Sabitlenmiş Tweet

महात्मा #बुद्ध अपने जीवन पर्यंत तक मूर्ति पूजन का विरोध करते रहे, परंतु उनके महापरिनिर्वाण के पश्चात ही उन्हीं का मूर्ति पूजन प्रारंभ हो गया।
कहने का तात्पर्य यह है कि कोई भी व्यक्ति हो जिस किसी भी चीज या व्यक्ति का विरोध या समर्थन अपने जीवन में करता है, परंतु यह जरूरी नहीं कि उस व्यक्ति के चले जाने के बाद भी उसके वंशज के द्वारा उस चीज या व्यक्ति का विरोध या समर्थन किया ही जाए।

हिन्दी









