राष्ट्रसेवा ही ‘विकसित भारत’ की नींव है। सिविल सेवा दिवस के गौरवशाली अवसर पर आइए, अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर सशक्त, समृद्ध एवं संवेदनशील भारतवर्ष के निर्माण का संकल्प दोहराएं।
शीलं परहितासक्तिः अनुत्सेकः क्षमा धृतिः।
अलोभश्चेति विद्यायाः परिपाकोञ्चलं फलम्॥
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का व्यक्तित्व और कृतित्व राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणापुंज बना रहेगा।
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥