

H N Rekwal
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@HN_Rekwal
National President Rastriya Adivasi Ekta Parisad







आज भारत एक ऐसा बाजार बन गया है, जहां हर चीज बिक रही है। देश बिक रहा है, सरकार बिक रही है, सांसद और विधायक बिक रहे हैं, नदियां और पहाड़ बिक रहे हैं, जंगल और खदान बिक रहे हैं, बालू बिक रहा है, कृषि भूमि बिक रही हैं, नौकरशाह बिक रहे हैं, पुलिस बिक रही है, इंसानियत और जमीर बिक रही है, पुरुष बिक रहा है, महिलाएं बिक रही हैं, बेटा बिक रहा है, बेटी बिक रही है, इज्जत बिक रही है, देश की संपत्ति, संपदा और प्राकृतिक संसाधन बिक रहे हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा बिक रहे हैं, कल-कारखाने, कंपनियां, निगम और सार्वजनिक लोक-उपक्रम बिक रहे हैं, बंदरगाह, रेलवे और रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग, हाईवे और एक्सप्रेस वे बिक रहे हैं और राष्ट्र की अस्मिता, अस्तित्व, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा स्वाभिमान और पहचान बिक रहे हैं। और, इन सबके बदले मिला क्या? वही क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति, मुट्ठीभर लोगों के लिए बेहतर और आरामदायक जीवन, नेताओं, नौकरशाहों और पूंजीपतियों और कारपोरेट घरानों तथा उच्चमध्यम वर्ग की तिजोरी भर रही है, अपराध बढ़ रहे हैं, भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, आवारा पूंजी और आवारा पूंजीवाद बढ़ रहा है और देश का अपराधीकरण, बाजारीकरण, अमानवीयकरण, और लंपटीकरण हो रहा है। यही आज के भारत के विकास का माडल है...!! @RahulGandhi @Dr_MonikaSingh_ @garrywalia_ @sakshijoshii @Rashmi22302711 @AnumaVidisha @RuchiraC @maulinshah9 @Iam_MKharaud @Kumarjyoti49291 @GoIShadow @sudhirchaudhary @AMISHDEVGAN @anjanaomkashya @RubikaLiyaquat @chitraaum @RajatSharmaLive @AwasthiGyyan @PMNehru @RaGa4India @Raga3689 @Pawankhera @SupriyaShrinate






"अब गुजरात वापस नहीं आऊंगा दोस्त!" 😭

केरल के मलप्पुरम जिले के चालीयार पंचायत के प्लक्कलचोला गांव के 24 आदिवासी परिवारों को पानी की भारी कमी के कारण अपना घर छोड़ना पड़ा। एकमात्र पानी का स्रोत था, वह सूख गया, इसलिए ये परिवार मजबूरी में कंजीरप्पुझा नदी के किनारे रहने लगे हैं। वहां ये लोग चट्टानों पर तिरपाल बिछाकर खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। हर रात उन्हें हाथियों और तेंदुओं का डर रहता है। बच्चों की पढ़ाई रुक गई है और बुजुर्गों व बीमार लोगों को इलाज के लिए करीब 2 किलोमीटर दूर ले जाना पड़ता है। कई बार शिकायत करने के बाद भी पीने के पानी की कोई पक्की व्यवस्था नहीं की गई। इससे साफ है कि सरकार की योजनाओं के बड़े-बड़े दावे जमीन पर पूरे नहीं हो रहे। यह सिर्फ पानी की समस्या नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के जीवन और उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।















