राज | ʀᴀᴀᴢ | راج
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@MlaErRr
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भारतीय जनता पार्टी को ही फायदा पहुंचाने के लिए हमारे ओवैसी साहब इसी प्रकार का हथकंडा अपनाते हैं - संजय राऊत

सोचिये 1000 करोड़ की डील और ये सिर्फ एक सूबे में चुनावी फायदा पँहुचाने की क़ीमत। जिनसे कई कई राज्यों में चुनावी फायदा लेना है उनको क्या क्या सुविधाएं दी जाती होंगी। अब गठबंधन तोड़ लेने से दामन पर लगे दाग़ नहीं छूटेंगे, सबकुछ जानते हुए भी गठबंधन करने का जवाब भी कम्युनिटी को देना पड़ेगा। न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में।



*सांप्रदायिक दल से गठबंधन पर मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी को जमीयत उलेमा-ए-हिंद का नोटिस, 24 घंटे में स्पष्टीकरण तलब* नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपनी घोषित सिद्धांतगत और संगठनात्मक नीति के तहत मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी से हालिया चुनावी अभियान के दौरान एक सांप्रदायिक राजनीतिक दल के साथ कथित गठबंधन और खुले समर्थन के संबंध में 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जमीयत ने आज़ादी के तुरंत बाद कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक, दिनांक 17 और 18 अगस्त 1951, जिसकी अध्यक्षता मौलाना सैयद हुसैन अहमद मदनी ने की थी, चुनाव और मतदान के संबंध में एक स्पष्ट, सिद्धांतगत नीति को अनुमोदित किया था। इस नीति की पुष्टि बाद की अनेक बैठकों में भी बार-बार की जाती रही है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जमीयत की नीति के अनुसार उसके सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसी भी सांप्रदायिक दल से किसी प्रकार का संबंध, राजनीतिक सहभागिता या समर्थन न रखें। इसके विपरीत, उन्हें केवल ऐसी राजनीतिक शक्तियों और दलों के साथ रहने का निर्देश दिया गया था जो राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की बहुलतावादी सामाजिक संरचना की रक्षा के पक्षधर हों। जमीयत के अनुसार हालिया चुनावी अभियान में मौलाना बदरुद्दीन अजमल क़ासमी द्वारा एक सांप्रदायिक दल के साथ राजनीतिक गठबंधन किए जाने तथा उसकी खुली हिमायत किए जाने की बात सामने आई है, जो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की घोषित नीति और उसके मूल सिद्धांतों से स्पष्ट विचलन माना जा रहा है। इसी संदर्भ में उनसे कहा गया है कि वे 24 घंटे के भीतर अपना लिखित उत्तर केंद्रीय कार्यालय को भेजें और यह स्पष्ट करें कि उक्त कदम किन उद्देश्यों, परिस्थितियों और आधारों पर उठाया गया। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि प्राप्त उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संगठनात्मक नियमावली के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अपने बयान में पुनः दोहराया है कि वह अपने अकाबिर द्वारा निर्धारित सिद्धांतगत रुख, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा सांप्रदायिक राजनीति के हर स्वरूप के विरोध के अपने रुख पर पूरी दृढ़ता के साथ कायम है। --------- प्रिय संपादकगण इस प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित करने की कृपा करें भवदीय नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी सचिव, जमीअत उलमा-ए-हिंद


























