Kailash Kumar retweetledi

जैसे ऐसा हो नहीं सकता
कि तुम प्रदूषित हवा में साँस लो
और तुम्हारे फेफड़ों पर असर ना पड़े,
वैसे ही ऐसा हो नहीं सकता
कि तुम मैली-कुचैली वाणी सुनो,
और तुम्हारे मन पर असर ना पड़े।
असर पड़ेगा!
'स्वामी विवेकानंद और व्यावहारिक' वेदांत पुस्तक से: books.acharyaprashant.org/listing/book-s…
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