीड करना सच में आवश्यक है? थोड़ा विचार करें जब पहले पुस्तकें नहीं थीं, तब लोगों का मस्तिष्क बिना पढ़े कैसे तीक्ष्ण था?
एरिस्टोटल, प्लेटो और गौतम बुद्ध जैसे महान चिंतकों के पास तो पुस्तकें ही नहीं थीं, फिर भी उनकी बुद्धि असाधारण थी। लेकिन यहीं पर एक महत्वपूर्ण बात छिपी है।
वास्तव में समस्या न पढ़ने में नहीं है, बल्कि गहन अध्ययन और ध्यान-एकाग्रता में है। पुराने समय में भले ही पढ़ने के लिए पुस्तकें सीमित थीं या थी ही नहीं लेकिन उस समय गहरा ध्यान, लंबी एकाग्रता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति मौजूद थी। माध्यम अलग था पढ़ने की जगह सुनना, याद रखना और विचार-विमर्श करना प्रमुख थे।
आज समस्या यह नहीं है कि लोग पुस्तकें नहीं पढ़ रहे; असली समस्या यह है कि गहराई से सीखना कम हो गया है। आज का वातावरण त्वरित मनोरंजन, छोटी-छोटी सूचनाओं और लगातार विचलनों से भरा हुआ है, जिसके कारण ध्यान की अवधि घटती जा रही है और सोच सतही होती जा रही है।
मस्तिष्क के समुचित विकास के लिए तीन चीजें अत्यंत आवश्यक हैं
1. एकाग्रता
2. कल्पनाशक्ति
3. गहन चिंतन
रीडिंग इन तीनों को स्वाभाविक रूप से विकसित करता है, इसलिए यह एक प्रभावी माध्यम है। हालांकि यह एकमात्र मार्ग नहीं है; यदि कोई व्यक्ति गहराई से संवाद करता है, लिखता है या लंबे समय तक ध्यान लगाकर सीखता है, तो वह भी अपने मस्तिष्क का विकास कर सकता है।
लेकिन यह स्पष्ट है कि त्वरित मनोरंजन वाले माध्यम जैसे छोटे वीडियो इन गुणों का विकास नहीं करते। यही कारण है कि यह स्थिति एक साधारण रीडिंग संकट नहीं, बल्कि सोच और समझ की गहराई में आ रहे गिरावट का संकेत है।
यदि हमने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ जानकारी तो बहुत रखेंगी, लेकिन उसे समझने और सही रूप से उपयोग करने की क्षमता कमजोर होती चली जाएगी।
इसीलिए सबसे सही और आरामदायक विकल्प रीडिंग ही है दिमाग को दुरुस्त रखने की या तो फिर आप दूसरे माध्यम अपनाइए जैसे लर्निंग + मेमोराइजिंग + डिस्कशन पर फोकस करे एक साथ।
रोज किताबें पढ़िए और अपनी बुद्धि को तेज करिए।
जीवन यात्रा...🚶🏻♂️

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