Sp Kolawat
1.5K posts








मेरे भाई। पहले थोड़ा अध्ययन कर लो। राजस्थानी भाषा को स्कूलों में पढ़ाने का फैसला अरविंद चोटिया ने नहीं दिया है। यह फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बहुत लंबी सुनवाई के बाद दिया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट में आपसे और हमसे ज्यादा समझदार, ज्यादा अध्ययनशील, ज्यादा पढ़े लिखे लोग बैठते हैं। उन्होंने फैसला दिया है तो काफी सोच विचार के बाद दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले कोई हवा में नहीं आते हैं। आप कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं। आपको ज्यादा ही दिक्कत है तो आप भी सुप्रीम कोर्ट जाइए। हमें हड़काने से काम नहीं चल पाएगा। हमें पता है कि आपके पास कोई काम नहीं है ट्वीट करने के अलावा। इसलिए आप दिन भर राजस्थानी भाषा के खिलाफ ट्वीट कर सकते हैं लेकिन ट्वीट करने से फैसले नहीं बदला करते हैं। राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए पिछले 90 साल से संघर्ष चल रहा है। अनेक लोगों ने अपना जीवन खपा दिया है। मान्यता अभी भी मिली नहीं है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यह भाषा पहले से पढ़ाई जा रही है। अब स्कूलों में भी पढ़ाई जाएगी यह आदेश आया है। एक दिन हमारी राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता भी मिलेगी। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि वह मान्यता भी हमारे जीवन काल में मिले तो हम एक संतुष्टि के साथ यह संसार छोड़ें। इसके अलावा कोई विवाद का विषय है ही नहीं। बाकी आप चाहे जितने ट्वीट करने के लिए स्वतंत्र हैं।
































