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Adv. Devraj Azad
@DevrajAzad01
#Ex_प्रदेश_कोर_कमेटी_सदस्य #Ex_प्रभारी_कानपुर_मंडल #Azadsamajpartykanshiram #Bhimarmy Ex प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य ब्लॉक भाग्यनगर वार्ड न2 जिला औरैया
औरैया, India Katılım Ocak 2021
605 Takip Edilen745 Takipçiler
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हज यात्रा 2026 में हवाई किराये की अचानक वृद्धि से हजयात्रियों पर पड़े अतिरिक्त आर्थिक बोझ के संबंध में माननीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री @KirenRijiju जी को पत्र लिखा।
@mygovindia
@MOMAIndia @RijijuOffice

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श्रम मंत्री रहने के दौरान मजदूरों के लिए महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, काम के घंटे 12 से हटाकर 08 घंटे करना, महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, ट्रेड यूनियन को बाध्यकारी मान्यता... आदि सब परम पूज्य बाबा साहेब की देन है।
मजदूर दिवस पर परम पूज्य बाबा साहेब को नमन। 🙏🙏
#LabourDay #thanksdrambedkar

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बिहार निवासी मौलाना तौसीफ रजा मजहरी, जो बरेली शरीफ में ताजश्शरिया के सालाना उर्स में शामिल होने आए थे, उनकी उत्तर प्रदेश के बरेली रेलवे स्टेशन के पास संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
परिजनों के पास मौजूद मृतक की आखिरी कॉल की रिकॉर्डिंग इस मामले को और अधिक संवेदनशील और गंभीर बनाती है।। कॉल के दौरान मौलाना ने स्पष्ट रूप से बताया था कि कुछ नशे में धुत लोग उनकी धार्मिक पहचान को लेकर गाली-गलौज और मारपीट कर रहे हैं तथा उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कई बार मदद की गुहार भी लगाई।
वहीं दूसरी ओर, घटना पर @bareillypolice का यह बयान कि खिड़की के पास बैठने के दौरान झपकी आने से गिरने के कारण मृत्यु हुई, कई गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक ओर पीड़ित की आखिरी कॉल में हमले और प्रताड़ना की बात सामने आ रही है, और दूसरी ओर आधिकारिक बयान इसे दुर्घटना बता रहा है।तो यह स्पष्ट रूप से विरोधाभास दर्शाता है।
माननीय रेलमंत्री @AshwiniVaishnaw जी, ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@RailMinIndia
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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के थाना खागा क्षेत्र में बहुजन युवती के साथ हुई घटना बेहद गंभीर, चिंताजनक और मानवता को झकझोर देने वाली है।
24 अप्रैल को युवती अपने मंगेतर के साथ निकली थी, तभी जातंकवादियों ने उन्हें रोककर जंगल में बंधक बना लिया। दोनों के साथ मारपीट की गई, अश्लील वीडियो बनाए गए और युवती के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध का आरोप सामने आया है। इतना ही नहीं, वीडियो वायरल करने की धमकी देकर जबरन पैसे भी ट्रांसफर कराए गए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित पक्ष द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थानीय पुलिस की ओर से तत्परता नहीं दिखाई गई, जिससे पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। और अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना इन सवालों को और भी गहरा करता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यदि आपकी पुलिस इस गंभीर मामले को “संदिग्ध” बताकर हल्का करने की कोशिश कर रही है, तो यह पीड़िता के न्याय के अधिकार के साथ सीधा अन्याय है और कानून के प्रति विश्वास को कमजोर करने वाला है।
@UPGovt से हमारी मांगें-पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।पीड़िता को सुरक्षा, चिकित्सा सहायता और न्याय दिलाया जाए। पुलिस की लापरवाही की भी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए
न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है। अब समय है कि सरकार और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए।
@CMOfficeUP
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आगरा जनपद के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के गौतम नगर में दलित युवती को घर में घुसकर खींचकर जबरन ले जाने की घटना अत्यंत शर्मनाक, दंडनीय और चिंताजनक है।
पीड़िता की माँ के अनुसार, परवेज पिछले एक वर्ष से उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहा था। वह रास्ते में आते-जाते छेड़छाड़ करता था और जबरन शादी का दबाव बनाता था। कई बार मना करने और विरोध के बावजूद उसने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं।
मंगलवार (28 अप्रैल) को आरोपी अपनी माँ के साथ घर आया और शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे परिवार ने साफ तौर पर अस्वीकार कर दिया। इसके बाद रात करीब 9:30 बजे वह फिर घर में जबरन घुस गया। उस समय घर में केवल बेटियाँ ही मौजूद थीं। आरोपी ने बड़ी बेटी पर शादी का दबाव बनाया और मना करने पर उसे पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया। छोटी बहन ने बहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन आरोपी नहीं माना और युवती को जबरन घर से बाहर खींचकर अपने साथ ले गया।
यह घटना न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि दलित समाज की बेटियों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। महिलाओं की इच्छा और सम्मान को इस तरह कुचलना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
@UPGovt से हमारी मांग है- सभी आरोपियों पर कड़ी से कड़ी धाराओं में मुकदमा चलाया जाए।एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए
यदि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे। समाज और प्रशासन मिलकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त संदेश दें।
@CMOfficeUP
@myogiadityanath
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आगरा छावनी में 17 सड़कों के नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। जिस बैठक में यह फैसला लिया गया, उसमें भाजपा नेताओं की उपस्थिति भी रही। लेकिन यह निर्णय कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की अनदेखी का मामला बन गया है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि पूरी सूची में एक भी सड़क का नाम किसी महिला के नाम पर नहीं रखा गया जबकि हमारे देश में ऐसी महान वीरांगनाएं और समाज सुधारक रही हैं, जिन्होंने इतिहास रचा है। उदाहरण के तौर पर सावित्रीबाई फुले जी,फातिमा शेख जी, अहिल्याबाई होल्कर जी, अवंतिका बाई लोधी जी, झलकारी बाई जी, उदा देवी पासी जी, फूलन देवी जी जैसी महान हस्तियों की अनदेखी करना अत्यंत चिंताजनक है।
सिर्फ महिलाओं ही नहीं, बल्कि एससी/एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के महापुरुषों की भी इस सूची में उपेक्षा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। क्या अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान, हेमू कालाणी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे राष्ट्रनिर्माता इस सम्मान के योग्य नहीं हैं?
एक तरफ सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (जो बिना समान और न्यायसंगत हिस्सेदारी के हैं) की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे निर्णयों में महिलाओं और वंचित वर्गों को स्थान नहीं दिया जाता-यह एक स्पष्ट विरोधाभास है।
भाजपा नेताओं की मौजूदगी में लिया गया यह फैसला भाजपा के “नारी सम्मान” और “सामाजिक न्याय” के दावों की असलियत उजागर करता है-ये दावे सिर्फ दिखावे तक सीमित हैं।


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ओडिशा के क्योंझर जिले में जीतू मुंडा अपनी तीन महीने पहले (26 जनवरी 2026 को) मृत हुई बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर ले जा रहे हैं। जिस बहन का पति और इकलौती संतान पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे और अब पूरे परिवार में सिर्फ वही अकेले जीवित बचे हैं।
अपनी बहन के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार (वारिस) प्रमाण पत्र नहीं दिखा पाने के कारण बैंक कर्मचारियों ने ‘नियमों’ का हवाला देते हुए उन्हें कई बार खाली हाथ लौटा दिया।
परेशान होकर वे सीधे श्मशान घाट पहुंचे। अपनी बहन की कब्र खोदी और उनका कंकाल बाहर निकाला। कंकाल को एक कपड़े में लपेटकर, अपने कंधे पर लादे, 5 किमी नंगे पांव चलते हुए वे सीधे बैंक के भीतर जा पहुंचे।
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि बिना चढ़ावे के ये प्रमाण पत्र इतने कम समय में बन पाना किसी के लिए संभव नहीं है। और फिर एक तो वे गरीब, ऊपर से आदिवासी-ऐसे में इन कागजों को तुरंत जुटा पाना उनके लिए असंभव था।
वहीं, इसी बैंकिंग व्यवस्था में उद्योगपतियों के वो 11 लाख करोड़ रुपये के कर्जे चुपचाप माफ़ भी हो जाते हैं, जिससे वे अरबों-खरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं।
ओडिशा की यह घटना व्यवस्था की संवेदनहीनता और असमानता की भयावह सच्चाई को उजागर करती है।
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राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी में यूआईटी थाने में झिवाना निवासी 16 वर्षीय दलित नाबालिग लोकेश कुमार के साथ पुलिस की अवैध हिरासत में बर्बर मारपीट और थर्ड डिग्री यातना देने की घटना अत्यंत पीड़ादायक, निंदनीय और शर्मनाक है।
परिजनों के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 को बच्चे को घर से जबरन उठाया गया और इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसकी हालत गंभीर हो गई तथा उसे वेंटिलेटर पर भर्ती कराना पड़ा। वह जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि दलित समाज आज भी सुरक्षित नहीं है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि परिजनों की शिकायत के बावजूद दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR तक दर्ज नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, क्या दलितों के साथ अत्याचार पर सरकार की यही संवेदनशीलता है?
हम प्रकृति से भाई लोकेश के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।
@RajGovOfficial से हमारी मांगें:तुरंत FIR दर्ज की जाए।SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त धाराएं लगाई जाएं।दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए।पीड़ित को बेहतर इलाज, मुआवजा और सुरक्षा दी जाए।मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
बहुजन उत्पीड़न बंद करो – न्याय दो!
@RajCMO

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अलीगढ़ जनपद के खैर थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय किशोरी के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना अत्यंत दुखद,शर्मनाक और दंडनीय है।
24 अप्रैल की रात से लापता पीड़िता अगले दिन सुबह 25 अप्रैल को एक खंडहर मकान में बेहोशी की हालत में मिली। बच्ची के साथ चार युवकों द्वारा बारी-बारी से दुष्कर्म किए जाने का आरोप मानवता को शर्मसार करने वाला है।
अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़िता के पिता के अनुसार पुलिस ने स्वयं ऐसी तहरीर लिखवाई, जिसमें केवल “लापता होने” और “खंडहर में मिलने” की बात दर्ज की गई, जबकि यह स्पष्ट रूप से सामूहिक दुष्कर्म का मामला था; चार युवकों के नाम सामने आने के बावजूद केवल एक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, इतना ही नहीं,मुकदमा भी पोक्सो एक्ट में पंजीकृत नहीं किया गया है। शुरू से ही पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आपके राज में बहन-बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें न्याय की उम्मीद भी नहीं है।
@UPGovt से हमारी स्पष्ट मांगें है: - सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा, मुआवजा और उचित कानूनी सहायता प्रदान की जाए।
यदि पीड़िता को शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो मैं खैर पहुँचकर न्याय की आवाज़ बुलंद करूँगा।
@CMOfficeUP
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परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है।
इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी।
ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
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जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से विद्यालयों में शिक्षण कार्य बाधित होने के संबंध में महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त महोदय,भारत सरकार को पत्र लिखा।
@CensusIndia2027
#CensusofIndia
#Census2027
#जनगणना
#जनगणना2027

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आज देश राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मना रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की असली ताकत गांव, गरीब, किसान और पंचायतों में निहित है, लेकिन यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि इस व्यवस्था के भीतर ‘आधी आबादी’ आज भी अपने पूरे अधिकार से वंचित है।
पंचायत स्तर पर ‘आधी आबादी’ को ‘आधी हिस्सेदारी’ न देकर उनके साथ वर्षों से अन्याय किया जाता रहा है, और अब भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार विधायिकाओं में भी महिलाओं को उनकी आधी भागीदारी से वंचित कर न केवल उसी अन्याय को दोहरा रही है, बल्कि महिला आरक्षण के भीतर वंचित वर्ग की मातृशक्ति के लिए अलग से हिस्सेदारी का प्रावधान न कर उन्हें उनके उचित प्रतिनिधित्व से भी वंचित कर रही है।
आज इस पंचायती राज दिवस पर यह संकल्प लेने की जरूरत है कि ‘आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी’ केवल नारा न रहे, बल्कि इसे हर स्तर (पंचायत से लेकर संसद तक) तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, और इसके साथ ही वंचित वर्ग की मातृशक्ति को सुनिश्चित हिस्सेदारी दी जाए, ताकि सामाजिक न्याय और वास्तविक समानता दोनों सुनिश्चित हो सकें।
जय भीम, जय भारत
जय संविधान, जय मातृशक्ति।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ।
यह सफलता आपकी लगन, आपके माता-पिता के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।
साथ ही, जो विद्यार्थी इस बार अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पाए हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में एक परिणाम सब कुछ तय नहीं करता। यह केवल एक पड़ाव है, जो आपको और मजबूत बनने तथा आगे बेहतर करने का अवसर देता है।
विशेषकर, इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के टॉप-3 में बालिकाओं का स्थान प्राप्त करना न केवल गर्व की बात है, बल्कि क्रान्तिज्योति माता सावित्रीबाई फूले जी के उस ऐतिहासिक कदम का परिणाम है, जब उन्होंने भारत में बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोला था।
यह अवसर भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब के उस महान संविधान की जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसमें उन्होंने लिंग, जाति और धर्म के हर भेदभाव को समाप्त कर एक समतामूलक राष्ट्र की नींव रखी।
हम सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
जय भीम। जय फूले। जय संविधान। जय भारत।
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भाजपा के “डबल इंजन” राज में बहुजन समाज न्याय के लिए अपनी जान देने को मजबूर है।
17 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में हिमांशु जाटव के साथ जातंकवादी द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। पीड़ित द्वारा पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह प्रशासन की संवेदनहीनता और मिलीभगत को उजागर करता है।
हिमांशु ने इंसाफ की उम्मीद में आरोपी के परिजनों से भी दो बार शिकायत की। वहाँ से निराश होने पर 17 अप्रैल की ही रात तीसरी बार आरोपी के घर पहुँचकर उसने खुद को आग लगा ली। दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 22 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक हत्या है, जिसमें दोषी केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि वह तंत्र भी है जिसने समय पर न्याय नहीं दिया।
यह घटना अत्यंत दुखद और दंडनीय है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@UPGovt से हमारी माँगें:- सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सुरक्षा प्रदान की जाए।
@CMOfficeUP
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल हो गया, लेकिन उस दिन की दर्दनाक यादें आज भी ताज़ा हैं। निर्दोष नागरिकों पर हुआ यह हमला इंसानियत को झकझोर देने वाला कायरतापूर्ण अपराध था।
हम उन सभी मासूम लोगों को नमन करते हैं जिन्होंने अपनी जान गंवाई, और घायलों के साहस व संघर्ष को सलाम करते हैं। पीड़ित परिवारों के साथ हमारी गहरी संवेदनाएं हैं उनका दर्द हमारा भी दर्द है।
यह एक साल हमें केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रहने के लिए नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज़ को और मजबूत करने का संकल्प लेने का समय है।
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भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न परम पूज्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती के बाद उनकी मूर्तियों को तोड़े जाने, उन पर अपमानजनक तरीके से पेंट करने , उनके बैनर-पोस्टर फाड़ने एवं जलाने की घटनाओं में जो चिंताजनक वृद्धि हुई है, वह अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और देश के सामाजिक सौहार्द पर गंभीर प्रहार है और इनमें सबसे अधिक घटनाएं विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में सामने आई हैं।
यह घटनाएं उन करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं जो उन्हें अपना भगवान मानते हैं। इस प्रकार की हरकतें समाज में वैमनस्य फैलाने, शांति व्यवस्था को बिगाड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास प्रतीत होती हैं।
और जब उनको भगवान मानने वाले उनके अनुयायी अपना विरोध दर्ज कराते हैं, तो उन्हीं पर दमनात्मक कार्रवाई की जाती है, जो स्थिति को और अधिक गंभीर बनाती है।
मैं अपने बहुजन के स्वाभिमानी लोगों से कहना चाहता हूँ कि हमारे रहबर, मान्यवर कांशीराम साहब की बात आज भी उतनी ही सच्ची और मार्गदर्शक है-“जिसका राज होता है, उसी का स्वाभिमान सुरक्षित रहता है।”
इसलिए यह समझना जरूरी है कि स्वाभिमान, सम्मान और अधिकार किसी से मांगकर नहीं मिलते, बल्कि संगठित संघर्ष, राजनीतिक हिस्सेदारी और जागरूकता से हासिल किए जाते हैं। जब तक समाज सत्ता पर अपना अधिकार नहीं होता, तब तक सम्मान और सुरक्षा की गारंटी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकती।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आप सामाजिक न्याय के योद्धाओं के नाम पर 403 करोड़ रुपये देने का ढोल पीट रहे हैं, तो उसे आप ही अपने पास संभाल कर रख लीजिए। मैं पूरे बहुजन समाज की तरफ से साफ-साफ कहना चाहता हैं कि हमें दिखावा नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा चाहिए। हमारे स्वाभिमान से खिलवाड़ अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है।
हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि केवल मूर्तियों पर छत डालना या दिखावटी कार्य करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमाओं की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बार-बार प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई न होना सरकार की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
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भाजपा के डबल इंजन शासित उत्तर प्रदेश में आरक्षण व्यवस्था को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है।
उ०प्र० पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई आर०ओ०/ए०आर०ओ०-2023 भर्ती के प्री. परीक्षा परिणाम में ओ०बी०सी० आरक्षण में अनियमितता और ओ०बी०सी० सीटों को सामान्य वर्ग में समायोजित किए जाने के मामले में सुनवाई तय होना स्पष्ट संकेत है कि यह कोई साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हस्तक्षेप है।
यह घटना किसी एक भर्ती तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश की अनेक चयन प्रक्रियाओं में वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों के लगातार क्षरण की गंभीर प्रवृत्ति को उजागर करती है।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) छात्रों के साथ हो रही हकमारी के खिलाफ उनके साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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भाजपा सरकारें हर स्तर पर मनमर्जी और गुंडागर्दी पर उतर आई हैं। हरियाणा के हिसार में रात 2 बजे छात्र नेताओं को घर से उठाया जा रहा है और दिन में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला जी को बीच सड़क पुलिस द्वारा हथियार दिखाए जाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
मेरी उनसे फोन पर बात हुई - उन्होंने बताया कि वे हिसार के एसपी से मिलने जा रहे थे, ताकि अपने कार्यकर्ताओं की कथित गलत गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध दर्ज करा सकें, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही उन्हें रोककर डराने की कोशिश की।
भाजपा की यह धक्केशाही अब अघोषित इमरजेंसी में बदल चुकी है। लोकतंत्र को कुचलने की यह नीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी। जनता सब देख रही है, और यही अहंकार भाजपा सरकारों को ले बैठेगा।
@JJPofficial
@Dchautala
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