Delhi: When asked about challenging the Madhya Pradesh High Court decision in the Bhojshala case before the Supreme Court, Jamaat-e-Islami Hind Vice President Malik Motasim Khan says, "The committee there will approach the Supreme Court and we will extend our moral support to it. The local people there and the committees of Kamal Maula Mosque will go to the Supreme Court. But the question is, in the country, who will go against which mosque? The country's judiciary has created such an atmosphere that now in every village some people will stand up and claim every mosque is a temple, and then the judiciary will keep delivering judgments. This is the real issue. This is a political matter. Earlier, the country's judiciary did not give such decisions. Why are such decisions being given today? It clearly shows that there is political pressure on the judiciary due to which such decisions are being taken. This should be avoided."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा, "हम ये समझते हैं कि खासकर पश्चिम बंगाल के जो नतीजे हैं और चुनाव से पहले का जो माहौल था और जो लोग ग्राउंड पर काम कर रहे थे, उससे साफ लग रहा था कि जो नतीजे अब आए हैं वो नतीजे आम जनता की राय के खिलाफ हैं। पश्चिम बंगाल की जनता जो चाहती थी उसके मुताबिक रिजल्ट नहीं आए हैं बल्कि उन्हें बदलने की कोशिश हुई है। उसमें चुनाव आयोग ने भी एक तरह से मदद की है। SIR से लेकर पूरी चुनावी प्रक्रिया में जिस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया चुनाव आयोग का रहा है, वो हमारे लिए और सबके लिए बहुत चिंता की बात है..."
Prof Salim Engineer Condemns NEET 2026 Irregularities Leading to Cancellation of Exam, Demands Independent Probe and strict action against Culprits.
#NEET@MSalimEngineer
Delhi: Jamaat-e-Islami Hind Vice President Malik Mutasim Khan says, "There are many questions regarding the elections held in West Bengal. One question is that SIR left lakhs of people there unable to vote. The absence of those votes had a significant impact on the victory and defeat in the election..."
PHOTO | New Delhi: Jamaat-e-Islami Hind vice president Salim Engineer expresses deep concern over escalating violence in Manipur, calling for accountability, protection of civil liberties and immediate dialogue. He says the killing of two young children at their home, along with civilian deaths during protests and separate incidents involving civilians and a security personnel, is deeply disturbing and reflects a serious failure to protect innocent lives. He adds that such incidents must be unequivocally condemned and raises concerns over the reported use of lethal force by security personnel against protesters, questioning proportionality and adherence to established norms. He calls for an independent, impartial and time-bound investigation into all incidents to ensure accountability and restore public trust.
(File photo)
PHOTO | Jamaat-e-Islami Hind has expressed concern over linking women’s reservation with delimitation, calling it politically motivated and potentially harmful to democratic fairness. The organisation supports implementing women’s reservation within the existing 543 Lok Sabha seats with sub-quotas for marginalised groups.
(Source: Third Party)
Delhi: On Assam CM Himanta Biswa Sarma's wife passport, Jamaat-e-Islami Hind, Vice President, Malik Motasim Khan says, ''We have seen a video that the Chief Minister of Assam has given his wife's passport to be more than one. Now we do not know whether there was an FIR against his wife or not. Can the Indian citizen keep the passport of other countries?..''
Delhi: On the Election Commission regarding the West Bengal's Assembly Election, Jamaat-e-Islami Hind, Vice President, Malik Motasim Khan says, ''So, the elections that are taking place in West Bengal, the stakeholders there, whether it is the Trinamool Congress, or the BJP of West Bengal, or the Congress of West Bengal, or the Communist Party of West Bengal, or whoever is fighting the elections there, they meet the authorities of the Election Commission with their problems and issues. So, it is the job of the Election Authority to talk to them nicely and resolve their complaint...''
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों के युद्धविराम पर कहा, "बहुत अच्छी बात है, बहुत खुशी की बात है। हम इसका इस्तकबाल करते हैं, वेलकम करते हैं। यह बड़ी तबाही हो रही थी। अमेरिका का जो एग्रेशन था, जिस तरीके से एक संप्रभु देश पर हमला किया गया, हेड ऑफ द स्टेट को टारगेट करके मारा गया और वहां सिविलियन आबादी, स्कूल्स, छोटे बच्चे उनका कत्ल किया जा रहा था। यह बहुत ही भयानक सूरत-ए-हाल थी। कल जो धमकियां दी जा रही थीं, उसने सारी दुनिया में एक डर का, खौफ का माहौल पैदा कर दिया था। जाहिर है, पूरे मुल्क को तबाह करना यह सिर्फ एक मुल्क तक मामला महदूद नहीं रहता, बल्कि यह पूरे इलाके के लिए और पूरी दुनिया के लिए तबाही का पैगाम था। सुबह जब सीजफायर का ऐलान हुआ, तो पूरी दुनिया ने इत्मीनान का सांस लिया..."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों के युद्धविराम पर कहा, "हम दो बातें कहना चाहेंगे। पहली बात तो ये कि भारत को बहुत आगे बढ़कर पीस कायम करने के लिए एक्टिव रोल प्ले करना चाहिए। अभी तक हमारा रोल बहुत ज्यादा एक्टिव नजर नहीं आ रहा है। भारत एक बड़ी ताकत है। ऐसे मौके पर भारत का खामोश रहना मुनासिब नहीं है...दूसरी बात यह कि दोस्तियां तो हो सकती हैं मुख्तलिफ मुल्कों से, लेकिन हमारी फॉरेन पॉलिसी का उसूल हमेशा से यह रहा है कि हमने हमेशा सिर्फ इंटरेस्ट की बुनियाद पर फॉरेन रिलेशंस नहीं रखे हैं, बल्कि प्रिंसिपल्स की बुनियाद पर रखे हैं..."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीज़फायर पर कहा, "तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है। अल्टीमेटली इन्फ्लेशन भी कम होगा। अर्थव्यवस्था सही रुख पर आगे बढ़ेगी। तो ये जंग, जंग असल में बड़ी ताकतें थोपती हैं, लेकिन उसका सबसे ज्यादा नुकसान दुनिया के गरीब आवाम को होता है, आम लोगों को होता है। तो इस जंग ने भी सबसे ज्यादा गरीब लोगों को नुकसान पहुंचाया है। वो नुकसान की पूरी तरह तलाफी तो मुमकिन नहीं है, लेकिन जो सीजफायर हुआ है, हम उम्मीद करते हैं कि ये परमानेंट पीस में बदल जाए। तो उसके नतीजे में इन नुकसानों को कंट्रोल करने में जरूर मदद मिलेगी।"
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने कहा, "हमने कहा है कि म्यूचुअल रिस्पेक्ट और डिप्लोमेसी ही एक तरीका है जंग खत्म करने का। अगर म्यूचुअल रिस्पेक्ट नहीं होगा और एक-दूसरे को बलपूर्वक कोअर्स किया जाएगा, तो कभी समाधान नहीं निकलेगा। डिप्लोमेसी और बातचीत के जरिए ही समाधान संभव है और इसी दिशा में आगे बढ़ना हमारा प्रयास होना चाहिए।"
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर कहा, "हमने कहा हमारा सबसे बड़ा कंसर्न है वो सिविलियन को नुकसान पहुंच रहा है। लाइफ का भी लॉस हो रहा है और जिंदगी की कीमतें बढ़ रही हैं। चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं। सिर्फ तेल और पेट्रोल ही नहीं बल्कि खाने पीने की चीज़ें भी महंगी हो रही हैं। हमारे देश के लोग वहां काम करते हैं। लोग वापस आ रहे हैं। हम उन्हें रोज़गार दें, यह बड़े मुद्दे हैं।"
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष एस. अमीनुल हसन ने कहा, "डाटा बता रहा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज से जो प्री-वार जितने शिप्स जाते थे, उसका अभी 5% या 8% तक ही क्रॉस कर रहे हैं। तो ये तो खुली बात है कि जब वहां से क्रॉसिंग ही 8-10% हो, तो गैस की कमी होगी, एनर्जी की कमी होगी, और फौरन एक्शन लेना चाहिए। हमारे मुल्क को बातचीत करनी चाहिए।"
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने कहा, "पांच राज्यों में जो चुनाव हो रहे हैं, उसमें हमने जनता से एक अपील की है कि वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें और वोट जरूर डालें। सोच-समझकर वोट डालें, भावनाओं में बहकर वोट न डालें। ऐसे लोगों और पार्टियों को वोट करें जो जनता के वास्तविक मुद्दों को गंभीरता से लेते हों..."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष सलीम इंजीनियर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर कहा, "आखिरकार में तो गुफ्तगू ही होना है, लेकिन जब कोई देश सारे इंटरनेशनल कानून को तोड़कर किसी देश पर हमला कर दे, वहां के सुप्रीम लीडर और वहां की लीडरशिप को डायरेक्ट निशाना बनाए और हजारों घरों को टारगेट करके नुकसान पहुंचाए, तो उस देश को अधिकार है कि वो इस आक्रमण का जवाब दे, अपनी रक्षा करे..."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा, "आजकल प्रोपेगैंडा फिल्में बहुत ज्यादा बन रही हैं। यह अब कोई छुपी हुई बात नहीं है कि महिलाओं पर, चाहे वे किसी भी धर्म या समुदाय की हों, जो अत्याचार देश में हो रहे हैं, वे हमारे पूरे देश की तस्वीर दर्शाते हैं। इस पर से ध्यान हटाने के लिए कभी 'कश्मीर फाइल्स', कभी 'केरला स्टोरी' को भावनात्मक बनाकर, कभी उसे लव जिहाद का नाम देकर और कभी कश्मीर के संदर्भ में उसे सांप्रदायिक रंग देकर असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। 2012 में जो निर्भया की घटना हुई, उसके बाद सरकार ने एक कमेटी बनाई, कमीशन बनाया, रिपोर्ट आई और कई सुझाव दिए गए। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने भी बहुत सारे सुझाव दिए थे। लेकिन हम देख रहे हैं कि वह सिलसिला रुक नहीं रहा है और महिलाओं की सुरक्षा तथा सम्मान में लगातार गिरावट आ रही है..."
दिल्ली: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा, "...प्रेस कांफ्रेंस में हमने तीन मुद्दों पर बात की है। पहला मुद्दा, इज़रायल अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले पर है। यह जंग लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें काफी जान माल का नुकसान हो रहा है। जमात ए इस्लामी समझती है कि यह हमला एक स्वतंत्र देश की संप्रभुता पर हमला है। पूरी दुनिया को इसकी निंदा करनी चाहिए। हमारे देश भारत को खासकर तौर पर करनी चाहिए क्योंकि ईरान हमारा पुराना दोस्त रहा है। अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का जो हमारा इतिहास रहा है, वह हमें नज़र आना चाहिए।"