Aashu Juneja
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Aashu Juneja
@JunejaAashu
ਜਿਸ ਕੇ ਸਿਰ ਊਪਰਿ ਤੂੰ ਸਵਾਮੀ ਸੋ ਦੁੱਖ ਕੈਸਾ ਪਾਵੈ ।।
Padampur, sri ganganagar Katılım Aralık 2020
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मजदूर दिवस की वो दहला देने
वाली कहानी !
एक बार आँखें बंद करके सोचो...
1886, शिकागो।
फैक्टरियों में लोग 12 से 16 घंटे
जानवरों की तरह काम करते थे।
कोई आराम नहीं, कोई सुरक्षा नहीं,
सिर्फ़ पसीना और शोषण।
फिर आया वो दिन — 1 मई 1886
लाखों मजदूरों ने एक स्वर में
आवाज दी:
“8 घंटे काम! 8 घंटे आराम!
8 घंटे अपना जीवन!”
हड़ताल शुरू। पूरा शहर ठप।
4 मई को हेमार्केट स्क्वायर में शांत रैली।
अचानक बम फटा...
पुलिस ने अंधाधुंध गोलियाँ चला दीं।
खून से सड़कें लाल हो गईं।
कई मजदूर शहीद।
8 नेताओं पर झूठा मुकदमा,
4 को फाँसी।
लेकिन उनकी आवाज़ मरी नहीं...
दुनिया भर में आग की तरह फैल गई!1889 में पेरिस में फैसला हुआ —
1 मई = विश्व मजदूर दिवस
भारत में 1923, चेन्नई।
सिंगरावेलु चेट्टियार ने पहली बार
लाल झंडा लहराया।
आज जब तुम 8 घंटे कि शिफ्ट के
हिसाब से काम करते हो या
1 मई को छुट्टी मनाते हो,
याद रखो —
ये व्यवस्था ये छुट्टी किसी ने फ्री में
नहीं दी।
ये खून-पसीने की जीत है!
हर वो इंसान जो मेहनत कर रहा है —
फैक्ट्री, खेत, सड़क, दुकान, ऑफिस,
रात की शिफ्ट...
तुम इस देश की असली रीढ़ हो!
शुभ मजदूर दिवस 🙏
तुम्हारी मेहनत को सलाम!
जय हिंद! जय मजदूर!

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@Manish_SGR1 Bai ji aapki jaankari ke liye bta du, ₹ 1200 se niche shayd hi mile, ho sakta 50-70 km ho jae, but mujhe ni lagta. Isi liye mere vir ab rate ki tension ni jo jrurat tha le liya, bas ab jo favorite ho- god name ya song suno/gunao aur neendi lo GN.
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दोस्तो आज में ये चार पाई लेकर आया हु हमारे यहां कल से लाइट नहीं हैं।
इस लिए रात में बहार सोना पड़ेगा बहुत अर्जेंट हो गया था इस लिए लेनी पढ़ी बहुत महंगी आई गई 1200 रूपए की।
वो पैसे कम नहीं हो रहा था 3 वार में उस के पास गया फिर भी उस ने 20रू भी कम नहीं किए।
फिर मजबूरी में मुझे 1200 में लेनी पढ़ी हमारे यहां इस को खटिया भी बोला जाता हैं।


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@BR30SMI @itspixora @grok Plz test again,
कई बार कार्ड में हार्मोंन ज्यादा या 2 जगह ड्राप हो जाता है इसलिए ये निशान आ जाता हैं जो कन्फ्यूजन पैदा करता है, इससे 50-50 चांस बनता है । सो दुबारा चेक
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@nknaresh427 अब यार कैसे समझाए लोगों को , कम्पनिया बहोत हो गयी है बहोत ही बहोत बस मानलो अंत ही नहीं है छोटी छोटी का तो, ब्रांड कितने ही गिनालो कम है। एक बात और azmarda को लेलो अब यही लेनी है चाहे cidmus कम रेट की है
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आज मेरी मेडिकल शॉप पर एक बूढ़ा आदमी आया
इस दवा का खाली पत्ता लेकर आया वो शुगर का टैब लेट था
तो उन्होंने बोला बेटा यह मिल जाएगा क्या तो मैंने कहा बाबूजी यह तो मैं मंगवा सकता हूं कल आ सकती है
बाबूजी ने कहा कि बेटा खत्म हो गई है बिल्कुल एक भी टैबलेट नहीं है तो मुझे आज ही चाहिए
मैं आसपास की मेडिकल वालों से ट्राई किया पर यह पता नहीं मिला
तो मैंने कहा बाबूजी दूसरी कंपनी का दे दूं क्या और मेरे पास डॉक्टर रेडी का ब्रांड पड़ा हुआ था
जो की इंटरनेशनल ब्रांड है पर बाबूजी ने मना कर दिया उन्होंने कहा कि बेटा मैं मर जाऊंगा पर दूसरी कंपनी का आइटम नहीं लूंगा
बाबूजी ने एक गाली भी तोफ़े में दे दी 🫣
चाहे कितना ही ब्रांडेड हो ।
आजकल पढ़े-लिखे आदमी को समझना जा सकता है
पर पुराने लोग होते हैं ना उनको नहीं समझाया जा सकता फिर बाबूजी बिना पत्ता लिए ही चले गए।।

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@sahilsw15 @Prisha42i Medical ki chhodo ye to jisne likha hai vo bhi na padh payega 😂
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@Prisha42i 😂... Hey Bhagwan ye to Medical store wala bhi na padh paye...😅
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डॉक्टर साहब... ये कौन सी भाषा है भाई?🙄
देखो ये पर्ची...
Diagnosis और Medicines में क्या लिखा है, कोई समझ ही नहीं आ रहा!
ये किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पर्ची है।
आम आदमी तो दूर, दूसरे डॉक्टर को भी समझ नहीं आएगी।
ऐसी घुंघराली लिखावट देखकर सर पकड़ लेते हैं लोग। दवा का नाम तक साफ नहीं, तो मरीज कैसे लेगा?
सबसे दुख की बात - ये लापरवाही मरीज को परेशानी में डाल देती है।
आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है?

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@al_jeera @Ayurvedictips_ वैसे भी azithro काफी कम कर रही है
crfixime + azithro कॉम्बीनेशन सुबह शाम असर करती है ख़ासकर जैसे गले खराब के लिए साथ एंटीकोल्ड
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@Ayurvedictips_ मुझे असर नहीं करती।...
एम्पिसिलिन भी असर नहीं करती...
आजकल लपरवाही - PCM 650/Dolo होती है (PCM 500 तो भूल गए लोग)... पटियाला की आदत है
ओमप्रज़ोल, पैंटोप् आदि......
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@micchamasala शाहरुख खान' father - After independence, he pursued various ventures in Delhi, including transportation, furniture, and a canteen. He also famously stood for elections against Maulana Abul Kalam Azad. -google
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एक इंटरव्यू में परिणीति चोपड़ा ने कहा कि बचपन में उनके पास जन्मदिन पर केक खरीदने के पैसे नहीं होते थे इसलिए घर में रसमलाई काटकर जन्मदिन मनाया जाता था।
लेकिन उनका परिवार का बैकग्राउंड भी सुन लीजिए
Parineeti Chopra के पिता पवन चोपड़ा अंबाला कैंट में भारतीय सेना को सामान सप्लाई करने वाले बिजनेसमैन हैं,पढ़ाई अंबाला के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से हुई
17 साल की उम्र में इंग्लैंड चली गईं और मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल से बिजनेस फाइनेंस और इकोनॉमिक्स में ट्रिपल ऑनर्स डिग्री ली।
अब अगर इसे गरीबी कहते हैं तो ऐसी गरीबी भगवान सभी को दे!


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@micchamasala शाहरुख खान का भी ऐसा ही झूठा बयान था, " एक बार पैसे नहीं थे मै स्कूल पैदल जाता था etc " BUT
-=खान'स father- He held degrees in law (MA, LLB) and was proficient in several languages, including Persian, Sanskrit, Pashto, Punjabi, Hindi, Urdu, and English

@old_cricketer तभी कहते हैं 2-5 मिनट कि उत्सुकता/खुशी में कोई राज़ किसी को न बताएं ना ही कोई वादा करें ।।
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एक एलआईसी किश्त 10 हजार की पिछले साल जमा नहीं कर पाया था।
इस साल की भी डेट निकल गई तब ध्यान आया।
दो सालों की किश्त इकठ्ठा जमा कराने इक्कीस हजार कैश लेकर एलआईसी ऑफिस पहुंचा कि शायद कुछ पेनाल्टी भी लगेगी।
कैशियर से पूंछा तो उसने कहा कि भाई साहब बस इस साल की किश्त जमा होना है, पिछले साल वाली तो कल जमा हो गई।
मैं चौंका तो उसने बताया कि मेरा मनीबैक आना था और मेरा बैंक अकाउंट लगा है एलआईसी में।
उसमें कल पिछली किश्त और पेनाल्टी का पैसा काट के बाकी मनी बैक मेरे बैंक अकाउंट में भेज दिया है।
मैं बहुत खुश हुआ।
ग्यारह हजार बचे।
खुश होकर पिज्जा खाए कॉफी पी। लगभग 500 खर्च किए।
लौट के घर पहुंचा तो इतना खुश था कि एकदम गोल्डन साड़ी में ग्लैमरस लग रहीं कहीं जाने को तैयार बैठी उन्होंने पास बिठा कर प्यार से मेरी खुशी का राज पूंछा तो सब सच बता दिया।
कि ग्यारह हजार कैश का फायदा हुआ।500 खर्च भी कर आये खुशी में।
इंटरवल
वो दिखाया गया प्यार मेरे इस बात को बताने के बाद गायब हो गया और फिर
अब वो ग्यारह हजार कैश में से 500 खर्च के बाद बचे दस हजार पांच सौ कैश भी मेरे पास नहीं हैं।
वहीं मनी बैक के मेरे खाते में आये बारह हजार भी ऑनलाइन ट्रांसफर उनके खाते में करवाये जा चुके हैं।
ग्यारह हजार फायदे वाला आदमी तेईस हजार के नुकसान में पहुंच गया।
इस सच्ची कहानी से ये शिक्षा मिलती है कि ऐसे आर्थिक फायदे की बातें अपनी बीबी को बिल्कुल नहीं बतानी चाहिये।
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