मां भारती के कर्मठ सपूत वीर सावरकर जी के जीवन से हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने संकल्प पर अडिग रहने की सीख मिलती है। उनका साहस, संयम और मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव सदैव देशवासियों का पथ प्रदर्शित करता रहेगा।
धीराः शोकं तरिष्यन्ति लभन्ते सिद्धिमुत्तमाम्।
धीरैः सम्प्राप्यते लक्ष्मीर्धैर्यं सर्वत्र साधनम्॥