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https://t.co/jlWQskFgSz, M. Sc (University Of Allahabad), M.A in Geography, B.Ed ... Supporter of Dr. B.R Ambedkar, Sahab Kanshiram and Bhanji's Ideology

Katılım Temmuz 2022
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याद रखिए हमारा सामाजिक परिवर्तन एक मिशन है उनका सामाजिक न्याय एक धोखा है।परिवर्तन और न्याय में जमीन आसमान का फर्क है कभी दोनों शब्दों का वैचारिक मतलब पता करिए सामाजिक परिवर्तन और न्याय में फर्क साफ पता चलेगा। तस्वीरें आपको बहुत कुछ बता देंगी। इसलिए सपा से सावधान रहें दलित भाई।
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दर्द.. चुनाव बाद चुनाव आयोग और evm की मैया दईया करनी है।लेकिन ये सब कभी भी evm का विरोध सड़क पर नहीं करेंगे। Evm का मुद्दा राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बनाएंगे विपक्ष इतने सांसद और विधायक लेकर बैठा है सब निकम्मे हैं।इन लोगों में कुव्वत ही नहीं ये लोग बीजेपी को हरा दें। रीढ़विहीन विपक्ष
Neha Singh Rathore@nehafolksinger

भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव जीत गई. चुनाव आयोग को बधाई🙏

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हां जैसे अखिलेश यादव पिछली विधानसभा में 400 सीट जीतने का वादा कर रहे थे। वैसे भी बीजेपी जानती है जब तक वह अखिलेश यादव को मुख्य विपक्ष के तौर पर बना के रखेगी तब तक जीतती रहेगी। अखिलेश यादव बीजेपी की जीत की गारंटी हैं यह बात योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं।
ANIL@AnilYadavmedia1

@Voiceofpavan हाथी अकेले लड़े तो चार सौ सीट जीतेगा

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दलितों को, मुस्लिम समुदाय की तरह सपा कांग्रेस के बीजेपी हटाओ या हराओ अभियान में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। सपा के 37 सांसद 111 विधायक हैं कांग्रेस के 99 सांसद हैं ये लोग सदन में आपके अधिकारों के आवाज कब उठाए। अपनी पार्टी को मजबूत करें सीटों से नहीं मतलब। आप एकजुट रहें।
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मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की जरूरत है। कोई भी गठबन्धन नहीं हरा सकता है। दो फ्रंट की लड़ाई में बीजेपी आसानी से जीत जाती है। जहां जहां त्रिकोणीय मुकाबले होते हैं वहां बीजेपी साफ हो जाती है। बसपा को पोस्ट पोल एलायंस करना है। शर्त यह होनी चाहिए मुख्यमंत्री बहन जी होनी चाहिए।
सिद्धार्थ मौर्य@siddarthmaurya

बसपा+सपा +छोटे दलों का गठबन्धन ही यूपी में भाजपा को सत्ता से बाहर कर सकता है अगर ये गठबंधन नहीं हुआ तो फिर से बीजेपी सरकार

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(Prateek Pushkar)@LearnGeography0·
सूरज सर के इस लेख को दलितों को जरूर पढ़ना चाहिए ।
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh

लक्ष्मण यादव के एजेंडे का पोस्टमॉर्टम। एक पॉडकास्ट में बहन मायावती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर स्मृतियों का नहीं, संघर्ष का है। लक्ष्मण जी, आप Dominant Caste से आते हैं। अतः आपको स्मृतियों की कद्र नहीं है लेकिन हम दलितों के जेहन में सपा सरकार के एक-एक पाप की स्मृति अमिट छाप की तरह बसी हुई है। क्या आपके सामाजिक न्याय की समझ यही कहती है कि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने गेस्ट हाउस कांड में बहन जी पर जो जानलेवा एवं बर्बर हमला किया था, हम उन स्मृतियों को भूल जाएं क्योंकि हमें BJP को हराना है? क्या हम उन स्मृतियों को भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने जातीय द्वेष में 20 लाख से अधिक कर्मचारियों का डिमोशन किया था? या फिर उन स्मृतियों को भूल जाएं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भरी संसद में SC-ST समुदाय के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था? क्या आप यह नहीं जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 के अपने मैनिफेस्टो में कैसे SC-ST Act के तहत दर्ज मामलों का रिव्यू करने का वादा किया था, और अखिलेश की सरकार बनते ही उन्होंने सत्ता एवं प्रशासन के दम पर रिव्यू के नाम पर अनगिनत पीड़ित दलितों पर उल्टा कार्रवाई कराई थी? हम कैसे भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने अपनी जातीय कुंठा में बहन जी द्वारा दलित एवं पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे? या फिर यह भूल जाएं कि कैसे सपा सरकार ने अनेकों आम्बेडकर पार्कों को खाली कराया, कैसे बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने अनेकों अस्पतालों, पार्कों एवं कॉलेजों के नाम बदले थे? सपा सरकार बनते ही आपके सजातीय लोगों ने दलितों की जमीनें कब्जानी शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन पर बर्बर हमले हुए, लेकिन सपा सरकार और पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर उनका मनोबल बढ़ाने में लगी रही। दलित समुदाय की मां-बहनों का बाहर निकलना भी दुभर हो गया था। रेप, छेड़खानी एवं जातीय हिंसा आम बात हो गई थी। यह सब किसी आतंक से कम नहीं था। आप चाहते हैं कि हम इन स्मृतियों को भूल जाएं? वाह! दलितों के मंच में जाकर उन्हें लच्छेदार भाषणों की चटनी चटाने वाले लक्ष्मण यादव को सामाजिक न्याय की इतनी सी बुनियादी समझ नहीं है कि स्मृतियां हमेशा समता के संघर्ष को सींचती हैं। ये स्मृतियां उस दौर की हैं जब दलित समुदाय के लोग मान्यवर कांशीराम एवं बहन जी के नेतृत्व में आजादी की आबोहवा में सिर उठाकर जीना शुरू कर चुके थे। समाजवादी पार्टी के गुंडों ने शुरू से ही उन्हें कुचलना शुरू किया। आलम यह था कि उन्होंने गैंग बनाकर 2 जून 1995 को बहन जी जैसी महान और शक्तिशाली नेता पर भी जानलेवा हमला किया। वैसे तो आप मनुस्मृति की किताब उठाकर रोज स्मृतियों की दुहाई देते रहते हैं, लेकिन जब दलितों की स्मृतियों की बारी आई तो आप स्मृतियों को भूलकर संघर्षों की दुहाई देने लगे। वैसे किन संघर्षों की बात कर रहे हैं आप? अखिलेश यादव द्वारा एक हॉल में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को आप संघर्ष कहते हैं? दलितों द्वारा दिन-रात जातीय हिंसा के खिलाफ हो रहा संघर्ष आपको दिखाई नहीं देता? दिखाई भी क्यों देगा, जाति का मामला जो है। अखिलेश यादव आपके सजातीय हैं। अतः उनका नाखून कटाना भी आपको संघर्ष ही दिखाई देगा। हम जानते हैं कि हमारा समाज बहुत भोला-भाला है, गुमराह हो जाएगा, लेकिन सनद रहे कि अभी समाज में हम जैसे लोग जिंदा हैं। हम अब उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने देंगे। जब आपके सजातीय लोग दलितों का दमन करते हैं, तो आपका सामाजिक न्याय वाला मुखौटा पूरा समाज देखता है। आपकी सामाजिक न्याय की समझ बस इतनी है कि आप BJP का डर दिखाकर दलितों का राजनीतिक नेतृत्व खत्म कर सकें, ताकि दलित आप Dominant Caste के रहमो-करम पर जिंदा रहे, जहां आप अपने फायदे के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। जैसे गांवों में लोग मजदूरी एवं बेगारी हेतु दलितों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही आप राजनीति में उनका इस्तेमाल करें। न तो हम मान्यवर कांशीराम, बहन जी एवं बसपा की कल्याणकारी स्मृतियों को भूलेंगे और न समाजवादी पार्टी द्वारा दलितों पर किए गए पापों की स्मृतियों को भूलेंगे। संघर्षों का दौर आपके लिए नया होगा, लेकिन हम दलित समुदाय के लोग सदियों से ही संघर्ष करते आए हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम दलितों का जीवन संघर्षों में ही बीतता है। बस अंतर इतना है कि आपका संघर्ष सिर्फ BJP से है। हमारा संघर्ष सिर्फ BJP से नहीं, बल्कि उनसे भी है जो BJP के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दलितों का संघर्ष समता एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए है। किसी पार्टी के विरोध अथवा समर्थन के नाम पर हमें खाई में न धकेलें। दलितों के जेहन में सपा की जातीय उत्पीड़न, विद्वेष एवं जातीय हिंसा से ओतप्रोत स्मृतियां भरी हुई हैं। न भूलेंगे, न माफ करेंगे।

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Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
लक्ष्मण यादव के एजेंडे का पोस्टमॉर्टम। एक पॉडकास्ट में बहन मायावती पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज का दौर स्मृतियों का नहीं, संघर्ष का है। लक्ष्मण जी, आप Dominant Caste से आते हैं। अतः आपको स्मृतियों की कद्र नहीं है लेकिन हम दलितों के जेहन में सपा सरकार के एक-एक पाप की स्मृति अमिट छाप की तरह बसी हुई है। क्या आपके सामाजिक न्याय की समझ यही कहती है कि समाजवादी पार्टी के गुंडों ने गेस्ट हाउस कांड में बहन जी पर जो जानलेवा एवं बर्बर हमला किया था, हम उन स्मृतियों को भूल जाएं क्योंकि हमें BJP को हराना है? क्या हम उन स्मृतियों को भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने जातीय द्वेष में 20 लाख से अधिक कर्मचारियों का डिमोशन किया था? या फिर उन स्मृतियों को भूल जाएं कि समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भरी संसद में SC-ST समुदाय के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फाड़ दिया था? क्या आप यह नहीं जानते हैं कि मुलायम सिंह यादव ने 2012 के अपने मैनिफेस्टो में कैसे SC-ST Act के तहत दर्ज मामलों का रिव्यू करने का वादा किया था, और अखिलेश की सरकार बनते ही उन्होंने सत्ता एवं प्रशासन के दम पर रिव्यू के नाम पर अनगिनत पीड़ित दलितों पर उल्टा कार्रवाई कराई थी? हम कैसे भूल जाएं कि अखिलेश यादव ने अपनी जातीय कुंठा में बहन जी द्वारा दलित एवं पिछड़े महापुरुषों के नाम पर बने जिलों के नाम बदल दिए थे? या फिर यह भूल जाएं कि कैसे सपा सरकार ने अनेकों आम्बेडकर पार्कों को खाली कराया, कैसे बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने अनेकों अस्पतालों, पार्कों एवं कॉलेजों के नाम बदले थे? सपा सरकार बनते ही आपके सजातीय लोगों ने दलितों की जमीनें कब्जानी शुरू कर दीं। विरोध करने पर उन पर बर्बर हमले हुए, लेकिन सपा सरकार और पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर उनका मनोबल बढ़ाने में लगी रही। दलित समुदाय की मां-बहनों का बाहर निकलना भी दुभर हो गया था। रेप, छेड़खानी एवं जातीय हिंसा आम बात हो गई थी। यह सब किसी आतंक से कम नहीं था। आप चाहते हैं कि हम इन स्मृतियों को भूल जाएं? वाह! दलितों के मंच में जाकर उन्हें लच्छेदार भाषणों की चटनी चटाने वाले लक्ष्मण यादव को सामाजिक न्याय की इतनी सी बुनियादी समझ नहीं है कि स्मृतियां हमेशा समता के संघर्ष को सींचती हैं। ये स्मृतियां उस दौर की हैं जब दलित समुदाय के लोग मान्यवर कांशीराम एवं बहन जी के नेतृत्व में आजादी की आबोहवा में सिर उठाकर जीना शुरू कर चुके थे। समाजवादी पार्टी के गुंडों ने शुरू से ही उन्हें कुचलना शुरू किया। आलम यह था कि उन्होंने गैंग बनाकर 2 जून 1995 को बहन जी जैसी महान और शक्तिशाली नेता पर भी जानलेवा हमला किया। वैसे तो आप मनुस्मृति की किताब उठाकर रोज स्मृतियों की दुहाई देते रहते हैं, लेकिन जब दलितों की स्मृतियों की बारी आई तो आप स्मृतियों को भूलकर संघर्षों की दुहाई देने लगे। वैसे किन संघर्षों की बात कर रहे हैं आप? अखिलेश यादव द्वारा एक हॉल में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को आप संघर्ष कहते हैं? दलितों द्वारा दिन-रात जातीय हिंसा के खिलाफ हो रहा संघर्ष आपको दिखाई नहीं देता? दिखाई भी क्यों देगा, जाति का मामला जो है। अखिलेश यादव आपके सजातीय हैं। अतः उनका नाखून कटाना भी आपको संघर्ष ही दिखाई देगा। हम जानते हैं कि हमारा समाज बहुत भोला-भाला है, गुमराह हो जाएगा, लेकिन सनद रहे कि अभी समाज में हम जैसे लोग जिंदा हैं। हम अब उन्हें चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आने देंगे। जब आपके सजातीय लोग दलितों का दमन करते हैं, तो आपका सामाजिक न्याय वाला मुखौटा पूरा समाज देखता है। आपकी सामाजिक न्याय की समझ बस इतनी है कि आप BJP का डर दिखाकर दलितों का राजनीतिक नेतृत्व खत्म कर सकें, ताकि दलित आप Dominant Caste के रहमो-करम पर जिंदा रहे, जहां आप अपने फायदे के अनुसार उनका इस्तेमाल करें। जैसे गांवों में लोग मजदूरी एवं बेगारी हेतु दलितों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही आप राजनीति में उनका इस्तेमाल करें। न तो हम मान्यवर कांशीराम, बहन जी एवं बसपा की कल्याणकारी स्मृतियों को भूलेंगे और न समाजवादी पार्टी द्वारा दलितों पर किए गए पापों की स्मृतियों को भूलेंगे। संघर्षों का दौर आपके लिए नया होगा, लेकिन हम दलित समुदाय के लोग सदियों से ही संघर्ष करते आए हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हम दलितों का जीवन संघर्षों में ही बीतता है। बस अंतर इतना है कि आपका संघर्ष सिर्फ BJP से है। हमारा संघर्ष सिर्फ BJP से नहीं, बल्कि उनसे भी है जो BJP के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। दलितों का संघर्ष समता एवं संवैधानिक मूल्यों के लिए है। किसी पार्टी के विरोध अथवा समर्थन के नाम पर हमें खाई में न धकेलें। दलितों के जेहन में सपा की जातीय उत्पीड़न, विद्वेष एवं जातीय हिंसा से ओतप्रोत स्मृतियां भरी हुई हैं। न भूलेंगे, न माफ करेंगे।
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कुछ बीएसपी समर्थक पश्चिम बंगाल तमिलनाडु आदि राज्यों के चुनाव के बाद बसपाऔर आसपा की राग अलापे हुए हैं कुछ बसपा और सपा का।घोचुओं की बात पर ध्यान न देकर बहन जी को यूपी पर फोकस करके बस यूपी विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय बनाना है पोस्ट पोल एलायंस किसी से भी करें बीजेपी और सपा कोई भी।
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इसे कहते हैं चने की झाड़ पर चढ़ाना। और ताज्जुब की बात तो ये है कि गोबरौटी के लौंडे चढ़ भी जाते हैं।
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ये बात पहले लक्ष्मण यादव से पूछना चाहिए द्वापर युग था भी या नहीं। लक्ष्मण यादव तो नहीं मानते हैं। मतलब किन्हें बेवकूफ बना रहे हैं। एक तरफ तो हिंदू धर्म का विरोध कर रहे हैं सपाई एक तरफ समर्थन।
Manoj KAKA@ManojSinghKAKA

आोमप्रकाश राजभर जी को यादवों के द्वापर से लेकर कलयुग तक के गौरवशाली इतिहास का अध्ययन करना चाहिए, योगेश्वर भगवान कृष्ण से लेकर माननीय अखिलेश यादव तक सदैव कमजोर के पक्ष में खड़ा रहने का इतिहास है , और मुगलो के ग़ुलामी करने वालों की ग़ुलामी आोमप्रकाश राजभर स्वयं कर रहे हैं ।

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पंडित जगन्नाथ
यूपी वाले भैया जी , आप के ग्रह नक्षत्र ठीक नहीं चल रहे हैं। आप जहां जाते हैं, वही हार जाता है। मत जाइए प्रचार करने । हम तो कहेंगे कि आप यूपी में भी अपना प्रचार मत करिए । आपके प्रचार के साथ दुर्योग चलता है। तीन चार राज्यों में आपके प्रचार को देखकर कोई भी अब समझ चुका होगा । 😀
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लो अब बात कर लो यहां पूरे इंडी गठबंधन का लवणेनभोज्यम् हो गया इनको सिर्फ कांग्रेस की पड़ी है। जिसके जिसके समर्थन में अखिलेश यादव खड़े हुए वो तो स्वाहा हो ही गया।
Vishal JyotiDev Agarwal 🇮🇳@JyotiDevSpeaks

असम में कांग्रेस का फिर लवड़ेन भुज्यम हो गया है!

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अखिलेश के यादव के पास 111 विधायक है। 37 सांसद है। 5 राज्यसभा में है। इन सभी को लेकर अखिलेश यादव कब सड़को पर आए? सिर्फ एक महफिलखाना खोल रखा है, जँहा कुछ को बुलाकर माला पहनाकर शेरो शायरी चलती रहती है। क्रेडिट...विकास कुमार जाटव जी @vkjatav84
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अखिलेश यादव के सम्मान में सपाई लक्ष्मण यादव हिंदू देवी देवताओं का सम्मान करते हुए। अरे तुम नहीं मानते चलो ठीक है लेकिन अपमान करने का अधिकार तुम्हे किसने दिया। गोबरौटी में अगर ये यही लैक्चर दे दिए तो गोबरौटी के लौंडे वही इनकी गांव का गुणगांव बना देंगे।
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पनौती जहां जहां जाता है वहां वहां बीजेपी जीत जाती है। गोबरौटी वाले और जुम्मन मियां समझ नहीं पा रहे हैं कि वही बीजेपी की जीत की गारंटी हैं। लाल टोपी, काले कारनामें थू है तुम लोगों की राजनीति पर बैठकर घुइयां छीलो।
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😂 दीदी आई और गई। आपस में लड़ के कट मरो सब। अब यूपी की बारी है। 37 सांसद 111 विधायक होने का घमंड चूर हो जाएगा। बहन जी के विरोध में रोज दो चार पोस्ट डाला करिए। फिर देखिये बहन जी वोट बैंक खिसका भी तो किसे जायेगा । जमीनी हकीक़त से दूर हैं आप। सपा दलितों की कोई आवाज नहीं उठाई।
Neeraj Kanojia@NeerajKanojia16

.....भागो ब्रो श्री के चाणक्य दीदी आई 🤘🤘 #electionresult2026

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ये सब पनौती जिसके भी पक्ष में बोलते हैं या लिखते हैं समझ लो उसका बंटाधार तय है। बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश इन पनौतियों की वजह से बीजेपी जीत गई। क्रिकेट सूर्य कुमार यादव को तो ये सब पनौती पहले ही शून्य कुमार यादव बना चुके हैं।
Surya Samajwadi@surya_samajwadi

8 बजे काउंटिंग शुरू होगी 12 बजे तक TMC के पार्टी ऑफिस में ढोल नगाड़े बजने शुरू हो जाएँगे 2 बजे ममता दीदी पश्चिम बंगाल की जनता को धन्यवाद देते हुए पोस्ट करेंगी 6 बजे ममता दीदी पार्टी ऑफिस पहुंचेगी और निर्ममता वाले दादा के ख़िलाफ़ जोरदार भाषण देंगी 8 बजे मोदी जी ममता बनर्जी को चौथी बार जीतने की बधाई देंगे 🤣

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