kv bannaaa rathore

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@Kvrathore009

बाड़मेर

Katılım Eylül 2023
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kv bannaaa rathore@Kvrathore009·
हरियाणा में तो कांग्रेस तभी हार गई थी जब हमारे वाले युवा नेता जी के वहां शुभ कदम पड़े थे....😉 जो व्यक्ति दूसरी जाति का वार्डपंच भी नहीं देख सकता , वह चला था #हरियाणा में खुद की जाति का मुख्यमंत्री बनाने..। @NirmlChoudhary
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Dharmendra Singh Rathore
Dharmendra Singh Rathore@DharmendraS_inc·
भाजपा की महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ जी के नेतृत्व में मशाल जुलूस में भाग ले रही महिलाओं के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी का व्यवहार अत्यंत ही निंदनीय और अपमानजनक है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के इस व्यवहार ने भाजपा की महिलाओं को लेकर सोच को उजागर कर दिया है। भाजपा भले महिला सम्मान की बात करे लेकिन सच्चाई इसके ठीक उलट है। पार्टी के प्रदेश मुखिया द्वारा ऐसा अपमानजनक व्यवहार राजस्थान को स्वीकार नहीं है।
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
बेहद उर्जावान और प्रभावशाली
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MANOJ SHARMA/ मनोज शर्मा
कौन है सामान्य वर्ग..?? सुना जाना चाहिए...हम देश की रीढ़ हैं..!!
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𝐒𝐚𝐦𝐚𝐧𝐭 𝐒𝐡𝐞𝐤𝐡𝐚𝐰𝐚𝐭
ना शिक्षा पर क़ानून। ना जनसंख्या पर क़ानून। ना भ्रष्टाचार पर क़ानून। ना ही न्याय ब्यबस्था पर कोई क़ानून। ना काला धन बापस ला पाया। ना 100 स्मार्ट सिटी बना पाया। ना डालर के मुकाबले रुपया मजबूत कर पाया। ना गाय और गौ रक्षको को बचा पाए। ना one नेशन one क़ानून ला पाया। ना बक़्फ़ बोर्ड खत्म कर पाया। ना कोई ठोस कृषी क़ानून ला पाया। ना ही कोई ठोस विदेश नीती बना पाया। ना चीन को लाल आँखे दिखा पाया। ना गंगा साफ हुई न यमुना कर पाया। ना ऑपरेशन सिंदूर हल कर पाया। ना किसान की आय दोगनी कर पाया। ना पाकिस्तान का कुछ उखाड़ पाया। न ही pok वापस ला पाया। न हिन्दू राष्ट्र बना पाया। ना हिन्दू सुरक्षित नहीं कर पाया। 🤦 ये महामानव पता नहीं कहाँ से UGC ले आया। #Feb1BharatBand #1_फ़रवरी_भारत_बंद #NoUGCRollBack_NoVote #UGCBlackLaw #ShameOnUGC #UGCRegulations #UGCRollBack #UGC_काले_कानून #सर्वण_विरोधी_नरेंद्र_मोदी #ModiFailedGC #UGC_काला_कानून_वापस_लो
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जयगढ़ री तोप™(सामंत)
अरे कहा है वो #गजेंद्रसिंह_शेखावत, कहा है #राजेंद्र_राठौड़, कहा है #राज्यवर्धन, कहा है #दिया_कुमारी। सब के सब #प्रतापसिंह_खाचरियावास की आवाज सुन कर बिलों में दुबक गए क्या कायरो। जिसका जिगरा हो वो ही दहाड़ सकता है, बाकी बीजेपी वालो तुम तो गुलाम हो। #UGC_RollBack @PSKhachariyawas
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Pratap Khachariyawas
Pratap Khachariyawas@PSKhachariyawas·
भारतीय जनता पार्टी (BJP) जब से सत्ता में आई है तब से इन्होंने जनता को लड़ाने के अलावा कोई काम नहीं किया है,पहले इन्होंने धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाकर अपनी सत्ता को बनाए रखा लेकिन जब देश का युवा जाग गया तो इन्हें अपनी कुर्सी जाने का डर लगा तो बीजेपी ने UGC बिल लाकर जाती के नाम पर युवाओं को लड़ाना चाहती है ताकि देश में टकराव रहे और भारतीय जनता पार्टी की कुर्सी सुरक्षित रहे। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है की आप सभी BJP के देश को लड़ाने वाले बिल का खुलकर विरोध करोगे ।। #UGC_Roll_Back
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
OMR घोटाले में शामिल 38 लोगों की सूची पहले ही सामने आ चुकी थी, लेकिन अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? यह एक बड़ा और गंभीर प्रश्न है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर न तो पक्ष की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया आई है और न ही विपक्ष ने कोई स्पष्ट सवाल उठाया है। आखिर इस संवेदनशील घोटाले पर दोनों ही पक्ष मौन क्यों हैं?
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Arvind Singh Bhati
Arvind Singh Bhati@ArvindSBhati9·
न्याय तभी सार्थक माना जा सकता है, जब वह सभी नागरिकों के लिए समान, निष्पक्ष और संतुलित रूप से लागू हो। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नई इक्विटी रेगुलेशन्स में संतुलन के अभाव के कारण उच्च शिक्षण संस्थानों में चिंता, भ्रम और असुरक्षा का वातावरण बन रहा है। यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि भेदभाव की परिभाषा को सीमित दायरे में क्यों रखा गया है, तथा झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की स्थिति में उत्तरदायित्व तय करने और दंड देने का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं है। संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व के बिना गठित समितियाँ न्याय के वास्तविक उद्देश्य को पूर्ण नहीं कर पातीं और उनके निर्णय कई बार केवल औपचारिक बनकर रह जाते हैं। इन नियमों को संविधान के समानता, निष्पक्षता और गरिमा के सिद्धांतों के अनुरूप जाति-निरपेक्ष, पारदर्शी और सभी के लिए सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों और सम्मान को क्षति न पहुँचे। सरकार से विनम्र आग्रह है कि वह विधि के शासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करे, जिससे शिक्षा संस्थानों का वातावरण विश्वासपूर्ण, न्यायसंगत और भयमुक्त बना रहे। @narendramodi @dpradhanbjp @ugc_india @BhajanlalBjp #UGCRegulations
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Jitendra Singh Alwar
Jitendra Singh Alwar@JitendraSAlwar·
धर्म, जाति, जेंडर और बैकग्राउंड के आधार पर होने वाला भेदभाव एजुकेशनल इंस्टीट्यूट/यूनिवर्सिटी/कॉलेज के साथ ही किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। UGC द्वारा लागू किए गए 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' स्टूडेंट्स को आपस में बांटने, एक - दूसरे का विरोधी बनाने प्रयास नज़र आता है। कोई छात्र, चाहे किसी भी कैटेगरी/वर्ग/जाति/समुदाय से हो; भेदभाव किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए। निर्बाध शिक्षा सबका अधिकार है। यूनिवर्सिटी कैंपस में हर एक स्टूडेंट की सेफ्टी, सिक्योरिटी सुनिश्चित होनी चाहिए। UGC की नई गाइडलाइंस केंद्र सरकार की उस मंशा को उजागर करती है, जो स्टूडेंट्स को टारगेट करने, उन्हें भटकाने के साथ ही शिक्षा विरोधी है, और हमारे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स को ख़त्म करना चाहती है।
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Yogeshwar Dutt
Yogeshwar Dutt@DuttYogi·
विभीषण के अर्थ की बात करें तो इसका मतलब होता है जिसे कभी गुस्सा न आता हो। लेकिन इन सबके बावजूद भी लोग अपने बच्चे का नाम विभीषण नहीं रखते हैं, क्योकि वह अपने जन्मकुल का द्रोही था भरी सभा में द्रौपदी चीर-हरण के समय बड़े- बड़े योद्धाओ ने चुप्पी साधी और जिस सत्ता- कुर्सी के लालच में किया ना वो सत्ता रही ना कुर्सी । सर्वनाश हो गया सभी का । एक दिन सभी को काल के गाल में जाना है । कोई अजर - अमर हो कर नहीं आया इसीलिए अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना आवश्यक है । पांडव संख्या में कम थे किंतु गुणों से सुसज्जित तथा प्रतिभावान थे इसीलिए ईश्वर स्वयं सारथी बनकर सत्य मार्ग सुसज्जित किया। प्रतिभा का दमन करके कोई सभ्यता - संस्कृति नहीं बची । असंख्य आक्रांता के आक्रमण को झेल कर भी जिन्होंने धर्म को माथे पर रखा , जिनके पूर्वज हजारों सालों से अपने रक्त से सीमा रक्षण किया , आज उनकी अजन्मी संतानों को संरक्षण के लिए अपने देश में आंदोलन की आवश्यकता पड़ रही है । पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर देश को गर्त में धकेल दिया जा रहा है जिससे हम अपने बाहरी शत्रु का मनोबल बढ़ा रहे है । समय रहते नहीं सम्भले तो इतिहास में भी स्थान नहीं मिलेगा और कोई भविष्य ही नहीं होगा । #UGC सही समय पर क्रोध करना भी आवश्यक है
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
न हजारों सालों वाली व्यवस्था बची है, न हजारों साल पहले वाले लोग बचे हैं, न हजारों साल पहले वाला समाज बचा है, 77 साल पहले भारत एक लोकतांत्रिक देश बना , समाज के हर एक वर्ग को लीगल , फंडामेंटल, इकोनॉमिक और सोशल राइट्स और प्रोटेक्शन मिल गए, लेकिन मैडम जी को अब हजारों और सैकड़ों साल का बदला आज के बच्चों को फंसा कर लेना है उन लोगों से जिनका पूर्व की घटनाओं से कोई लेना देना नहीं है, गजब थेथरई है।
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Yogeshwar Dutt
Yogeshwar Dutt@DuttYogi·
पूरे देश में सभी वर्ग, जाति और सामाजिक समानता को संविधान द्वारा सुरक्षा दी जाती है। मौलिक समानता का अधिकार हम सभी भारतवासीयों का है और हम सबके पूर्वजों ने इसकी न सिर्फ़ सुरक्षा की है बल्कि अपने त्याग- बलिदान से आज तक भारतीय संस्कृति को जीवित रखा है। किशोरावस्था की शुरुआत में ही शिक्षा के स्तर पर भविष्य के नागरिकों का जीवन बिना सुनवाई और समानता के अंधकारमय कर देना इस देश को गर्त में ले जाएगा। हमारे बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना भी हमारा धर्म और राष्ट्र का सच्चा हित है। पहले ही यह देश भूतकाल के कुछ गलत फैसलों की सजा भुगत रहा है और हम वर्तमान में UGC द्वारा आपसी बटवारे की खाई को ओर गहराता बिल संवेदनशील मुद्दों पर निश्चित ही हमारे देश को गलत दिशा में ले जाएगा। एक भारत श्रेष्ठ भारत की एकता और अखंडता के लिए ऐसे नियम यह सही नहीं है। #UGC #UGCrule
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Ashok Gehlot
Ashok Gehlot@ashokgehlot51·
हम युवाओं के साथ न्याय के लिए कांग्रेस शासन सहित 11 साल पहले जब से यह खेल शुरू हुआ तब से 2026 तक की भर्तियों की जांच की मांग करते हैं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का यह बयान हास्यास्पद और जांच को भटकाने वाला है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में पकड़े गए आरोपियों ने केवल कांग्रेस शासन में गड़बड़ी की। यह सामान्य समझ की बात है कि जो व्यक्ति 2019 में ओएमआर शीट बदलने जैसा अपराध कर रहा था और 2026 तक उसी पद पर जमा रहा, तो क्या यह संभव है कि उसने भाजपा सरकार के कार्यकाल (2024-25) में अपराध करना बंद कर दिया हो?  जांच पूरी होने से पहले ही अपने कार्यकाल को 'क्लीन चिट' देकर मुख्यमंत्री जी क्या एसओजी (SOG) पर यह दबाव नहीं बना रहे हैं कि 2024-25-26 की फाइलों को खोला ही न जाए?  कल ही जोधपुर के शेरगढ़ उपखंड में सड़क पर रीट भर्ती परीक्षा 2025 के दर्जनों एडमिट कार्ड पड़े मिले हैं जबकि वहां 100 किलोमीटर तक कोई परीक्षा केन्द्र नहीं था। इसकी भी जांच की आवश्यकता है कि ये वहां कैसे पहुंचे या वहां कोई अनुचित कृत्य हुआ है। ऐसा लगता है भाजपा सरकार का उद्देश्य इस सिस्टम को सही करने और युवाओं को न्याय देने की बजाय केवल राजनीति करना है। हमारी सरकार ने गड़बड़ी मिलने पर पिछली सरकारों पर दोष मढ़ने के बजाय सख्त कार्रवाई की और RPSC सदस्य सहित 265 से अधिक लोगों को जेल भेजा। कठोरतम कानून बनाया, माफिया की संपत्ति ध्वस्त की। सरकार को डरना नहीं चाहिए, दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए अपने कार्यकाल की भी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।   अब ऐसा लगने लगा है कि भाजपा सरकार राज्य की जांच एजेंसियों पर यह दबाव बना रही है कि जांच केवल 2023 तक सीमित रखी जाए, 2024-25-26 की जांच न हो। SOG ने बताया है कि 11 साल से ओएमआर शीट में गड़बड़ी की जा रही थी। SOG तो राज्य पुलिस की विंग है, उसकी बात को तो राज्य सरकार गंभीरता से ले।
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Ratan Ranjan
Ratan Ranjan@RatanRanjan_·
अगर लिख नहीं सकते तो रिपोस्ट कर दो #UGC_RollBack
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Sushant Sinha
Sushant Sinha@SushantBSinha·
सीधी सी बात है कि अगर वोट लेते वक्त हिंदू एक है तो सेफ़ है बताते हैं तो कायदे बनाते वक्त जनरल और OBC-SC-ST में बाँटकर वो सेफ्टी क्यों छीन रहे? जब सब एक होकर सेफ़ हैं हीं तो सवर्णों से ख़तरा क्यों दिखने लगता है? #UGCRollBack UGC New Rule Explained 👇🏾 youtu.be/R8wzG1-q1MU
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Ashok Gehlot
Ashok Gehlot@ashokgehlot51·
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में ओएमआर शीट बदलने वाले गिरोह के पकड़े जाने के 5 दिन बीत चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार की रहस्यमयी चुप्पी चिंताजनक है। हमारी सरकार ने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आजीवन कारावास, 10 करोड़ जुर्माना और दोषियों की संपत्ति ज़ब्त जैसा देश का सबसे सख्त कानून बनाया और बिना किसी भेदभाव के RPSC सदस्य तक को जेल की सलाखों के पीछे भेजकर नजीर पेश की। हमने गड़बड़ी मिलने पर कभी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर केवल पूर्ववर्ती सरकारों पर दोष नहीं मढ़ा, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की। अब 'जीरो टॉलरेंस' का दावा करने वाली भाजपा सरकार बताए कि वह अपने कार्यकाल (2024-25) के दौरान हुई परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच करवाने की घोषणा करने से क्यों बच रही है? क्या भाजपा सरकार युवाओं के साथ न्याय नहीं करना चाहती है?
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
कुछ सवाल जिनके उत्तर सबको मालूम है। 1.जब मंजू शर्मा और संगीता आर्या द्वारा किसी घोटाले का कोई प्रमाण सामने नहीं आया, तो उन्होंने समय से पहले इस्तीफा क्यों दिया? और यदि वे दोषी नहीं थीं, तो उनका इस्तीफा स्वीकार क्यों किया गया? 2.REET परीक्षा के मुख्य आरोपी जारोली और दीपक पाराशर की जोड़ी आखिर कहां गायब हो गई है? क्या वे पाताल में समा गए हैं, या जानबूझकर उन्हें ओझल रखा गया है? 3.इतने दिन बीत जाने के बाद भी जिन 38 लोगों को पकड़ा गया है, उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? उनकी बर्खास्तगी के आदेश अब तक जारी क्यों नहीं हुए? 4.बोर्ड से OMR शीट क्या अपने आप पैरों से चलकर बाहर चली गई? यदि उन्हें सुरक्षित नहीं रखा गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही है? 5.अधीनस्थ बोर्ड की तरह RPSC भी विस्तृत विवरण के साथ परीक्षा परिणाम क्यों जारी नहीं करता? क्या पारदर्शिता से परहेज किया जा रहा है? 6.क्या बाबूलाल कटारा अकेले ही भ्रष्टाचार कर रहा था? क्या अन्य सदस्य और अध्यक्ष उसकी गतिविधियों से अनभिज्ञ थे? या फिर उनकी सहमति और सहयोग के बिना इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव था?
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Abhinav Pandey
Abhinav Pandey@Abhinav_Pan·
#UGC जातिगत भेदभाव को एकजुटता से रोका जाना चाहिए। ये काम साफ नियत से करना चाहिए, सियासी उल्लू सीधा करने के लिए नहीं। और नियम जाति के महीन पिरामिड को समझते हुए बनाए जाने चाहिए। 1. सवर्ण छात्र अगर जातिगत भेदभाव करते हैं तो उनपर कार्रवाई हो,मगर उन्हें आपसी रंजिश में फँसाया जाए तो फँसाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। क़ानून का दुरूपयोग नहीं होना चाहिए। 2. अगर कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग से भेदभाव करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान क्यों नहीं है? भेदभाव के मामले तो यहां भी होते हैं 3. नए नियमों में OBC वर्ग को भी पीड़ित पक्ष में रखा गया है, तो क्या Gen वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है? जातिगत भेदभाव देश के लिए नासूर है। ऐसे मामलों में दोषी के खिलाफ सख़्त सजा का प्रावधान होना चाहिए,मगर निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए। 2012 में बने नियम में था कि अगर आरोप ग़लत निकले या फँसाने की मंशा निकली तो जुर्माना लगता था। नए नियम में क्यों नहीं है? बाक़ी जाति का पिरामिड समझना है तो नियम बनाने वालों को गाँव में घूमकर समझना चाहिए। एसी कमरों में सिर्फ़ हवा ठंडी लगती है,जातिगत गर्माहट नहीं पता लगती। अंत में- परसाई जी,सच लिख गए हैं। इस देश में हर जाति ने अपने से छोटी जाति खोज रखी है। ये लिखा समझना है तो @TheNewspinch की Documentary Musahar देख लीजिएगा
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Arvind Chotia
Arvind Chotia@arvindchotia·
अब तो ये स्पष्ट है सारे नेता भ्रष्ट हैं भास्कर ने भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय, सभी प्रकार के एक-एक विधायक को सैंपल के तौर पर टेस्ट किया और पैसा लेने के लिए सारे तैयार बैठे हैं। 40% पैसा नेताओं को चाहिए और अफसर को कितना चाहिए यह बताया नहीं गया है। फिर भी आखिर में निर्माण कार्य में कितना पैसा लगता है, इसकी कुछ झलक तो जरूर मिलती ही है। अब जब हम शिकायत करते हैं कि सरकारी निर्माण क्यों कुछ ही दिनों में दरक जाते हैं, सड़कों की पपड़ी क्यों उतर जाती है, कुछ ही बरस पूर्व बने स्कूल/काॅलेज/दफ्तर की छतें क्यों गिर जाती हैं, क्यों कमजोर होती हैं, इन सब सवालों का जवाब आज भास्कर के तेज तर्रार रिपोर्टर अवधेश आकोदिया ने एक साथ ही दे दिया है। हमेशा पूछा जाता है कि यहां भ्रष्ट कौन नहीं है, तो जवाब एक ही होता है कि वही भ्रष्ट नहीं है जिसे भ्रष्टाचार करने का अवसर नहीं मिला है। विधायकों के पास विधायक निधि होती है और इसका उपयोग अपने विवेक से कर सकते हैं तो इसी में जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। बहरहाल, अवधेश भाई और दैनिक भास्कर टीम को हार्दिक बधाई। अभिनंदन। आपने आम धारणा को पुष्ट किया है। @avadheshjpr
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