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Advocacy 📚✏️📖

Alwar, Rajasthan Katılım Haziran 2022
821 Takip Edilen351 Takipçiler
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Adv. Sumit Verma@ITcellsumit·
बसपा सुप्रीमो आदरणीय बहनजी कु॰मायावती जी के जन्मोत्सव पर आज सुबह 11:00 बजे दा मैरिज सूत्रा गार्डन खुंदनपुरी अलवर पर आप सभी सादर आमंत्रित है। #जयभीम #बसपा
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
बिहार विधानसभा के लिये जल्द अगले कुछ महीनों में ही होने वाले आमचुनाव में बी.एस.पी. उम्मीदवारों के चयन सहित पार्टी के हर स्तर की तैयारियों को लेकर वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ पिछले दो दिनों की बैठक में गहन चर्चा व समीक्षा की गयी तथा इस दौरान अकेले अपने बल पर चुनाव लड़ने के फैसले के मद्देनज़र आने वाले दिनों में पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा को भी अन्तिम रूप दिया गया। बैठक में पार्टी पदाधिकारियों को उल्लेखित कमियों को दूर करके पूरी मुस्तैदी व तन, मन, धन से आगे बढ़ने का निर्देश देते हुये उन्हें अगले महीने के प्रारंभ से शुरू होने वाले पार्टी की यात्रा व जनसभा आदि कार्यक्रमों के सम्बंध में विशेष ज़िम्मेदारी भी सौंपी गयी। ये सभी कार्यक्रम बी.एस.पी. पार्टी प्रमुख अर्थात् मेरे दिशा निर्देशन में होंगे। इसकी विशेष जिम्मेदारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द व केन्द्रीय कोआर्डिनेटर व राज्यसभा सांसद श्री रामजी गौतम तथा बी.एस.पी. बिहार स्टेट यूनिट को साैंपी गयी है। बिहार एक बड़ा राज्य है और इसीलिये वहाँ की ताज़ा ज़रूरतों को देखते हुये राज्य की सभी विधानसभा सीटों को तीन ज़ोन में बाँट कर पार्टी के वरिष्ठ लोगों को अलग-अलग से उसकी ज़िम्मेदारी सौंपने का फैसला भी बैठक में लिया गया। बिहार में पार्टी की अपनी तैयारी के साथ-साथ वहाँ राज्य के तेज़ी से बदलते हुये राजनीतिक हालात एवं चुनावी समीकरण आदि को देखते हुये बी.एस.पी. द्वारा चुनाव में बेहतर रिज़ल्ट लाने का आश्वासन पार्टी के लोगों ने पार्टी प्रमुख को बैठक में दिया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले उड़ीसा और तेलंगाना राज्य में भी पार्टी संगठन की तैयारियों व वहाँ भी यूपी के पैटर्न पर ज़िला से लेकर पोलिंग बूथ स्तर तक कमेटियों के गठन के साथ-साथ पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के मिशनरी कार्यों के लिये दिये गये टारगेट की भी समीक्षा बैठक पार्टी प्रमुख द्वारा स्वंय अलग-अलग से ली गयी।
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Er.Ramji Gautam MP Rajya Sabha
Er.Ramji Gautam MP Rajya Sabha@ramjigautambsp·
श्री आकाश आनंद को नेशनल कनवीनर बनाये जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें.
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
देश में ख़ासकर राजनैतिक स्वार्थ के कारण राजनीति का गिरता हुआ स्तर अति-दुखद एवं चिन्तनीय। इस सम्बंध में सभी पार्टियों की राजनीति, पार्टी के संविधान के हिसाब से विचार और सिद्धान्तों के आधार पर, देश व करोड़ों ग़रीबों व आमजन के हित में होनी चाहिये, जो कि ख़ासकर पिछले कुछ वर्षों से सही से देखने को नहीं मिल रहा है, जबकि इस दौरान् देश के सामने विभिन्न प्रकार की आन्तरिक एवं बाहरी चुनौतियाँ काफी बढ़ी हैं। इतना ही नहीं बल्कि देश के उच्च सरकारी व ग़ैर-सरकारी संस्थाओं व विशेषकर राजनीति में उच्च पदों पर बैठे लोगों के बारे में जिस प्रकार की अभद्र, अशोभनीय, अमर्यादित व असंसदीय टिप्पणी आदि सार्वजनिक तौर पर करके उनकी व देश की छवि को भी धूमिल करने के जो प्रयास किये जा रहे हैं वह अति-दुखद व चिन्तनीय। ख़ासकर चुनाव के समय यह प्रक्रिया और भी अधिक विषैली व हिंसक हो जाती है। इसी क्रम में अभी बिहार में भी जो कुछ देखने व सूनने को मिला है वह देश की चिन्ता को बढ़ाने वाला है। जबकि हमारी पार्टी बी.एस.पी., शुरू से ही ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के अम्बेडकरवादी सिद्धान्त और नीति पर आयरन दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पार्टी व सरकार चलाने का साहस दिखाने वाली पार्टी होने के कारण किसी भी प्रकार की दूषित व ज़हरीली राजनीति के ख़िलाफ है और दूसरों से भी यही उम्मीद करती है कि वे देश व आमजन के हित में घिनौनी स्वार्थ की राजनीति करने से दूर रहें और एक-दूसरे को ज़बरदस्ती नीचा दिखाने की सस्ती राजनीति से देश का माहौल खराब ना करें तो बेहतर। यहाँ इस बारे में यह विशेष उल्लेखनीय है कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का आदर्श कल्याणकारी भारतीय संविधान, भारत के करोड़ों लोगों के हित, सुरक्षा व उनके आत्म-सम्मान को सर्वोपरि मानते हुये, हर संवैधानिक संस्था को अपनी-अपनी निर्धारित सीमा में रहकर कार्य करने अर्थात् उन सबके लिए चेक एण्ड बैलेन्स की गारण्टी सुनिश्चित की है, जिस पर सही से अमल करके ही हालात को बिगड़ने से ज़रूर बचाया जा सकता है।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
केन्द्र सरकार द्वारा कल संसद में, भारी हंगामे के बीच लाया गया 130वाँ संविधान संशोधन बिल, देश में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे राजनैतिक हालात में, यह स्पष्टतः लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाला लगता है और इसका सत्ताधारी पार्टियाँ अपने-अपने लाभ, स्वार्थ व द्वेष में ज्यादातर इसका दुरुपयोग ही करेंगी, ऐसी जनता को आशंका। अतः इस बिल से हमारी पार्टी कतई भी सहमत नहीं है। सरकार इसे देश के लोकतंत्र एवं संविधान के हित में ज़रूर पुनर्विचार करे तो यह उचित होगा।
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Mayawati@Mayawati·
15-08-2025-BSP Press note-Independence Day
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Mayawati@Mayawati·
यू.पी. के ज़िला फतेहपुर में मक़बरा व मन्दिर होने को लेकर चल रहे विवाद/बवाल पर सरकार को किसी भी समुदाय को ऐसा कोई भी क़दम नहीं उठाने देना चाहिये जिससे वहाँ साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो जाये तथा आपसी भाईचारा व सद्भाव भी बिगड़े। सरकार इस मामले को ज़रूर गम्भीरता से ले तथा ज़रूरत पड़ने पर सख़्त क़दम भी उठाये।
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Mayawati@Mayawati·
उत्तर प्रदेश विधानसभा का आज से शुरू हो रहा मानसून सत्र, संक्षिप्त होने के बावजूद केवल औपचारिकता पूर्ति वाला नहीं हो, बल्कि इसको सही से प्रदेश व जनहित में उपयोगी बनाना ज़रूरी है, जिसकेे लिए सरकार एवं विपक्ष दोनों को अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ, द्वेष व कटूता आदि को त्याग कर आगे बढ़ना होगा। इसके अलावा, संसद का जो अभी मानसून सत्र चल रहा है उसके भी पूरी तरह शान्तिपूर्ण तरीके से नहीं चलने से वह जन अपेक्षा के अनुसार सही से कार्य नहीं कर पा रहा है। इस कारण जनता व देश के ज्वलन्त मुद्दों पर पूरी गंभीरता से चर्चा नहीं हो पाने से लोगों में चिन्ता स्वाभाविक है। वैसे भी भारतीय व्यापार पर भारी अमेरिकी टैरिफ के कारण देश की अर्थव्यवस्था व विकास पर जो बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका है उसकी चर्चा व्यापक रूप से हर जगह गर्म है, जिसपर ख़ास तौर से संसद में सही से चिन्तन-मनन करने की ज़रूरत है, क्योंकि यह देश के ’अच्छे दिन’ से जुड़ा देशहित का ख़ास मुद्दा है तथा जिसे हल्के में लेकर देश के भविष्य को दाव पर नहीं लगाया जा सकता है। सरकार व विपक्ष दोनों इस पर उचित व समुचित ध्यान दें। साथ ही, चाहे वोटर व वोटर सूची तथा उसके रिवीज़न एवं ईवीएम आदि से सम्बंधित देश, जनहित एवं लोकतंत्र से जुड़े मामलों में जो किस्म-किस्म की बातें देश में चल रही हैं उन संदेहों को अवश्य ही यथाशीघ्र दूर किया जाए तो यह बेहतर होगा।
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भाई-बहन के आपस के पवित्र रिश्ते एवं प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन के त्योहार की देश के समस्त भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। लोग इसकी पवित्रता को बनाये रखते हुये पूरे सौहार्द व उमंग के साथ मनायें।
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Mayawati@Mayawati·
ब्रिक्स देश ब्राज़ील की तरह ही भारत पर भी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ (शुल्क) लगाकर अमेरिका ने जो भारत को आघात पहुँचाने का प्रयास किया है, उसे भारत सरकार ने अपने संयमित बयान में ’अनुचित, अन्यायपूर्ण व अविवेकी’ बताया है, किन्तु देश की जनता डोनाल्ड ट्रम्प का ’मित्र’ देश भारत के प्रति इसे प्रथम दृष्टया विश्वासघाती एवं देश को कमज़ोर करने वाला कदम ज़्यादा मानती है, जिससे निपटने के लिए सभी को पूरी परिपक्वता दिखाते हुये राजनीतिक स्वार्थ, संकीर्णता, मतभेद एवं द्वेष आदि से ऊपर उठकर, दीर्घकालीन रणनीति के तहत्, देश में पूरे अमन-चैन और कानून व्यवस्था के अच्छे माहौल के साथ पूरी मुस्तैदी से कार्य करना ज़रूरी है। देश के सामने आई इस बड़ी चुनौती पर गंभीर चिन्तन के लिए सम्बंधित विषय पर वर्तमान संसद सत्र में चर्चा हो तो यह जन व देशहित में बेहतर होगा, किन्तु केन्द्र व राज्य सरकारें अगर आन्तरिक संकीर्ण मुद्दों में ही अधिकतर उलझी रहेंगी तो यह कैसे संभव हो पायेगा? वैसे इस बारे में यहाँ उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी. की राजनीति हमेशा से देश के मानवतावादी संविधान की मंशा के मुताबिक ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की रही है, किन्तु यहाँ देश में केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच आपसी अविश्वस के कारण जो राजनीतिक टकराव और खींचतान आदि लगातार बनी हुई है वह अब समाप्त होना चाहिए, यही व्यापक जन व देशहित में है।
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पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली गाँव में आज दोपहर बादल फटने से इलाके में आई बाढ़ व भूस्खलन में हुई मकान एवं होटल आदि ढहने सहित व्यापक तबाही तथा कई लोगों के लापता होने की भी ख़बर अति-दुखद एवं चिन्तनीय। केन्द्र व राज्य सरकार तत्परता से कार्य करते हुए पीडितों की हर प्रकार से ज़रूर मदद करेे तथा आगे के लिए ऐसे इलाकों में सुरक्षा उपायों को भी मज़बूत करे ताकि ऐसे आपदाओं में जान-माल की हानि को अवश्य ही कम किया जा सके।
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जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के राज्यपाल रहे श्री सत्यपाल मलिक का आज निधन हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके शोक संतप्त परिवार एवं उनके सभी समर्थकों आदि के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
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जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) ना तो बीजेपी के एनडीए गठबंधन के साथ है और ना ही कांग्रेस के इण्डिया समूह (गठबंधन) के साथ है, तथा, ना ही अन्य किसी और भी फ्रन्ट के साथ है, बल्कि इन दोनों व अन्य और किसी भी जातिवादी गठबंधनों से अलग अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के अम्बेडकरवादी सिद्धान्त व नीति पर चलने वाली पार्टी है। लेकिन इसके बावजूद भी ख़ासकर दलित, आदिवासी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी तथा इन वर्गों के प्रति जातिवादी मानसिकता रखने वाले कुछ मीडिया बी.एस.पी. की इमेज को बीच-बीच में धूमिल करने व राजनीतिक नुक़सान पहुँचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं, जिसको लेकर पार्टी को लगातार अपने लोगों को इनसे सतर्क करते रहने की ज़रूरत पड़ती रहती है। इस क्रम में अभी हाल में ’भारत समाचार’ ने अपने यूट्यूब चैनल में ’’बीजेपी के साथ आ गयी मायावती कर दिया बड़ा ऐलान?’’ इस शीर्षक से गलत, तथ्यहीन व विषैली ख़बर चलायी है, जबकि उसके भीतर न्यूज़ में कुछ और है। इस प्रकार से भारत समाचार चैनल द्वारा पार्टी की इमेज को ख़ासकर चुनाव के पूर्व इस प्रकार का आघात पहुँचाने का जो यह घिनौना प्रयास किया गया है उसकी जितनी भी निन्दा व भर्त्सना की जाये, वह कम है। चैनल को इसके लिए माफी भी ज़रूर माँगनी चाहिये। साथ ही, पार्टी के लोगों से यह विशेष आग्रह है कि वे राजनीतिक षडयंत्र के तहत् मीडिया के इस प्रकार के घिनौने हथकण्डों से हमेशा ज़रूर सावधान रहें और किसी के भी बहकावे में ना आये, क्योंकि जातिवादी तत्व अपने अम्बेडकरवादी कारवाँ को कमज़ोर करने के घिनौने षडयंत्र में हमेशा किसी ना किसी रूप में लगे रहते हैं।
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झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक एवं आदिवासी समाज के जाने-माने दिग्गज नेता श्री शिबू सोरेन का आज इलाज के दौरान निधन हो जाने की ख़बर अति-दुखद। उनके पुत्र तथा वर्तमान में झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन व उनके परिवार के साथ-साथ उनके समस्त समर्थकों एवं अनुयाइयों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कु़दरत उन सबको इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
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’मित्र’ देश बताने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारतीय आयात पर कल दिनांक 1 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क तथा रूस से तेल आयात करने पर पेनाल्टी लगाने की भी नई उभरी चुनौती को केन्द्र सरकार इसे अवसर एवं आत्मनिर्भरता में बदलकर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित नहीं होने देगी, तथा इसको लेकर देश को दिये गये इस आश्वासन पर कि ’किसान, छोटे व मंझोले उद्योग और राष्ट्रहित से कोई समझौता नहीं करेगी’, इस पर सरकार खरी उतरकर दिखाएगी भी, ऐसी देश को आशा। भारत दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला अधिकतर ग़रीबों और मेहनतकश लोगों का देश है, जिसे हर हाथ को काम देने वाली श्रम शक्ति के बल पर देश को आगे बढ़ाने की नीति बनाकर उस पर सही से अमल किया जाये तो देश निश्चय ही आत्मनिर्भरता के साथ-साथ ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ वाला सुखी व सम्पन्न देश बन सकता है, जिसमें ही संविधान के मानवतावादी एवं कल्याणकारी उद्देश्य के हिसाब से जन व देशहित पूरी तरह से निहित है व यह सुरक्षित भी रह सकता है।
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Mayawati@Mayawati·
’ऑपरेशन सिंदूर’ पर संसद में आज से शुरू होने वाली चर्चा को, सत्ता व विपक्ष को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लेना चाहिये। आगे महिलाओं का सिंदूर ना उजड़े तथा माँ को भी अपने बेटे गंवाने ना पड़े इस पर सरकार एवं विपक्ष को मिलकर ठोस रणनीति के तहत कार्य करना चाहिये, यही समय की माँग भी है।
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Mayawati@Mayawati·
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा व आरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दिल में कुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज़्यादा लगती है। वास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगज़ाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी का ऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान तथा अपने पैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) यहाँ बनानी पड़ी है। कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इन वर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आँसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमान हालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है। वैसे भी एससी/एसटी वर्गों को आरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देश की आज़ादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनका भारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है, जो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है। इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है। इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ों इन बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियाँ हमेशा से एक ही थैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं, जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बी.एस.पी. सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बी.एस.पी. के नेतृत्व रही सरकार में सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़लूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जान-माल व मज़हब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवं कल्याण की भी पूरी गारण्टी रही है। अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बी.एस.पी. की आयरन गारण्टी में ही निहित है। अतः ख़ासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग ख़ासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें, यही उनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है।
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देश के कानून मंत्री का कल संसद में दिया गया बयान कि संविधान की प्रस्तावना से ’सेक्युलरिज़्म’ (धर्मनिरपेक्षता) आदि शब्द हटाने सम्बंधी सरकार की ना कोई नीयत है और ना ही ऐसा कुछ विचाराधीन है, यह उचित एवं सराहनीय है तथा ख़ासकर हमारी पार्टी बी.एस.पी. सहित देश व दुनिया भर में उन सभी लोगों के लिए राहत की ख़बर है व अच्छा आश्वासन है जो परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के संविधान में इस प्रकार के किसी भी अनुचित बदलाव या छेड़छाड़ के पूरी तरह विरुद्ध हैं तथा ऐसी उठने वाली ग़लत माँग को लेकर चिन्तित भी थे। वैसे भी यह सर्वविदित है कि अपना भारत देश हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध व पारसी आदि विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोगों का विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है तथा संविधान के ज़रिए विविधता में एकता की विशेषता इसकी बेमिसाल पहचान दुनिया भर में है। सभी धर्मों के मानने वाले लोगों को एक समान आदर-सम्मान देने व समतामूलक समाज व्यवस्था आदि की सोच को लेकर ही बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान रचा और जिसकी झलक संविधान में हर कदम पर मिलती है। केन्द्र सरकार ने संविधान को लेकर ताज़ा विवाद के सम्बंध में संविधान की पवित्र मंशा के हिसाब से अपनी स्थिति स्पष्ट की है, यह अच्छी बात है तथा सरकार बिना किसी की परवाह व चिन्ता किये हुए अपने इस स्टैण्ड पर कायम रहेगी, ऐसी देश की चाहत व उम्मीद भी है।
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संसद का आज से शुरू हो रहा बहुप्रतीक्षित सत्र, पिछले सत्रों की तरह देशहित व जनहित के अहम् और अति-ज़रूरी मुद्दों पर उचित एवं समुचित बहस तथा किसी बेहतर परिणाम के बिना ही, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव, आरोप-प्रत्यारोप, हंगामा तथा देश के करोड़ों ग़रीब व अन्य मेहनतकश बहुजनों के थोड़े ’अच्छे दिन’ की ओर सही से आगे बढ़ने के भरोसे के बेगै़र ज़्यादातर निराश करने वाला ना हो, इसकी सभी देशवासियों को चिन्ता स्वाभाविक। वैसे भी देश के सामने ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी व बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा तथा ख़ासकर क्षेत्र व भाषा आदि को लेकर बढ़ता आपसी विवाद व हिंसक टकराव आदि के जनहित की समस्यायें के साथ ही आन्तरिक व बाहरी/सीमा सुरक्षा जैसी देशहित के मुद्दे लोगों की सुख-शान्ति व समृद्धि के संघर्ष को प्रभावित कर रहे हैं, तथा इन मामलों पर सार्थक बहस के आधार पर आगे की दीर्घकालीन ठोस नीति व रणनीति बनाकर उन पर अमल के लिए संसद का सुचारू रूप से संचालन जनता ज़रूरी समझती है, ताकि देश विकास व लोग तरक्की के रास्ते पर सही/आसानी से चल सकंे, जिसमें ही देश के सर्वसमाज एवं बहुजनों का हित निहित है। इसके अलावा, विश्व के राजनीतिक व आर्थिक हालात जिस तेज़ी से लगातार नई करवटें बदल रहे हैं उसमें भारत सहित विभिन्न देशों के लोकतंत्र व उसकी संप्रभूता आदि को नई चुनौतियाँ एवं नया ख़तरा भी मंडलाने लगा है, जिसके प्रति भारत सरकार की अपनी राजनीतिक सजगता व कुशलता ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही से मुकाबला करने के लिए सरकार अगर विपक्ष के माध्यम से पूरे देश की जनता को विश्वास में लेकर आगे बढ़े तो यह उचित होगा। वास्तव में सरकार और विपक्ष दोनों पार्टी हित से ऊपर उठकर इन मुद्दों पर एकता बनायें, यही देश के बहुजनों की चाहत है। इसके साथ ही, संसद के वर्तमान मानसून सत्र के दौरान पहलगाम नरसंहार के मामले में भारत के ’आपरेशन सिन्दूर’ पर चर्चा के लिये सरकार को सकारात्मक होना चाहिये तो यह बेहतर होगा, क्योंकि देश की जनता व सीमाओं की सुरक्षा अन्ततः सरकार का पूर्ण उत्तरदायित्व बनता है, जिसके प्रति प्रतिपक्ष द्वारा भी पार्टी हित से ऊपर उठकर सरकार से सहयोग का रवैया अपनाना ज़रूरी अर्थात् सरकार व विपक्ष दोनों के लिए देश व जन सुरक्षा सर्वोपरि है।
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@Vndnason ये अपने आप को दूसरी मायावती बहनजी समझती है।
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𝓓𝓲𝓿𝓲𝓷𝓮 𝓓𝓪𝔀𝓷
ये क्या है?? दूसरे से जवाब मांगने वाली इसका भी जवाब दे दें। या ब्लॉक ही रखेंगी?
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