Sant Shri Asharamji Bapu@Asharamjibapu__
सनातन धर्म किसी व्यक्ति ने स्थापना नहीं की। किसी ऋषि-मुनि ने स्थापना नहीं की। किसी पीर-पैगंबर ने स्थापना नहीं की। हालांकि भगवान कृष्ण ने भी स्थापना नहीं की और राम जी ने भी स्थापना सनातन धर्म की नहीं की।
जब से सृष्टि है, तब से सनातन सत्य का मार्ग बताने वाले अपौरुष वेद हैं। पुरुष की रचना नहीं है वेद। कृष्ण के पहले वेद थे, राम के पहले वेद थे। गीता उपनिषदों से निकला अमृत है और उपनिषदें वेदों से उभारा अमृत है।
इसलिए हिंदू, मुसलमान, ईसाई, पारसी — कोई भी गीता को तटस्थता से पढ़ता है, सिर आंखों लगाता है और उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता है। चाहे महात्मा थोरो हो, चाहे लिवर लिजरिया हो, चाहे Mr. वॉटसन हो, चाहे अमेरिका का तत्वचिंतक Mark Twain हो। जिन्होंने भी गीता, उपनिषदों को देखा है, उन्होंने भारतीय संस्कृति की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
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