Kashi Singh Airy

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@KashiSAiry

Official Account: Former Central President-Uttarakhand Kranti Dal, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष-उत्तराखंड क्रांति दल @UKD4Uttarakhand 4 times MLA UP/Uttarakhand

Uttarakhand Katılım Mart 2023
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Kashi Singh Airy@KashiSAiry·
माननीय मुख्यमंत्री @pushkardhami जी को सार्वजनिक पत्र लिखकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम स्व. बिपिन रावत जी के नाम पर रखने अनुरोध किया l उक्रांद ने इस संदर्भ मे मुख्यमंत्री को 1 वर्ष पूर्व पत्र भेजा था l मुख्यमंत्री उत्तराखंडियों की जनभावना का सम्मान करें l tiny.cc/jyn5vz
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Kashi Singh Airy@KashiSAiry·
देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना घटी है, चंपावत में एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म ने हमें झकझोर दिया है l जैसे कि लगातार सुनते आ रहे हैं इस घृणित आपराधिक कुकृत्य में भी भाजपा का एक पदाधिकारी शामिल था l भाजपा का चाल चरित्र सबके सामने उजागर हो रहा है, प्रदेश में घटित हर एक आपराधिक घटना में किसी ना किसी भाजपा नेता या उससे जुड़े व्यक्ति का नाम उजागर होता है l पूर्व में भी भाजपा के विधायक, नेता, पदाधिकारीयों का नाम महिलाओं से शोषण और अपराध में आता रहा है I पिछले 5 वर्षों उत्तराखंड में एक के बाद एक आपराधिक घटनाएँ घट रही हैं और लगातार अपराध में बढ़ोत्तरी हो रही है जो रुकने का नाम नहीं ले रही हैं l भाजपा सरकार के राज में उत्तराखंड देश में सबसे ज्यादा महिला अपराध वाले राज्यों में से एक बन गया है, आये दिन कोई ना कोई अपराध की घटनाएँ सुनने को मिल रही हैं I राज्य में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है, देवभूमि उत्तराखंड को भाजपा अपराध भूमि बनाने में लगी हुई है I
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Kashi Singh Airy@KashiSAiry·
उत्तराखंड भाजपा सरकार के राज में कानून व्यवस्था पटरी से उतर गई है, अपराध के मामले लगातार लगातार बढ़े हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, आए दिन अपराध की घटनाएँ सुनने को मिलती हैं I पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से उत्तराखंड पुलिस के मामले सामने आये हैं वो मानवता को शर्मसार करने वाले हैं, ऐसा लगता है राज्य के मुख्यमंत्री का अपनी पुलिस पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है I पुलिस का मुख्य कार्य कानून का पालन करवाना, जीवन, संपत्ति और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और अपराधों को रोकना है, लेकिन लगता है कि उत्तराखंड पुलिस ने अपने लिए अलग रूलबुक बना ली है I पुलिस का काम सजा देना नहीं है वो काम अदालतों का है, पुलिस का काम क़ानून व्यवस्था व्यवस्था बनाना है और उसे किसी भी संवेदनशील मामले में मानवीय व्यवहार दिखाना चाहिए I पिछले दिनों केशव थलवाल, बालम सिंह, पंकज कुमार आदि के साथ जिस तरह पुलिस का अमानवीय व्यवहार सामने आया है वो पुलिस का क्रूर पक्ष दिखाता है जो बहुत ही दुखद और शर्मनाक है I आज आमजन पुलिस के पास जाने से डरता है, उसे विश्वास नहीं रहता है कि पुलिस उसकी मदद करेगी, पुलिस विभाग को अपनी कार्यशैली सुधारने की जरुरत है, उसका काम कानून व्यवस्था सुधारना है ना कि आमजन को प्रताड़ित करना है I
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Kashi Singh Airy@KashiSAiry·
श्रम करने वाले हर मेहनतकश श्रमिकों को कोटि-कोटि नमन है l हर कामगार को उचित न्यूनतम मेहतनामा मिले, तभी देश सशक्त बनेगा I अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुभकामनाएँ I
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हमने कहा था कि यहाँ के जल, जंगल, जमीन आधारित यहाँ की अर्थव्यवस्था हो जिसपर स्थानीय लोगों को अधिकार और हक़-हकूक मिले I उत्तराखंड की नीतियां हिमालय के आस्तित्व, हिमालयी पर्यावरण और हिमालयी परिस्थितिकी को लेकर बनाई जाएँ l हिमालयी पर्यावरण और परिस्थितिकी का संरक्षण केवल राज्य के लिए नहीं पूरे देश के लिए जरुरी है I वर्तमान में हिमालयी पर्यावरण और परिस्थितिकी को नज़रअंदाज़ करके जिस तरह का विकास किया जा रहा है, उससे हमारे जल, जंगल और पहाड़ को ख़तरा उत्पन्न हो गया है I उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए विशेष भू-कानून की जरुरत है जिससे यहाँ कि सरकारें भू-माफियाओं के हाथों खेलती आ रही हैं और कभी भी सशक्त भू-कानून या हिमालयी परिस्थितिकी के अनुसार नीतियां लागू नहीं करी I उत्तराखंड के आस्तित्व को बचाने के लिए सशक्त भू-कानून और हिमालयी परिस्थितिकी के अनुसार नीतियां लागू करनी होंगी I जय हिमालय, जय उत्तराखंड #हिमालय #भू_कानून @UKD4Uttarakhand
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कितने शर्म की बात है कि हमारे पहाड़ के विधायक परिसीमन के मुद्दे पर चुप हैं और मैदान से आने वाले विधायक ने जनसंख्या आधारित परिसीमन के खिलाफ अपनी बात रखी I मंगलौर(हरिद्वार) से विधायक काजी निजामुद्दीन ने सदन में परिसीमन पर बात रखते हुए भाजपा सरकार के मंत्री और विधायकों से कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने नाम पर मोदी सरकार द्वारा लाया गया जनसंख्या आधारित परिसीमन बिलअगर संसद में पारित होगा तो पहाड़ की लोकसभा और विधानसभा सीटें घट जाएँगी I जनसंख्या आधारित परिसीमन के नुकसान के मुद्दे उत्तराखंड भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक जो पहाड़ की सीट से आते हैं वो सिर झुकाकर चुप रहे । दिल्ली दरबार के राजनीतिक फायदे के लिए पहाड़ के भाजपा विधायकों ने अपना धर्म-ईमान सब बेच दिया है और उन्हें पहाड़ की कोई चिंता नहीं है I शर्म आनी चाहिए भाजपा विधायकों को कि वो पहाड़ की सीटें कम करवाने पर तुले हुए हैं । सदन में परिसीमन से जनसंख्या आधारित नुकसान पर बात रखने वाले विधायक की राजनीति से ऊपर उठकर तारीफ होनी चाहिए, पहाड़ के हित के लिए परीसीमन के खिलाफ आवाज उठाने को विधायक काजी निजामुद्दीन का धन्यवाद I @UKD4Uttarakhand
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हमने चंद्र सिंह गढ़वाली जी से प्रेरणा लेकर और जनभावना से हमने गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने का निश्चय किया लेकिन 26 वर्षों से उत्तराखंड में बनी सरकारों ने गैरसैंण राजधानी के मसले को लटकाये रखा I हमने दिसंबर 1992 में गैरसैंण में चंद्र सिंह गढ़वाली जी की प्रतिमा स्थापित करके "चंद्रनगर", गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने की नींव रखी थी I उत्तराखंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसकी कोई स्थायी राजधानी नहीं है, ये उत्तराखंड के साथ एक भद्दा मजाक है I गैरसैंण उत्तराखंड की जनता की जनभावना है, लेकिन 26 वर्षों से यहाँ की सरकारों ने गैरसैंण स्थायी राजधानी को लटकाकर उत्तराखंड की जनता की जनभावना को कुचला है I हम गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने के लिए लड़ते रहे हैं और लड़ते रहेंगे, हम गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी बनाकर ही दम लेंगे I जय उत्तराखंड @UKD4Uttarakhand
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नारी शक्ति वंदन के नाम पर भाजपा सरकार की नौटंकी उत्तराखंड भाजपा सरकार 28 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र बुला रहा है, जिसमें वो विपक्ष की निंदा करेगी । पिछले कुछ दिनों भाजपा द्वारा सड़कों पर लगातार नारी शक्ति वंदन के नाम पर नौटंकी की जा रही है, भाजपा के नेता, विधायक, मंत्री सब सड़कों पर रैलियां निकाल रहे हैं । संसद में भाजपा का चुनावी नारी शक्ति वंदन अधिनियम बहुत ना होने के कारण गिर जाने को भाजपा इसका राजनीतिक फायदा उठाते हुए विपक्ष को महिलाओं विरोधी बताने में लगी है । सच ये है कि भाजपा महिलाओं को सदन में आरक्षण नहीं देना चाहती है, नारी शक्ति वंदन अधिनियम तो 2023 में ही पारित हो गया था लेकिन भाजपा सरकार ने अब तक सदन में महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं लागू किया, भाजपा इस बार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम पर जनसंख्या आधारित परिसीमन करवाना चाहती थी । उत्तराखंड भाजपा सड़कों पर नारी शक्ति वंदन के नाम पर नौटंकी कर रही है । पहाड़ों पर आए दिन जंगली जानवरों के हमलों का शिकार हो रही हैं, लेकिन ये सरकार उनकी कुछ मदद नहीं कर रही है, उल्टा भाजपा का एक मंत्री बोलते हैं कि महिलाएं क्यों जंगली जानवरों के पास जा रही हैं । कुछ वर्ष पहले उत्तराखंड भाजपा सरकार ने घस्यारी कल्याण योजना की घोषणा की थी कि महिलाओं को पशुओं के लिए 3 रूपये किलो चारा उपलब्ध करवाएंगे, लेकिन आज वो योजना कहां है इसका अता पता नहीं है । उत्तराखंड महिला अपराध में हिमालयी राज्यों में सबसे आगे है, आए दिन महिलाओं की हत्या हो रही है लेकिन भाजपा सरकार कानून व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं को सुरक्षा देने की जगह नौटंकी कर रही है । पहाड़ पर आए दिन अस्पताल, डॉक्टरों की कमी और ढंग का इलाज ना मिलने के कारण महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है लेकिन सरकार ने आजतक सुध नहीं ली कि महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा दी जाए । पहाड़ की महिलाएं शराब के ठेकों के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं और भाजपा सरकार की पुलिस उनके साथ दुर्व्यवहार कर रही है, तब भाजपा का नारी वंदन कहां चला जाता है । भाजपा ने कब महिलाओं के इन मसलों पर चर्चा करने के लिए विधानसभा का सत्र आयोजित किया, भाजपा ने किसी भी विधानसभा सत्र में महिलाओं से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं उठाया है । उत्तराखंड की जनता भी अब समझ रही है कि भाजपा केवल नौटंकी करने वाली पार्टी है और भाजपा का महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है । भाजपा नारी शक्ति वंदन के नाम पर केवल राजनीतिक नौटंकी कर रही है, ये विशेष सत्र और भाजपा की नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम इसी राजनीतिक नौटंकियों का हिस्सा हैं । उत्तराखंड की मातृशक्ति ने इस राज्य को बनाने और सामाजिक आंदोलनों में बढ़कर नेतृत्व किया है वो भाजपा के महिला विरोधी चाल चरित्र को समझती है और भाजपा की ऐसी नौटंकियों को अच्छी तरह जानती है । भाजपा को अगर महिलाओं के प्रति कुछ करना ही है तो उन्हें सुरक्षा दे, जंगली जानवरों के हमलों से बचाने का उपाय करे, महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधा दे, महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल बनाए । भाजपा नारी शक्ति वंदन के नाम पर राजनीतिक नौटंकी करके कुछ हासिल नहीं कर रही बल्कि उसकी महिला विरोधी चरित्र की कलई खुल रही है । जय मातृशक्ति, जय उत्तराखंड
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आज का दिन वैश्विक घटनाओं में एक महत्वपूर्ण दिवस है, आज पेशावर कांड की वर्षगांठ है । आज ही के दिन 23 अप्रैल 1930 को पेशावर प्रांत में तैनात गढ़वाल रायफल्स के हवलदार चंद्र सिंह गढ़वाली जी और उनके सैनिक साथियों ने अपने अंग्रेज अधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था । अंग्रेज अधिकारी ने हवलदार चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके सैनिक साथियों को खान अब्दुल गफ्फार खान "सीमांत गांधी" के नेतृत्व में अंग्रेज़ों के खिलाफ आंदोलन कर रहे पठानों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया । अंग्रेज अधिकारी के गोली चलाने के आदेश की अवहेलना करते हुए हवलदार मेजर चंद्र सिंह गढ़वाली ने अपने साथियों से कहा गढ़वाली सीजफायर और उनके साथियों ने बंदूक नीचे करते हुए गोली चलाने से इंकार कर दिया था । ये घटना की चर्चा पूरे विश्व में हुई कि कैसे गढ़वाल रायफल्स के सैनिकों ने अंग्रेजों के आदेश की अवहेलना करते हुए निहत्थे पठानों पर गोली चलाने को मन कर दिया, चंद्र सिंह गढ़वाली पूरे देश में एक महानायक की तरह उभरे और देश के लोगों के प्रसिद्ध हुए। चंद्र सिंह गढ़वाली ने दिखाया कैसे पहाड़ के छोटे गांव से निकले युवा सैनिक ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया और अंग्रेज़ों के खिलाफ खड़े हो गए । चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथी सैनिकों को अंग्रेजों ने कई वर्ष की जेल की सजा दी और यातनाएं दी, चंद्र सिंह गढ़वाली जेल से छूटने के बाद भारत की आजादी के आंदोलन से जुड़े । चंद्र सिंह गढ़वाली ने 1952 में एक पर्वतीय राज्य बनाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी को पत्र लिखा और एक पर्वतीय राज्य की माँग करी थी । गैरसैंण को एक पर्वतीय राज्य की राजधानी बनाने का सपना चंद्र सिंह गढ़वाली जी का ही था । चंद्र सिंह गढ़वाली जी की दृष्टि(vision) को आगे ले जाते हुए उत्तराखंड क्रांति दल ने उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य की परिकल्पना करी और आंदोलन किया । उत्तराखंड क्रांति दल ने चंद्र सिंह गढ़वाली जी को सम्मान देते हुए 1992 में उनके जनवदिवस 25 दिसंबर को चंद्रनगर, गैरसैंण में उनकी प्रतिमा स्थापित करते हुए, गैरसैंण को राजधानी बनाने के लिए आंदोलन आगे बढ़ाया । पेशावर कांड की वर्षगांठ पर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों को शत-शत नमन । जय उत्तराखंड, जय भारत
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पिथौरागढ़ से 130वीं पर्यावरण बटालियन को पिथौरागढ़ से हटाने के विरोध में पूर्व सैनिकों का आंदोलन 62 दिनों तक चलने के बाद अप्रैल 2026 के मध्य में अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है I भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने पिथौरागढ़ (कुमाऊं) से बटालियन की दो कंपनियों को राजस्थान/गुजरात (अरावली क्षेत्र) में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। पूर्व सैनिकों का तर्क है कि इस बटालियन के हटने से सीमांत क्षेत्र के पर्यावरण को नुकसान होगा और लगभग 450 पूर्व सैनिकों का रोजगार छिन जाएगा, जो 1994 से 130 इंफैंट्री बटालियन (TA) ईको कुमाऊँ के तहत कार्यरत हैं । हमारे आदर्श डॉ. डी डी पंत जी कहा करते थे कि हिमालय रूठेगा तो देश टूटेगा, हमें हिमालय के पर्यावरण को बचाना है, हिमालय के पर्यावरण की सुरक्षा करनी है I हम सरकार को चेतावनी देते हैं हिमालयी पर्वावरण के प्रहरी 130वीं पर्यावरण बटालियन को पिथौरागढ़ से हटाने की कोशिश ना करे नहीं तो क्षेत्र में बहुत बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे I जय उत्तराखंड, जय भारत @UKD4Uttarakhand
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हमने हमेशा से ही जनसँख्या आधारित परिसीमन का विरोध किया है, उत्तराखंड जैसे हिमालयी पहाड़ी राज्यों के लिए जनसँख्या आधारित परिसीमन उनके आस्तित्व के लिए खतरा है l हमने शुरुवात से ही उत्तराखंड में जनसँख्या आधारित परिसीमन का विरोध किया है, हमारी माँग है कि उत्तराखंड में भौगोलिक आधारित परिसीमन होना चाहिए I हमंने 2004 में उत्तराखंड पर थोपे गए जनसँख्या आधारित परिसीमन का जमकर विरोध किया था लेकिन तब की काँग्रेस सरकार और विपक्ष में बैठी भाजपा इसपर चुप रहे और पहाड़ पर 6 विधानसभा सीटें कम हो गई l वैसे 2004 में पहाड़ पर 9 विधानसभा सीटों को कम करने की योजना थी लेकिन हमारे कड़े विरोध और आंदोलन को देखकर ये घटाकर 6 विधानसभा सीटें कर दी गईं l मेरा पहले से ही जनसँख्या आधारित परिसीमन पर एक ही स्टैंड रहा है कि उत्तराखंड में जनसँख्या आधारित परिसीमन नहीं भौगोलिक आधारित परिसीमन होना चाहिए l हमें उत्तराखंड में जनसँख्या आधारित परिसीमन ना मंजूर था, ना मंजूर है और ना मंजूर होगा l हमारी माँग है कि देश के कई राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी भौगोलिक आधारित परिसीमन होना चाहिए, हम कड़ी चेतवानी देते हैं कि अगर उत्तराखंड में जनसँख्या आधारित परिसीमन होगा तो हम इसके विरोध में किसी भी हद्द तक जाकर लड़ेंगे l @UKD4Uttarakhand
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संसद में महिलाओं को 35% प्रतिनिधित्व देने के लिए 2023 में महिला आरक्षण विधेयक(नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पारित हो गया था, जिसका सभी दलों ने स्वागत किया था, 3 वर्ष से ज्यादा हो गए लेकिन भाजपा सरकार ने आजतक सदन में ये महिला आरक्षण लागू नहीं किया है l हम सदन में महिला आरक्षण के पक्ष में रहे हैं और चाहते हैं इसमें देरी ना हो और जल्दी से जल्दी सदन में 2023 में पारित हुए महिला आरक्षण विधेयक के अनुसार महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित कर दीं जाए I भाजपा सरकार संसद में महिला आरक्षण की आड़ पर 131वां संविधान संसोधन विधेयक ला रही है, दरसल वो संविधान में संसोधन करके बिना जनगणना के जनसँख्या आधारित परिसीमन करवाना है और लोकसभा में अपने मनमुताबिक सीटें बढ़ाना और उसके बाद अपने मनमुताबिक परिसीमन करने की योजना है l संविधान के अनुसार बिना जनगणना के परिसीमन नहीं हो सकता है, भाजपा यही संसोधन करना चाहती है उत्तराखंड में हम पहले से जनसँख्या आधारित परिसीमन का विरोध करते आ रहे हैं I पहले भी 2004 में परिसीमन थोपकर पहाड़ में विधानसभा की सीटें घटा दी गईं थी, अब इस संसद में इस संसोधन विधेयक के पारित होने से और जनसंख्या आधारित परिसीमन होते ही पहाड़ में लोकसभा और विधानसभा की सीटें कम हो जाएंगी I भाजपा सरकार द्वारा वर्तमान में लाया जा रहा संविधान संसोधन विधेयक और जनसँख्या आधारित परिसीमन उत्तराखंड के खिलाफ है I हम जनसँख्या आधारित परिसीमन का विरोध करते हैं, हम इसके लिए कोई भी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं और किसी भी हद्द तक इसके लिए लड़ेंगे I जय भारत, जय उत्तराखंड @UKD4Uttarakhand
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उत्तरप्रदेश के कब्ज़े में उत्तराखंड का 2 लाख करोड़ से ज्यादा का बकाया है, इन 26 वर्षों में 10 से ज्यादा मुख्यमंत्री हो गए लेकिन किसी ने भी इसको उत्तरप्रदेश से वापस लेने की कोशिश नहीं करी है l यहाँ की सम्पत्तियों पर आज भी उत्तरप्रदेश कब्ज़ा जमाए बैठा है लेकिन हमारे मुख्यमंत्रियों ने उसे वापस लेने की कोशिश नहीं करी और ना ही सम्पत्तियों को वापस लेने के लिए अदालत में गंभीरता से मुकदमा लड़ने की कोशिश करी I भाजपा सरकार में तो यहाँ के मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री से उत्तराखंड की संपत्ति उत्तरप्रदेश को सौंपने का समझौता कर आ गए जबकि उन सम्पत्तियों का मामला अदालत में चल रहा था l मैंने उस वक़्त भी कड़ा विरोध किया था कि सरकार उत्तरप्रदेश के साथ सम्पत्तियों के बँटवारे पर कोई समझौता ना करे क्योंकि मामला अदालत में है और हमारा पलड़ा भारी है लेकिन हमारी राज्य सरकार भागकर उत्तरप्रदेश सरकार के साथ समझौता करके आ गई I ये हमारा पैसा है और हमारी सम्पत्तियां है इस पर हमारा हक़ है लेकिन 25 वर्षों से हमारी राज्य सरकारों ने इसे उत्तरप्रदेश के कब्ज़े में दे रखा है I @UKD4Uttarakhand
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𝟏𝟑𝟏वां संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन भाजपा सरकार द्वारा विशेष सत्र बुलाकर संसद में लाया जा रहा 131वां संविधान संशोधन विधेयक ना केवल देश के लिए बल्कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों के खिलाफ है, ये संसद में क्षेत्र के आधार पर असंतुलन पैदा करेगा l इस संसोधन के तहत संसद लोकसभा की सीटों की संख्या 545 से बढ़कर 850 हो जाएगी l भाजपा बड़ी चालाकी से इस बिल को सदन में महिलाओं के 1/3 आरक्षण के नाम पर ला रही है और बोल रही है कि महिलाओं का लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए 350 लोकसभा सीटें बढ़ाई जा रही हैं I लोकसभा सीटों का ये परिसीमन जनसँख्या के आधार पर होगा और उन क्षेत्रों को नुकसान होगा जहाँ आबादी कम है I दक्षिण भारत के राज्यों जिन्होंने जनसँख्या नियंत्रण पर काम किया और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार पर ध्यान दिया, इस संविधान संसोधन और नए परिसीमन के आधार पर उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो जाएगी क्योंकि दक्षिण भारत और अन्य हिमालयी राज्यों में आबादी कम है l इस संसोधन का सबसे ज्यादा फायदा उन राज्यों को होगा जहाँ आबादी ज्यादा है, जैसे उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तर-मध्य के अन्य राज्य जहाँ भाजपा पहले से ही जोड़-तोड़ करके सत्ता में है l पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि भाजपा किसी प्रकार भी सत्ता में बने रहना चाहती है चाहे उसे संविधान की धज्जियाँ ही क्यों ना उड़ानी पड़े, भाजपा ने बड़ी निर्लज़्ज़ता से संवैधानिक संस्थाओं जिसमे चुनाव आयोग भी आता है उनको अपनी राजननीतिक महत्वाकांक्षों के लिए हथियार की तरह प्रयोग किया है l विशेष गहन पुनरावृति(SIR) का भाजपा ने दुरूपयोग करके सत्ता हथियाने का माध्यम बना दिया है, भाजपा जहाँ चाहे वहां वोटर लिस्ट में बदलाव कर रही है और लाखों लोगों को मतदान से वंचित कर रही है l दक्षिण भारत में जहाँ भाजपा अपने पाँव नहीं जमा पा रही वहाँ इस संसोधन के माध्यम से भाजपा संसद में उन्हें कमजोर करना चाहती है, इसका नुकसान हिमालयी राज्यों को भी उठाना पड़ेगा जहाँ विशिष्ट संस्कृति है और क्षेत्रीय दलों की बड़ी भूमिका रहती हैं l उत्तराखंड में हम पहले से परिसीमन का मुद्दा उठाते आ रहे हैं, पहले से ही उत्तराखंड में 2007 में थोपे गए परिसीमन से असंतुलन पैदा हुआ और पहाड़ में विधानसभा की सीटें कम कर दी गईं थी I इस नए बिल से उत्तराखंड में लोकसभा सीटों का भी असंतुलन पैदा होगा आज जहाँ उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं जिसमे पहाड़ पर 4 लोकसभा सीटें हैं और मैदानी क्षेत्र में में 1 लोकसभा सीट है I अब नए संसोधन विधेयक आने से उत्तराखंड लोकसभा की करीब 9 से 10 हो जाएँगी, जिसमे से पहाड़ में केवल 3-4 सीटें ही रहेगी लेकिन मैदान क्षेत्र में 6-7 लोकसभा सीटें हो जाएँगी, इससे उत्तराखंड से लोकसभा में पहाड़ का प्रतिनिधित्व नगण्य रह जाएगा l उत्तराखंड में नए परिसीमन के आधार 105 विधानसभा सीटों की बात सुनाई दे है, ये नया संसोधन विधेयक उत्तराखंड में विधानसभा सीटों के परिसीमन का आधार भी बनेगा, जिससे उत्तराखंड में विधानसभा के अंदर बहुत बड़ा असुंतलन पैदा होगा l आज उत्तराखंड में 2007 के परिसीमन के बाद पहाड़ में करीब 36 विधानसभा सीटें हैं और मैदानी क्षेत्र में 34 विधानसभा सीटें हैं, नए संसोधन विधेयक के आधार पर परिसीमन से 105 सीटें होगीं जिसमें पहाड़ पर 35-40 विधानसभा सीटें और मैदानी क्षेत्र में करीब 70 सीटें हो जायेगीं, इससे विधानसभा के अंदर बड़ा असंतुलन पैदा होगा और पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधत्व कम हो जाएगा I भाजपा का इरादा उत्तराखंड में पहाड़-मैदान वाली लड़ाई करवाना और उत्तराखंड को मिनी उत्तरप्रदेश बनाने का है, जो उत्तराखंड के आस्तित्व के लिए बहुत ही खतरनाक है I हम पहले से ही उत्तराखंड भौगोलिक आधार पर परिसीमन की माँग करते आ रहे हैं लेकिन ये नया संसोधन विधेयक उस माँग को कमजोर रहा है और ये उत्तराखंड के साथ अन्याय होगा l हम नए संसोधन विधेयक के विरोध में हैं क्योंकि ये सदन में क्षेत्रों के आधार पर प्रतिनिधित्व का असंतुलन पैदा करेगा, दक्षिण राज्यों और विशेषकर हिमालयी राज्यों के साथ अन्याय होगा I भाजपा इस विधेयक को सदन में महिलाओं के प्रतिनिधत्व बढ़ाने के रूप में पेश कर रही है लेकिन उसकी मंशा कुछ और है, वो इस विधयेक को राजनीतिक हथियार के रूप में प्रयोग करना चाहती है l हम सदन में महिलाओं के आरक्षण के विरोध में नहीं है, अगर भाजपा को महिलाओं को सदन में 1/3 का प्रतिनिधत्व देना है तो वो वर्तमान सीटों के आधार पर ही लागू कर दे और हम इसका समर्थन करते हैं l मैं पुनः स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमारा विरोध महिला आरक्षण नहीं बल्कि जनसंख्या आधारित परिसीमन है । विपक्ष को एकजुट होकर भाजपा सरकार द्वारा संसद के विशेष सत्र में लाए जा रहे 131वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करना चाहिए, अगर लोकतंत्र को बचाना है तो इभाजपा की ऐसी चालबाज़ियों का विरोध करना होगा l जय भारत, जय उत्तराखंड ,
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