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Divya
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Divya
@DivyaSabaa
Shayari | Cricket | Chess | Photography | Ad Films | Literature
Goa, India Katılım Temmuz 2025
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ghazal:
किसी का वक़्त यूँ ता-ज़िन्दगी यकसाँ नहीं होता
कि सूरज भी तो दिन भर एक सा ताबाँ नहीं होता
मुसलसल सख़्त राहों से गुज़रना और गुम होना
समुंदर तक ये दरिया का सफ़र आसाँ नहीं होता
हो मौसम कोई भी ज़ख़्मों के गुल खिलते ही रहते हैं
मुहब्बत में चमन दिल का कभी वीराँ नहीं होता
यहाँ आते हैं ग़म तो मुस्तक़िल रहने को आते हैं
मिरे दिल के शबिस्ताँ में कोई मेहमाँ नहीं होता
फ़क़त इक सिलसिला है आँसुओं का और आहों का
हमारी दास्तानों का कोई उन्वाँ नहीं होता
ये क्या कम है मुझे इन आफ़तों ने बख़्श दी हिम्मत
हवाएँ गर न हों तो फिर 'सबा' तूफ़ाँ नहीं होता
-Divya 'sabaa'
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kaash dhoonde tu mujhe ghoom ke basti basti
aur dua meri kabhi tujh se mulaqat na ho
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#shair
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उस के पास दौलत बेशुमार थी
मगर उसे सुकून की दरकार थी
अपनी बीवी से ठनी उसकी रार थी
ज़िंदगी बे-मआनी बे-मज़ा बेकार थी
काव्य कुटीर@KavyaKutir
आज का शब्द "सुकून" पसंदीदा पंक्तियां कमेंट कीजिए 😊
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What if they never loved each other....
This would have been a beautiful ending.
Swastik 🐴@Ghodewalebhaiya
I was watching GOT again then a thought came what if Daenerys and jon meet for the first time on the battlefield and Jon Snow is having a dragon ....
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@PoetrywithSurya @sunshine83722 हमारी और से भी जन्मदिन की शुभकामनाएँ पहुँचे!
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गुलमोहर से लाल तुम्हारे।
कितने प्यारे गाल तुम्हारे।
जिधर करो रुख़ मौसम बिगड़े।
इतने काले बाल तुम्हारे।
दुनिया वाले कुछ भी बोलें।
हम तो हैं हर हाल तुम्हारे।
@sunshine83722
जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं चंपा ☺️☺️

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ik imarat mere baahar abhi todi gayi thi
ek malba mere andar kahein bikhra huwa hai
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#shair
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असफलता या अस्वीकृति किसी यात्रा का अंत नहीं होती, बल्कि यह सीखने और मजबूत बनने की पहली सीढ़ी है।
हर किसी के जीवन में ऐसे पल आते हैं जब लगातार नाकामी और रिजेक्शन हौसला तोड़ने लगते हैं। पर सच तो ये है, जो अपनी कोशिशें जारी रखता है, वह आखिरकार कामयाबी की मंजिल को छू ही लेता है।
दुनिया के सबसे सफल और पढ़े जाने वाले लेखकों में स्टीफन किंग का नाम शुमार है। लेकिन उनके सफर की शुरुआत असफलता और निराशा से भरी थी।
जब स्टीफन किंग ने अपना पहला उपन्यास ‘कैरी’ लिखा, वे आर्थिक तंगी और जीवन के संघर्षों से गुजर रहे थे। किताब की पांडुलिपि एक के बाद एक तीस से ज्यादा बार प्रकाशकों द्वारा अस्वीकृत की गई।
हर बार जब किसी प्रकाशक से रिजेक्शन लेटर मिलता, स्टीफन किंग उसे दीवार पर लगे एक कील में टांग देते। वक्त के साथ वह कील रिजेक्शन लेटरों से भर गया, तो उन्होंने एक मोटा कील लगाया ताकि सारे रिजेक्शन उसमें सजा सकें।
इस संघर्ष के बीच वे एक छोटे और तंग अपार्टमेंट में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। रोज़मर्रा के खर्च जुटाने के लिए वे स्कूल में छोटे-मोटे काम करते, लेकिन अपने लेखन का सपना कभी नहीं छोड़ा।
आखिरकार, एक छोटे प्रकाशक ने ‘कैरी’ को स्वीकार किया। पहली एडवांस रॉयल्टी की राशि मिलते ही जीवन की दिशा बदल गई।
अपनी मेहनत, जिद और रिजेक्शन झेलने की आदत ने स्टीफन किंग को महान लेखक बना दिया।
आज ‘कैरी’ न सिर्फ एक बेस्टसेलर है, बल्कि स्टीफन किंग का नाम हॉरर फिक्शन के सम्राट के तौर पर स्थापित कर चुका है।
स्टीफन किंग की कहानी हमें सिखाती है कि जब आपको रिजेक्शन मिलता है, तो वही आपके व्यक्तित्व या मूल्य को तय नहीं करता बल्कि आप उस रिजेक्शन के बाद क्या कदम उठाते हैं, यानी आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, वही आपको परिभाषित करता है।
अपने सपनों पर विश्वास और अडिग मेहनत किसी भी मुश्किल को हरा सकते हैं। हर रिजेक्शन, हर ठोकर कामयाबी की ओर एक कदम हो सकता है। कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं, जरूरत है तो बस डटे रहने और आखिरी दम तक सपनों पर भरोसा करने की।

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व्यक्तित्व हमारा विविध
सुखद रंगों में ढला है
चाह नहीं है कोई
हमें सबकुछ तो मिला है
जब लिखते हैं तो, खुद से
अलग कोई और होते हैं
जब दिखते हैं तो, लिखने से
भिन्न कुछ और लगते हैं
हमें एक साथ दोगुना
जीने का अवसर मिलता है
खुद को व्यक्त करते हैं
साथ, जीवन भी चलता है
न कहीं भटकता है मन
न भूले से आता है ग़म
तो उठाइए मेरी तरह कलम
दुगुना, जी लीजिए जीवन...
~kavyakshra 🖊️
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