
स्वतंत्र समाजवादी(PDA)
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स्वतंत्र समाजवादी(PDA)
@JanwadiAwaz
Quiet observer | Loud thinker | Penning truth over silence | Against deception & injustice | Stay aware
Uttar pradesh (India) Katılım Temmuz 2025
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इनको ऐसी ही तेज तर्राक जबाब देना चाहिए एक हमारे मुख्यमंत्री जी खुद के केस वापस किए।
जबर्दस्त विधायक जी
@sonker_ragini
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@Tiwari_1oct @yadavakhilesh तुम एक नम्बर की निर्लज्ज हो जो भुगत रहा उसे पता है
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@yadavakhilesh मुफ्तखोरी और तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले स्मार्ट मीटर से डर रहे हैं क्योंकि इससे बिजली चोरी रुक रही है। जो खुद भ्रष्टाचार के पर्याय रहे हों, उन्हें हर पारदर्शी व्यवस्था में कमीशन ही नजर आता है।
जनता का करंट भ्रष्टाचार पर नहीं
बल्कि विकास के विरोधियों पर गिरेगा।

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स्मार्ट मीटर के नाम पर चल रही बिजली की ठगी के ख़िलाफ़ उप्र की जनता के गुस्से का मीटर हाई है क्योंकि उसे पता चल गया है कि बेवजह ज़रूरत से ज़्यादा मीटर रीडिंग आने और बिजली का खर्चा बेतहाशा बढ़ने का असली कारण भाजपा का भ्रष्टाचार है। जनता समझ गयी है कि भाजपाई ठेके देने से पहले ही मीटर-बिजली कंपनी से एडंवास कमीशन वसूल लेते हैं, जिसकी वसूली बिजली कंपनियाँ मीटरों को पहले से तेज दौड़ने के लिए सेट करके करती हैं।
भाजपा के बिजली मीटर भी, ईवीएम मशीन की तरह हेराफेरी करते हैं।
भाजपाई जनता के गुस्से के करंट से दूर ही रहें। महंगे सिलेंडर और महंगी बिजली के बिल ही भाजपा का कनेक्श सत्ता से काट देंगे।
बिजली उपभोक्ता कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
#बुरे_दिन_जानेवाले_है
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CM Yogi Adityanath ने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करते हैं, उन्हें भारत में रहने का अधिकार नहीं है।
मेरा मानना है वंदे मातरम् ही क्यों संविधान विरोधियों , तिरंगे को ना मानने वाले,गांधी , अम्बेडकर का अपमान करने वाले, गोडसे को मानने वालो को भी देश में रहने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।

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ये डील नहीं, ढील है।
भाजपा की उल्टी गणित से जनता फिर पूछ रही है : ज़ीरो (0) बड़ा या अठारह (18%)
इस देश में कोई भी डील जो 70% कृषि आधारित जनता के लिए हानिकारक है वो कभी लाभकारी साबित नहीं हो सकती है।
कृषि और डेयरी को बचाने का जो झूठ सदन के पटल पर बोला जा रहा है, उसका संज्ञान भविष्य में लिया जाएगा और झूठा साबित होने पर कार्रवाई की माँग भी की जाएगी।
जब डील की शर्तें निर्धारित और हस्ताक्षरित ही नहीं हुई हैं तो कोई पहले से दावे कैसे कर सकता है।
कोई भी ट्रेड लाभ-हानि की तराज़ू पर तोला जाता है। ऐसे में सवाल ये है कि फ़ायदे में कौन है और नुक़सान में कौन।
भाजपाई हानि का उत्सव न मनाएं। ये डील एक आपदा है, भाजपाई इसमें कमीशनख़ोरी के अवसर न तलाशें।
ये समझौता नहीं, समर्पण है।
लोग कह रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि भारत से 500 अरब डॉलर की रंगदारी वसूली जा रही है।
जो ट्रेड डील को मील का पत्थर बता रहे हैं, उनकी अक्ल पर पत्थर पड़ गये है।
जो कह रहे हैं कि ये कूटनीति की जीत है दरअसल वो भी जानते हैं कि अमेरिका कूट नीति को कूट-कूट मन माफ़िक साँचे बना रहा है, जिसमें वो अपने मुनाफ़े का कारोबार ढाल सके।
जो इसे भाजपा सरकार के दबदबे की जीत बता रहे हैं, वो दरअसल दबा-दबा महसूस कर रहे हैं। उनकी जीभ भी दबी है और गर्दन भी।

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हम रिक्तताओं से जन्मे हैं,
और रिक्तताओं में ही लौटेंगे।
~ऐली एंग
मैंने चाँद को मुँह समझकर
उसमें उँगलियाँ डालीं,
देखूँ,कितना खोल सकता हूँ उसे।
किसी ने कहा था,
सेक्स तो बस नलिकाओं का सिलसिला है।
तो क्या नली उल्टा पड़ा छेद है?
या दो रिक्त स्थानों का आलिंगन?
मैं और मेरा प्रेम
सोफ़े के दो सिरों पर बैठे थे,
पैरों की उँगलियाँ एक-दूसरे में फँसी हुई।
क्या तुमने कभी किसी को इतना चाहा है
कि मन हुआ हो ,
ईश्वर तुम्हारे भीतर
एक नई जगह खोल दे,
ताकि उसके परिपूर्ण हाथ
उस कोने तक पहुँच सकें
जहाँ कोई और कभी न पहुँचा हो…
किसने छुआ? तीस बरस पहले
चिकित्सकों ने मेरी माँ के शरीर को चीरकर
मुझे बाहर निकाला ,निस्पंद, मौन ,
और वह दर्द से ऊपर कहीं तैरती रही,
एक पर्दा उसके तन को दो भागों में बाँटता हुआ।
वह अनेक हिंसाओं में पहली थी
जिसे पहुँचाने का इरादा मेरा न था,
पर वह हुई।
मैंने कभी उस निशान को देखने की हिम्मत नहीं की।
मैं अजनबियों को पैसे देता था
कि वे मेरे भीतर छेद करें
और उन्हें धातु से सजा दें,
भौंह, निप्पल, नाक का सेप्टम ,
सजावट का उन्माद,
त्वचा के टूटने का आकर्षण।
मैंने सोचा,
अगर दर्द को स्वयं बुलाऊँ,
तो फिर कोई मुझे चोट नहीं पहुँचा सकेगा।
पर अंत में…
छल्ले गिर गए और शरीर
फिर से ताज़ा, अभेद्य हो गया।
कुछ छेद क्षणिक होते हैं,
कुछ को मैं कब्र तक साथ ले जाऊँगा।
धरती का धँसाव, झरोखा,
मैनहोल, के-होल, देह के छिद्र,
ब्लोहोल, ग्लोरीहोल ,
और मेरे दिल में ईश्वर के आकार का एक खालीपन।
अब मैं न भरने की तलाश में हूँ,
न भरे जाने की।
मुझे यूँ ही पवित्र रहने दो,
जबकि दुनिया मुझसे होकर गुजरती रहे।
मुझे खाली करने वाला छेद नहीं ,
मुझे दरार की लालसा है।

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वो नहीं मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद कर के न दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
न गिला किया, न ख़फ़ा हुए, यूँ ही रास्ते में जुदा हुए
न तू बेवफ़ा, न मैं बेवफ़ा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
वो ग़ज़ल कि कोई किताब था, वो गुलों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख़्वाब था, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
मुझे पतझड़ों की कहानियाँ न सुना सुना के उदास कर
तू ख़िज़ाँ का फूल है मुस्करा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
वो उदास धूप समेट कर कहीं वादियों में उतर चुका
उसे अब न दे मेरे दिल सदा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
ये सफ़र भी कितना तवील है, यहाँ वक़्त कितना क़लील है
कहाँ लौट कर कोई आएगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
कोई फ़र्क़ शाहो-गदा नहीं कि यहाँ किसी को बक़ा नहीं
ये उजाड़ महलों की सुन सदा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
तुझे ऐतबारो-यक़ीं नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं
न मलाल कर मेरे साथ आ, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
Good Night x mate🌹

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