Vivek

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@MurmuringInk

REAL life issue || Philosophical memes|| Imagination story || Cricket content || Deep Shayari ll Comedy video

IN THOUGHTS Katılım Temmuz 2025
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
कल अपनी स्कूटी के लिए टायर खोजते समय मेरी नज़र एक ऐसी चीज़ पर पड़ी, जिस पर मैंने पहले कभी ध्यान नहीं दिया था... हम सभी ने ट्यूबलेस टायर के बारे में सुना है। लेकिन अचानक मुझे एक लिस्टिंग दिखाई दी, जिस पर लिखा था— “सॉलिड टायर – एयरलेस टायर” एक पल के लिए मैंने सोचा— “बिना हवा का टायर? फिर यह चलता कैसे होगा?” 🤔 थोड़ा और पढ़ने पर समझ आया कि इन टायरों में हवा का इस्तेमाल ही नहीं होता। न पंचर का डर, न हवा का प्रेशर चेक करने की जरूरत। यह टायर ठोस रबर से बना होता है और सीधे व्हील हब पर फिट किया जाता है। लेकिन इसमें एक दिक्कत भी है। प्रोडक्ट के विवरण में साफ लिखा था कि इसकी फिटिंग आसान नहीं होती और अक्सर प्रोफेशनल टूल्स की जरूरत पड़ती है। यहाँ तक कि फिट करने से पहले टायर को गर्म पानी में रखने की सलाह भी दी गई थी, क्योंकि इसका रबर काफी सख्त होता है। तभी मुझे एक दिलचस्प बात समझ आई। सालों पहले लोग ट्यूब वाले टायर से ट्यूबलेस टायर की ओर बढ़े थे। अब इंजीनियरिंग एयरलेस टायरों पर भी काम कर रही है। मकसद? पंचर की समस्या को पूरी तरह खत्म करना। सवाल यह है हम ट्यूबलेस टायरों को अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन क्या एयरलेस टायर दोपहिया वाहनों की सुरक्षा में अगला बड़ा कदम साबित हो सकते हैं? आपकी बहुमूल्य राय जरूर बताइए।
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Zara
Zara@zaramillions·
A heartfelt thank you to each and every one of you. Your love, support, likes, reposts, and comments have made this journey truly special. I hope you'll continue supporting me as we grow together. Now, on to the next milestone 2,000 followers.
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@mahsharfatima86 बिल्कुल, बैग वास्तव में प्रमाणित कम्पोस्टेबल है और उसका सही तरीके से निपटान किया जाए, तो यह प्लास्टिक प्रदूषण कम करने में मदद कर सकता है
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Journalist Fatima ✍️
Journalist Fatima ✍️@mahsharfatima86·
@MurmuringInk अगर कामपॉसtiबल है bag hai तो तो काफी अच्छा है क्योंकि इससे पॉल्यूशन काम हो जाता है और इको फ्रेंडली रहते हैं
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
आज मेरी नज़र दो ऐसी पॉलीथिन पर पड़ी, जिन्होंने मुझे कुछ देर के लिए सचमुच कन्फ्यूज़ कर दिया। पहली नज़र में वे बिल्कुल आम प्लास्टिक बैग जैसी लगीं। सफेद रंग, वही चमक, वही फील… लेकिन जैसे ही मैंने ध्यान से पढ़ा, उस पर लिखा था— “I am Not a Plastic Bag” मैं थोड़ा रुका। फिर आगे पढ़ा— 100% Compostable Does Not Contain Plastic Certified by CPCB Made Using Bio-Compostable Material यानी जो चीज़ दिखने में बिल्कुल प्लास्टिक जैसी लग रही थी, वह असल में प्लास्टिक थी ही नहीं। मेरे हाथ में मौजूद ये दोनों बैग एक दिलचस्प बदलाव की कहानी कह रहे थे। सालों तक हम प्लास्टिक बैग इस्तेमाल करते रहे। सुविधा मिली, लेकिन उसके बदले पर्यावरण ने भारी कीमत चुकाई। अब धीरे-धीरे ऐसी पॉलीथिन सामने आ रही हैं जो देखने में प्लास्टिक जैसी हैं, लेकिन दावा करती हैं कि वे बायो-कम्पोस्टेबल हैं। यहीं से एक बड़ा सवाल पैदा होता है— क्या आने वाले समय में ऐसी थैलियाँ आम प्लास्टिक की जगह ले सकती हैं? अगर हाँ, तो यह सिर्फ़ एक बैग का बदलाव नहीं होगा, बल्कि हमारी रोज़मर्रा की आदतों में एक बड़ा पर्यावरणीय बदलाव होगा। लेकिन साथ ही एक बात समझना भी ज़रूरी है— Compostable होने का मतलब यह नहीं कि उसे कहीं भी फेंक दिया जाए। अगर उसका सही निपटान नहीं हुआ, तो अच्छी तकनीक भी अपना पूरा फायदा नहीं दे पाएगी। मुझे सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि तकनीक अब सिर्फ़ बड़ी मशीनों या बड़ी इंडस्ट्रीज़ में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की छोटी चीज़ों में भी बदलाव ला रही है। एक साधारण-सी दिखने वाली पॉलीथिन भी अब पर्यावरण और जिम्मेदारी की नई बहस शुरू कर रही है। आप क्या सोचते हैं— क्या ऐसी compostable bags सच में प्लास्टिक का बेहतर विकल्प बन सकती हैं, या यह बदलाव अभी लंबा सफर तय करेगा?
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@jeetusp इसको भी सही से मैनेज कर रहे हैं...
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Jitendra Verma
Jitendra Verma@jeetusp·
@MurmuringInk बदलाव की छोटी सी शुरुआत हो चुकी है लेकिन अभी बहुत बड़ा लक्ष्य है
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@cutedinuv बिल्कुल इसका भी साहिबे डिस्पोजेबल करना पड़ेगा
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Dinu
Dinu@cutedinuv·
@MurmuringInk तकनीक ने प्लास्टिक जैसी सुविधा तो दे दी है, लेकिन अब जिम्मेदारी यह है कि हम इसका उपयोग और निस्तारण सही तरीके से करें।
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afjal raj guru
afjal raj guru@afjalrajguru·
Naran में रील बनाने के चक्कर में जान पर बन आई! Toyota Revo तेज रफ्तार में Kunhar River में जा गिरी। लड़के अपनी गलती की वजह से डूबते-डूबते बचे। Rescue teams ने किसी तरह निकाला। सब सुरक्षित हैं, लेकिन ये वीडियो देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पहाड़ी इलाकों में River के किनारे speed + stunt = मौत का खेल!👇
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Yaram
Yaram@YarMoha079·
ये आयशा खान है इनको लगता है किसी ने इनके ऊपर काला जादू कर दिया है। क्योंकि कुछ दिनों से इननके साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, लगातार अजीब घटनाएं हो रही हैं। एक दिन ये सुबह बिस्तर से उठ नहीं पा रही थी और उसी दिन इनका आईफोन भी टूट गया था। एक और घटना का जिक्र करती हैं की चार दिन से डिलीवरी वाले का फोन आ रहा था जबकि उन्होंने कोई आर्डर ही नहीं किया था। फिर जब डिलीवरी आता है तो उसमें मिट्टी निकलता है इसी वजह से मुझे लगता है कि किसी ने काला जादू कर दिया है। 😂
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@YarMoha079 एकसमय ऐसा आ जाता है
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premprakash
premprakash@pp73030711·
बच्चे के दिल का दर्द काश बुलडोजर चलाने वाले समझ पाते। न घर बचा न सपनों की साइकिल यह एक मासूम बच्चा घर टूटने के बाद उजड़े हुए आशियाना के मलबे के ढेर पर बैठाअपनी नम आंखों से टूटी हुई साइकिल देख रहा है।घर कैसे टूट गया , खामोश आंखों से सब कुछ बयां कर रहा है कुछ बोल नहीं रहा है , लेकिन इसका न बोलना ही ,बहुत कुछ बोल रहा है यह भाउख करने वाली तस्वीर छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के नकटी गांव की है आप के दिल को झकझ छोड़ देगा आँखो में आशू आ जायेगा। कितना दर्द होता है जब किसी गरीब का आशियाना टूटता है अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ गरीबों का घर टूटता है अतिक्रमण के नाम पर कभी नेता और बड़े-बड़े उद्योगपति बड़े-बड़े अधिकारी का घर क्यों नहीं टूटता है
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afjal raj guru
afjal raj guru@afjalrajguru·
आज इस लड़की के हाथ में जो किताब देखी, तो सच में दिमाग हिल गया! सिर्फ Book का Front Page देखो,सब कुछ क्लियर हो जाएगा! अगला नंबर आखिर किसका हो सकता है?👇
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@ChauhanDevyani7 जब कोई ब्रांड किसी सामान्य चीज़ को “समस्या” और अपने प्रोडक्ट को उसका “समाधान” बना देता है, तो धीरे-धीरे वह आदत व्यक्तिगत पसंद से बढ़कर सामाजिक अपेक्षा बन जाती है।
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Devyani Chauhan
Devyani Chauhan@ChauhanDevyani7·
क्या महिलाओं ने शरीर के बाल इसलिए शेव करना शुरू किया क्योंकि उनके बाल अचानक ज़्यादा आने लगे थे???? नहीं... असल बदलाव तब आया... जब मार्केटिंग फैशन और बदलते ब्यूटी स्टैंडर्ड्स ने लोगों की सोच बदलनी शुरू की कि आखिर सुंदर और सामान्य किसे माना जाए 1915 में Gillette एक चुनौती का सामना कर रही थी ज़्यादातर पुरुष ही पहले शेव करते थे... इसलिए कंपनी की ग्रोथ धीमी पड़ने लगी तब कंपनी ने महिलाओं को एक नए ग्राहक वर्ग के तौर पर देखना शुरू किया लेकिन एक दिक्कत थी... ज़्यादातर महिलाओं को रेज़र की ज़रूरत महसूस ही नहीं होती थी यहीं से शुरू हुई एक ऐसी मार्केटिंग...जिसने सिर्फ़ प्रोडक्ट नहीं बेचा.. लोगों की सोच को भी प्रभावित किया Ads में बिना बालों वाली त्वचा को आधुनिक..साफ़ सुथरी और खूबसूरत दिखाया जाने लगा जबकि शरीर के बालों को धीरे धीरे कम आकर्षक बताया गया।ल इसके बाद स्लीवलेस कपड़े..छोटी स्कर्ट...फिल्में.. फैशन इंडस्ट्री और सेलिब्रिटीज़ ने भी इस सोच को और मज़बूत कर दिया ध्यान देने वाली बात ये है कि इससे पहले भी कुछ महिलाएँ अलग अलग तरीकों से शरीर के बाल हटाती थीं लेकिन ये कोई आम चलन नहीं था समय के साथ ये सिर्फ़ एक व्यक्तिगत पसंद नहीं रही समाज की एक उम्मीद बन गई आज दुनिया भर में करोड़ों महिलाएँ शरीर के बाल हटाती हैं सिर्फ़ इसलिए नहीं कि इंसानी शरीर बदल गया है... इसलिए क्योंकि खूबसूरती को देखने का नज़रिया बदल गया और इस बदलाव में मार्केटिंग की भूमिका बहुत अहम रही...लेकिन वो अकेली वजह नहीं थी..फैशन मीडिया और समाज ने भी इसे आगे बढ़ाया यही मार्केटिंग की सबसे बड़ी ताकत है कई बार बड़े ब्रांड सिर्फ़ लोगों की ज़रूरत पूरी नहीं करते... वो ये भी तय कर देते हैं कि लोगों को ज़रूरत आखिर किस चीज़ की महसूस होनी चाहिए
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गीतमाला‏گیتمالا
तू हसरत पुरानी, तू आदत नई है यक़ी तो दिला दे, तू है के नहीं है #KausarMunir #lyrics दोस्तों कोई ऐसा #नग़मा #शेर या #ग़ज़ल बताइये जिसमें #आदत शब्द का इस्तेमाल हुआ हो?? #चित्रपट 🎧 #गीतमाला youtube.com/shorts/E09yqqH…
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@mK2yKgwbGz2R2Aq तेरी आदत भी अजीब कैद बन गई है, दरवाज़ा खुला है, मगर जाने का मन नहीं।
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Shre_parn🇮🇳❣️राव साहेब❣️
पैंतरे आज़माता है इश्क़ हुस्न से नजदीकियां बढ़ाने के मनमर्जियों की अर्जियां बड़ी मिन्नतों से क़ुबूल होती है 💞 Just ✍️💓 अपनी मौज का मुसाफ़िर ❣️ #बज़्म
SanjuGoyal01@SanjuGoyel

यह जो तुम तोड़ देते हो शर्ट का बटन तुम्हारी चालाकियां भी बख़ूबी समझती हूं मैं..! - संजू

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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
@iiamirfanali वायरल होने की चाह अगर विवेक छीन ले, तो वह मनोरंजन नहीं, खतरा बन जाती है। कुछ लाइक्स के लिए अपनों को जिंदगी भर का दर्द देना किसी भी तरह सही नहीं।
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Irfan Ali
Irfan Ali@iiamirfanali·
Reel बनाने की दीवानगी इस हद तक पहुँच गई है कि लोग अपनी ही ज़िंदगी को दांव पर लगाने से भी नहीं डर रहे। कुछ सेकंड की वायरल वीडियो के लिए अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करना बिल्कुल भी समझदारी नहीं है। लाइक्स और व्यूज़ दोबारा मिल सकते हैं, लेकिन ज़िंदगी नहीं।
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
वही ट्रेन। वही AC कोच। वही मंज़िल। फिर एक यात्री ने ₹2,720 दिए और दूसरे को ₹3,540 क्यों देने पड़े? कुछ दिन पहले मैंने SC Duronto Express का किराया चेक किया, क्योंकि मुझे जल्द यात्रा करनी पड़ सकती है। AC 3 Tier का किराया लगभग ₹3,540 दिख रहा था। तभी मेरे एक दोस्त ने बताया कि उसने 24 अगस्त की यात्रा के लिए पहले ही टिकट बुक कर लिया है और उसका किराया केवल ₹2,720 पड़ा। एक पल के लिए मैं हैरान रह गया। वही ट्रेन। वही AC 3 Tier कोच। लेकिन उसका टिकट मेरे मुकाबले लगभग ₹820 सस्ता था। फिर मुझे असली वजह समझ आई। इस ट्रेन में डायनेमिक प्राइसिंग लागू है। मेरे दोस्त ने अपनी यात्रा की योजना काफी पहले बना ली थी, जब सीटें ज्यादा उपलब्ध थीं और किराया कम था। वहीं मुझे शायद कम समय में यात्रा करनी पड़े, जब मांग ज्यादा है और किराया पहले ही बढ़ चुका है। कई बार सही समय पर की गई प्लानिंग सिर्फ वेटिंग लिस्ट से ही नहीं बचाती यह आपके सैकड़ों रुपये भी बचा सकती है। आपका क्या मानना है? क्या डायनेमिक प्राइसिंग सही है, या रेलवे का किराया सभी यात्रियों के लिए एक समान और तय रहना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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