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@Kitabganj1

कहीं नहीं, तो कविताओं में ही सही- कुछ असंभव पर- घटता रहे ।।

Katılım Ekim 2018
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Kitabganj@Kitabganj1·
तुम किताबें पढोगे नहीं- तो कहानी तुम्हारी यूँ ही रह जायेगी तुम्हारे चीखने को कह कर संगीत कोई इतिहास की किताब बिक जायेगी।। (फ़ोटो: जय भीम, 2021)
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सत्यम् सिंह।
मैं अब अपने घर एक स्वप्न की तरह ही आता हूँ साल में एक दो बार बस कुछ देर के लिए। अपने माँ-बाप के सपनों का पीछा करते करते मैं इतनी दूर आ निकला जहां से सिर्फ स्वप्न बनकर वापिस आया जा सकता है व्यक्ति बनकर नहीं।। किताबगंज।।🌻 @Kitabganj1
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शब्दसार
शब्दसार@shabdsar·
तुम्हें किसी ने छोड़ दिया अकेला तुम किसी को छोड़ दोगे अकेले दुनिया में जिसे छुओ ख़याल रखो अकेली पड़ी चीजें टूट जाती हैं अक्सर छूते ही ~ किताबगंज(@Kitabganj1)
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Veer Ranjan Sonu
Veer Ranjan Sonu@vrsonu·
अपने वक़्त की असहनीय कारगुज़ारियों पर शिकायतों का पत्थर फेंककर मृत्यु के निमंत्रण को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता हम दुनिया को इतने ख़तरनाक हाथों में नहीं छोड़ सकते हमें अपनी-अपनी आत्महत्याएँ स्थगित कर देनी चाहिए। @Kitabganj1
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Kitabganj@Kitabganj1·
इक आजाद लड़की के मन में सारे जानवर होते हैं, खरगोश से लेकर भेड़िये तक वो मरती है एक दिन अपने भीतर किसी बेहद पालतू से जानवर के नाखूनों में फंसकर ।। 🔹प्रतिमा सिंह, बोरसी काव्य संग्रह (फ़ोटो: तरुण चौहान)
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Jamshed Qamar Siddiqui
Jamshed Qamar Siddiqui@Jamshedhumd·
देखिए मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि ऐसा कोई एक दिन या कोई एक तारीख नहीं होती जब ये तय होता है कि आज से आप अच्छी कविताएं लिख पाएंगे। अच्छी कविताएं बुरी कविताओं के बाद ही आती हैं इसलिए लिखते रहिए, कोई कितना भी आपकी कविताओं में कीड़े निकाले। आप लिखते रहिए। आलोचनाओं को जूते की नोक पर रखिये, जैसे दिल करे वैसे लिखिए। खूब लिखिए... बस मुझे उसमें टैग मत कीजिये।
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Neelam
Neelam@NeelamWrites·
@Shabnam44806561 @pankaj_2210 @Akhil1774 @AvantikA_2 @DrAmitSingh001 @Yasmeen80859727 @ZainabFatima9_2 @DrSuriyaHaider @MaltiVishwaka12 @vishvictory @jatinsharma0571 घटते हुए भी जिंदगी में कम से कम इतना तो बाकी रहे - मैं जानता हूँ कि मुश्किल है पूरा चाँद सहेज पाना अपनी तबीयत में उम्र भर पर कम से कम ईद के चाँद भर तो चाँद हम सब में बाकी रहे।। ~किताबगंज
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Kitabganj@Kitabganj1·
@Bearbabu19712 सुंदर वीडियो चुना है आपने 🌻
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Bear babu
Bear babu@Bearbabu19712·
ये जानना कितना सुखद है कि न्याय स्थापित करने के बाद थका ईश्वर भी लौटता अपने घर है। - किताबगंज @Kitabganj1 🩵 🎬 : Durandhar The revenge
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काव्य कुटीर
उनके कुर्सी पर जो नरम सफ़ेद तौलिया है वो उसी थान का है  जिससे हमारे कफ़न काटे गए हैं...! - किताबगंज 🌷 @Kitabganj1
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Uljhi Diary
Uljhi Diary@UljhiDiary·
हम जिस गली भी मिले बसंत वही आया। इस शहर में हमारा मिलना कोई घटना नहीं बल्कि एक मौसम है। - किताबगंज @Kitabganj1
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Kitabganj@Kitabganj1·
एक मित्र ने बताया आज कि गूगल सर्च पर AI टूल गुप्त प्रेमपत्र को "लोकप्रिय कविता संग्रह" कहता है। क्या आपने अब तक किताबगंज का ये काव्य संग्रह पढ़ा है? @Hindi_panktiyan @PanktiPrakashan
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काव्य कुटीर
तुम्हारे लिए एक फूल लाना चाह था पहाड़ों से- पर वो रस्ते में ही मुरझा गया। शहर बहुत दूर है यहाँ के फूलों के लिए।। - किताबगंज🌷 फ़ोटो: @ImSury9
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Kitabganj@Kitabganj1·
प्रेम बारिश बनकर गिरा सब पर। पर मेरे भूखे पेट ने ढूंढी नौकरी और छाता बनकर मुझे कभी इस बारिश में भीगने न दिया।। (फ़ोटो: तरुण चौहान)
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Kitabganj@Kitabganj1·
दक्षिण अमेरिका में स्पेनिश और पुर्तगालियों के आने से पहले किसी और भाषा में गीत लिखे जाते थे - कैमरून से आए दोस्त से मैंने पूछा था कि अंग्रेजी और फ्रेंच तो ठीक है पर घर पर कौन सी भाषा बोलते हो? मेरे गांव में अंग्रेजों के जाने के बाद भी मगही बोलते थे लोग। 1/2
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Kitabganj@Kitabganj1·
तुम उतरा करो न समुंदरों में ज्यादा- कि मीठे समुन्दर का हम क्या करेंगे? तुम जुल्फें न खोला करो यूँ ही ज्यादा- कि रुकती फ़िज़ाओं का हम क्या करेंगे? (फ़ोटो: ashish.langade)
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Kitabganj@Kitabganj1·
वो कौन है जो हमारी मातृभाषाओं को राजभाषाओं में बदल रहा है। एक दिन शीशा में हम हुलक कर देखबई त हमर मगही चेहरा पर हिंदी के लाली लिपस्टिक लगल मिलतई हम रह जेभई एक मेला में मिले वाला रूबिक क्यूब जेकरा ऑफिस में तो सब चीनतहई पर गांव में केकरो बुझा न पाई।। (वीडियो:pol charkha) 2/2
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