पृथ्वी हमारी माता है और इसके संरक्षण में मानवता का कल्याण निहित है। इसकी रक्षा करना हम सबका केवल दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा पवित्र संकल्प भी है।
यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा।
पृथिवीं धेनुं प्रदुहां न उदिच्छन्तु नमोऽस्तु पृथिव्यै॥
देवभूमि उत्तराखंड से देश के सभी दलों से मेरा एक बार फिर आग्रह है कि वे नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का समर्थन जरूर करें। हम 2029 से ही देश की माताओं-बहनों को उनका हक देकर रहेंगे।