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परसीमन के बाद यूपी में विधानसभा की सीटें लगभग 600 हो जाएंगी।ये नंबर सामने आते ही लोग कहते हैं कि इसे दो राज्य में बांट दीजिए। जबकि मैं इसके विपरीत सोचता हूं। पहली बात यह कि अगर पूरब-पश्चिम करके दो भाग में बंटेगा तो नोएडा, गाजियाबाद जैसे औद्योगिक शहर दूसरे राज्य में चले जाएंगे, फिर हमारे पास क्या बचेगा? हम तो बिहार की तरह हो जाएंगे। काम के लिए दूसरे राज्य में पलायन। दूसरी बात- इस वक्त हम देश के सबसे बड़े राज्य हैं, इसलिए राजनीति में हमेशा केंद्र बिंदु रहते हैं। जो पार्टी सत्ता में रहती है, उसका फोकस यूपी पर बहुत रहता है। दो भाग बटेंगे तो आर्थिक भेदभाव भी बढ़ सकता है। मतलब कम योजनाएं हमारे हिस्से आ सकती हैं। अलग राज्य बनाने के बजाय व्यवस्थित चलाने पर फोकस होना चाहिए। जैसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक खंडपीठ मेरठ शिफ्ट कर दीजिए। पुलिस मुख्यालय लखनऊ के साथ कुछ अन्य जगहों को भी सशक्त कर दीजिए। पश्चिम में एक बड़े विश्व विद्यालय को शुरू कर दीजिए। और भी तमाम चीज है। मैं तो यही कहूंगा, अलग राज्य बनाने की न ही सोचिए। बहुत घाटा है। आज भी पूर्वांचल के 10 से ज्यादा जिलों में गिनती की फैक्ट्री हैं, मतलब रोजगार शून्य।









