CG Forest & Climate Change Department

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This is the Official account of Forest & Climate Change Department, Government of Chhattisgarh. Rts are not Endorsements.

Chhattisgarh, India Katılım Haziran 2021
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दिनांक 02/04/2026 मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई की कुछ लोग वन्य जीव तेंदुए की खाल की तस्करी वाड्रफ नगर व जिला बलरामपुर मैं करने वाले हैं इस सूचना से वरिष्ठ अधिकारी को अवगत कराया गया वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो मध्य क्षेत्र भोपाल एवं राज्य उड़न दस्ता रायपुर छत्तीसगढ़ वन विभाग सूरजपुर एवं बलरामपुर की संयुक्त गठित कर कार्यवाही की गई जिसमें 09 1 आरोपी श्याम सुंदर पिता स्वर्गीय सुकुल राम जाति खैरवार निवासी ग्राम बेडमी तहसील उड़गी थाना रामकोला जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ 2 आरोपी रामतरास चमार पिता स्वर्गीय बिगन सिंह उम्र 52 साल ग्राम बेदमी 3 आरोपी गोरेलाल बौद्ध पिता चरकू उम्र 36 वर्ष ग्राम सरना थाना रघुनाथ नगर पोस्ट रघुनाथ नगर जिला बलरामपुर छत्तीसगढ़ 4 आरोपी उमेश कुमार पिता स्वर्गीय कैलाश प्रसाद कहार उम्र 40 वर्ष निवासी चेतवा थाना बीजपुर जिला सोनभद्र उत्तर प्रदेश 5 आरोपी शिव धन पिता श्याम सुंदर उम्र 24 जाति खैरवार रवार वर्ष ग्राम बेदमी थाना रामकोला जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ 6 आरोपी जगबीर सिंह पिता स्वर्गीय शिव प्रसाद जाति गौड़ उम्र 38 वर्ष ग्राम अंबा खुरिया थाना धुरकी जिला गढ़वा झारखंड 7 आरोपी तेज वाली प्रताप सिंह पिता जगबीर प्रताप सिंह जाति गौड़ उम्र 25 वर्ष ग्राम अंबा खुरिया थाना धुरकी जिला गढ़वा झारखंड 8 आरोपी राम प्रसाद पिता देवराज जाति खैरवार उम्र 24 वर्ष ग्राम रणहोर थाना अनानपारा जिला सोनभद्र उत्तर प्रदेश 9 आरोपी राहुल चमार पिता राम तरस चमार जाति चमार उम्र 22 वर्ष ग्राम बेदमी थाना रामकोला जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ आरोपियों से दो तेंदुए की खाल एवं मोटरसाइकिल जप्त कर वन परिक्षेत्र वाड्रफ नगर में पी ओ आर नंबर 22289/09 दर्ज कर अपराध विवेचना में लिया गया कार्रवाई जारी
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🐅🌿 बाघ आकलन 2026: जगदलपुर से अच्छी खबर! छत्तीसगढ़ वन विकास निगम, जगदलपुर द्वारा “अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026” का महत्वपूर्ण सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वैज्ञानिक ट्रांसेक्ट और ट्रेल सर्वे के जरिए वन्यजीवों की मौजूदगी के अहम आंकड़े जुटाए गए। 🐾 📱 M-STrIPES ऐप से रियल-टाइम डेटा रिकॉर्ड कर पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की गई। 🌳 यह पहल दिखाती है कि वन विकास निगम के क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ✨ उम्मीद है इस बार जगदलपुर क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या और विविधता में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिलेगी। #TigerCensus2026 #WildlifeConservation #Jagdalpur #ForestDepartment
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🚨🌳 वन सुरक्षा में बड़ी कार्रवाई – अवैध लकड़ी परिवहन पर रोक! छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम की सतर्क टीम ने बिलासपुर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से लकड़ी परिवहन कर रहे एक पिकअप वाहन को जब्त किया। 🚛 🌲 27 नग सागौन (चिरान) लकड़ी के साथ वाहन को पकड़ा गया और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। 👮‍♂️ नियमित गश्त और सख्त निगरानी के चलते वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है। 💪 वन विभाग की यह मुहिम हमारे जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। #ForestProtection #ActionAgainstIllegalLogging #Chhattisgarh #WildlifeSafety
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नियद नेल्लनार योजना के अंतर्गत बस्तर क्षेत्र में 10 लाख औषधीय पौधों का रोपण से आदिवासियों के आर्थिक उत्थान की नींव रखी जा रही है..... 🍀 छत्तीसगढ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग) द्वारा नियद नेल्लनार योजना अंतर्गत बस्तर क्षेत्र में विशेष रूप से जनजाति समूहों के सामाजिक व आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन-सिटू (अंतः स्थलीय संरक्षण) के तहत बाजार अनुकूलित औषधीय पौधों का रोपण की नवाचार योजना शुरू की गई है । 🍀 योजना बस्तर क्षेत्र के 05 जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर एवं कोण्डागांव में सी.आर.पी.एफ. कैम्पों के नजदीक स्थित 20 गांवों में 10 लाख औषधीय पौधों का रोपण किया गया । 🍀 योजना अंतर्गत 05 लाख सतावर तथा 05 लाख सर्पगंधा के पौधे लगाए गए। ये दोनों ही पौधों की कच्चे उत्पाद की फसल का समय लगभग 15-18 महीने का होता है । 🍀 बोर्ड द्वारा पौधों के रोपण से लेकर कच्चे उत्पाद की फसल निकालने तक की तकनीकी जानकारी का प्रशिक्षण बोर्ड द्वारा निःशुल्क कराया जाता है । 🍀 बोर्ड द्वारा ग्रामीण आदिवासियों को औषधि पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराया गये है । 🍀बोर्ड द्वारा अनुबंधित क्रेताओं के माध्यम से औषधीय पौधों से प्राप्त होने वाले कच्चे उत्पादों का विक्रय भी सुनिश्चित किया गया है।
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छत्तीसगढ़ वन विभाग की बड़ी कामयाबी: विलुप्तप्राय काले हिरणों से गुलजार हुआ बारनवापारा का रामपुर ग्रासलैंड। छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में काले हिरणों (ब्लैकबक) के कुनबे को बढ़ाने की सफल पहल की है।वन विभाग द्वारा इस वर्ष काले हिरणों की पुनर्स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, इसी कड़ी में अब 34 काले हिरणों को पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति का पालन करते हुए सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर दिया गया है।मुक्त किए गए ये हिरण अब रामपुर ग्रासलैंड में पहले से रह रहे काले हिरणों के समूह के साथ घुल-मिल गए हैं। एक समय छत्तीसगढ़ से लगभग विलुप्त हो चुके इन वन्यजीवों को पुनः उनके प्राकृतिक पर्यावास में स्वच्छंद विचरण करते देखना प्रदेश के लिए एक सुखद अनुभव है।
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छत्तीसगढ़ के जंगल सिर्फ प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि यहाँ के आदिवासी समुदायों की जीवनरेखा हैं—महुआ, तेंदूपत्ता और इमली जैसे लघु वनोपज ने न केवल उनकी आजीविका को मजबूत किया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनाया है; जब जंगल, मेहनत और सही मूल्य एक साथ जुड़ते हैं, तभी असली जमीनी विकास संभव होता है। punjabkesari.com/top-news/triba… #CGMFPFED #Chhattisgarh #VocalForLocal #RuralIndia #ForestEconomy
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खैरागढ़ के ईको कैंप छिंदारी में ‘बर्डवॉक’ बना आकर्षण का केंद्र प्रकृति प्रेमियों को मिल रहा अनूठा अनुभव, बढ़ रही संरक्षण के प्रति जागरूकता रायपुर, 30 मार्च 2026/ वन विभाग खैरागढ़ द्वारा ईको कैंप छिंदारी में शुरू की गई ‘बर्डवॉक’ पहल प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह पहल वन मंत्री श्री केदार कश्यप की प्रेरणा और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वर्ष 2026 से प्रारंभ इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को विशेषज्ञों की देखरेख में पक्षी भ्रमण (बर्डवॉक) आयोजित किया जा रहा है। इसमें आम नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को भाग लेने का अवसर मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि ईको कैंप छिंदारी जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है, जहां छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली पक्षियों की लगभग 35 प्रतिशत प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। यहां आने वाले पर्यटक विभिन्न रंग-बिरंगे पक्षियों को नजदीक से देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। हाल के बर्डवॉक कार्यक्रमों में खैरागढ़ के संगीत एवं कला के छात्र- छात्राओं सहित दुर्ग, रायपुर और राजनांदगांव से आए पर्यटकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों को पक्षियों के व्यवहार, घोंसला निर्माण और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह पहल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की सीख भी देती है। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को शांत रहने, प्लास्टिक का उपयोग न करने और वन्यजीवों के आवास का सम्मान करने जैसे नियमों का पालन कराया जाता है। पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए वयस्कों से 200 रुपए तथा विद्यार्थियों से 50 रुपए का सहयोग शुल्क निर्धारित किया गया है। ईको कैंप का संचालन स्थानीय समुदाय द्वारा किया जा रहा है, जिसे वन विभाग का वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्राप्त है। ईको कैंप छिंदारी में बर्डवॉक के साथ-साथ बोटिंग, टेंटिंग, कैंपिंग तथा छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों जैसे फरा, ठेठरी और खुरमी का आनंद लेने की भी सुविधा उपलब्ध है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल पर्यटकों के लिए एक आदर्श पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। वन विभाग ने इच्छुक नागरिकों से बर्डवॉक में शामिल होने के लिए अग्रिम पंजीकरण कराने का आग्रह किया है, ताकि सभी को सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण अनुभव मिल सके। यह पहल इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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नागोया प्रोटोकॉल- पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से लाभ उसे देश के स्थानीय लोगों के साथ बराबरी से साझा किए जाने का अंतरराष्ट्रीय समझौता.....
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🎥🌿 आर्द्रभूमि से सीख — प्रकृति की पुकार 🌿🎥 बिलासपुर के वन चेतना केंद्र, सकरी में आयोजित ‘आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी एवं पक्षी संरक्षण’ कार्यशाला की कुछ झलकियाँ… जहाँ विशेषज्ञों ने बताया — 💧 आर्द्रभूमियाँ सिर्फ जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं 🕊️ पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास का महत्व 🌱 जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन में इनकी अहम भूमिका ✨ कोपरा जलाशय (छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट) की विशेषताओं और संरक्षण पर भी विशेष चर्चा की गई 👩‍🎓👨‍🎓 विद्यार्थियों की उत्साही भागीदारी और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को और भी सार्थक बना दिया 📢 आइए, हम सब मिलकर आर्द्रभूमियों और पक्षियों की रक्षा का संकल्प लें #WorkshopHighlights #WetlandsMatter #SaveBirds #NatureConservation #Bilaspur #Chhattisgarh #EcoAwareness 🌍💚
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🌿 बिलासपुर | 27 मार्च 2026 🌿 वन चेतना केंद्र, सकरी में ‘आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी एवं पक्षी संरक्षण’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आर्द्रभूमियों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं पक्षियों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन चर्चा की गई। ✨ छत्तीसगढ़ के प्रथम रामसर साइट कोपरा जलाशय की विशेषताओं और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई। 👨‍🏫 विभिन्न विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से आर्द्रभूमियों के महत्व को समझाया, वहीं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता के साथ अपने ज्ञान को समृद्ध किया। 👥 कुल 70 विद्यार्थियों की सहभागिता के साथ यह आयोजन जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। 🌱 यह पहल पर्यावरण संरक्षण और पक्षी सुरक्षा के प्रति समाज को प्रेरित करने का एक सशक्त प्रयास है। #WetlandConservation #BirdProtection #EnvironmentAwareness #Chhattisgarh #Bilaspur #NatureLovers #SaveWetlands #EcoFriendly 🌍🕊️
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दिनांक 31-03-2026 को कुंवरगढ़ महोत्सव, कुरा धरसीवां में छत्तीसगढ़ हर्बल का स्टॉल लगाया गया, जहां माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्टॉल का निरीक्षण एवं विजिट किया गया। इस अवसर पर वन आधारित उत्पादों, जनजातीय आजीविका और प्राकृतिक हर्बल उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की गई। यह पहल जंगल से जुड़े समुदायों को सशक्त बनाने और छत्तीसगढ़ के हर्बल उत्पादों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। #kuwargarhmohatsav #cmo #chhattisgarhherbals
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महुआ—छत्तीसगढ़ का “पीला सोना” जंगलों में महुआ के फूल ज़मीन को पीले रंग से ढक देते हैं और हर फूल के साथ जुड़ी होती है मेहनत, परंपरा और हजारों वनवासी परिवारों की आजीविका। जो कभी सिर्फ कच्चे रूप में बेचा जाता था, वही आज लड्डू, कुकीज़ और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों के रूप में नई पहचान बना रहा है। महुआ सिर्फ एक वन उपज नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और प्रकृति के साथ संतुलन का प्रतीक है। chhattisgarhherbal.com #Mahua #ChhattisgarhHerbals #ForestToMarket #VocalForLocal #TribalLivelihood
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औषधीय पौधों की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने किया नर्सरी का निरीक्षण ⛳ छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने 25 मार्च को महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड का दौरा किया । ⛳ श्री विकास मरकाम ने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न औषधीय पादप नर्सरियों का सघन निरीक्षण किया तथा क्षेत्र भ्रमण कर चल रहे विकास कार्यों का भी जायजा लिया। निरिक्षण के दौरान बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस.राव और विभिन्न अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। ⛳ श्री विकास मरकाम ने भनपुरी स्थित नर्सरी एवं कृषक प्रशिक्षण केन्द्र में आगामी वर्षा ऋतु में वितरण हेतु तैयार किए जा रहे मण्डूकपर्णी, सतावर, बच और ब्राम्ही के पौधों का भी निरीक्षण किया । ⛳ श्री विकास मरकाम ने ग्राम तेन्दूलोता में बच और ब्राम्ही के कृषि क्षेत्र को विस्तार देने तथा किसानों को इसके आर्थिक लाभों के प्रति प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने देवरी 10 प्रकार के औषधीय पौधों वाले ‘मल्टीलेयर प्लांटेशन’ मॉडल का भी अवलोकन किया तथा देवरी स्थित नर्सरी में उन्होंने विभिन्न ‘एग्रो फारेस्ट्री मॉडल’ जैसे सागौन के साथ लेमनग्रास, वेटिवर और पचौली के रोपण की सराहना करते हुए बताया कि अंतरवर्तिय फसलों के माध्यम से किसान कम समय में पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा कमा सकते हैं । ⛳ श्री विकास मरकाम ने दौरे के अगले चरण में डोंगरगांव और डोंगाझर नर्सरियों में सैलेशिया और सतावर की उन्नत ‘सिंपशेट्टी’ प्रजाति का निरीक्षण किया गया, जो अन्य प्रजातियों की तुलना में अधिक उत्पादन देती है. यहाँ उपयोग की जा रही नवीन तकनीकों जैसे रेनपाईप एप्लीकेशन और विड़मेट पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में अधिक से अधिक किसानों को प्रशिक्षण से जोड़कर औषधीय एवं सुगंधित पादपों के कृषिकरण का विस्तार किया जाए। उन्होंने वनों में औषधीय पौधों के सघन रोपण, उनके प्राथमिक प्रसंस्करण और स्थानीय जनजातियों, ग्रामीणों एवं परंपरागत वैद्यों को आवश्यकतानुसार पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर उन्हें लाभान्वित करने की कार्ययोजना पर बल दिया.
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सफलता की कहानी- गौरेला पेंड्रा मरवाही में लेमनग्रास क्रांति; शून्य बजट से समृद्धि की राह.....
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छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने वन्यजीव तस्करों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में केशकाल वनमंडल और राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मुखबिर की सूचना पर विभाग के ही एक कर्मचारी ने खरीदार बनकर जाल बिछाया और फरसगांव-बड़ेडोंगर मार्ग पर घेराबंदी कर तस्करों को रंगे हाथों धर दबोचा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि लगभग 7 महीने पहले भरमार बंदूक से इस तेंदुए का शिकार किया गया था। विभाग ने मौके से खाल के साथ-साथ तस्करी में इस्तेमाल वाहन और मुख्य आरोपी से शिकार में प्रयुक्त बंदूक भी जप्त कर ली है। पकड़े गए आरोपी कोंडागांव, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिले के निवासी हैं, जिन पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत सख्त कार्यवाही की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और शिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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🌳 वनों की सुरक्षा को मिला नया कवच! 🌳 छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम, कवर्धा परियोजना मंडल द्वारा एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है 💪 📌 कैम्पा मद से 227 नए मुनारों (Boundary Pillars) का सफल निर्माण 👉 वन सीमाओं को अब मिला मजबूत और स्थायी संरक्षण 👉 अवैध अतिक्रमण पर लगेगी प्रभावी रोक 👉 वन रक्षकों के लिए निगरानी हुई आसान ✨ यह पहल न केवल वन भूमि की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करेगी, बल्कि भविष्य में विवादों को भी कम करेगी। 🌿 प्रबंध संचालक एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री प्रेम कुमार (भा.व.से.) द्वारा भी इस कार्य की सराहना की गई। 🌱 सुरक्षित वन = समृद्ध पर्यावरण = बेहतर भविष्य #Chhattisgarh #ForestDevelopment #VanVikas #EnvironmentProtection #GreenFuture #CAMPA #Kawardha #ForestConservation
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सशक्त छत्तीसगढ़, समृद्ध पर्यटन! वन मंत्री श्री केदार कश्यप जी की दूरगामी सोच से साकार हुआ 'मोहरेंगा नेचर सफारी'। यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय लोगों और महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाएगी। यहाँ प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का बेजोड़ संगम है। आइए, छत्तीसगढ़ की इस अनूठी प्राकृतिक संपदा का हिस्सा बनें।
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इस नवरात्रि अपनाएं तिखुर, व्रत के दौरान शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने के लिए यह एक सहज और प्राकृतिक विकल्प है। तिखुर अपने शीतल स्वभाव, हल्केपन और आसान पाचन के कारण व्रत में विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। पारंपरिक वन-आधारित सुपरफूड के रूप में इसकी शुद्धता और सादगी इसे व्रत के दौरान एक भरोसेमंद और संतुलित आहार बनाती है। chhattisgarhherbal.com #chhattisgarhherbals #NavratriSpecial #Tikhur #fastingdelight #NaturalWellness
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छत्तीसगढ़ हर्बल्स का महुल दोना-पत्तल अब महामाया मंदिर, बिलासपुर में भोग वितरण के लिए उपयोग किया जा रहा है। यह पहल प्रकृति और परंपरा का सुंदर संगम है, जहां इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाकर प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार ये दोना-पत्तल स्थानीय महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ वन आधारित आजीविका को भी बढ़ावा दे रहे हैं। #ChhattisgarhHerbals #Mahul #EcoFriendly #VocalForLocal #SustainableLiving
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21मार्च 2026 सुबह 11.00 बजे छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवंऔषधि पादपबोर्ड, द्वारा आयोजित "बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह" का आयोजन किया गया ⛳ छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएवं औषधि पादपबोर्ड, द्वारा 21 मार्च 2026 सुबह 11.00 बजे "बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के पदभार ग्रहण समारोह" का आयोजन राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर, जीरो प्वाईट, रायपुर में किया गया। ⛳ कार्यक्रम में सर्वप्रथम बोर्ड के माननीय अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्यवा श्री अंजय शुक्ला जी को बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं योजनाओं के विस्तार से जानकारी दी, उन्तेोंने बताया कि बोर्ड वर्तमान में औषधीय पौधों की खेती हेतु विशेष योजना चला रहा है, जिसके अंतर्गत धमतरी जिले में महानदी के किनारे खस की खेती महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से की जा रही है, जिन्हें फसल उत्पादन के पहले ही एडवांस सं. 25.00 लाख विकेताओं द्वारा प्रदान किया गया, वही गैरिला-पेण्डा-मरवाही जिले में लेमनग्रास की खेती स्व-सहायता समूहों के माध्यम से की जा रही है। बोर्ड के द्वारा किए जा रहे फलस्वरूप खेती में किए जा रहे नवाचार योजना केलिए राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार भी मिला है। ⛳ इसके बाद कार्यक्रम में बोर्ड के नवनियुक्त उपाध्याला श्री अंजय शुक्ला ने उस्तावर कर पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण समारोह में पधारे हुए सभी लोगों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दी। ⛳ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जगदलपुर के विधायक माननीय श्री किरण सिंह देव ने बोर्ड के कार्यों की सराहना करते हुए सभी से यह बात साझा कि दिसंबर माह में बोर्ड द्वारा किए गए एक संभागीय स्तर के एक वैद्य सम्मेलन में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का उपचार करने वाले सैकड़ों वैद्यों से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्हेंनि यह भी कहा कि बस्तर में यदि कोई आदिवासी बीमार होता है, वह सबसे पहले वैद्यों के पास जाता है, जिसका उपचार वैध निःशुल्क कर देते हैं। ⛳ कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि तकनीकी शिक्षा मंत्री माननीय श्री खुशवंत साहेव ने नवनियुक्त माननीय उपाध्यक्ष को बधाई देते हुए सभी लोगों से गर्व से यह बात कि वैद्यगण बड़ी-बड़ी बीमारियों के लिए छोटी-छोटी जड़ी-बूटी देकर अत्यंत कम खर्च में उपचार कर देते है। इसके बाद कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पधारे हुए घरसी चेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा ने बोर्ड के चौये उपाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने की बधाई दी। ⛳ तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय वनमंत्री श्री केदार कश्यप जी ने अपने उद्‌बोधन में बताया कि पूरे छत्तीसगढ़ में 60.00 लामा वर्ग कि.मी. वन क्षेत्र है और पिछले कुछ वर्षों में वनक्षेत्रों में 683 वर्ग कि.मी. की वृद्धि हुई है, जो कि छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में खासकर बस्तर के जंगलों में दुर्लभ वनौषधियों का भंडार है, जिसका उपयोग वहाँ के वैद्य आम लोगों के उपचार में करते है। बस्तर गोत्र के लगभग 80 प्रतिशत लोग बनों पर और उनसे प्राप्त होने वाले वनौषधियों पर निर्भर है, उन्हेंनि सभी से निवेदन किया कि आज 21 मार्च अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर सभी संकल्प ले कि वे सत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति तथा परंपरागत ज्ञान का संरक्षण भविष्य की पीड़ियों के लिए करेंगे। ⛳ कार्यक्रम में श्री गुरु बालदास साहेब जी, राजस्व मंत्री माननीय श्री टेकराम वर्मा, अभनपुर विधायक श्री इंड कुमार साहू, रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी, आर.डी.ए. अध्यक्ष श्री नन्ने साहू, नागरिक आपूर्ति कार्पोरेशन के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष, श्री केदारनाथ गुप्ता, निःशक्तजन आयोग के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, बीज निगम अध्यक्ष श्री चन्द्रहास चन्द्राकर जी, राज्य अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा जी, श्री अशोक बजाज जी (प्रदेश कार्यालय मंत्री), श्री आलोक ठाकुर जी (किसान मोर्चा प्रदेश अध्शा), श्री अरविन्द ठाकुर (अध्या सरपंच संप रायपुर), श्री श्याम नारंग (जिला अध्यक्ष रायपुर ग्रामीण), श्री संतोष शुक्ला जी (महामंत्री रायपुर ग्रामीण), श्री रमेश ठाकुर (जिला अध्यक्ष रायपुर बाहर), श्री अमित साहू (प्रदेश मंत्री भाजपा), श्री उपकार चन्द्राकर (पिछड़ा वर्ग मोर्चा प्रदेश महामंत्री), श्री शिवशंकर वर्मा (जिला उपाध्यक्ष), श्री पिन्टू साहू (जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा रायपुर ग्रामीण), श्री सुरेन्द्र पाटनी (रायपुर ग्रामीण प्रभारी), श्री तुषार चोपड़ा (जिला मंत्री रायपुर शहर), श्री गुरू सौरभ साहेब (जिला पंचायत सभापति), श्रीमति स्वाति वर्मा (जिला पंचायत सभापति), श्री श्याम कुमार शुक्ला (अध्यक्ष ब्राम्हण सामाज), मंडल अध्यक्षगण श्री किशोर साहू, श्री मनोज वर्मा, श्री आयु चन्द्रवंशी, श्री अशोक सिन्हा, श्री सुनील शर्मा, श्री चन्द्रकांत सातू, श्री किशोर साहू, श्री हरिशंकर वर्मा, श्रीमत्ति सोना वर्मा उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त श्री गोपेश साहू (जोन अध्यक्ष), श्री हितेन्द्र तिवारी (अध्यक्ष रायपुर बार), श्रीमति उमा व्यास तया युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष श्री मयंक यादव, श्री हनुमंत आडिल, श्री महेश यहु, श्री रामकुमार बेस, श्री नीरज चन्द्रकार, श्री मोजराम धीवर, श्री विलराज छाबड़ा, श्री प्रमोद निषाद, श्री शशिकांत साहू सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव सहित कार्यालय के समस्त स्टॉफ मौजूद रहे।
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