Gyan Pandey
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पहाड़ों में ऐसा होता है !
मैं कई सुने पहाड़ों पर गया हूँ , कई प्रकार की ऊर्जा को महसूस किया है ! छेड़खानी कभी नहीं की ! सब अपना अपना किया काट रहे हैं ! जैसे हमारा अस्तित्व है वैसे उनका भी है !
AstroCounselKK 🇮🇳@AstroCounselKK
Scary 😨.. This happened for real in The Perch Shimla .. A family sharing their recent experience..
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पीर पंजाल , धौलाधार ये शब्द बचपन में आकर्षित करते थे ! बड़े होने पर ये मेरे उम्र के कुछ वर्षों में सम्मिलित होकर मेरे जीवन का एक अटूट हिस्सा बन गए हैं ! यहाँ की कहानियाँ ठिठोली अप्रतिम याद बन कर सदैव मेरे साथ रहेंगी !
मैं कभी बाबा बना तो अपने नाती पोतों को यहाँ ज़रूर लाऊँगा !

Tom Sawyer@setwickk
एक ऐसा पहाड़ जिसका नाम ही डायन के नाम पर है ! वहाँ जब रात गुज़ारी तो पता चला कि दुनिया में कुछ तो ऐसा है जिसकी पढ़ाई अभी विज्ञान नहीं कर पाया है ! डायनकुण्ड का नाम आप सब ने कम ही सुना होगा !
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.....और फिर वो धीरे धीरे मेरे करीब आती गई, मेरी साँसे तेज हो चली थी उसके हर बढ़ते कदम से।
रात ज्यादा हो गई थी उस दिन फैक्ट्री का काम निपटाते हुए। ड्राइवर के घर पर कोई इमरजेंसी थी तो वो शाम को ही चला गया था, कार मुझे ड्राइव करनी थी मैं बस काम चलाऊ ड्राइवर था.....!
फैक्ट्री से बाहर निकल के 100 मीटर चला होऊंगा कि एक फैक्ट्री के बाहर एक युवती खड़ी थी रात की हल्की रोशनी में जैसे कोई खामोश कविता।
बाल हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे, और आँखें… जैसे कुछ कहना चाहती हों।
मैंने गाड़ी रोकी।
“इतनी रात में?”
वो मुस्कुराई धीमी, सधी हुई।
“आप मिल गए… अब देर नहीं लगेगी।”
उसकी बात अजीब थी, पर सुकून देने वाली भी।
मैंने दरवाज़ा खोल दिया।
वो बैठी और गाड़ी में जैसे उसकी खुशबू फैल गई। सफर शुरू हुआ और सन्नाटा भी, लेकिन वो भारी नहीं था।
आप रोज़ इस रास्ते से जाते हैं? उसने पूछा।
हाँ… और आप? मैंने जवाब के साथ प्रश्न किया।
वो खिड़की से बाहर देखने लगी
“मैं भी… किसी का इंतज़ार करती थी यहाँ।”
“किसका?”
वो मेरी तरफ मुड़ी
“शायद… आपका।”
मैं हल्का सा हँस पड़ा और बोला मुझे तो पहली बार देख रही हैं आप ।
दिल कभी-कभी पहले पहचान लेता है, उसने धीमे से कहा।
मेरी धड़कन तेज़ हो गई।
रास्ता खत्म होने लगा था।
“यहीं उतर जाऊँगी,” उसने कहा।
मैंने गाड़ी रोकी.....!
पर वो उतरने से पहले ठहर गई।
“अगर मैं फिर कभी मिलूँ… तो पहचान लोगे?”
मैंने बिना सोचे कहा ज़रूर।
वो मुस्कुराई
“फिर मिलेंगे।”
वो उतर गई… और अंधेरे में खो गई।
अगले दिन ड्राइवर आया था तो मैंने उसे जल्दी भेज दिया कि मैं आ जाऊंगा..
रात हुई गाड़ी निकाली और मैं उसी जगह जाकर रुका
और वो… सच में फिर वहीं खड़ी थी।
इस बार
मैंने कुछ नहीं पूछा।
बस दरवाज़ा खोल दिया।
वो बैठी… और धीरे से बोली
देखा…
दिल ने सही पहचाना था.....
क्रमशः.......
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