Jagdeep Joseph

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@Jagdeepjoseph

Principal, Christian College of Physical Education, Lucknow President, Physical. Education Teacher Association, Uttar Pradesh

Lucknow Katılım Nisan 2017
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सरोजिनी नायडू पार्क,महात्मा गांधी मार्ग के निकट #उत्तरप्रदेशसंस्कृतिविभाग व #बंगालीक्लब लखनऊ के प्रयासों के बाद गुरुवर की प्रतिमा स्थापित की गई थी. प्रतिमा पर लिखे हुए शिलालेख के मुताबिक गुरुदेव का निधन 2 अगस्त 1942 को हुआ था। जयन्ती 7 मई 1861- 7 अगस्त 1941 @upculturedept
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लखनऊ में ट्रैफिक जाम पर हाईकोर्ट सख्त:अधिकारियों को स्थायी समाधान की ठोस योजना बनाने का निर्देश #लखनऊ में पॉलिटेक्निक से किसान पथ तक लगातार ट्रैफिक जाम पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को 2 सप्ताह में स्थायी समाधान निकालने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों के अब तक के प्रयासों पर असंतोष जताया और कहा कि सालों से समस्या बनी हुई है। हाईकोर्ट की सख्ती के मुख्य बिंदु: दो सप्ताह का समय: ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम को जाम के स्थायी समाधान के लिए ठोस Action Plan के साथ रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश।अधिकारियों को तलब: डीसीपी ट्रैफिक, डीसीपी पूर्वी जोन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट में पेश होना पड़ा। निरीक्षण का निर्देश: कोर्ट ने अधिकारियों को पॉलिटेक्निक से किसान पथ तक पूरे मार्ग का भौतिक निरीक्षण कर जाम के कारणों का पता लगाने को कहा है। असंतोष: कोर्ट ने कहा कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी ठोस समाधान नहीं निकला है।जनता की परेशानी: जाम के कारण आम जनता को हो रही भारी परेशानी पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।अगली सुनवाई में इन अधिकारियों को फिर से रिपोर्ट के साथ पेश होना होगा।
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#लखनऊ में सिविल लाइंस के साथ सिविल लाइन कॉलोनी भी है. जो अपनी सारी खूबसूरती खो हो चुकी है. जब गौमती के किनारे बांधने का काम शुरू हुआ था तब सिविल लाइंस की सड़क बांध के हिस्से में आ गई थी अब सिर्फ उसका नाम ही दिखाई देता है.
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All teachers, students, and alumni of Lucknow Christian College and its units are invited to gather at Nishatganj Christian Cemetery, Lucknow, tomorrow, 27 April 2026, at 9:00 AM. Kindly share in your friends.
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ट्रेन #बरेली सिटी स्टेशन से #काठगोदाम स्टेशन 24 अप्रैल 1884 को पहुंची थी. 19वीं शताब्दी के अंत तक, काठगोदाम 66 मील (104 किलो मीटर ) लंबी #रोहिलकुंड और #कुमाऊं रेलवे द्वारा संचालित निजी रेलवे लाइन थी और काठगोदाम से बरेली सिटी स्टेशन तक थी । रोहिलकुंड और कुमाऊं रेलवे को भारत सरकार को हस्तांतरित कर दिया गया और 1 जनवरी 1943 को अवध और तिरहुत रेलवे में विलय कर दिया गया। 14 अप्रैल 1952 को, अवध और तिरहुत रेलवे का असम रेलवे और बॉम्बे, बड़ौदा और मध्य भारत रेलवे के कानपुर -अचनेरा खंड के साथ विलय कर NER का गठन किया गया , जो वर्तमान भारतीय रेलवे के 16 जोन में है । फोटो काठगोदाम रेलवे स्टेशन नवंबर 2025 की
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#विश्वमलेरियादिवस #worldmalariaday #रोनाल्डरॉस का जन्म 13 मई, 1857 को #अल्मोड़ा में हुआ था। वे अंग्रेजी राज की भारतीय सेना के स्कॉटिश अफसर सर कैम्पबेल रॉस की दस संतानों में सबसे बड़े थे। उस समय भारत में #मलेरिया की बीमारी के बहुत सारे मामले सामने आते थे। 1892 में उन्होने अपने अनुभव के आधार पर मलेरिया पर अपना पूर्णरूपेण शोधकार्य शुरू किया। ढाई साल के कई असफल प्रयासों के बाद अंतः वह अपने प्रयासों पर सफल हुए जिसके लिए उन्हें #नोबेल पुरस्कार मिला । रोनाल्ड रॉस चिकित्सक थे। वक्त के साथ अल्मोड़ा के लोग अपने इस नगीने को भूल गए। #थॉमसनहाउस, अल्मोड़ा. फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट।
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लगभग 50,000 sqf ज़मीन और 4000 वर्ग फुट का बंगला लीज पर दिया गया । कॉलेज का जमीन पर व्यवसायिक उपयोग। व्हाट्सएप पर चल रहे मैसेज के मुताबिक बिशप C selvin की जानकारी यह पूरा मामला है। आरोप है की Lucknow Christian Primary School की करोड़ों की जमीन निपटा दी गयी है ।आरोप है कि एक पूरे सिंडिकेट ने मिलकर मोटी रकम के खेल में स्कूल की बहुमूल्य जमीन को लीज के नाम पर बाबा रामदेव की झोली में डाल दिया। शहर के बीचों-बीच स्थित यह जमीन शिक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए थी, लेकिन अब उस पर सौदेबाज़ी और बंद कमरों की सेटिंग के आरोप लग रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके इशारे पर स्कूल की जमीन को निजी हाथों में सौंपने की पटकथा लिखी गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों की जमीन को लीज का चोला पहनाकर असली खेल खेला गया। कागज़ों में सब कुछ वैध दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन अंदरखाने करोड़ों के लेन-देन की चर्चाएं गर्म हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा संस्थानों की जमीन अब दलालों और रसूखदारों के लिए खुला बाजार बन चुकी है? अगर स्कूलों की संपत्ति भी सुरक्षित नहीं, तो फिर आम आदमी किस पर भरोसा करे? अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, लीज की शर्तें सार्वजनिक हों और यह बताया जाए कि बच्चों की जमीन आखिर किस अधिकार से किसी और की झोली में डाली गई। वरना जनता यही मानेगी कि लखनऊ में जमीन नहीं, जमीर लीज पर चढ़ चुका है। उत्तर प्रदेश में #इग्नू का विज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज को कॉलेज की प्रबंध समिति ने बंद करा दिया है । @rashtrapatibhvn @PMOIndia @AmitShah @AmitShahOffice @GovernorofUp @myogiadityanath @myogioffice
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#लखनऊ नगर निगम ने भी लखनऊ के नाम और पहचान ख़त्म करने का ठेका उठाया लिया है। #डालीगंज ( कोतवाली हसन गंज ) के क़ुतुबपुर में आचार्य नरेंद देव मार्ग की ओर भगवती प्रसाद शुक्ला मार्ग का बोर्ड इसके साथ लिखा है सीतापुर ब्रांच मार्ग लिखा है ( सही नाम सीतापुर ब्रांच रोड है ) पण्डित भगवती प्रसाद शुक्ला मार्ग के बोर्ड को सीतापुर ब्रांच रोड की तरफ होना चाहिए। डालीगंज पुल 2017 से बन्द है जिस स्थान पर बोर्ड लगाया है वहां से बन्द डालीगंज पुल लगभग 300 मीटर दूर है। लखनऊ नगर निगम 110 वार्ड में टैक्सपेयर का रुपया ऐसे गलत बोर्ड लगाकर बर्बाद कर दिया है। @LMC_Lucknow @NagarVikas_UP @Sushma_Kharkwal
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#विश्वक्षयरोगदिवस #भवाली आने के बाद #कमलानेहरू की जिंदगी अगले करीब 9 महीने तक मरीज के रूप में बिस्तर तक ही सीमित रही । उनके रेडियोग्राफ से पता चला कि उनका बायें फेफेडा काफी छतिग्रस्त है और डाक्टरों ने उसके artificial pneumothorax का निर्णय लिया । उस समय भवाली के प्राइवेट डाक्टर प्रेम लाल शाह जी artificial pneumothorax के विशेषज्ञ समझे जाते थे । इलाज के लिये सेनेटोरियम से निकालकर उन्हे डा शाह के पास लाया गया और उस समय कमला जी की पूरी टीम का निवास बना #घोडाखाल तिराहे के पास #भीमताल को जाने वाले पैदल रास्ते पर बने कांग्रेसी नेता हीरालाल शाह का मकान ‘ चंद्र भवन ‘ । बाद में हीरालाल शाह जी के इसी मकान में कुछ दिन क्रांतिकारी #यशपाल जी और फिर ₹मधुमति फ़िल्म की सूटिंग के समय #दिलीप कुमार जी भी रहे । डाक्टर प्रेम लाल शाह मूलत: #नैनीताल के रहने वाले थे । #आगरा मेडिकल कालेज , फिर #कलकत्ता और उसके बाद वेल्लौर से फेफड़ों के सम्बंध में विशेषज्ञता प्राप्त कर 1926 के आसपास भवाली आ गये क्योकि उस समय भवाली में टी बी सेनोटोरियम के कारण बाह्यरोगियों की संख्या बढ रही थी और एक अच्छे डाक्टर की यहाँ सख्त जरूरत थी । आज जहाँ भवाली बाजार में खादी आश्रम है , वह पूरा भवन डा प्रेमलाल शाह द्वारा 1928 में बनवाया गया था । वहीं पीछे की तरफ मरीज़ देखने का उनका कमरा था । artificial pneumothorax यह बहुत ही दर्द भरा और ख़तरनाक इलाज था जिसके दौरान कुछ कुछ अंतराल पर एक सुई सीने में डालकर और उससे आक्सीजन प्रवेश कराकर फेफड़े को संकुंचित ( collapse ) किया जाता था , इसे ही कृत्रिम वातलवक्ष (Artificial Pneumothorax) कहते हैं। कमला जी को इस आपरेशन की पहली रात मारफीन दी जाती थी और दूसरे दिन लोकल एनेस्थीसिया के बाद सीने में नीडिल डालकर आक्सीजन पम्प की जाती थी । यह इलाज तत्काल काम नही करता था और कभी कभी तो करता भी नही था तो इस तरह के पाँच छ आपरेशन अतिरिक्त कर आक्सीजन पास कराई जाती थी जिसके तमाम दुष्परिणाम और गम्भीर जटिलतायें ( complications ) भी होते थे । यह काम बहुत ही तकनीकी विशेषज्ञ का था और जिसके डा प्रेम लाल शाह विशेषज्ञ माने जाते थे । उल्लेखनीय है कि उस समय तक टी बी की कोई दवा ईजाद हो नही हो पायी थी । ( फोटो में भवाली में डाक्टर प्रेमलाल शाह जी के साथ कमला नेहरू जी मरीज़ के रूप में, कमला जी मृत्यु से एक साल पूर्व की फोटो पर चेहरे में चमक ,नाक नक़्श बेटी इंदिरा की तरह ही । वाया Shalendra pratp singh singh
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@SANJOGWALTER कब तक समझाओगे भाई जब वैक्यूम फ्लॉक को थर्मस और टुल्लू को छोटा वॉटर पंप को बोलना सीख लेंगे तब शायद समझ जायेंगे।
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सूरजकुंड पार्क के पास चौराहा बनाया गया और उसका नाम रखा गया #लालबहादुरशास्त्री चौराहा और इसके पास ही #आरएलसी है.उस भवन का नाम लाल बहादुर शास्त्री किया गया.पता नहीं क्यों लखनऊ विनाश प्राधिकरण ने शास्त्री जी से दुश्मनी निकाल ली और उसे चौराहे को तोड़ दिया और एक नई चौराहे को बनाया पता नहीं है उसका क्या नाम रखा जायेगा ? @LkoDevAuthority @LucknowDivision @LucknowDM
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@SANJOGWALTER @Asif_Lucknawi कब तक समझाओगे भाई जब वैक्यूम फ्लॉक को थर्मस और टुल्लू को छोटा वॉटर पंप को बोलना सीख लेंगे तब शायद समझ जायेंगे।
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@Asif_Lucknawi डालीगंज चौराहा नहीं है 1- महात्मा गांधी मार्ग 2-लालू लल्लू मल धर्म शाला के निकट 3- सूरज कुंड पार्क के सामने। चौराहा का नाम लाल बहादुर शास्त्री जी के नाम पर था। डालीगंज नदी पार है महात्मा गांधी मार्ग पर नहीं है ।
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Asif Ahmad (Yusuf)🇮🇳@Asif_Lucknawi·
माननीय के इंतजार में लखनऊ का ग्रीन कारीडोर डालीगंज चौराहे से समतामूलक चौक तक फेस २ बनकर तैयार लेकिन माननीय सांसद जी के पास इसके लोकार्पण का समय नहीं दो बार तारीख बदल दी गई..... पार्टी कार्यकर्ता के यहां शादी ब्याह होता तो टाइम से आ जाते ☺️ #Ama_jane_do #नखलऊ #public_ki_baat
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@anuragkumarlko @Lko_VivekSharma @SANJOGWALTER नारी शिक्षा निकेतन के चौराहे पर एक पेड़ 45° पर झुका है जो अक्सर हम का सबसे बड़ा कारण है।
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यह अमीरी फिर नहीं मिली कभी
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आज भी जब मैं राजा अहमद अली मार्ग से गुजरता हूं तो मुझे #एकुलाल और #अकबर की बहुत याद आती है. उनको एक बच्चा मिला था जिसका नाम अकबर था उन्होंने उसे पाल लिया थाले सालों बीते गये,एकुलाल जी और अकबर का किस्सा #लखनऊ में लोग जान गए थे की कैसे उन्होंने एक मुस्लिम बच्चे को पाला और उसका धर्म परिवर्तन नहीं किया था. लखनऊ में एकुलाल है और उनके पास एक बच्चा है जिसका नाम अकबर है यह सबसे पहले जाना था परवेज भाई ने. उनकी इस खबर के बाद दूसरे दिन खबरिया चैनल वहां पहुंच गए उसे सारे भारत को यह कहानी पता चली. कई साल के बाद #इलाहाबाद से अकबर का परिवार #लखनऊ पहुंचा अकबर को लेने के लिए और अकबर उनके साथ नहीं गया. क्योंकि उसके पालक पिता ही उसके लिए सब कुछ थे. 20 जून 2018 को बीमारी की वजह से एकुलाल इस दुनिया को छोड़ गए बलरामपुर अस्पताल में उनकी मौत हुई थी और लखनऊ के लोगों ने मेरी पोस्ट के बाद अस्पताल में जाकर उनसे मुलाकात की और अकबर के बैंक खाते में ठीक-ठाक रकम जमा कर दी. ऐकुलाल लाल जी का अंतिम संस्कार भैसा कुंड के विद्युत शव दाह गृह में हुआ था. चाय का ठेला कुछ दिन के लिए शांत रहा फिर कुछ दिन के बाद अकबर ने वह ठेला लगाना शुरू किया. अब तक अकबर के कई दोस्त आ चुके थे अकबर हाथ मे महंगा मोबाइल था. मार्च 2018 मे अकबर वापस अपने परिवार के पास इलाहाबाद चला गया. एकुलाल जी के साथ आखिर तक संपर्क बना रहा जोजफ सर का.
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@SANJOGWALTER ऐकू लाल संदिल अब दुनिया में नहीं रहे। अकबर नैनी इलाहाबाद में जुटे की दुकान चलाता है उसके बायोलॉजिकल पेरेंट्स इस दुनिया में नहीं है।
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#अकबर की मां को पता चला कि उसका खोया हुआ बच्चा #लखनऊ में है तो वो #इलाहाबाद से अब #प्रयागराज से लखनऊ आई और अकबर को ले जाने की इच्छा जाहिर की बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा 4 मार्च 2016 को फैसला सुनाया की अकबर अपनी जैविक मां के अभिरक्षा दावों के बावजूद, ऐकु लाल के साथ 18 वर्ष की आयु तक रह सकता है, उनके मजबूत बंधन और लड़के की इच्छा को मान्यता देते हुए, उसे धार्मिक शिक्षा के माध्यम से अपने इस्लामी विश्वास को बनाए रखते हुए अपने दत्तक पिता के साथ अपना जीवन जारी रखने की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट ने अकबर के कल्याण पर जोर दिया, ऐकु लाल की देखभाल का उल्लेख किया और भारत की धर्मनिरपेक्ष भावना की पुष्टि करते हुए कहा कि जब एक मजबूत बंधन मौजूद हो तो जाति/धर्म अभिरक्षा का निर्धारण नहीं करना चाहिए। फोटो साभार पवन कुमार जी
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@SANJOGWALTER भैंस के आगे मेयर और महापौर की धुन क्यों बजा रहे हों भाई। पत्रकार तो बहुत रिसर्च करते हैं, आज कल तो रील वीर हैं।
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ऐसे ही पत्रकार #लखनऊ के ऐतिहासिक स्थल और सड़कों की नई पहचान कायम करने पर उतारू है. सारे कुएं में भांग है पत्रकारों के बहुत बड़े हिस्से को #मेयर और #महापौर का फर्क नहीं पता वीडियो व्हाट्सएप से sabhar🙏.
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@SANJOGWALTER Dev Anand's wife and daughter have lived for a long time in Sister Bazaar in Landour town near Mussoorie.
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मोना सिंघा (19 सितंबर 1931) का जन्म #लाहौर में पंजाबी मसीही परिवार में हुआ था । उनके पिता #गुरदासपुर जिले में #बटाला में तहसीलदार थे और वह पाँच भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटी थीं। विभाजन के बाद, उनका परिवार #शिमला चला गया । वह शिमला के सेंट बेड्स कॉलेज की छात्रा थीं । अपने स्नातक वर्ष में, उन्होंने #मिसशिमला प्रतियोगिता जीती । फिल्म निर्माता #चेतनआनंद की नज़र उन पर पड़ी। मोना सिंहा का नाम बदलकर #कल्पनाकार्तिक रख दिया गया और वह #बॉम्बे (जिसे अब #मुंबई के नाम से जाना जाता है ) चली गईं। उनकी पहली फिल्म बाज़ी बहुत सफल रही और भारतीय सिनेमा में मील का पत्थर बन गई।#KalpanaKartik इसके बाद उन्होंने टैक्सी ड्राइवर में काम किया न#वकेतन की पहली सफलता थी और यही वह फिल्म थी जिसके सेट पर #देवआनंद ने लंच ब्रेक के दौरान कल्पना कार्तिक से गुप्त रूप से शादी कर ली थी। नौ दो ग्यारह अभिनेत्री के रूप में उनकी आखिरी फिल्म थी। कल्पना कार्तिक ने तेरे घर के सामने (1963), ज्वेल थीफ (1967), प्रेम पुजारी (1970), शरीफ बदमाश (1973), हीरा पन्ना (1973) और जानेमन (1976) के लिए एसोसिएट प्रोड्यूसर के रूप में काम किया । शादी के बाद कल्पना का फिल्म करिअर तो खत्म हो गया, सार्वजनिक तौर पर वे कहीं दिखी भी नहीं। यहां तक कि देव आनंद के निधन के दौरान भी वे दिखाई नहीं दीं। वे कैसी हैं, किस हाल में हैं, कोई नहीं जानता, कई साल पहले यह ख़बर आई थी कि जादू-टोने में व्यस्त रहने की वजह से वे अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। कुछ का दावा है कल्पना लंबा वक्त मुम्बई के किसी चर्च में बिताती हैं।
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Jagdeep Joseph@Jagdeepjoseph·
@SANJOGWALTER फादर कामिल बुल्के की इंग्लिश हिंदी डिक्शनरी हिंदुस्तान में सर्वश्रेष्ठ डिक्शनरी मानी जाती हैं।
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संस्कृत् महारानी, हिंदी बहूरानी और अंग्रेजी नौकरानी है-#फादरकामिलबुल्के। डा. फादर कामिल बुल्के बेल्जियम से भारत आकर मृत्युपर्यंत हिंदी, तुलसी और वाल्मीकि के भक्त रहे ।1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 1 सितंबर 1909 17 अगस्त 1982 नई दिल्ली।
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निशीकांत त्रिवेदी 🇮🇳
दुनिया के सबसे बुज़ुर्ग मैराथन धावक, 114 वर्षीय फौजा सिंह का निधन, घर के बाहर सैर करते वक़्त तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने मारी टक्कर, खेल और फ़िटनेस जगत में शोक की लहर। #faujasinghji #Punjab
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