Meerwal_ji

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@Meerwal_

Socio-Political Activist, Anti-Castist,Social Activist || Humanist | Nationalist | constitutionalist | Nature Lover | Fight For Human Rights,Fb💯%

Jaipur Katılım Mart 2013
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Meerwal_ji@Meerwal_·
@WMX_MEDIA @grok हिन्दी में अनुवाद करो क्या लिखा है
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الأحداث الإيرانية
🔴عـــــــــاجل مودي رئيس الوزراء الهندي يترجى مجتبى خامنئي بمرور السفن الهندية وتزويده بالنفط مع ازدياد الغضب الشعبي في الهند ومحاوله الاطاحة بحكومته اثر التطبيع مع اسرائيل ووصفها بالاب الروحي ”_ ورد السيد خامنئي قائلاً: "اطردوا السفيرين الأميركي والإسرائيلي، وبعد ذلك يمكنكم المرور. نحن لا نتعامل مع أولئك الذين يعتمدون على طرفين. هذا كل ما يجب أن أقوله". ثم أغلق الخط.
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Meerwal_ji
Meerwal_ji@Meerwal_·
''बसपा के जन्मदाता को श्रद्धांजलि। 💐💐🙏🙏 आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन। कांशीराम जी ने बाबा साहेब की सोच आगे बढ़ाई। बहुजन समाज के लोग बीएसपी मूवमेंट से जुड़ें। मिशनरी, ईमानदार अम्बेडकरवादी बनें। वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें''
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Pk...मौर्यवंश की बेटी ☸️ ⛩️
शोषित, वंचित, दलित पिछड़े वर्ग, को न्याय अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले बहुजन समाज के मसीहा.... "मान्यवर कांशीराम जी" की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन 🙏
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Meerwal_ji
Meerwal_ji@Meerwal_·
@tapasyadeva_44 क्या आप बांदीकुई से हो
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Tapasya Deva
Tapasya Deva@tapasyadeva_44·
कोई भाई रेलवे में हों और वह यह जानता हों तो हमें यह बताने का कष्ट करें कि रेलवे स्टेशन पर रखी इन पेटियों में क्या सामान होता है। दोस्तों आज रेलवे स्टेशन पर ये पेटियां देखी तो मन में यह विचार आ गया।
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Meerwal_ji
Meerwal_ji@Meerwal_·
@EyeOn_Trade कुछ नहीं करेंगे बस धैर्य बनाकर रखेंगे
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Pankaj Jain SEBI RA
Pankaj Jain SEBI RA@EyeOn_Trade·
NIFTY अचानक 1000 पॉइंट gap down खुले तो आप क्या करेंगे?
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Ravindra Choudhary
Ravindra Choudhary@Ravindrachdry·
100% काम लेकर 50% वेतन — ये प्रोबेशन नहीं, शोषण है ।। जब जिम्मेदारी पूरी,तो वेतन अधूरा क्यों ?? @RajGovOfficial प्रोबेशन में भी 100% वेतन दो ।। #प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन #प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन #प्रोबेशन_में_पूरा_वेतन @BhajanlalBjp @RajCMO @LDCsangh
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खुरपेंची स्वास्थ्य
हमारे देश में सबसे संगठित लूट आज ब्लड टेस्ट, X-Ray और Ultrasound के नाम पर चल रही है। डॉक्टर मनमर्जी से जांच लिख देता है , गरीब-मध्यम वर्ग डर के मारे जांच करा लेता है। हर टेस्ट ₹1,000 से ₹7,000 और कई बार एक ही बीमारी में 10–15 गैरज़रूरी जांचें। अब सीधे सवाल सिस्टम और अधिकारियों से 👇 इन प्राइवेट लैब्स की रेट लिस्ट कौन तय करता है? क्या हर जांच से पहले मेडिकल जस्टिफिकेशन अनिवार्य है या बस कमीशन?? डॉक्टर और लैब के बीच कट-प्रैक्टिस पर कार्रवाई कब होगी? National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories की मान्यता होने के बाद भी ओवरचार्जिंग कैसे चल रही है? Indian Medical Association इस लूट पर चुप क्यों है? गरीब मरीज को यह बताने वाला कौन है कि कौन-सी जांच ज़रूरी है और कौन-सी नहीं? हकीकत 👇 जांच लिखो → डर पैदा करो → महंगी लैब भेजो → कमीशन खाओ। इलाज सस्ता नहीं , जांच सबसे महंगी। बीमा/योजना के बाहर का मरीज कर्ज में डूबता है। मांग साफ है 👇 रेट-कैपिंग , ऑनलाइन पब्लिक रेट बोर्ड, डिजिटल जस्टिफिकेशन नोट अनिवार्य। अनावश्यक जांच पर डॉक्टर-लैब दोनों पर कड़ी सज़ा। ऑडिट ट्रेल और व्हिसलब्लोअर सुरक्षा। बीमारी से लड़ना मुश्किल है , लूट से लड़ना उससे भी ज़्यादा। गरीब की जेब नहीं इस सिंडिकेट पर हाथ डालिए।
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BSP
BSP@Bsp4u·
देश में ’सामाजिक परिवर्तन’ के महान संतों में जाने-माने संतगुरु श्री रविदास जी को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ ही देश व दुनिया में रहने वाले उनके करोड़ों अनुयाइयों को इसकी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। संतगुरु श्री रविदास जी ’मन चंगा तो कठौती में गंगा’ अर्थात् मन को शुद्ध व पाक-साफ रखकर ही इंसान सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है तथा समाज व देश का भी भला कर सकता है, जैसा इंसानियत भरा संदेश देने के साथ-साथ अपना सारा जीवन इन्सानियत का संदेश देने में गुज़ारा और इस क्रम में ख़ासकर जाति भेद व द्वेष आदि के खि़लाफ आजीवन कड़ा संघर्ष करते रहकर अमर हो गए। उनका संदेश धर्म की पवित्रता को समाज सेवा व जनचेतना के लिए इंसान एवं इंसानियत की भलाई के लिए है, किसी स्वार्थ ख़ासकर संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिए नहीं, जिसे भुला दिये जाने के कारण ही अमन-चैन, आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा सुख-समृद्धि का वातावरण काफी कुछ प्रभावित है। संतगुरु श्री रविदास जी का उपदेश मानकर उनके करोड़ों ग़रीबों, शोषितों, पीडि़तों आदि का काफी कुछ भला हो सकता है, जिस पर समुचित ध्यान देने की ज़रूरत है।
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President of India
President of India@rashtrapatibhvn·
मैं सभी देशवासियों को गुरु रविदास जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। समानता और समरसता पर आधारित उनका संदेश समाज के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है। त्याग और तपस्या के मार्ग पर चलकर वे जाति और धर्म के भेदभाव को दूर करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। आइए इस अवसर पर, सेवा और भक्ति पर आधारित उनकी शिक्षाओं को अपनाएं और विकसित राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दें।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
देश के संसद में आज केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के सम्बन्ध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा। इसीलिए सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्किी इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी वैसे तो केन्द्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूँजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूँजीपति व धन्नासेठ समर्थक है। इतना ही नहीं बल्कि खासकर अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है। और इसी क्रम में संसद में आज पेश बजट को भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह बजट भी आया और गया की तरह परम्परागत रूप से मायूस करने वाला तो नहीं है। और साथ ही यह प्रश्न छोड़ दिया है कि पिछले वर्ष के बजट में सरकार द्वारा किये गये दावे, वादे और आशायें क्या आज पूरी की गई है या एक रस्म को निभा कर रह गयी है। तथा क्या तुलनात्मक रूप में लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन आया है। वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास व बहु-प्रतीक्षित गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित व देशहित से जुडे़ हैं और जिनका आकलन वर्तमान बजट की वाहवाही से पहले जरूर कर लेना है। सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो यह लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है वरना यह जिम्मेदारी कौन निभाता है।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जाॅच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
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BSP
BSP@Bsp4u·
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है। 2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये। 3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है। 2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये। 3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजापाठ, स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप एवं प्रभाव पिछले कुछ वर्षों से काफी बढ़ गया है, जो नये-नये विवाद, तनाव व संघर्ष आदि का कारण बन रहा है, यह सही नहीं है तथा इन सबको लेकर लोगों में दुख एवं चिन्ता की लहर स्वाभाविक है। वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिये धर्म को राजनीति तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई ख़तरे हमेशा बने रहते हैं तथा प्रयागराज में स्नान आदि को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे का अनादर व आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा़ उदाहरण है। इससे हर हाल में ज़रूर बचा जाना ही बेहतर। वैसे भी देश का संविधान व क़ानून ईमानदारी से जनहित व जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानकर राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखता है, जिस पर सही नीयत व नीति से अमल हो, ताकि राजनेतागण अपना सही संवैधानिक दायित्व, बिना किसी द्वेष व पक्षपात के, सर्वसमाज के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हित में ईमानदारी व निष्ठापूर्वक निभा सकें, वर्तमान हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा। अतः प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितना जल्द सुलझ जाये उतना बेहतर। इसके साथ ही, आज ’उत्तर प्रदेश दिवस’ की सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
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Narendra Ji
Narendra Ji@Na72866·
बहुत कड़वा दृश्य है एक भूखी बच्ची प्लेटों से जूठा खा रही हो और चारों ओर खामोशी हो। दरअसल असली कमी खाने की नहीं इंसानियत की थी जो वहाँ सबसे ज़्यादा भूखी थी। अगर किसी एक ने भी हाथ बढ़ाया होता तो वो बच्ची पेट से नहीं दिल से भी भर जाती। चलो हम तय करें कि जहाँ भी ऐसे हालात दिखें वहाँ खड़े न देखें इंसान बनें इंसानियत
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Aas Mohd Saifi
Aas Mohd Saifi@yuva_aas·
हाई बेस DJ पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए..!
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Meerwal_ji
Meerwal_ji@Meerwal_·
@Neha_1513 कैसे हालात हो गए सिस्टम के
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Neha
Neha@Neha_1513·
एक महिला बलात्कार की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची,दरोगा का अभद्र व्यवहार सामने आया..!! कहां तक सही है ऐसा अभद्र व्यवहार करना ..??
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Meerwal_ji@Meerwal_·
@ImSoniya24 हफ्ते में 411 घंटे होते ही नहीं जी
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Soniya Deshwal
Soniya Deshwal@ImSoniya24·
ये हैं मुंबई के Zomato Delivery Partner ‘उमा शंकर’ इनकी कमाई देखकर आप हैरान हो जाओगे उमा शंकर ने सिर्फ दिसंबर के महीने में Zomato के साथ काम करके ₹1,04,155 रुपए कमाए है उमा शंकर के फोन के Dashboard के अनुसार 👇🏻 • एक महीने में 1,013 डिलीवरी पूरी की • हफ्ते में लगभग 411 घंटे काम किया • हर दिन करीब 13 से 14 घंटे काम किया • और रोजाना 30 से 33 ऑर्डर पहुंचाए उमा शंकर ने 2025 में डिलीवरी के काम से कुल ₹10,50,000 कमाए जब इनसे इस बारे में पूछा गया तो उमा शंकर ने गर्व से कहा ‘‘₹10 लाख’’ कमाए हैं यह कहानी दिखाती है कि अगर मेहनत और लगन से किया जाए, तो 'गिग वर्क' से भी शानदार कमाई की जा सकती है
Soniya Deshwal tweet mediaSoniya Deshwal tweet media
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Dr. Sheetal yadav
Dr. Sheetal yadav@Sheetal2242·
जो काम ये लोग करते हैं इसका भुगतान सैलरी से नहीं किया जा सकता है। सोसाइटी को उनके प्रति थैंकफुल होना चाहिए।
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