आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं - PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि, 20 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली परीक्षा के अंतर्गत, एसआई भर्ती परीक्षा, 2021 में पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और अनुचित साधनों के प्रयोग में संलिप्त अभ्यर्थियों को, एप्लीकेशन अपडेट करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। आयोग सचिव ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों के विरुद्ध, एसआई भर्ती परीक्षा-2021 की शुचिता भंग करने के संबंध में, आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, उन्हें 16 मई से शुरू होने वाली एप्लीकेशन अपडेट प्रक्रिया में, शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसकी विस्तृत सूचना आयोग की वेबसाइट (rpsc.rajasthan.gov.in) पर उपलब्ध है।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान
आज जो नीट परीक्षा रद्द की गई है…
यदि राजस्थान की SI भर्ती 2021 वाली को भी
पेपर लीक का पता चलते ही तुरंत रद्द कर दिया गया होता
तो आज वो अभ्यर्थी और उनके परिजन खून के आंसू नहीं रो रहे होते…!!!
लेकिन राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने उस नासूर को पाला…
और अंततः वो नासूर छात्रों को जीवन भर का दर्द दे गया..
राम राम सभी थानेदार भाइयों को ....
भाइयों में SI भर्ती रद्द करने की मुहिम शामिल रहा .. अच्छी खासी फंडिंग भी की .. क्यूंकि उस समय मेरे 16 नंबर कम हो गए और 6_7 नंबर से मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ ..
अब भर्ती रद्द हो गई है तो में सभी ईमानदार भाई से माफी चाहता हूं.. आप तैयारी करे और
@JATbera1 देख भाई स्टार्ट तूने किया है ... थूक के तूने चाटा है ..
पहले si भर्ती रद्द.. फिर परिवार वाले ही लग गए तो कहता है ईमानदार कहा जाए ...
किसी ने सही कहा है भाई मेरे भगवान अपने कर्मों का फल इसी जन्म में देता है
#जय_हो_भाईचारा
#व्याख्याता_भर्ती_जांच_करे_SOG
यह व्यक्ति लगातार आरोप लगा रहा है,,,,,फिर बोलते हैं कुछ गलत कैसे हुआ क्योंकि कुछ होने से पहले पुलिस के लिए आम जनता की इज्जत कोई मैटर ही नहीं करती,,, बार-बार बोलने पर भी इस व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं की जाती,
एक नमन मेरे समाज के उन साथियों को भी दूंगा जो बोलते हैं हम सही को सही और गलत को गलत कहने की क्षमता रखते हैं, तो मैं कोई अलग नहीं हूं जैसा भी हूं आप लोगों के बीच में रहने वाला ही हूं कोई अलग ग्रह का नहीं हूं जिसके लिए कोई इज्जत लागू नहीं होती,,,,
बहुत आसानी से बोल देते हो कि इग्नोर किया करो लेकिन परिवार वाले, यार-दोस्त ऐसे स्क्रीनशॉट भेजते हैं बोलते हैं कि आप गलत नहीं हो तो इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते, पर उनको कैसे बताऊं इस व्यक्ति के खिलाफ मैंने पहले भी राजस्थान पुलिस को टैग करके बोला है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई, इस तरीके से एलिगेशन मेंशन करके लगाना व्यक्ति की सामाजिक हत्या के बराबर है 🙌🙏
कुछ लोग बोलते हैं सोशल मीडिया से दूर हो जाओ,,, तो भाई लोगों से हार कर कहां-कहां से दूर हो जाए..? कल को कोई धरातल पर भी जीने नहीं देगा तो यहां से भी दूर हो जाएं मतलब चल बसें...?
खैर मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं,,,, न्याय की उम्मीद नहीं 🙏 मेरे समाज के ट्विटर क्रांति वीरों को भी सिर्फ मेरे से ही दिक्कत है क्योंकि कल तक इनके बीच में ही रहता था आज भी इनके बीच ही रहता हूं लेकिन इनको यह भ्रम हो गया है कि इसको दो लोग जानने लग गए इसकी टांग खींचना है,,,, भाई अच्छे से खींचे लेकिन कोई छींटे उछाले वहां पर तो कमेंट में जाकर दांत मत निकालो,
सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत तो रखो,,,, मानवता जिंदा रखो, यह मानव जीवन भर-भर नहीं मिलेगा💔🙏
सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पूरा प्रकरण केवल एक भर्ती निरस्त होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता, राजनीतिक देरी, व्यवस्था में समन्वय के अभाव और युवाओं के टूटते विश्वास का बड़ा उदाहरण बन गया है। इसमें कुछ युवाओं को न्याय मिला है, तो कुछ को अपने साथ अन्याय महसूस हो रहा है।
राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा आखिरकार निरस्त कर दी गई। इस फैसले के बाद स्वाभाविक रूप से समाज और अभ्यर्थियों के बीच दो स्पष्ट पक्ष सामने आए हैं।
पहला पक्ष उन हजारों बेरोजगार युवाओं का है, जो लंबे समय से इस भर्ती में पेपर लीक और धांधली के आरोपों को उठाते रहे। उनके लिए यह निर्णय न्याय की जीत और व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना जैसा है। उनका मानना है कि जब भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता ही संदिग्ध हो जाए, तब उसे जारी रखना ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता।
दूसरी ओर एक ऐसा पक्ष भी है, जिसकी संख्या भले कम हो, लेकिन उसकी पीड़ा भी कम नहीं है। ये वे अभ्यर्थी हैं जो स्वयं को पारदर्शी और ईमानदार तरीके से चयनित मानते हैं। उनका सवाल है कि यदि कुछ लोगों ने गलत तरीके अपनाए, तो पूरे चयन को क्यों रद्द किया गया? उनका तर्क है कि “गेहूं के साथ घुन क्यों पीसा जाए?” और इसी कारण उन्हें यह फैसला अपने साथ अन्याय प्रतीत होता है।
यदि इस पूरे प्रकरण की तह में जाएं तो सबसे पहला दायित्व तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार पर आता है, जिसके कार्यकाल में यह भर्ती आयोजित हुई और पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। जब सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और एसओजी जैसी संस्थाएं यह स्वीकार कर चुकी हैं कि भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, तब यह स्पष्ट है कि उस समय की सरकार व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी रखने में विफल रही। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि उस दौर की सरकार इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी जिम्मेदार पक्षों में से एक है।
इसके बाद वर्तमान सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। भर्ती को निरस्त करने में ढाई वर्ष से अधिक का समय लग गया। इस दौरान मुख्यमंत्री, किरोड़ीलाल मीणा, एसओजी अधिकारियों, न्यायालयों और मंत्रिमंडलीय समिति के बीच जिस स्तर का समन्वय होना चाहिए था, उसका अभाव लगातार दिखाई दिया। निर्णय लगातार टलता रहा, मामले को लंबा खींचा जाता रहा और इसी देरी ने अभ्यर्थियों की पीड़ा को कई गुना बढ़ा दिया।
जब नई सरकार बनी थी, तब यह धारणा थी कि इस भर्ती पर शीघ्र निर्णय होगा और यदि अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो भर्ती जल्द निरस्त कर दी जाएगी। यदि उसी समय स्पष्ट और निर्णायक फैसला ले लिया जाता, तो आज जिन अभ्यर्थियों को वर्षों बाद बाहर होना पड़ा, उनकी पीड़ा शायद इतनी गहरी नहीं होती। समय बीतने के साथ कई चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी की उम्मीदों, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की योजनाओं को इस भर्ती से जोड़ लिया था। ऐसे में देर से लिया गया निर्णय उनके लिए मानसिक और भावनात्मक आघात बन गया।
हालांकि न्यायालय की उस टिप्पणी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिसमें कहा गया कि यदि पानी के गिलास में जहर की दो बूंदें मिल जाएं, तो उन्हें अलग करना संभव नहीं होता; ऐसे में पूरा गिलास फेंकना ही एकमात्र विकल्प बचता है। इसी सिद्धांत को आधार बनाकर अदालत ने माना कि जब पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाए, तब केवल कुछ लोगों को अलग कर निष्पक्षता सुनिश्चित करना व्यावहारिक नहीं रह जाता।
लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा ही क्यों हुईं, जहां लाखों युवाओं का भविष्य वर्षों तक अनिश्चितता में झूलता रहा।
ले भाई एक ओर मौका मिला हमे तो .. भाईसाहब व्याख्याता है भूगोल के ...
लेकिन ट्विटर अकाउंट की भाषा ...🙏
पहली बार कोई देश के गर्व करने वाला काम किया है
हिन्दी हमारी मां है
देश की टॉप 25 ट्रेंडिंग में जन्मदिन के दिन जगह बनाना मेरे लिए गर्व की बात है,,,🙌
और यह सब आपके प्यार और प्रेम की वजह से,,,, हमेशा आभारी हूं 🙏 @JATbera1#HBD_भैराराम_बैड़ा
जन्मदिन के मौके पर @NFUofficial1 के 200 लोगों को प्रमोट करूंगा ❣️
सक्रिय थी रिपोस्ट करके अपनी आईडी कमेंट बॉक्स में डाल दे 🙌✨
#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
#HBD_भैराराम_बैड़ा
#National_freedom_union
TVK वालों ने 2029 के लिए पोस्टर जारी किया है…
पहली बात तो ये कि जो मिला है उसको सँभाल लो…
और दूसरी बात ये कि फ़िल्मी भांड के पीछे तुम लोग पागल होंगे
हम नहीं है….!!!