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@Journomukesh

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Jaipur Katılım Ekim 2009
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Cockroach Janta Party
CJP’s Five-Point Agenda for 2029 We call upon leaders of all opposition parties, their supporters, and social activists to stand behind our Five-Point Agenda. It doesn’t matter to us which party you belong to (except for BJP), if you want to save democracy, support #CJP2029
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@dibang मैंने एक documentary में देखा और सुना था कि यरुशलम में आज भी गलियों के उन पत्थरों तक को नहीं हटाया है जिन पर चलकर ईसा को सूली पर चढ़ने को ले जाया गया था l हमारे यहां corridors के नाम पर इतिहास उखाड़ रहे हैं l
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Dibang
Dibang@dibang·
@Journomukesh Itihaas hai. Vo tareekh jo beet gai. Itihas padhte hain usase seekhne ke liye, aaj ko janane ke liye. Kyon badalna use.
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Dibang
Dibang@dibang·
लो जी, लाहौर में चल रहा है बदले नामों को फिर बदलने का दौर. इस्लामपुरा अब फिर कृष्णनगर मौलाना ज़फर चौक अब फिर लक्ष्मी चौक बाबरी मस्जिद चौक अब फिर जैन मंदिर चौक फातिमा जिन्ना रोड अब फिर क्वींस रोड नाम बदल गए हैं. नए नामों के बोर्ड लग गए हैं और कोई इसका विरोध नहीं कर रहा है. कट्टरपंथी भी नहीं. बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद ये सिलसिला शुरू हुआ था. मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने कहा: हमें यूरोप से सीख लेनी चाहिए. वो ऐतिहासिक नामों से छेड़छाड़ नहीं करते हैं. लाहौर के पुराने नाम हमारा इतिहास हैं इसे हमें सहेजना है बदलना नहीं हैं. लाहौर के इतिहास से ही इसकी पहचान है. पुराने नाम और इमारतें इसका सबूत हैं. 👉 इधर भी कुछ ऐसी गुंजाइश है क्या?
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@sara75165335 कोई नहीं समझ रहा क्योंकि अभी Hindu खतरे में है काशी मथुरा बाकी है l
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꧁༒SᴀRA༒꧂
꧁༒SᴀRA༒꧂@sara75165335·
देश में भयानक बेरोजगारी, फिर भी अडानी का अमेरिका में ₹1 लाख करोड़ का हवाई वादा! वीडियो विश्लेषण के अनुसार, भारत में बेरोजगारी और डॉलर संकट गहराया हुआ है। इसके बावजूद मीडिया में खबर है कि अडानी अमेरिका में 10 अरब डॉलर (करीब ₹1 लाख करोड़) निवेश करेंगे। बड़ा सवाल यह है कि अडानी का सारा व्यापार भारत में है और कमाई रुपये में होती है, तो यह विदेशी मुद्रा (डॉलर) कहां से आएगी? हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद जो अडानी ₹20,000 करोड़ का राइट्स इश्यू नहीं बचा पाए थे, वे इतना बड़ा निवेश कैसे करेंगे? यह सब सिर्फ न्यूज़ में बने रहने की हवा-हवाई 'फितूरबाजी' लगती है। ऊपर से IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने भी चेतावनी दी है कि भारत का सरकारी कर्ज GDP के 100% तक पहुँच सकता है, जिससे वित्तीय अस्थिरता बढ़ेगी। ऐसे संकट के समय विदेशी मुद्रा को बाहर भेजना देश के लिए और भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। यह वीडियो भारत के मौजूदा आर्थिक संकट, डॉलर की कमी और अडानी के इस बड़े विदेशी निवेश के वादे के पीछे की असलियत को गहराई से समझने में मदद करता है #ArtOfGiving #Adani #Neet #Dollar
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@askrajeshsahu 2024 और 2025 के पेपर भी leak हुए थे और इन्ही लोगों ने किए थे l यह बात तो साबित ही है l
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Rajesh Sahu
Rajesh Sahu@askrajeshsahu·
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET)- 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार विकास बिंवाल को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कॉलेज टेस्ट में कई बार वह एब्सेंट रहा और जिन टेस्ट में उसकी मौजूदगी रही, उसमें भी वह सिर्फ 30 फीसदी अंक ही ला सका। इसके कारण वह अधिकांश टेस्ट में फेल था। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि विकास पढ़ाई में कमजोर छात्र था। वह 12वीं में सेकेंड डिवीजन से पास हुआ था, लेकिन 2025 के NEET में उसका सिलेक्शन 85.11% पर्सेंटेज के साथ हुआ। इसके कारण सीबीआई ने 2025 में हुए NEET पेपर को भी जांच के दायरे में लिया है।
Rajesh Sahu tweet media
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
यह लेख पढ़ने योग्य है.....एक बार जरूर पढ़िए.. x.com/i/status/20555…
Mayur Waghela I.N.D.I.A 🇮🇳@Mayur52974592

माननीय कॉक्रोस्टिस महोदय, आपको 'माननीय' लिखते हुए उंगलियाँ थोड़ी झिझक रही हैं। वजह यह नहीं कि कुर्सी छोटी है, वजह यह है कि कुर्सी इतनी बड़ी हो चुकी है कि शायद उस पर बैठा आदमी नीचे खड़े लोगों की चीखें सुन ही नहीं पाता। इंसाफ़ पाने के लिए शायद अब जमीन से कुर्सी तक लिफ्ट लगाए जाने की जरूरत है। आपको पत्र लिखना थोड़ा कठिन काम है। इसलिए नहीं कि शब्द नहीं मिलते, बल्कि इसलिए कि इस देश में अब न्याय पर बात करते समय लोग पहले कमरे का दरवाज़ा बंद करते हैं, फिर फुसफुसा कर बोलते हैं। लोकतंत्र में नागरिकों का यह सावधान स्वर शायद अदालतों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। कहा जाता था कि अदालत आख़िरी उम्मीद होती है। लेकिन अब लगता है कि उम्मीद भी पहले वकील करती होगी, फिर तारीख़ लेती होगी, फिर थककर रिकॉर्ड रूम के किसी कोने में बैठ जाती होगी। कभी सुना था कि न्यायपालिका लोकतंत्र की प्रहरी होती है। अब लगता है प्रहरी तो है, मगर शायद वीआईपी ड्यूटी पर लगी हुई है। आम आदमी दरवाज़े पर खड़ा रहता है और भीतर से आवाज़ आती है, “लिस्टेड नहीं है।” प्रिय कॉक्रोस्टिस महोदय, आपकी अदालतें बड़ी अद्भुत जगह हैं। किसी मामले में रात दो बजे सुनवाई हो जाती है, और किसी में पीढ़ियाँ बूढ़ी हो जाती हैं। शायद न्याय भी अब इमरजेंसी और नॉन-इमरजेंसी पैकेज में आने लगा है। गरीब आदमी का मामला साधारण डाक से चलता है, और सत्ता से जुड़ी फाइलें शायद ब्लू टिक वाले व्हाट्सऐप की तरह सीधे स्क्रीन पर चमक उठती हैं। अदालत भावनाओं से नहीं चलती। बिल्कुल सही बात है। अगर भावनाओं से चलती तो शायद किसी माँ की चीख़, किसी बेरोज़गार की टूटती उम्मीद, किसी जेल में बंद व्यक्ति की घुटन, किसी पत्रकार की खामोशी... इनमें से कुछ तो सुनाई देता। लेकिन अदालतें तो सिद्धांतों से चलती हैं... और सिद्धांत भी इतने ऊँचे कि आम आदमी उन्हें देखने के लिए गर्दन ऊपर करते-करते सर्वाइकल का मरीज बन जाए। और क्या शानदार व्यवस्था बनाई है आपने! जनता वोट देकर सरकार चुनती है, फिर सरकार अपने मित्र पूंजिपतियों के हक़ में फैसले लेती है, फिर जनता अदालत जाती है, फिर अदालत कहती है हम नीति में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यानी जनता अंत में वहीं खड़ी रह जाती है जहाँ से चली थी। इसे ही शायद संवैधानिक चक्रव्यूह कहते होंगे। प्रिय कॉक्रोस्टिस महोदय, आपकी न्याय की कुर्सी इतनी पवित्र बना दी गई है कि उसके बारे में सवाल पूछना भी लगभग सांस्कृतिक अपराध हो गया है। मानो किसी प्राचीन मंदिर की मूर्ति हों। फर्क सिर्फ इतना है कि मंदिरों में कभी-कभी प्रसाद तो मिल जाता है... लेकिन आपके यहाँ मिलती है अगली तारीख़। आपके हर बड़े फैसले के बाद न्यूज़ चैनल का एंकर चीख़ता है, लोकतंत्र की जीत! अब जनता कन्फ्यूज़ है कि लोकतंत्र इतनी बार जीत कैसे जाता है जबकि उसकी हालत हर साल और दयनीय होती जा रही है। इतिहास बड़ा बेरहम होता है, कॉक्रोस्टिस महोदय। वह यह नहीं देखता कि आदेश कितने पन्नों का था। वह सिर्फ यह देखता है कि जब नागरिक डर रहा था तब अदालत उसकी ढाल बनी या दर्शक दीर्घा में बैठकर प्रक्रिया समझाती रही। फिर भी लोग अदालत की तरफ देखते हैं। क्योंकि इस देश में उम्मीद मरती नहीं, बस तारीख़ पर चली जाती है। आपका, वही आम नागरिक 'ऑर्डर रिज़र्व्ड' शब्द सुनकर जिसके दिल की धड़कन बढ़ जाती है...!! सौजन्य:- @ManojAbhigyan @RahulGandhi @Dr_MonikaSingh_ @garrywalia_ @sakshijoshii @Rashmi22302711 @AnumaVidisha @RuchiraC @maulinshah9 @Iam_MKharaud @Kumarjyoti49291 @GoIShadow @sudhirchaudhary @AMISHDEVGAN @anjanaomkashya @RubikaLiyaquat @chitraaum @RajatSharmaLive @AwasthiGyyan @PMNehru @RaGa4India @Raga3689 @Pawankhera @SupriyaShrinate

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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@PMishra_Journo @8PMnoCM CJI ने अपनी घटिया मानसिकता को सार्वजनिक कर दिया है l अब इस देश के युवा और पत्रकारों को निर्णय करना है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी पर विराजमान व्यक्ति जिसकी ड्यूटी ही है नागरिको की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना ,वही नागरिक सम्मान की धज्जियाँ उड़ा रहा हो तो क्या करना चाहिए?
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Prabhakar Kumar Mishra
Prabhakar Kumar Mishra@PMishra_Journo·
CJI की सफाई: CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कॉकरोच वाली उनकी टिप्पणी को लेकर हो रही आलोचना पर स्टेटमेंट जारी किया है। CJI ने कहा है कि कॉकरोच और पैरासाइट्स वाली टिप्पणी देश के युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे कानून और मीडिया जैसे पेशों में प्रवेश कर रहे हैं। " मेरी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक वर्ग द्वारा जिस तरह गलत तरीके से उद्धृत किया गया, उसे पढ़कर मुझे पीड़ा हुई है।..... मैं भारत के युवाओं के प्रति अत्यंत सम्मान रखता हूं।" लेकिन अब इस सफाई का क्या फ़ायदा! कॉकरोच वाली बात तो पूरे देश में फैल गई। #CJI #JusticeSuryakant
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@KraantiKumar यूपी की जनता आज भी मायावती के समय सख्त कानून व्यवस्था को याद करती है.उन्होंने पूरी यूपी पुलिस को पलट दिया था.उन्होंने पुलिस वालों के सिर्फ जिले ही नहीं बदले थे बल्कि इलाके और रेंज ही बदल दी थी.पुलिस को काम करना ही पड़ रहा था.
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Kranti Kumar
Kranti Kumar@KraantiKumar·
वरिष्ठ पत्रकार सरत प्रधान वैसे तो बहन मायावती जी के आलोचक हैं, लेकिन उन्होंने पत्रकार ज़ीनत के पॉडकास्ट पर बहन मायावती जी बारें में ऐसी बातें कहीं जिसके बारें में कम ही लोगों को पता है. सरत प्रधान ने कहा आजमगढ़ का एक बाहुबली रमाकांत यादव गरीब आदमी को पीट पीटकर उसकी संपत्ति पर कब्जा कर रहा है, इसकी खबर न्यूज़ चैनलों पर आ रही थी. बहनजी ने इस खबर को न्यूज़ चैनल पर देख लिया. तब रमाकांत यादव बसपा से सांसद था. बहन मायावती जी ने रमाकांत यादव को अपने दफ्तर में बुलाया. रमाकांत यादव दफ्तर के बाहर आकर मिलने के लिए रुका था. बहनजी ने डीजीपी विक्रम सिंह को फ़ोन कर रमाकांत यादव को गिरफ्तार करवा दिया. आज कभी किसी सिटिंग CM ने अपने ही पार्टी को सांसद को इस तरह गिरफ्तार नही कराया. बहनजी के शासनकाल में कानून व्यवस्था मजबूत थी.
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
मी लॉर्ड! कॉकरोच और परजीवियों की ओर से एक विनम्र आग्रह thesootr.com/vicharmanthan/…
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
ऐसे judge के खिलाफ महाभियोग कार्रवाई होनी चाहिए। जिम्मेदार नागरिक न्यायिक मानकों व नैतिकता को गिरते हुए नहीं देख सकते। संस्था की गरिमा दांव पर है। विपक्ष के नेता @RahulGandhi को निंदा करनी चाहिए और CJI के खिलाफ महाभियोग लाने पर विचार करना चाहिए।bhaskar.com/national/news/…
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BJP
BJP@BJP4India·
Question 1: Source of Funds - Who Paid for Your Globetrotting? Rahul Gandhi, with a declared income of just ₹11 crore over a decade, how did you finance ₹60 crore worth of foreign luxury travel? ➢ First-class long-haul tickets ➢ Business jets for multi-city hops ➢ Five-star suites in London, New York, Berlin, and Doha and ➢ Entourage and protocol costs Your 2015 Southeast Asia junket alone swallowed 5.2 times your entire year’s declared income. Assets grew 37-fold from ₹55 lakh to ₹20 crore, yet travel expenditure finds no reflection. Is this black money? Undisclosed foreign funding? Or looted money of common Indians? Stop dodging, Rahul. Come clean on the money trail. India has watched on for 22 years, it is now asking.
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BJP
BJP@BJP4India·
Congress dynast Rahul Gandhi has made 54 traceable foreign trips, hopping across London, New York, Italy, Germany, Qatar, Vietnam, Cambodia, Maldives, Dubai, and now a secret Oman visit - over the past 22 years! Modelled cost? A jaw-dropping ₹60 crore first-class luxury, private charters, five-star hotels, full entourage and security. Sworn declared income over 10 years? Mere ₹11 crore. One single 2015 Southeast Asia trip alone cost ₹4.5 crore against just₹86 lakh declared income, 5.2 times his entire year’s earnings. *This is a massive funding scandal staring the nation. A look at the five massive questions Rahul Gandhi and the Congress must answer. ⬇️🧵*
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
राजस्थान हाई कोर्ट ने बिना मांगे ही एएमबी होटल्स को दे दी 100 करोड़ की जमीन thesootr.com/state/rajastha…
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@khurpenchh बिल्कुल आसान तरीका है l इसी फार्मूले से पैसा बचा रहे थे लेकिन कुछ जलने वालों ने बीवाल बंधुओं की प्रगति बर्दाश्त नहीं हुई बेचारे l
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Mukesh Kumar Verma
Mukesh Kumar Verma@mukeshdeshka·
"नए यूजर्स के लिए ब्लूटिक से लेकर payout तक की समस्त शंकाओं का समाधान"👇👇 ➡️ ब्लू टिक कब लें? आप अगर अधिक एक्टिव रहते हैं तो 500+फॉलोअर्स पर लें लेकिन अगर कम एक्टिव रहते हैं तो 1000+ फॉलोअर्स पर लें। ➡️ कौन सा प्लान लें? आप प्रीमियम प्लान लीजिए जो वेब से 427रू./माह और ऐप से 470रु./माह पड़ेगा। ➡️ ब्लू टिक लेने के बाद मुख्य फोकस कहां करें? ब्लू टिक लेने के बाद आपको अपने मोनेटाइजेशन के लिए फोकस करना होगा। ➡️ मोनेटाइजेशन के लिए क्या रणनीति अपनाएं? मोनेटाइजेशन की 5 शर्तें हैं : 1. आपके पास प्रीमियम या प्रीमियम+ सब्सक्रिप्शन होना चाहिए। 2. मोनेटाइजेशन के पिछले 3 महीनों में 5 मिलियन ऑर्गेनिक इंप्रेशन होना चाहिए। 3. कम से कम 500 प्रीमियम यानि ब्लू टिक फॉलोअर्स होने चाहिए। 4. आपका अकाउंट समर्थित देश में होना चाहिए। 5. आप 𝕏 के अनुबंध का पालन करते हों। इनमे से आपको नंबर 2 और नंबर 3 की शर्तों पर अत्यधिक फोकस करना है। बाकी शर्तें आप लगभग पूरी करते होगें। ➡️ 5 मिलियन के लिए क्या करें? 5 मिलियन के लिए आपको कुछ चीजें जरूर करनी है : 1. कुछ बड़ी आईडी का नोटिफिकेशन ऑन करिए और उनका पोस्ट आते ही कोई अच्छा सा कॉमेंट करिए। 2. दिन भर में लगभग 200 से 300 कमेंट्स का लक्ष्य रखिए। 3. अधिक से अधिक लोगों से जुड़ने का प्रयास करिए। 4. दिन भर में सिर्फ 8 से 10 पोस्ट करिए और जो भी पोस्ट करें तो उसे पिन रखें जब तक कि दूसरी पोस्ट नहीं आती है। 5. अभी पोस्ट पर कम फोकस रखना है आपका अधिक फोकस कमेंट्स करने पर और लोगों से जुड़ने पर होना चाहिए। 6. ब्लू टिक वाले लोगों से जुड़ने पर ज्यादा से ज्यादा फोकस करिए। इससे आपके 500 ब्लू टिक फॉलोअर्स वाली शर्त भी पूरी होगी और आपको रीच भी मिलेगी। ➡️ 5 मिलियन होने के बाद भी अकाउंट मोनेटाइज नहीं हो रहा है, क्या करूं? मोनेटाइजेशन के लिए 5 मिलियन ऑर्गेनिक इंप्रेशन होना आवश्यक है। लेकिन हर किसी के पास कुछ बॉट्स, सर्च इंजन स्कीमिंग और नकली इंप्रेशन होते हैं इसलिए 5 मिलियन के बाद भी मोनेटाइजेशन नहीं हो पता है। लेकिन निश्चिंत रहिए जैसे ही आपके 5 मिलियन ऑर्गेनिक इंप्रेशन होंगे आपको तुरंत मॉनेटाइज कर दिया जाएगा। ➡️ पे आउट किस आधार पर आता है? पे आउट के मुख्यतः दो आधार हैं: 1. वेरिफाइड यूजर्स इंगेजमेंट 2. आपके कंटेंट पर यूजर्स द्वारा बिताया गया समय ➡️ इंगेजमेंट रेट कितना होना चाहिए ? 5% से 11% के बीच के इंगेजमेंट रेट को एक स्वास्थ्य इंगेजमेंट रेट माना जाता है। ➡️ इंगेजमेंट क्या है ? 𝕏 पर एंगेजमेंट का मतलब है कि यूजर्स प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद सामग्री के साथ विभिन्न तरीकों से बातचीत करते हैं। इसमें लाइक, रीट्वीट, कमेंट, शेयर और ट्वीट के भीतर लिंक या हैशटैग पर क्लिक जैसी क्रियाएं शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक इंटरैक्शन यूजर्स की रुचि और सामग्री के साथ जुड़ाव के स्तर को दर्शाता है, जिससे वे इस बात के प्रमुख संकेतक बन जाते हैं कि आपकी सामग्री आपके दर्शकों के साथ कितनी अच्छी तरह जुड़ती है। ➡️ एंगेजमेंट रेट कैलकुलेशन कैसे करें.? एंगेजमेंट रेट एक महत्वपूर्ण मीट्रिक है जो आपकी सामग्री को उसकी रीच के सापेक्ष प्राप्त होने वाले इंटरैक्शन के स्तर को मापता है। इसकी गणना एंगेजमेंट की कुल संख्या (जैसे लाइक, रिपोस्ट, कमेंट्स, आदि) को इंप्रेशन की कुल संख्या (यूजर्स को आपकी सामग्री प्रदर्शित होने की संख्या) से डिवाइड करके और फिर इसे प्रतिशत के रूप में व्यक्त करने के लिए 100 से गुणा करके की जाती है। ➡️ पे आउट की और भी क्या शर्तें हैं? पे आउट की एक शर्त यह है कि आपका 10 डॉलर से कम पे आउट नहीं आएगा। यदि आपने 10 डॉलर से कम अर्जित किए होंगे तो आपका पे आउट नहीं आएगा दूसरी बार में पूरा जोड़ के आ जायेगा। लेकिन पहली बार में पे आउट अच्छा ही आता है क्योंकि उसमे पिछले 3 महीने की एक्टिविटी जुड़ी होती है। दूसरा पे आउट जरूर कम आ सकता है क्योंकि उसमें सिर्फ 14 दिन की एक्टिविटी जुड़ी होती है। ➡️ पे आउट कब आता है? पे आउट हर दूसरे शुक्रवार को आता है और अगले बुधवार तक आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है। इसके अलावा आपका कोई और प्रश्न हो तो कमेंट्स में जरूर पूछिए। अब पढ़ते पढ़ते यहां तक आ ही गए हैं तो पोस्ट को लाइक और रीट्वीट भी कर दीजिए साथ में बुकमार्क करके सेव भी कर लीजिए।
Mukesh Kumar Verma tweet media
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
भारतीय रुपया अब 95.80 रुपये पर आकर शतक के बेहद करीब पहुंच गया है। पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले ही रुपये का मूल्य गिर रहा था। रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली प्रमुख मुद्रा है। जब रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 58-59 रुपये थी, तब क्या क्या बोल रहे थे!
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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
मंत्री जी तेल कम्पनियां सालों से भारी मुनाफा कमा रही थी वो कहाँ गया ? फ़रवरी से उनको घाटा होना बताया जा रहा है वो उनकी पिछले सालों की भारी भरकम कमाई का 0.1 फीसदी भी नहीं है l इस घाटे की भरपाई भारत सरकार को करनी चाहिए l x.com/i/status/20541…
ANI@ANI

#WATCH | Delhi: Union Minister for Petroleum and Natural Gas, Hardeep Singh Puri, says, "... If you look at the fiscal situation, if you look at the fact that my oil companies are losing Rs 1,000 crores every day, the under recovery is going to be Rs 1,98,000 crores. The losses are Rs 1 lakh crore, if you look at the quarter. In that context, how long can you keep it like this? Where is the oil? It used to be around $64 or $65. It has gone up to $115 in that basket..."

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Mukesh
Mukesh@Journomukesh·
@dineshbohrabmr राजस्थानी भाषा कौनसी है? इसकी लिपि क्या है? बोली और भाषा का फर्क़ कौन करेगा ? यदि भाषा मान ले तो कौनसी राजस्थानी बोली को भाषा माना जाये ? पूर्वी राजस्थान में कौनसी राजस्थानी भाषा पढ़ाई जाएगी?
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में अब राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक राजस्थानी भाषा शामिल करने के लिए नीति बनाने के निर्देश दिए हैं और 30 सितंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश पदम मेहता व अन्य की याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि करोड़ों लोग राजस्थानी बोलते हैं और 2003 में राजस्थान विधानसभा इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की अनुशंसा कर चुकी है।
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Nirmal Pareek
Nirmal Pareek@nirmal_pareek93·
क्या राजस्थान में एक सोशल पोस्ट की वजह से FIR दर्ज होगी? जितनी मेरी जानकारी है कि पत्रकार ने - प्रशासनिक पंगुता, न्याय का ढोंग, दिशाहीन और किंकर्तव्यविमूढ़, आत्ममुग्धता और पब्लिसिटी के प्रति गहरे झुकाव... जैसे शब्दों का पोस्ट में उपयोग किया था! मैं पत्रकार की भाषा से सहमत नहीं हूं, लेकिन क्या मुख्य सचिव एक पोस्ट की वजह से ही पत्रकार पर FIR दर्ज कराकर डराना चाहते हैं? क्या पत्रकार इस वजह से कुछ लिखने से डरेंगे कि मुख्य सचिव FIR करवा देंगे? मैं, राजस्थान के सभी तरह के पत्रकारों से आह्वान करना चाहता हूं कि प्रदेश में सिस्टम की इस परिपाटी के खिलाफ हमें सचेत रहना होगा, ये आज महेश झालानी पर FIR कर रहे हैं, कल हम पर भी करेंगे! पत्रकार महेश झालानी तो चुपचाप सरेंडर हो गए, क्यों हो गये? ये तो वही जाने...! और मुख्य सचिव जी आपने जब से पद संभाला है, तब से जमकर PR कर रहे हो, लेकिन एक पोस्ट ने आपको इतना विचलित कर दिया कि FIR तक पहुंच गए? ये मुगल काल नहीं, ना ही अंग्रेजी शासन... लोकतंत्र में जनता और पत्रकारों को आलोचना का उतना ही अधिकार है, जितना तारीफ का है... भारत का संविधान भी इसके पक्ष में खड़ा है, संविधान असल मायने में जनता की ही मुखर और मजबूत आवाज है! #Rajasthan
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