एक ख़्वाब
जो तुमने दिखाया हमें
नींद टूटी
तो बिखर गया
कुछ कदम जो
तुम्हारे साथ चले
राहें मुड़ी
तो रास्ता बदल गया
साँसें जो चल रही थी
बग़ैर तुम्हारे भी
मिले तुम
तो उनको जीना आ गया
चंद लम्हों में
जो सारा जीवन भर गये
हाथ छूटा
तो भीतर सब ख़ाली हो गया
…और एक दिन पता चलता है कि
जिनको आप अपने सबसे अपनों में गिना करते ‘हैं’
वो तो ग़ैरों से भी पराये निकले
‘अपने हैं’ को ‘अपने थे’ बनने में
कुछ वक़्त का ही फ़ासला लगा