
औधव ने पूछा कि सबसे बढ़िया में बढ़िया काम क्या है? सबसे बढ़िया में बढ़िया पुरुषार्थ क्या है? सब में बढ़िया में बढ़िया विजय क्या है? तब श्री कृष्ण ने कहा — “स्वभाव विजय इति शौर्य।” अपना जीव का स्वभाव, कामी, क्रोधी का स्वभाव पर विजय पाकर आत्मा-परमात्मा का स्वभाव में जगना, ये बड़े में बड़ा विजय है। दुनिया के सारे पहलवानों को हरा लिया, लेकिन मन तुमको कामी, क्रोधी, लोभी, मोही बनाता है, तो आप तुच्छ पहलवान हैं। लेकिन किसी को, एक कीड़ी को भी आप नहीं हरा सकते। फिर भी आपने अपने स्वभाव में भगवत्स्वभाव का रस भर दिया। आप धनभागी हो गए। शबरी, भीलन धनभागी हो गए। रावण ऐसे के ऐसे रह गए। रैदास धनभागी हो गए। हिटलर, सिकंदर ऐसे के ऐसे रह गए? तो ये सार बात है सिद्धांत। #AsharamjiBapu




























