@funpatfcb@gharkekalesh A. Never bought popcorn or anything above its MRP. Plus MRP largely applies to packaged items so it’s not illegal to overcharge a non-packaged item.
B. If it involves labour, sell the bottles with higher retail price instead of giving 5 minute ppt on hardships and demand-supply.
Shopkeeper in Kedarnath calmly explains why water costs ₹80: ‘We pay ₹1500 to carry one load up here, no roads, no delivery, high rent & only 4-5 months season. Everything comes on mules or backs.’
भोपाल और देहरादून के दस अंतर:
मैं दो दिनों से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मे हूँ। आप अगर भूल गएँ हों तो याद दिला दूँ की किसी जमाने में मध्य प्रदेश को ‘बीमारू’ राज्य कहा जाता था। यहाँ अपने युवा सहयोगी ऋषभ की शादी में शामिल होने आया हूँ; शादी की खूबसूरत यादें और तस्वीरें बाद में साझा करूँगा। फिलहाल, दो दिनों में भोपाल और देहरादून से तुलना में ये 10 अंतर दिखे जिन्हे आपके साथ साझा कर रहा हूँ:
1. देहरादून की तरह यहाँ हर पचास, सौ मीटर पर शराब की दुकानें नहीं हैं।
2. हूटरबाज़ी सिरे सा गायब है; पता नहीं इस VIP गिरि का देहरादून में श्राप कब से और कैसे लग गया।
3. होर्डिंग्स नियंत्रित हैं; इसकी तुलना में देहरादून में हर मोड़ पर भौंडी, बदरंग तस्वीरों की बाढ़ है।
4. कचरे के डंप गायब है; अपने यहाँ देहरादून में सड़कों पर खुलेआम कूड़े के ढेर आम हैं।
5. देहरादून की तरह जानवरों के झुंडो का आतंक नहीं है।
6. ट्रैफिक लाइट्स काम करती हैं; देहरादून में पता नहीं क्यों अक्सर ये निष्क्रिय या कन्फ्यूज्ड नज़र आती हैं।
7. अतिक्रमण की बदहाली नहीं है; देहरादून में अतिक्रमण ने बहुत कुछ खत्म कर दिया है।
8. भोपाल में पैदल चलना संभव है; देहरादून में यह लगभग असंभव है।
9. मामा जी (पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान) का जलवा है, हर कामगार उनका मुरीद है; अपने यहाँ आम व्यक्ति में अधिकांश निराशा और हताशा है।
10. भोपाल शहर में लोगों में तनाव और आक्रामकता कम प्रतीत होती है, देहरादून में बढ़ता तनाव और अधैर्य साफ नजर आता है।
देहरादून के इस पतन के मुख्य किरदार मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, देहरादून के पांच विधायक, शहर के मेयर, उत्तराखंड सरकार, मुख्य सचिव, नगर निगम, एमडीडीए, शहरी मुद्दों से जुड़े सभी अधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और हम सभी देहरादून के लोग हैं। हम सब मिलकर अपने इस कभी खूबसूरत शहर को दिन-ब-दिन नष्ट कर रहे हैं और इसे जीता-जागता नर्क बना रहे हैं।
दुख की बात यह है कि जब हम देश के अन्य शहरों में जाते हैं तब साफ दिखता है कि हम किस तरह के बदहाल और अराजकता के माहौल में रह रहे हैं। समझ नहीं आता कि हमारे मुख्यमंत्री, उनके राजनीतिक सहयोगी, उनकी पार्टी, हमारी नौकरशाही और हम नागरिक आखिर कब समझेंगे कि हम एक गहरे संकट में हैं और ये तमाम प्रोजेक्ट और योजनाएँ शहर को बेहतर नहीं, बल्कि और बदतर बना रही हैं, ख़त्म कर रही हैं।
PS: कोई भी लिस्ट पूरी तरह संपूर्ण या 100% एक्यूरेट नहीं हो सकती। यह केवल शहर में दो दिनों के अनुभव पर आधारित है। यदि आपके पास अन्य फीडबैक हों तो कृपया अवश्य साझा करें।
आभार, सादर
#Bhopal#Dehradun
किसी भी मंत्री ने यात्रा के कार्यक्रम को फ्रंट से लीड नहीं किया।
सरकार केवल संख्या गिनने में लगी हुई है—कितने लाख यात्री आते हैं!
हम किस तरीके से उनका प्रबंधन कर रहे हैं, उनकी श्रद्धा को हम किस तरीके से सम्मान दे रहे हैं, उनकी सुरक्षा का क्या प्रबंध कर रहे हैं—इस पर सरकार विचार नहीं कर रही है।
सरकार को दो कदम उठाने चाहिए। पहला कदम यह उठाना चाहिए कि रात में यात्रा को पूरी तरीके से बंद करें, एक समय-सीमा तय कर लें और जो वाहन चलें उनके जो चालक हों, उन्हें पहाड़ों में गाड़ी चलाने का लंबा अनुभव होना चाहिए। ऋषिकेश में एक दिन व्यक्ति रुके, उसके सारे चेकअप हों आदि सब चीजें हों, उसको यात्रा में What to do? What not to do? वह सब समझाया जाए और एक दिन बेस कैंप में चारों यात्राओं के दिन निर्धारित कर लिए जाएं। यदि केदारनाथ यात्रा के दौरान एक दिन रुद्रप्रयाग में रुकना आवश्यक हो जाए या नीचे अगस्त मुनि में रुकना आवश्यक हो जाए, तो व्यक्ति वहां की परिस्थितियों के अनुरूप अपने शरीर को ढाल लेता है तो आप कहीं बेस कैंप निर्धारित करिए, उन बेस कैंप में एक दिन हर यात्री को, वह हमारे चारधाम में पहुंचे उससे पहले उनका चेकअप किया जाना चाहिए।
यह शर्त दोनों पर लागू होनी चाहिए। हेलीकॉप्टर्स पर भी लागू होनी चाहिए। कोई भी हेलीकॉप्टर डायरेक्टली दिल्ली से चारधाम यात्रा के किसी मार्ग तक, उसको परमिशन नहीं दी जानी चाहिए और एक दिन वहां रहे, दूसरे दिन वहां से प्रस्थान करें।
जब तक आप इस शक्ति को नहीं बरतेंगे, हार्ट अटैक की घटनाएं भी बढ़ेंगी, सांस से लोग मरेंगे और भी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। जब आदमी थका हुआ होता है, गाड़ियां जो हैं खड्डे में जाएंगी, गंगा में समाएंगी तो इसको रोकना है, तो एक दूरदर्शितापूर्ण, स्पष्ट कार्यक्रम—What to do? What not to do? How to do? यह सब चीजें तय करके बताई जानी चाहिए।
#CharDhamYatra#Uttarakhand#PilgrimSafety#Management
@sanely_Prashant@gharkekalesh Cinema hall me 10 rs ke popcorn 250 me kharidte ho tab koi dikkat nahi hai kisi ko, highway pe 20rs ka paratha 150 me bikta hai tab koi dikkat nahi hai kisi ko, this is how double standard works in india
@gharkekalesh It is illegal to sell any packaged item over its MRP. There is a reason it is called Maximum Retail Price. Such greedy and victim card exhibitionist Dehatis must be jailed.
जनता के मुद्दे -
1- शिक्षा
2- स्वास्थ्य
3- रोजगार
4- गरीबी
5- मंहगाई
सरकार के मुद्दे -
1- वंदे मातरम्
2- पाकिस्तान
3- हिंदू मुस्लिम
4- मुझको गाली दी
विपक्ष के मुद्दे -
1- EVM हटाओ
2- जाति जनगणना
4- लोकसभा स्पीकर हटाओ
5- वोट चोरी
मीडिया के मुद्दे -
1- सीमा हैदर का छठा बच्चा
2-मुस्कान को जेल में बेटी हुई है
3- आम काट कर खाते हो या चूसकर
20 साल से भाजपा को सर आँखों पर बिठाने वाली जनता को भाजपा विधायक पुत्र सरेआम रौंद रहे हैं, और विधायक पुलिस IPS से कह रहे हैं: मेरा बेटा करेरा आएगा, चुनाव भी लड़ेगा, तेरे डैडी में दम हो तो रोक लेना! हमारा इतिहास भी देख लेना, अपनी औकात में रहो!
गृह मंत्री @DrMohanYadav51 जी, क्या मध्य प्रदेश में आप सरकार चला रहे हैं या सर्कस? आपके विधायक का बेटा निर्दोष लोगों पर गाड़ी चलाता है, और आपका विधायक पुलिस अधिकारियों से औकात में रहने को कहता है!
यह @narendramodi का नया भारत है, जहाँ सत्ता के नशे में चूर भाजपा के नेता लोगों को कुचलेंगे भी और न कानून का डर, न कार्रवाई का।
आज जनता के सामने भाजपा का असली चाल, चरित्र और चेहरा स्पष्ट रूप से सामने है।
BJP के वरिष्ठ नेता का बेटा घर के बाहर खड़ी लड़की का रेट लगा रहा था.
यूपी के मुजफ्फरनगर में मां-बेटी अपने घर के बाहर खड़ी थीं.
तभी वहां BJP नेता का बेटा आर्यमान अपने दोस्त शौर्य के साथ पहुंचा. आर्यमान ने मां के साथ खड़ी लड़की से पूछा- क्या रेट है.
फिर ये वीडियो बना 👇
PM is coming to Dehradun tomorrow to inaugurate Delhi-Doon expressway
these posters are put up everywhere in the city
I don’t understand the reason for it
- is this to tell people that PM is visiting?
- will PM be happy to see his photos everywhere?
in my opinion, they are a waste of tax money. and they also make the city look bad. as in, it is opposite to beautification of the city. people want to see clean streets and trees and nature and not posters of same thing every 100 m. I also like to believe that our PM thinks the same and that the state govt should do better for us
एलिवेटेड रोड बनने के बाद कुछ ऐसे बदल गया है दिल्ली से देहरादून का रास्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्षरधाम-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को 14 अप्रैल को जनता को समर्पित करेंगे।
@PMOIndia#akshardham#dehradun#delhi#uttarakhand
देशहित और जनहित में किए काम की वजह से हमारे ऊपर आज FIR हुई ,
आप सब जो मुझे पर्सनली नहीं जानते, सबने आज मेरा बहुत साथ दिया , मुझे कई लोगों के मैसेजेस आए , कई लोगों ने फंड देने की बात कही , कई वकील भाइयों और बहनों ने लीगल हेल्प करने के बात कही ,
आप सभी लोगों का हृदय की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद , आज मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हमने आप लोगों को कमाया है , हमें किसी प्रकार के फंड की जरूरत नहीं है, जो काम हम कर रहे हैं वो कोई भी एक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन से कर सकता है,
हमारी FSSAI और उनके अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि हम किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार हैं , आप लोगों ने पिछले कई वर्षों में इतनी गलतियां की हैं ,आज देश में बढ़ते कैंसर , डायबिटीज, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के लिए आप लोग जिम्मेदार हैं ,
आप लोगों ने FIR में ये कहीं नहीं लिखा कि आरोप गलत हैं, आप लोगों को चिंता इस बात की है कि डॉक्यूमेंट्स कैसे लीक हो गए , अगर आप लोगों में दम है तो पब्लिक के सामने आकर बताइए कि आरोप गलत हैं,
वरना अगले कुछ दिनों में हम स्टेट फूड डिपार्टमेंट और FSSAI की पोल खोलते रहेंगे और मुकदमा लड़ते रहेंगे।जय हिंद जय भारत । BEST OF LUCK FSSAI
हेलो @fssaiindia ,
"आपने @khurpenchh पर FIR करवा कर अच्छा नहीं किया है"
~आप लोग हमारी आवाज दबा नहीं पाओगे,
~सड़ी गली बेचने वालों को लाइसेंस आप दो,
और FIR हम पर करवा रहे हो,
~लाइसेंस कैंसिल होने के 1 महीने बाद ही फिर से लाइसेंस दे देते हो, कितना मिलता है?
~ खराब प्रोडक्ट पकड़े जाने पर 1 महीने बाद वही प्रोडक्ट का सैंपल तुम्हारी लैब में पास हो जाता है, कितना मिलता है?
I must confess that until recently I had never heard of Phool Dei, a spring festival that was celebrated yesterday in the villages of Uttarakhand.
Children gather fresh flowers from the hills and go from house to house placing them on doorsteps, offering a blessing for the household:
“Phool Dei, Chhamma Dei,
Deni Dwar, Bhar Bhakar…” roughly wishing the home prosperity.
In return they receive sweets.
It reminded me a little of Halloween in the U.S., where children go door to door saying “trick or treat.” But what a lovely contrast. Here the children arrive not threatening a prank, or asking first, but giving first. Flowers.
In an age when we speak so much about environmental consciousness, this graceful celebration of spring and nature deserves to be far more widely known.
Just as Holi travelled across India and the world, perhaps Phool Dei should too.
For me, the children of Uttarakhand are my #MondayMotivation