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छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया है. कुसमुंडा क्षेत्र की 20 से ज़्यादा भू-विस्थापित आदिवासी महिलाओं ने
SECL दफ्तर के बाहर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने पहुंची.
इन महिलाओं की पुश्तैनी ज़मीनें कोयला परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थीं. लेकिन ना मुआवज़ा मिला, ना नौकरी, ना पुनर्वास किया गया.
कई सालों की शिकायतों और दर-दर की ठोकरों के बाद उन्होंने इस तरह विरोध प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार किया. विकास की कीमत सबसे ज़्यादा आदिवासी समाज चुकाता है.
प्रदर्शन करना सही है, लेकिन अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करना गलत है. किसी हरामखोर ने आदिवासी महिलाओं को गलत सलाह दी.


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