Geeta Singh

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Geeta Singh

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@Geetasingh29

India Katılım Nisan 2021
23 Takip Edilen20 Takipçiler
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dhananjay p singh
dhananjay p singh@dhananjaybpl·
कांग्रेस भले ही वोट चोरी वोट चोरी चिल्ला रही है लेकिन जनमत पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा,बिहार में तो ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण ही चुनाव का फैसला करेगा @DrMohanYadav51 @HitanandSharma @drhiteshbajpai @rajneesh4n @RahulKothariBJP @RajuMishra63 @anantvijay @OfficeofSSC @ChouhanShivraj
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Bhagavad Gita 𑁍
Bhagavad Gita 𑁍@GitaShlokas·
आये गए रघुनंदन, सजवादो द्वार द्वार...
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
देवालय जाकर बहुत से लोगों की आदत होती है कि वे खड़े-खड़े दर्शन करते है, जबकि शास्त्रों के अनुसार यह गलत है... इसलिए मंदिर जाएं तो यह ध्यान रखें कि मंदिर में भगवान के दर्शन हमेशा बैठकर करें। साथ ही दर्शन करते समय यह ध्यान रखें सबसे पहले मूर्ति के चरणों को देखें नतमस्तक होकर प्रार्थना करें। फिर देवता के वक्ष पर, अर्थात् अनाहतचक्र पर मन एकाग्र करें व अंत में देव मूर्ति के नेत्रों की देखें व उनके रूप को अपने नेत्रों में बसाएं। मंदिर में कुछ भी मांगने या प्रार्थना करते समय दान लेने की, क्षमा याचना या आशीर्वाद लेने की अवस्था में बैठकर प्रार्थना करें। इससे आपकी हर मनोकामना तो शीघ्र ही पूरी होगी। साथ ही मंदिर जाने के पूर्ण सकारात्मक परिणाम भी मिलने लगेंगे। हे परमात्मा आप की असीम कृपा मुझ पर बरस रही है मैं आप को प्रणाम करता हूँ । जरा सोचिये हमने क्या किया..?? 1. चोटियां छोड़ी , 2. टोपी, पगड़ी छोड़ी , 3. तिलक, चंदन छोड़ा 4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी , 5. यज्ञोपवीत छोड़ा , 6. संध्या वंदन छोड़ा । 7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा , 8. महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी। 9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है) 10. संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी , 11. श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी । 12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े , 13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी , 14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े , 15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)। अब कोई रीति या परंपरा बची है? ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगेबौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया..M लमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार Nमाज पढ़ना, ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है, फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ? कहाँ लुप्त हो गये- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ? हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं। अपनी पहचान बनाओ,अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ,सप्ताह मे कम से कम एक दिन तो मन्दिर जाना शुरु करो बच्चों के साथ... जय महाकाल, जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है.. सिरदर्द को 5 मिनट में ठीक करने वाली प्राकृतिक चिकित्सा... नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिल्कुल अलग - अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं। दाहिना नासिका छिद्र "सूर्य" और बायां नासिका छिद्र "चन्द्र" के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है। सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें और बस पांच मिनट में आपका सरदर्द "गायब" है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है। अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें... यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में "तरोताजा" महसूस करें। दाहिना नासिका छिद्र "गर्म प्रकृति" रखता है और बायां "ठंडी प्रकृति" अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह। प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ। अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें। बस इन्हें आजमाइए और बिना दवाओं के स्वस्थ महसूस करें। पोस्ट स्वास्थ्य जानकारी हेतु रिट्वीट शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है... बीमार पड़ने के पहले , ये काम केवल आयुर्वेद ही कर सकता है। 1. नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें,थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा। 2. कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे। 3. तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर, सिर्फ फिल्टर्ड ही तिल्ली, सरसों, मूंगफली, नारियल केवल। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं। 4.सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर जहरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें। 5.रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें। 6.काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी। 7.तेल कम कर, देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं।अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता। 8.ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा। 9.ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी। 10.भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा। 11.नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगे। 12.सुबह के खाने के साथ ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा। 13. चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी। चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या पतजंलि का मधुरम(देशी शक्कर) लें। 14. छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते। 15. धीरे धीरे पतजंलि की दिव्य पेय(चाय) की आदत बनाएं, निरोग रहेंगे। 16. डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें। 17. रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगे। करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा। 18. पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे। 19. रसोई में घुसते ही थोड़े ड्राई फ्रूट(काजू की जगह तरबूज के बीज) खायें, एनर्जी बनी रहेगी। 20. प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं। 21. माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है। 22. खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं। 23.बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं। 24. तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी। 25. मैदा, बेसन, चौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गेस की समस्या से बचेंगे। 26. अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे। 27. बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है। 28. पानी का फिल्टर R O वाला नहीं, हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करे, सस्ता भी और बढ़िया भी। 29. रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें। 30. रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर eye wash cup में डाल कर आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पौडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा। 31. सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी। 32. रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम। 33. एक्यू प्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी। 34. चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी। 35. रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है। 36. सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा। 37. सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा। 38. रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रखकर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा। कभी कभी नमक में, हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें,दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता। 39. बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा। 40. सुबह के खाने के साथ घर का जमाया ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक है। 41. सूरज डूबने के बाद दही या दही से बनी कोई चीज न खाएं, ज्यादा उम्र में दमा हो सकता है। 42. दहीबड़े सिर्फ मूंग की दाल के बनने चहिये, उड़द के नुकसान करते हैं। पोस्ट स्वास्थ्य जानकारी हेतु रिट्वीट शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद
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PRIYANKA YADAV
PRIYANKA YADAV@YADAV_JI_R·
अमृतसर में हिन्दुओ और सिखों की लाशों से भरी ट्रैन आती थी लिखा रहता था, "ये आज़ादी का नजराना" पहली ट्रेन पाकिस्तान से (15.8.1947)😢 अमृतसर का लाल इंटो वाला रेलवे स्टेशन अच्छा खासा शरणार्थियों कैम्प बना हुआ था । पंजाब के पाकिस्तानी हिस्से से भागकर आये हुए हज़ारों हिन्दुओ-सिखों को यहाँ से दूसरे ठिकानों पर भेजा जाता था ! वे धर्मशालाओं में टिकट की खिड़की के पास, प्लेट फार्मों पर भीड़ लगाये अपने खोये हुए मित्रों और रिश्तेदारों को हर आने वाली गाड़ी मै खोजते थे... 15 अगस्त 1947 को तीसरे पहर के बाद स्टेशन मास्टर छैनी सिंह अपनी नीली टोपी और हाथ में सधी हुई लाल झंडी का सारा रौब दिखाते हुए पागलों की तरह रोती-बिलखती भीड़ को चीरकर आगे बढे... थोड़ी ही देर में 10 डाउन, पंजाब मेल के पहुँचने पर जो द्रश्य सामने आने वाला था,उसके लिये वे पूरी तरह तैयार थे....मर्द और औरतें थर्ड क्लास के धूल से भरे पीले रंग के डिब्बों की और झपट पडेंगे और बौखलाए हुए उस भीड़ में किसी ऐसे बच्चे को खोजेंगे, जिसे भागने की जल्दी में पीछे छोड़ आये थे ! चिल्ला चिल्ला कर लोगों के नाम पुकारेंगे और व्यथा और उन्माद से विहल होकर भीड़ में एक दूसरे को ढकेलकर-रौंदकर आगे बढ़ जाने का प्रयास करेंगे ! आँखो में आँसू भरे हुए एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक भाग भाग कर अपने किसी खोये हुए रिश्तेदार का नाम पुकारेंगे! अपने गाँव के किसी आदमी को खोजेंगे कि शायद कोई समाचार लाया हो ! आवश्यक सामग्री के ढेर पर बैठा कोई माँ बाप से बिछडा हुआ कोई बच्चा रो रह होगा, इस भगदड़ के दौरान पैदा होने वाले किसी बच्चे को उसकी माँ इस भीड़-भाड़ के बीच अपना ढूध पिलाने की कोशिश कर रही होगी.... स्टेशन मास्टर ने प्लेट फार्म एक सिरे पर खड़े होकर लाल झंडी दिखा ट्रेन रुकवाई ....जैसे ही वह फौलादी दैत्याकार गाड़ी रुकी, छैनी सिंह ने एक विचित्र द्रश्य देखा..चार हथियार बंद सिपाही, उदास चेहरे वाले इंजन ड्राइवर के पास अपनी बंदूकें सम्भाले खड़े थे !! जब भाप की सीटी और ब्रेको के रगड़ने की कर्कश आवाज बंद हुई तो स्टेशन मास्टर को लगा की कोई बहुत बड़ी गड़बड़ है...प्लेट फार्म पर खचाखच भरी भीड़ को मानो साँप सुंघ गया हो..उनकी आँखो के सामने जो द्रश्य था उसे देखकर वह सन्नाटे में आ गये थे ! स्टेशन मास्टर छेनी सिंह आठ डिब्बों की लाहौर से आई उस गाड़ी को आँखे फाड़े घूर रहे थे! हर डिब्बे की सारी खिड़कियां खुली हुई थी, लेकिन उनमें से किसी के पास कोई चेहरा झाँकता हुआ दिखाई नहीँ दे रहा था, एक भी दरवाजा नहीँ खुला.. एक भी आदमी नीचे नहीँ उतरा, उस गाड़ी में इंसान नहीँ भूत आये थे..स्टेशन मास्टर ने आगे बढ़कर एक झटके के साथ पहले डिब्बे के द्वार खोला और अंदर गये..एक सेकिंड में उनकी समझ में आ गया कि उस रात न.10 डाउन पंजाब मेल से एक भी शरणार्थी क्यों नही उतरा था.. वह भूतों की नहीँ बल्कि लाशों की गाड़ी थी..उनके सामने डिब्बे के फर्श पर इंसानी कटे-फटे जिस्मों का ढेर लगा हुआ था..किसी का गला कटा हुआ था.किसी की खोपडी चकनाचूर थी ! किसी की आते बाहर निकल आई थी...डिब्बों के आने जाने वाले रास्ते मे कटे हुए हाथ-टांगे और धड़ इधर उधर बिखरे पड़े थे..इंसानों के उस भयानक ढेर के बीच से छैनी सिंह को अचानक किसी की घुटी.घुटी आवाज सुनाई दी ! यह सोचकर की उनमें से शायद कोई जिन्दा बच गया हो उन्होने जोर से आवाज़ लगाई.. "अमृतसर आ गया है यहाँ सब हिंदू और सिख है. पुलिस मौजूद है, डरो नहीँ"..उनके ये शब्द सुनकर कुछ मुरदे हिलने डुलने लगे..इसके बाद छैनी सिंह ने जो द्रश्य देखा वह उनके दिमाग पर एक भयानक स्वप्न की तरह हमेशा के लिये अंकित हो गया ...एक स्त्री ने अपने पास पड़ा हुआ अपने पति का 'कटा सर' उठाया और उसे अपने सीने से दबोच कर चीखें मारकर रोने लगी... उन्होंने बच्चों को अपनी मरी हुई माओ के सीने से चिपट्कर रोते बिलखते देखा..कोई मर्द लाशों के ढेर में से किसी बच्चे की लाश निकालकर उसे फटी फटी आँखों से देख रहा था..जब प्लेट फार्म पर जमा भीड़ को आभास हुआ कि हुआ क्या है तो उन्माद की लहर दौड़ गयी... स्टेशन मास्टर का सारा शरीर सुन्न पड़ गया था वह लाशों की कतारो के बीच गुजर रहा था...हर डिब्बे में यही द्रश्य था अंतिम डिब्बे तक पहुँचते पहुँचते उसे मतली होने लगी और जब वह ट्रेन से उतरा तो उसका सर चकरा रहा था उनकी नाक में मौत की बदबू बसी हुई थी और वह सोच रहे थे की रब ने यह सब कुछ होने कैसे दिया ? कोई कैसे इतनानिर्दयी हो सकता है कोई सोच भी नहीँ सकता था....उन्होने पीछे मुड़कर एक बार फ़िर ट्रेन पर नज़र डाली...हत्यारों ने अपना परिचय देने के लिये अंतिम डिब्बे पर मोटे मोटे सफेद अक्षरों से लिखा था..... "यह गाँधी और नेहरू को हमारी ओर से आज़ादी का नज़राना है " !
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
कमर दर्द, सर्वाइकल और चारपाई ( खाट)... ये समझिए कि हमारे पूर्वज वैज्ञानिक थे सोने के लिए खाट हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है क्या हमारे पूर्वजों लकड़ी को चीरना नहीं जानते थे!, वे भी लकड़ी चीरकर उसकी पट्टियाँ बनाकर डबल बेड बना सकते थे डबल बेड बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था लकड़ी की पट्टियों में कीलें ही ठोंकनी होती हैं चारपाई भी भले कोई सायंस नहीं है , लेकिन एक समझदारी है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके चारपाई बनाना एक कला है उसे रस्सी से बुनना पड़ता है और उसमें दिमाग और श्रम लगता है। जब हम सोते हैं , तब सिर और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है क्योंकि रात हो या दोपहर में लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते हैं पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है। इसलिए सोते समय चारपाई की जोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है दुनिया में जितनी भी आराम कुर्सियां देख लें सभी में चारपाई की तरह जोली बनाई जाती है बच्चों का पुराना पालना सिर्फ कपडे की जोली का था लकडी का सपाट बनाकर उसे भी बिगाड़ दिया गया,चारपाई पर सोने से कमर और पीठ का दर्द का दर्द कभी नही होता है दर्द होने पर चारपाई पर सोने की सलाह दी जाती है डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है, उसमें रोग के कीटाणु पनपते हैं, वजन में भारी होता है तो रोज-रोज सफाई नहीं हो सकती चारपाई को रोज सुबह खड़ा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सूरज का प्रकाश बहुत बढ़िया कीटनाशक है खाट को धूप में रखने से खटमल इत्यादि भी नहीं लगते हैं अगर किसी को डॉक्टर Bed Rest लिख देता है तो दो तीन दिन में उसको English Bed पर लेटने से Bed -Soar शुरू हो जाता है भारतीय चारपाई ऐसे मरीजों के बहुत काम की होती है चारपाई पर Bed Soar नहीं होता क्योकि इसमें से हवा आर पार होती रहती है गर्मियों में Bed मोटे गद्दे के कारण गर्म हो जाता है इसलिए AC की अधिक जरुरत पड़ती है जबकि चारपाई पर नीचे से हवा लगने के कारण गर्मी बहुत कम लगती है बान की चारपाई पर सोने से सारी रात Automatically सारे शारीर का Acupressure होता रहता है हमारी देशी ‘चारपाई’ की उपयोगिता और गुण के समझते हुए अमेरिकी कंपनीयां विदेश में 1 लाख रुपये से ज्यादा में इसे बेच रही पर हम इसके गुणों को अनदेखा कर बेड पर लेट कर हज़ारों बीमारियाँ ले रहे और अपनी ही किफ़ायती गुणकारी चीज़ों विदेशों में जाकर उनके मनचाहे पे अपनी देशी चीजें ख़रीद रहे... पोस्ट स्वास्थ्य जानकारी हेतु रिट्वीट शेयर फालो जरूर करें धन्यवाद 😇💌
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
वाराणसी से मणिकर्णिका घाट दुर्लभ अलौकिक दर्शन..✨
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है... 33 करोड़ नहीं 33 कोटि देवी देवता हैं हिंदू धर्म में... कोटि = प्रकार..देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं..कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता है। हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिंदू धर्म में :- 12 प्रकार हैँ :- आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँशभाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...! 8 प्रकार हैं :- वासु:, धरध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष। 11 प्रकार हैं :- रुद्र: ,हरबहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली। एवँ दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार । कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं...यह बहुत ही अच्छी जानकारी है इसे अधिक से अधिक लोगों में बाँटिये और इस कार्य के माध्यम से पुण्य के भागीदार बनिये..एक हिंदू होने के नाते जानना आवश्यक है..अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाए..अपने भारत की संस्कृति को पहचानें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचायें। खासकर अपने बच्चों को बताएं..क्योंकि ये बात उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बताएगा... ▪️दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष ! ▪️तीन ऋण - देव ऋण , पितृ ऋण , ऋषि ऋण ! ▪️चार युग - सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग , कलियुग ! ▪️चार धाम - द्वारिका , बद्रीनाथ , जगन्नाथ पुरी , रामेश्वरम धाम ! ▪️ चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ) ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , शृंगेरीपीठ ! ▪️ चार वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद , यजुर्वेद , सामवेद ! ▪️ चार आश्रम - ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , संन्यास ! ▪️चार अंतःकरण - मन , बुद्धि , चित्त , अहंकार ! ▪️ पञ्च गव्य - गाय का घी , दूध , दही , गोमूत्र , गोबर ! ▪️ पंच तत्त्व - पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश ! ▪️ छह दर्शन - वैशेषिक , न्याय , सांख्य , योग , पूर्व मिसांसा , दक्षिण मिसांसा ! ▪️ सप्त ऋषि - विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप! ▪️ सप्त पुरी - अयोध्या पुरी , मथुरा पुरी , माया पुरी ( हरिद्वार ) , काशी , कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची ) , अवंतिका और द्वारिका पुरी ! ▪️आठ योग - यम , नियम , आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समािध ! ▪️ दस दिशाएं - पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण , ईशान , नैऋत्य , वायव्य , अग्नि आकाश एवं पाताल ▪️ बारह मास - चैत्र , वैशाख , ज्येष्ठ , अषाढ , श्रावण , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक , मार्गशीर्ष , पौष , माघ , फागुन ! ▪️पंद्रह तिथियाँ - प्रतिपदा , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावास्या ! ▪️ स्मृतियां - मनु , विष्णु , अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ ! इस पोस्ट को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी सनातन भारतीय संस्कृति का ज्ञान हो। ऊपर जाने पर एक सवाल ये भी पूँछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायू (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ो पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शौक में 4. मन्दिर में 5. कथा में सिर्फ 1 बार भेजो बहुत लोग इन पापो से बचेंगे ।। अकेले हो? परमात्मा को याद करो । परेशान हो? ग्रँथ पढ़ो । उदास हो? कथाए पढो । टेन्शन मे हो? भगवत गीता पढो । फ्री हो? अच्छी चीजे फोरवार्ड करो हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियो पर कृपा करो...... सूचना क्या आप जानते हैं ? हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है। व्रत,उपवास करने से तेज़ बढ़ता है,सर दर्द और बाल गिरने से बचाव होता है । आरती----के दौरान ताली बजाने से दिल मजबूत
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पौराणिक ग्रंथ 'रामायण' में हम्पी का उल्लेख वानर राज्य किष्किंधा की राजधानी के तौर पर किया गया है। केरल का प्रसिद्ध 'सबरिमलय मंदिर' तीर्थ इसी नदी के तट पर स्थित है। 13. ऋष्यमूक पर्वत : मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की, सीता के आभूषणों को देखा और श्रीराम ने बाली का वध किया। ऋष्यमूक पर्वत वाल्मीकि रामायण में वर्णित वानरों की राजधानी किष्किंधा के निकट स्थित था। ऋष्यमूक पर्वत तथा किष्किंधा नगर कर्नाटक के हम्पी, जिला बेल्लारी में स्थित है। पास की पहाड़ी को 'मतंग पर्वत' माना जाता है। इसी पर्वत पर मतंग ऋषि का आश्रम था जो हनुमानजी के गुरु थे। 14. कोडीकरई : हनुमान और सुग्रीव से मिलने के बाद श्रीराम ने वानर सेना का गठन किया और लंका की ओर चल पड़े। तमिलनाडु की एक लंबी तटरेखा है, जो लगभग 1,000 किमी तक विस्‍तारित है। कोडीकरई समुद्र तट वेलांकनी के दक्षिण में स्थित है, जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में पाल्‍क स्‍ट्रेट से घिरा हुआ है। यहां श्रीराम की सेना ने पड़ाव डाला और श्रीराम ने अपनी सेना को कोडीकरई में एकत्रित कर विचार विमर्ष किया। लेकिन राम की सेना ने उस स्थान के सर्वेक्षण के बाद जाना कि यहां से समुद्र को पार नहीं किया जा सकता और यह स्थान पुल बनाने के लिए उचित भी नहीं है, तब श्रीराम की सेना ने रामेश्वरम की ओर कूच किया। 15. रामेश्‍वरम : रामेश्‍वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का छिछला पानी तैरने और सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्‍वरम प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केंद्र है। महाकाव्‍य रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है। 16. धनुषकोडी : वाल्मीकि के अनुसार तीन दिन की खोजबीन के बाद श्रीराम ने रामेश्वरम के आगे समुद्र में वह स्थान ढूंढ़ निकाला, जहां से आसानी से श्रीलंका पहुंचा जा सकता हो। उन्होंने नल और नील की मदद से उक्त स्थान से लंका तक का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। धनुषकोडी भारत के तमिलनाडु राज्‍य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक गांव है। धनुषकोडी पंबन के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। धनुषकोडी श्रीलंका में तलैमन्‍नार से करीब 18 मील पश्‍चिम में है। इसका नाम धनुषकोडी इसलिए है कि यहां से श्रीलंका तक वानर सेना के माध्यम से नल और नील ने जो पुल (रामसेतु) बनाया था उसका आकार मार्ग धनुष के समान ही है। इन पूरे इलाकों को मन्नार समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। धनुषकोडी ही भारत और श्रीलंका के बीच एकमात्र स्‍थलीय सीमा है, जहां समुद्र नदी की गहराई जितना है जिसमें कहीं-कहीं भूमि नजर आती है। 17.' नुवारा एलिया' पर्वत श्रृंखला : वाल्मीकिय-रामायण अनुसार श्रीलंका के मध्य में रावण का महल था। 'नुवारा एलिया' पहाड़ियों से लगभग 90 किलोमीटर दूर बांद्रवेला की तरफ मध्य लंका की ऊंची पहाड़ियों के बीचोबीच सुरंगों तथा गुफाओं के भंवरजाल मिलते हैं। यहां ऐसे कई पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं जिनकी कार्बन डेटिंग से इनका काल निकाला गया है। श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है। आजकल भी इन स्थानों की भौगोलिक विशेषताएं, जीव, वनस्पति तथा स्मारक आदि बिलकुल वैसे ही हैं जैसे कि रामायण में वर्णित किए गए है।। जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖
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Vatsala Singh
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भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने के लिए कैकयी का त्याग... एक रात जब माता कैकेयी सोती हैं, तो उनके स्वप्न में विप्र, धेनु, सुर, संत सब एक साथ हाथ जोड़ के आते हैं और उनसे कहते हैं कि हे माता कैकेयी, हम सब आपकी शरण में हैं, महाराजा दशरथ की बुद्धि जड़ हो गयी है तभी वो राम को राजा का पद दे रहे हैं, अगर प्रभु राजगद्दी पर बैठ गए तब उनके अवतार लेने का मूल कारण ही नष्ट हो जायेगा..माता, सम्पूर्ण पृथ्वी पर सिर्फ आपमें ही ये साहस है की आप राम से जुड़े अपयश का विष पी सकती हैं, कृपया प्रभु को जंगल भेज के सुलभ करिये, युगों-युगों से कई लोग उद्धार होने की प्रतीक्षा में हैं, त्रिलोक स्वामी का उद्देश्य भूलोक का राजा बनना नहीं है अगर वनवास ना हुआ तो राम इस लोक के 'प्रभु' ना हो पाएंगे माता' ये कहते-कहते देवता घुटनों पर आ गए, माता कैकेयी के आँखों से आँसू बहने लगे। माता बोलीं-'आने वाले युगों में लोग कहेंगे कि मैंने भरत के लिए राम को छोड़ दिया लेकिन असल में मैं राम के लिए आज भरत का त्याग कर रही हूँ, मुझे मालूम है, इस निर्णय के बाद भरत मुझे कभी स्वीकार नहीं करेगा..रामचरित मानस में भी कई जगहों पर इसका संकेत मिलता है। जब गुरु वशिष्ठ दुःखी भरत से कहते हैं.. सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ। हानि लाभु जीवनु मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।। हे भरत सुनो भविष्य बड़ा बलवान् है। हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के ही हाथ में है, बीच में केवल माध्यम आते हैं...प्रभु इस लीला को जानते थे इसीलिए चित्रकूट में तीनों माताओं के आने पर प्रभु सबसे पहले माता कैकेयी के पास ही पहुँच कर प्रणाम करते हैं। क्यूंकि उनको पैदा करने वाली भले ही कौशल्या जी थीं लेकिन उनको 'मर्यादा पुरुषोत्तम' बनाने वाली माता कैकेयी ही थीं..माता सीता को मुँह -दिखाई में कनक भवन देने वाली, सनातन धर्म को अपने त्याग से सिंचित करने वाली, सम्पूर्ण रामायण में आदर्श से ज्यादा वस्तुनिष्ठ रहने वाली श्रेष्ठ विदुषी, काल-खंड विजयी और युगों-युगों से अपयश का विष पी रही माता कैकेयी को शत् शत् प्रणाम है.... जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖🕉️
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dhananjay p singh
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दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में मध्य प्रदेश की डायरी ….! विधानसभा चुनाव अब करवट ले चुका है । सनातन धर्म का अपमान कांग्रेस को भारी पड़ रहा है@ChouhanShivraj @OfficeOfKNath @HitanandSharma @BJP4MP @RajuMishra63 @drhiteshbajpai @rajneesh4n @JaibhanPawaiya @AshwiniVaishnaw
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
ऐसी जानकारी बार-बार नहीं आती, शेयर रिपोस्ट कर आगे भेजें, ताकि लोगों को सनातन धर्म की जानकारी हो सके... वेद-ज्ञान - प्र.1- वेद किसे कहते है ? उत्तर- ईश्वरीय ज्ञान की पुस्तक को वेद कहते है। प्र.2- वेद-ज्ञान किसने दिया ? उत्तर- ईश्वर ने दिया। प्र.3- ईश्वर ने वेद-ज्ञान कब दिया ? उत्तर- ईश्वर ने सृष्टि के आरंभ में वेद-ज्ञान दिया। प्र.4- ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ? उत्तर- मनुष्य-मात्र के कल्याण के लिए। प्र.5- वेद कितने है ? उत्तर- चार । 1-ऋग्वेद 2-यजुर्वेद 3-सामवेद 4-अथर्ववेद प्र.6- वेदों के ब्राह्मण । वेद ब्राह्मण 1 - ऋग्वेद - ऐतरेय 2 - यजुर्वेद - शतपथ 3 - सामवेद - तांड्य 4 - अथर्ववेद - गोपथ प्र.7- वेदों के उपवेद कितने है। उत्तर - चार। वेद उपवेद 1- ऋग्वेद - आयुर्वेद 2- यजुर्वेद - धनुर्वेद 3 -सामवेद - गंधर्ववेद 4- अथर्ववेद - अर्थवेद प्र 8- वेदों के अंग हैं । उत्तर - छः । 1 - शिक्षा 2 - कल्प 3 - निरूक्त 4 - व्याकरण 5 - छंद 6 - ज्योतिष प्र.9- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने किन किन ऋषियो को दिया ? उत्तर- चार ऋषियों को। वेद ऋषि 1- ऋग्वेद - अग्नि 2 - यजुर्वेद - वायु 3 - सामवेद - आदित्य 4 - अथर्ववेद - अंगिरा प्र.10- वेदों का ज्ञान ईश्वर ने ऋषियों को कैसे दिया ? उत्तर- समाधि की अवस्था में। प्र.11- वेदों में कैसे ज्ञान है ? उत्तर- सब सत्य विद्याओं का ज्ञान-विज्ञान। प्र.12- वेदो के विषय कौन-कौन से हैं ? उत्तर- चार । ऋषि विषय 1- ऋग्वेद - ज्ञान 2- यजुर्वेद - कर्म 3- सामवे - उपासना 4- अथर्ववेद - विज्ञान प्र.13- वेदों में। ऋग्वेद में। 1- मंडल - 10 2 - अष्टक - 08 3 - सूक्त - 1028 4 - अनुवाक - 85 5 - ऋचाएं - 10589 यजुर्वेद में। 1- अध्याय - 40 2- मंत्र - 1975 सामवेद में। 1- आरचिक - 06 2 - अध्याय - 06 3- ऋचाएं - 1875 अथर्ववेद में। 1- कांड - 20 2- सूक्त - 731 3 - मंत्र - 5977 प्र.14- वेद पढ़ने का अधिकार किसको है ? उत्तर- मनुष्य-मात्र को वेद पढ़ने का अधिकार है। प्र.15- क्या वेदों में मूर्तिपूजा का विधान है ? उत्तर- बिलकुल भी नहीं। प्र.16- क्या वेदों में अवतारवाद का प्रमाण है ? उत्तर- नहीं। प्र.17- सबसे बड़ा वेद कौन-सा है ? उत्तर- ऋग्वेद। प्र.18- वेदों की उत्पत्ति कब हुई ? उत्तर- वेदो की उत्पत्ति सृष्टि के आदि से परमात्मा द्वारा हुई । अर्थात 1 अरब 96 करोड़ 8 लाख 43 हजार वर्ष पूर्व । प्र.19- वेद-ज्ञान के सहायक दर्शन-शास्त्र ( उपअंग ) कितने हैं और उनके लेखकों का क्या नाम है ? उत्तर- 1- न्याय दर्शन - गौतम मुनि। 2- वैशेषिक दर्शन - कणाद मुनि। 3- योगदर्शन - पतंजलि मुनि। 4- मीमांसा दर्शन - जैमिनी मुनि। 5- सांख्य दर्शन - कपिल मुनि। 6- वेदांत दर्शन - व्यास मुनि। प्र.20- शास्त्रों के विषय क्या है ? उत्तर- आत्मा, परमात्मा, प्रकृति, जगत की उत्पत्ति, मुक्ति अर्थात सब प्रकार का भौतिक व आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान आदि। प्र.21- प्रामाणिक उपनिषदे कितनी है ? उत्तर- केवल ग्यारह। प्र.22- उपनिषदों के नाम बतावे ? उत्तर- 01-ईश ( ईशावास्य ) 02-केन 03-कठ 04-प्रश्न 05-मुंडक 06-मांडू 07-ऐतरेय 08-तैत्तिरीय 09-छांदोग्य 10-वृहदारण्यक 11-श्वेताश्वतर । प्र.23- उपनिषदों के विषय कहाँ से लिए गए है ? उत्तर- वेदों से। प्र.24- चार वर्ण। उत्तर- 1- ब्राह्मण 2- क्षत्रिय 3- वैश्य 4- शूद्र प्र.25- चार युग। 1- सतयुग - 17,28000 वर्षों का नाम ( सतयुग ) रखा है। 2- त्रेतायुग- 12,96000 वर्षों का नाम ( त्रेतायुग ) रखा है। 3- द्वापरयुग- 8,64000 वर्षों का नाम है। 4- कलयुग- 4,32000 वर्षों का नाम है। कलयुग के 5122 वर्षों का भोग हो चुका है अभी तक। 4,27024 वर्षों का भोग होना है। पंच महायज्ञ 1- ब्रह्मयज्ञ 2- देवयज्ञ 3- पितृयज्ञ 4- बलिवैश्वदेवयज्ञ 5- अतिथियज्ञ स्वर्ग - जहाँ सुख है नरक - जहाँ दुःख है जय सनातन धर्म, जय श्रीराम, जय गोविंदा
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dhananjay p singh
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मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास एक ही ब्रह्मास्त्र है और वह है मामा-भांजी #ShivrajSinghChouhan का रिश्ता ..! क्या रंग लाएगा! @दैनिक जागरण @ChouhanShivraj @SadhnaSinghMP @BJP4MP @drhiteshbajpai @rajneesh4n @ShivrajDabi @AmitShah @Nai_Dunia @RajuMishra63 @JagranNews
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dhananjay p singh
dhananjay p singh@dhananjaybpl·
अमित शाह जी ने मेरे सवाल पर कहा-2018 में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में भ्रम फैलाया था, हमें वोट ज़्यादा मिले पर भाजपा सरकार नहीं बनी। अब जनता कांग्रेस सरकार से तुलना कर भारी बहुमत से भाजपा को जिताएगी@ChouhanShivraj @AmitShah @BJP4MP @RajuMishra63 @drhiteshbajpai @rajneesh4n
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Reeta Gupta
Reeta Gupta@ReetaGu68371380·
कल ट्विटर पर भूदेव को बचाने के लिए एक ट्रेंड चलाया जाएगा। ‌जो लोग ट्विटर पर हैं कृपया साथ दें और भूदेव को ट्विटर पर ट्रेंड करने में हमारी मदद करें ताकि भूदेव को साढ़े सत्रह करोड़ का इंजेक्शन दिलाने के लिए अच्छे स्पॉन्सर हमें मिल सके #भूदेव_बचाना_हैं #save_bhudev #help_bhudev
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dhananjay p singh
dhananjay p singh@dhananjaybpl·
इंटरनेट मीडिया में शिवराज सिंह चौहान पहली पसंद हैं।वहीं कांग्रेस में अब भी दिग्विजय सिंह टॉप पर हैं। यही कारण है कि दिग्विजय हमेशा भाजपा के निशाने पर रहते हैंसदाबहार नेता डॉ नरोत्तम मिश्रा तीसरे नंबर पर हैं। @ChouhanShivraj @digvijaya_28 @BJP4MP @MPCongress4 @drhiteshbajpai
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