Vivek Choudhary
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Vivek Choudhary
@Jobner_Vivek
Secretariat Employee Union
Katılım Ağustos 2024
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इस महंगाई के दौर में सरकार को प्रोबेशन में वेतन बढ़ाना चाहिए।
@1stIndiaNews
@RajCMO @KumariDiya
@AslamChopdar11 @JATbera1
@LDCsangh
#प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन

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एक नया कर्मचारी जब सेवा में आता है, तो वह सबसे ज्यादा उत्साह और ऊर्जा के साथ काम करता है। लेकिन जब महीने के अंत में उसे 'आधा अधूरा' वेतन मिलता है, तो वह उत्साह फीका पड़ जाता है।
किराया: पूरा लगता है,राशन: पूरा आता है।
पेट्रोल: पूरा जलता है,मेहनत: पूरी लगती है।
...तो फिर वेतन अधूरा क्यों?
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
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आज कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित मांग—प्रोबेशन काल में वेतन वृद्धि—को लेकर साथियों के साथ विवेक चौधरी ने आदरणीय कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत से शिष्टाचार मुलाक़ात की।
मुलाक़ात के दौरान प्रोबेशन अवधि में मिल रहे अल्प वेतन की व्यावहारिक कठिनाइयों एवं कर्मचारियों पर पड़ रहे आर्थिक प्रभावों के तथ्यात्मक बिंदु मंत्री महोदय के समक्ष विस्तार से रखे गए। विवेक चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह मांग न केवल न्यायसंगत है, बल्कि हजारों युवा कर्मचारियों के सम्मान और भविष्य से भी जुड़ी हुई है।
मंत्री महोदय ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि लंबे समय से लंबित इस जायज मांग को शीघ्र ही माननीय मुख्यमंत्री महोदय के समक्ष प्रस्तुत कर सकारात्मक एवं उचित कार्यवाही सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
कर्मचारियों में इस पहल को लेकर नई उम्मीद और विश्वास का संचार हुआ है।

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आज कर्मचारियों की बहुप्रतीक्षित मांग—प्रोबेशन काल में वेतन वृद्धि—को लेकर साथियों के साथ विवेक चौधरी ने आदरणीय कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत से शिष्टाचार मुलाक़ात की।
#प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन 🔥
@SureshRawatIN
@Jobner_Vivek @ShrawanLDC @LDCsangh @NFUofficial1 @JeetuS_gurjar

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#Jaipur: प्रोबेशनर्स के वेतन में वृद्धि की मांग
कर्मचारी नेता विवेक चौधरी ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत से की मुलाकात, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से...
#RajasthanWithFirstIndia @ashokgehlot51 @rituraj9999

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#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन अभियान के तहत सचिवालय कर्मचारी संघ नेता @Jobner_Vivek । इसमें आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। @LDCsangh @Radhemahwa @ShrawanLDC @An1l_choudhary
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@kgbayana विधानसभा की कार्रवाई पूर्ण होने तक इंतजार करते हैं उसके बाद कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे....
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@Jobner_Vivek Court ka option bhi to h ap to aadesh karo ham tan man dhan se teyar h
HT

@Son_of_Soldier_ @LDCsangh @JATbera1 @maheshkum2617 @lkantbhardwaj @harlalgodara @BhajanlalBjp @AyushiTiwa96319 भाई जी इस बार विधानसभा कार्रवाई पूरी होने तक इंतजार करते हैं उसके बाद कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे....
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@LDCsangh @Jobner_Vivek @JATbera1 @maheshkum2617 @lkantbhardwaj @harlalgodara @BhajanlalBjp @AyushiTiwa96319 Coart जाओ ना यार अगर पैसे की दिक्कत है तो एक ग्रुप बना लो ताकि सभी के पैसे थोड़ा थोड़ा आ जाए...
एक पर भार भी नहीं बढ़ेगा
लड़ाई लड़ने है अगर हक की तो कोर्ट जाओ और अगर राजनीति चमकानी है नेता के रूप में तो नेताओं के पास धक्के खाते रहे भाई,मामला अवगत कराते रहो 🙏🙏
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राजस्थान सरकार के इस बजट में प्रोबेशन अवधि में पूर्ण वेतन की घोषणा नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा जरूर है, लेकिन इस पूरे आंदोलन में शासन सचिवालय कर्मचारी नेता श्री विवेक चौधरी जी की भूमिका सराहनीय रही है।
विवेक जी ने इस मुद्दे को सिर्फ एक मांग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कर्मचारियों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बनाया। उन्होंने व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया, हजारों कर्मचारियों को एकजुट किया और लगातार जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों से मिलकर मजबूती से पक्ष रखा।
उनका नेतृत्व, संघर्षशीलता और कर्मचारियों के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है। उन्होंने हर मंच पर कर्मचारियों की आवाज बुलंद की और यह विश्वास दिलाया कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक प्रोबेशन में पूर्ण वेतन का न्याय नहीं मिल जाता।

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परिवीक्षा अवधि में कर्मचारियों को पूरा वेतन देना हाईकोर्ट को कहना पड़ा, यह खुद में सिस्टम की बड़ी नाकामी का सबूत है। सवाल यह है कि जो बात इंसाफ और तर्क से साफ थी, उसके लिए कर्मचारियों को अदालत का दरवाज़ा क्यों खटखटाना पड़ा?
प्रोबेशन के नाम पर सालों तक 70%, 80% या 90% वेतन देना दरअसल सस्ते श्रम का सरकारी मॉडल बन चुका था। समान काम, समान जिम्मेदारी, लेकिन वेतन में खुली भेदभाव नीति—और वो भी सरकार द्वारा लागू की गई।
यह फैसला बताता है कि प्रशासन ने जानबूझकर कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाया। नए भर्ती हुए युवा कर्मचारी विरोध नहीं कर सकते थे, इसलिए उनकी जेब पर कैंची चलाना आसान समझ लिया गया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे अवैध सर्कुलर वर्षों तक लागू रहे और किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे रोकने की जरूरत नहीं समझी। क्या कर्मचारी सिर्फ आदेश मानने की मशीन हैं, जिनके अधिकार तभी याद आते हैं जब कोर्ट डांटे?
हाईकोर्ट का यह फैसला राहत जरूर है, लेकिन यह भी सवाल छोड़ जाता है—जो पैसा गलत तरीके से काटा गया, उसकी जवाबदेही कौन लेगा? अगर अब भी ऐसे फैसलों से सबक नहीं लिया गया, तो शोषण की यह व्यवस्था नए नामों के साथ दोबारा लौट आएगी।

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सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट मत रहा है कि—
“Equal Work, Equal Pay” यानी समान कार्य के लिए समान वेतन।
जब प्रोबेशन या फिक्स्ड पे पर कार्यरत कर्मचारी से 100% जिम्मेदारी, 100% समय और 100% काम लिया जा रहा है, तो फिर वेतन आधा या कम देना सरासर अन्याय है।
काम पूरा → जिम्मेदारी पूरी → जवाबदेही पूरी
तो फिर
वेतन भी पूरा क्यों नहीं?
यह व्यवस्था युवाओं के श्रम का शोषण है और वर्षों से चली आ रही एक गलत परंपरा है, जिसे अब खत्म होना चाहिए।
आपका यह मुद्दा पूरी तरह न्यायसंगत है और इसे मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
✍️ #प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन
✍️ #EqualWorkEqualPay
✍️ #युवाओं_के_साथ_न्याय

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प्रोबेशन में जब काम पूरा ले रहे ह तो वेतन भी पूरा मिलना चाहिए
@BhajanlalBjp
#प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन

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कर्मचारियों की पीड़ा है, प्रोबेशन एक अभिशाप है।
@Jobner_Vivek @LDCsangh
#प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन

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