
ISHA DIXIT
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ISHA DIXIT
@ISHADIXIT19456
आत्मज्ञान के प्रकाश में अंधे कर्म सब त्याग दो



*अहंकार पर प्रहार के रूप में सिर मुंडवाना* ✨️ पुराना पैटर्न (लंबाई का बोझ): बचपन से ही मेरा अपने बालों से गहरा “लगाव” था। मेरे भीतर एक भारी कंडीशनिंग बैठी हुई थी: कि एक स्त्री की सुंदरता उसके बालों की लंबाई से जुड़ी होती है। क्योंकि मैं गंजा पैदा हुई थी और मेरे बाल हमेशा छोटे, पतले रहे, इसलिए मैं जीवनभर इन सौंदर्य-मानकों के सामने खुद को “असफल” महसूस करती रही। मैं वर्षों तक शैम्पू, तेल और घरेलू नुस्खों के चक्र में फँसी रही, उस बढ़त को जबरन लाने की कोशिश करती रही जो आती ही नहीं थी। एक साधारण-सी ट्रिम भी असहज लगती थी क्योंकि मैं हर इंच को अपनी “पहचान” मानकर पकड़े हुए थी। ✨️ चिंगारी (चुनौती): दो हफ्ते पहले, मेरी गीता कम्युनिटी के एक दोस्त ने मुझे पिक्सी कट के लिए चुनौती दी। मेरी तुरंत प्रतिक्रिया शुद्ध अहंकार थी: “क्या तुम्हारा दिमाग खराब है? मैं इसे बढ़ाने की कोशिश कर रही हूँ, और तुम चाहते हो कि मैं इसे कटवा दूँ?” उसने तथ्य सामने रखा: मेरे बाल मेरा बंधन बन गए थे। वे मेरे अहंकार की सुरक्षा-कंबल थे। उसने मुझे आचार्य जी की शिक्षा याद दिलाई—कि भीतर कुछ टूट भी रहा हो, तब भी हमारे भीतर एक ऐसा केंद्र होता है जिसे कभी तोड़ा नहीं जा सकता। ✨️ आत्मचिंतन (’जीरो’ पर जाने का निर्णय): पिछले हफ्ते, मैं अपने साथ बैठी और समझा कि मैं कितनी डरी हुई थी। वही डर मेरे लिए वह सबूत था जिसकी मुझे ज़रूरत थी—मेरे बाल एक पिंजरा थे। मैंने तय किया कि अगर मुझे अपने अहंकार को चुनौती देनी है, तो आधे-अधूरे तरीके से नहीं करूँगी। पिक्सी कट में भी अहंकार के छिपने के लिए “थोड़ी-सी जगह” रह जाती। मैंने तय किया कि मैं अपना सिर पूरी तरह मुंडवा दूँगी। मैंने इसे अपने आने वाले जन्मदिन के लिए खुद को दिया जाने वाला परम उपहार माना। ✨️ कर्म (मुंडन): मैं कल नाई के पास गई—14 दिन पहले ही। मुझे पता था, अगर मैं इंतज़ार करती, तो मेरा अहंकार बचने का कोई रास्ता ढूँढ लेता और मुझे इससे पीछे हटा देता। गंजे लुक के साथ बाहर निकलना अविश्वसनीय रूप से सशक्त करने वाला लगा। मैं सीधे अपने सबसे बड़े डर के भीतर कदम रख रही थी: अपने परिवार का सामना करना, अपने समाज का सामना करना, और “सामाजिक आईना”। ✨️ वर्तमान अवस्था (नया अवलोकन): शारीरिक क्रिया पूरी हो गई है। अब असली आंतरिक काम शुरू होता है। अब मैं एक “नई व्यक्ति” हूँ, एक “नई यात्रा” पर। मेरा फोकस बाल उगाने से हटकर अपनी भीतरी गतिविधि को देखने पर आ गया है। मेरा अहंकार दूसरों की प्रतिक्रियाओं को कैसे संभालेगा? क्या मैं केंद्रित रह पाऊँगी जब दुनिया मुझे अलग नज़र से देखेगी? ✨️ अंतिम बोध: मैंने आचार्य जी के शब्दों के सत्य को जीने की दिशा में एक कदम उठाया है: *“सच्चा नारीवाद वास्तव में तब है जब स्त्री मुक्त हो जाती है* *अपने शरीर को ही अपनी प्राथमिक पहचान मानने की शारीरिक और सामाजिक बाध्यता से।”* #AcharyaPrashant #WomenEmpowerment Posted by Shweta on Acharya Prashant's Gita Mission App. Download Now - app.acharyaprashant.org/?id=8-8a2edf33… @Advait_Prashant @Prashant_Advait




Acharya Prashant's jis Life !!

@upsrtc_lko There is a disturbing element in the bus continuously abusing and showing inappropriate behavior,very uncomfortable for everyone, specially for women. No action from driver or conductor, they didn't do anything to discourage him. Bus no.- UP41AT4273






This is what women were born to do.










