
S.M.K
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जाटव दलित समाज इस समय राजनीति में नेतृत्व विहीन महसूस कर रहा है, और वह भी जननायक तथा बहुजन मसीहा आदरणीय श्री अखिलेश जी को अपना नेता स्वीकार करना चाहता है। लेकिन अतीत के अनुभवों के कारण वह थोड़ा संकोच कर रहा है। चूंकि उसकी सीधी लड़ाई पहले समाजवादी पार्टी से ही रही है, इसलिए वह खुलकर सपा का दामन थामने में हिचकिचा रहा है। वे सोच रहे हैं कि यदि कोई उन्हें खुले दिल से आमंत्रित करे, तो वे सहर्ष आगे आने को तैयार हैं। कहीं न कहीं जाटव दलित समाज भी अब यह बात स्वीकार कर चुका है कि आदरणीय बहन जी की राजनीतिक वापसी अब बहुत कठिन है। सब जानते है, हर किसी का एक दौर होता है, और अब समय बदल चुका है। ऐसे में सारे गिले-शिकवे भुलाकर अखिलेश जी @yadavakhilesh को भी कदम आगे बढ़ाना चाहिए और विशेष रूप से जाटव दलित समाज को खुले मंच से आवाज देनी चाहिए। खैर, मेरा क्या! मैं तो सच लिखने के लिए प्रतिबद्ध हूं।
















BJP बनाम CJP













