आज मोदी जी के चहेते मुख्यमंत्री हिमंत् विश्व सरमा ने जिस तरह मौजूदा दौर के सबसे बड़े दलित नेता कॉंग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के लिये “कौन खरगे” और “पागल” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है वो बेहद शर्मनाक है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी को हिमंता के शब्दों के लिये आगे आकर देश के दलितों से माफी मांगनी चाहिये।
@Dr_Uditraj सोच तू कितना दोगला है, जिस पार्टी ने तुझे सांसद बनाया उसके ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी आंदोलन में शामिल हुए, लेक़िन लालच फ़िर भी इतनी की सांसदी से इस्तीफा नहीं दिया ।।
थू है तुझ पर काले कौए ।।
2 अप्रैल 2018 को दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था। मैं, बीजेपी का सांसद होते हुए, न केवल इसका समर्थन किया बल्कि इसका नेतृत्व भी किया। उसी समय रामविलास पासवान जी और मायावती जी ने भारत बंद का विरोध किया। ये सारे प्रमाण इंटरनेट पर मिल जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अनुमति आवश्यक हो गई थी। दूसरा मुद्दा एससी/एसटी शिक्षक भर्ती में रोस्टर की गड़बड़ी का था।
बीजेपी के संगठन महासचिव का फोन आया कि आप पार्टी में होते हुए भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इस पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की। मेरी तरफ से भी जवाब उतना ही स्पष्ट था। माहौल गर्म हो गया और उन्होंने फोन काट दिया। अगले दिन उनका फिर फोन आया और वे मुझे समझाने लगे कि ऐसा नहीं करना चाहिए। तब मुझे समझ में आ गया कि बात काफी आगे तक पहुंच चुकी है।
मेरे मन में आया कि मैं इस्तीफा दे दूं लेकिन उससे कोई लाभ नहीं होता। मैंने सोचा कि संसद के मंच का उपयोग किया जाए और जितना संभव हो सके अपनी आवाज उठाई जाए। अब तो इंटरनेट का जमाना है और कोई भी जाकर देख और सुन सकता है कि मैंने सत्ता से जितने सवाल किए, शायद ही किसी ने किए हों।
जरूरी नहीं कि इतिहास सबके साथ न्याय करे। अभी तक तो मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ है, और आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है।
@SupriyaShrinate जिनकी तीन पीढियां सत्ता के शीर्ष पर रहीं, उसे आज भी जनता से समस्या पूछनी पड़ रही है ।।
शर्म तो बिल्कुल भी नहीं आती होगी सुप्पी आंटी ।।
अभिनेता और जननेता का फर्क
▪️मोदी जी के चाय बागान फोटोशूट में सारी महिलायें असमिया गमोसा से मैचिंग एक जैसी साड़ी पहनकर आयीं
5 साल पहले उनकी दिहाड़ी को ₹351/दिन करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ
▪️वहीं राहुल जी आम लोगों से बात करने के लिए साधारण बस में गए - उन्मुक्त संवाद किया
केंद्र से केरल को लगातार मिल रहे सौतेले व्यवहार के बावजूद 10 वर्षों में केरल में LDF सरकार के रहते बहुत तीव्र गति से विकास और जन कल्याण के कार्य हुए हैं!
राष्ट्रीय जनता दल केरल चुनाव में LDF गठबंधन में है और LDF राज्य में पुनः सरकार बनाने जा रही है!
@yadavtejashwi#LDF#RJD#TejashwiYadav
@nehafolksinger जिनके ख़ुद के बच्चे होने में सदियों बीतने वालें हैं वो दूसरों के बच्चों की नस्लें देख के चिढ़ रही है ।।
अपनी नस्ल बचा होस्टल वाली अर्धनारी ।।
बड़ी खबर: ईरान ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ!
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आपसी मतभेद भुलाकर रिश्ते सुधारने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि है!
उनका यह कहना कि 'मैं अपनी ओर से आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हूँ', यह संकेत देता है कि ईरान इस क्षेत्र में एक बड़े 'पीसमेकर' की भूमिका निभाना चाहता है।
नोट: अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान ईरान के साथ खड़े हुए तो समझ लीजिए, इजरायल और अमेरिका की मुसीबत और बढ़ सकती है!
आज राज्यसभा के लिए नामांकन प्रस्तुत करते हुए मन स्वाभाविक रूप से उस लंबी यात्रा को याद कर रहा है, जिसे हमने आप सबके साथ मिलकर तय किया है।
मुझे पटना पश्चिम (बांकीपुर) की जनता ने हाथ पकड़कर चलना सिखाया है। पिछले दो दशकों से अधिक समय से आपने जो विश्वास और स्नेह दिया है, उसी के बल पर मुझे बिहार सरकार में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राज्य और समाज की सेवा करने का अवसर मिला, जिसे मैंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने का प्रयास किया है।
चाहे श्रीरामनवमी की भव्य शोभायात्रा की तैयारियाँ हों, आस्था के पर्वों की व्यवस्था हो, या बांकीपुर के विकास से जुड़े संकल्प, हर कदम पर मैंने स्वयं को आप सबके विश्वास का प्रतिनिधि मानकर कार्य किया है।
आज राज्यसभा के लिए नामांकन करते हुए मन में वही जिम्मेदारी और सेवा का संकल्प है।
मैं विश्वास दिलाता हूँ कि बांकीपुर की जनता के साथ मेरा यह आत्मीय संबंध आगे भी इसी विश्वास और समर्पण के साथ बना रहेगा, और हम सब मिलकर विकसित बिहार के संकल्प को आगे बढ़ाते रहेंगे।
आपका विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है।
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।
मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
रंगों का यह पावन उत्सव हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सौहार्द, समरसता और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का संदेश देता है। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि विविधता में एकता, आपसी विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है।
कामना है कि यह रंगोत्सव आपके जीवन में नई संभावनाएँ, समृद्धि और सतत प्रगति के उज्ज्वल अवसर लेकर आए, तथा हम सभी मिलकर एक सशक्त, संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें।
आप सभी को होली की हार्दिक एवं मंगलकामनाएँ।
इज़राइल और ईरान जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर देश के मीडिया का यह कहना कि “कांग्रेस छाती पीट रही है” या “विपक्ष परेशान है” यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद के गिरते स्तर का प्रमाण है। जब बात इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की हो, जब पूरी दुनिया शांति, कूटनीति और रणनीतिक संतुलन की बात कर रही हो, तब भारत के विपक्ष की जायज़ चिंता को उपहास में बदल देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
विपक्ष सवाल पूछेगा, यही उसका संवैधानिक धर्म है। अगर भारत की विदेश नीति, हमारे राष्ट्रीय हित, खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा, और ऊर्जा आपूर्ति जैसे गंभीर विषयों पर सरकार से स्पष्ट रुख माँगा जाता है, तो उसे “परेशानी” या “छाती पीटना” बताना दरअसल जवाबदेही से भागना है। असहमति लोकतंत्र की ताकत होती है, कमजोरी नहीं।
आज जरूरत है परिपक्व बहस की, तथ्यों पर आधारित चर्चा की, और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की। लेकिन जब मीडिया का एक वर्ग विश्लेषण छोड़कर व्यंग्य और ट्रोलिंग की भाषा अपनाता है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। देश यह देख रहा है कि किस तरह गंभीर कूटनीतिक संकट को भी राजनीतिक तंज़ और निम्न स्तर की शब्दावली में बदल दिया जा रहा है।
हम स्पष्ट कहना चाहते हैं, सवाल उठाना देशविरोध नहीं है, बल्कि देशहित में जिम्मेदारी निभाना है। भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में विचारों की असहमति को सम्मान मिलना चाहिए, न कि उसे मज़ाक बनाकर दबाने की कोशिश। राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद गरिमा से होना चाहिए।
मीडिया द्वारा कांग्रेस पार्टी और देश के विपक्ष के लिए इस्तेमाल किए गए “छाती पीटना” जैसे शब्दों के प्रयोग की मैं घोर निंदा करता हूँ। यह भाषा न केवल निम्न स्तर की है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विरुद्ध है।
कांग्रेस पार्टी के लिए जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया, उससे मुझे गहरी आपत्ति है। असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन अपमान और तंज उसकी मर्यादा के विरुद्ध हैं। विदेश नीति कोई टीवी स्टूडियो की सनसनी नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और स्वायत्त सोच का प्रश्न है।
जब वैश्विक परिदृश्य में तनाव के क्षण आए, तब भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र आवाज़ रखी। डॉ मनमोहन सिंह जी ने अमेरिका की धरती पर खड़े होकर यह कहने का साहस दिखाया था, कि अमेरिका से गलती हुई है। वह बयान किसी देश-विरोध में नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नैतिकता और संतुलित कूटनीति के पक्ष में था। आज प्रश्न यह है, क्या वर्तमान नेतृत्व वही स्पष्टता और नैतिक दृढ़ता दिखाने को तैयार है? क्या हम किसी भी देश की संप्रभुता की बात भी निष्पक्ष रूप से नहीं कर सकते?
हर मुद्दे को “छाती पीटना”, “हाय तौबा” या हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखना एक गंभीर राष्ट्रीय विमर्श को सतही बनाने जैसा है। विदेश नीति भावनाओं की उत्तेजना से नहीं, बल्कि विवेक, संतुलन और साहस से संचालित होती है। अगर हम स्वयं को एक मजबूत और उभरती शक्ति कहते हैं, तो हमें यह आत्मविश्वास भी रखना चाहिए कि हम वैश्विक मंच पर अपनी बात स्पष्ट और निष्पक्ष रूप से रख सकें, चाहे वह अमेरिका हो, इज़रायल हो या कोई अन्य देश।
आज स्वाभाविक रूप से स्मरण होती हैं, आयरन लेडी इंदिरा गांधी जी , जिन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए थे। तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा और निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। वह दौर यह बताता है, कि भारत तब सशक्त दिखता है, जब उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और आत्मविश्वासी होती है।
कांग्रेस की परंपरा रही है कि भारत की विदेश नीति को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाए और उसे राष्ट्रीय स्वाभिमान, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों के आधार पर संचालित किया जाए। सवाल पूछना देशद्रोह नहीं है, बल्कि वही लोकतंत्र की शक्ति है। असहमति को अपमान से दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। राष्ट्रवाद का अर्थ शोर नहीं, बल्कि सत्य के साथ खड़े होने का साहस है। और यही साहस भारत की असली पहचान रही है।
दो महीने से सरकार कह रही है कि ईरान से बाहर आ जाओ। हर दो सप्ताह पर सार्वजनिक निर्देश दिए जाते रहे कि स्थिति उचित नहीं, ईरान छोड़ो।
पर, फ्री-लोडिंग एक ऐसी आदत हैं जहाँ व्यक्ति गाँड में घुसी मिसाइल लिए घूमता है कि मोदी जी पर्सनली डबल डेकर बस भेजेंगे, फिर एक पोर्ट खुलवाएँगे, फिर ग्लोबमास्टर जहाज आएगा, फिर छोटा तिरंगा, लाल गुलाब और इत्र की भीनी-भीनी सुगंध!
पूरे इज़राइल का देश आपके नेतृत्व की सराहना करता है, आपकी मित्रता की कद्र करता है, और इस बात के लिए आभारी है कि आप कठिन समय में हमारे साथ खड़े रहे। यहाँ आने के लिए आपका धन्यवाद। 🇮🇳🇮🇱