लंकेश

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@Observer4s

हुँह 😏

Katılım Mart 2013
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
यहां दो तस्वीरें हैं.. एक पर धर्म पूछ जान ली गयी , दुसरे पर जाति देख अस्मत लूट जान ली गयी। दोनों वीभत्स हैं..विरुप हैं। मगर एक को पड़ोसी देश के मुल्लों ने अंजाम दिया था, दुसरे को गांव के हीं, पड़ोसी नीलों ने अंजाम दिया। अब सोंचिये की भयंकर कौन है? खौफनाक कौन है? पड़ोसी देश के मुल्ले या पड़ोसी नीले??
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
बिहार में सवर्ण आयोग पहली बार 2011 में नीतीश कुमार सरकार द्वारा गठित किया गया था, मंशा उनकी क्या रही होगी वो हीं जाने, लेकिन केवल गठित हीं किया था..धरातल पर कुछ नहीं हुआ। पुनः झुनझुना के रूप में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले (मई 2025 में) नतीश ने इसे फिर से उछाला । इसके अध्यक्ष हैं महाचंद्र प्रसाद सिंह,बीजेपी नेता, पूर्व मंत्री। उपाध्यक्ष है राजीव रंजन प्रसाद (JDU नेता)। कोई फण्ड नहीं, कोई कार्यालय नहीं, कोई अलग कानून नहीं, कोई सरकारी आदेश नहीं, बस यूँ हीं महज दिखावे का. इस आयोग के पदाधिकारियों को पता हीं नहीं कि उन्हें करना क्या है, उनकी जिम्मेदारी क्या है, और पता भी है तो सरकार करने ना देती होगी। जब कुछ जिम्मेदारी है हीं नहीं तो काहे का आयोग, काहे का डिरामा। चुनाव आया तो बोलने के लिए कि हमने सवर्ण के लिए भी कुछ सोंचा है.. इस आयोग का काम था, अभी दौड़ कर सारण जाना, रिपोर्ट तलब करना, निर्देश देना, घटना में दोषी लोगों को पाताल से भी निकलवाना.. मगर इनमें से कोई गया तक भी नहीं होगा.. क्योंकि ये आयोग वास्तव में केवल कागजो पर हीं है। सुना है दो चार बैठक हुई थी इनकी जिसमें ये खुद भूमिहार, और भूमिहार ब्राह्मण के लिए लड़ पड़े.. 🙄
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🌸🍃Indresh Mishra🇮🇳🍃🌸इन्द्रेश कुमार मिश्रा ✍️
@Observer4s एक मांझी नही बीजेपी में और उसके सहयोगियों में ऐसे हजारों मांझी हैं जो सवर्ण समाज की नफ़रत पर राजनीति करते हैं इस देश में हर समाज का नेता अपनी समाज के नैतिक/अनैतिक मांगों के साथ खड़ा है, लेकिन सवर्ण समाज का नेता अपनी समाज की नैतिक मांग पर भी फेवीकोल पी कर सो रहा है
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
#UGC_काला_कानून हमें तो पहले से हीं अंदेशा था इस बात का कि तारीख हीं मिलेगी कोरट से, मगर एक कदम आगे की कार्रवाई हुई. सूचीबद्ध तो हुआ मामला, पर सुनवाई नहीं हुई. न्यायालय व्यवस्था में एक से बढ़कर एक झोल है. किसी भी केस को लिंगर करने का इतने लुप होल हैं कि कोई खिलाड़ी किसी भी केस को कई सालों तक यूँ हीं तारीख़ पर तारीख़ लेकर सिस्टम को अपने सिस्टम से जवाब देकर चिढ़ाता रहेगा. अब दुबारा कब सूचीबद्ध होगा, सरकार हीं जाने. न्यायालय तो जानने से रहा। फिर भी स्टे तो हैं हीं,, ये चलता रहेगा, चुनाव निपट जाएंगे इसी के आड़ में। ये सब सोची समझी साजिश है, और कुछ नहीं। उधर माझी केंद्र का पक्ष मजबूती से रखते हुए मिडिया को सम्बोधित कर हीं रहें हैं कि #UGC किसी भी कीमत पर लागू होना चाहिए.. 🙄
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लंकेश@Observer4s·
@rana_ji_04 फिरको वाली पोस्ट पर x फिरकी ले रहा है
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लंकेश@Observer4s·
खरगे ने एकबार लोकसभा में कहा था कि आधे बीजेपी के सांसद तो पहले के कोंग्रेसी हीं हैं.. बड़े ठहाके लगे थे.. लेकिन इन ठहाको में एक कड़वी सच्चाई है कि खरगे की बात सौ फीसदी सही है. जिस कांग्रेस की नीतियों, घोटालों से तंग आकर आजीज आकर जनमानस ने बीजेपी को चुना था, वहीं बीजेपी आज उन्हीं कोंग्रेसीयों को उनके दल बदल के साथ अपने दल में मिलाकर जनता को चूना लगाने का काम रोज हीं कर रही है. भाजपा है अब कहां? कौन है? भाजपा की परिभाषा :- "एक ऐसी पार्टी जिसके चुनाव चिन्ह के छत्र छाया में आकर, इंडिया के सभी राजनीतिक पार्टियों के बड़े से बड़े भ्रष्ट नेता अपने आप को कोर्ट कचहरी, पुल्स थाना, और किसी भी जाँच एजेंसी से महफूज महसूस करता है, उस पार्टी को भारतीय जनता पार्टी कहते हैं " क्या से क्या हो गए देखते देखते। कहाँ तो ये बोलते थे कि, ना खाऊंगा ना खाने दूंगा.. जिसने भी जितना खाया है उसका वसूली होगा. और इसी आड़ में इस मानव ने डीमोनीटाइजेशन जैसा फैसला लिया.. .. क्या क्या पाप है भाई... 🙄
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
@druditatyagi @Rudrabhakt_JB @neha_laldas चुनाव तक केवल तारीख़.. सरकार चाहेगी की गेंद न्यायालय के पाले में रहे। गेंद पर फाइनल किक मारना है या नहीं, न्यायालय को आदेश सरकार से हीं आएगी,, हमेशा की तरह, तो फिलहाल मामला यूँ हीं बना रहेगा... फिर भी दबाब बने रहना बेहद जरुरी है। आवाज़ बुलंद होते रहना चाहिए.. ✌🏻
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रुद्रभक्त
रुद्रभक्त@Rudrabhakt_JB·
🚨 आज सुप्रीम कोर्ट में UGC पर अहम सुनवाई 🚨 आज का दिन तय करेगा आगे की दिशा 👇 • क्या पूरा कानून खत्म होगा? • क्या संशोधन के साथ लागू रहेगा? • क्या सरकार को फटकार मिल सकती है? • क्या छात्रों/संस्थानों को राहत मिलेगी? • क्या मामला फिर अगली तारीख तक टल जाएगा? • या फिर केंद्र सरकार इसे और लंबा खींचने की कोशिश करेगी? देशभर की नजरें इस सुनवाई पर टिकी हैं। आपकी क्या राय है ,, आज क्या होने वाला है? 🤔👇
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डॉ उदिता त्यागी
मुझे उमींद जगी है अब हम लड लेंगें थैंक यू जयपुर हमारा होंसला बनाये रखने के लिए #UGC_काला_कानून
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
कैमूर पुसौली रेलवे स्टेशन पर डीजे का दुकान चलाने वाले गुप्ता जी को कल धोखे से गांव बुलाकर 8-10 अज्ञात लोगों ने डंडे से पीट पीट कर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि माइक देने के बहाने उसे गाँव बुलाया गया था, जहां पहले से घात लगाए अनुसूचित जाति के युवकों ने उनपर हमला बोल दिया। अस्पताल ले जाने के क्रम में मौत हो गयी। शोषित कौन, वंचित कौन, पिछड़ा कौन???????? Act का जो अस्त्र थमाया गया है इनके हाथों में, समाज जल कर भस्म हो जायेगा। पता नहीं आगे क्या क्या होगा। गाँव से लोग भाग कर शहर गए बच्चे पढ़ाने, अब शहर के लोगों के बच्चों को भी सरकार यूजीसी लाकर पढ़ने ना दे रही है। सवर्ण जाए कहां, गांव रहने लायक नहीं, शहर में बच्चे पढ़ नहीं सकते.. नौकरी खत्म, प्रतिष्ठा खत्म। रूस हीं आसरा है 🙄
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रुद्रभक्त
रुद्रभक्त@Rudrabhakt_JB·
आज आप नहीं बोलोगे… कल आपके लिए कोई नहीं बोलेगा। #UGC_RollBack
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
जिनके शबनम के चुन्नी पर रंग का एक बूँद पड़ जाए तो, पुरा मोहल्ला हिन्दुओ के बच्चों को काटने दौड़ पड़ता है, जिनके पाले कुत्तों बिल्लीयों तक को भी रंग छू जाए तो हत्याएँ होने लगती है.. जिनके कानों में भजन पहुँचता है तो उनके भौहें तन जाती हो . जिनके मस्जिद के आगे से शांति पुर्वक यात्रा निकलता है तो, उनका धर्म खतरे में आ जाता है और मस्जिद से हथियार गोला बारूद निकलने लगता हो . अब उन्हीं समुदाय के 10-12 उपद्रवी लौंडे,बेहद गलत मंशा लिए हिन्दू धर्म की सबसे बड़ी आस्था, देवी, मोक्षदायिनी, माँ गंगा के आँचल में, हिन्दू के सबसे बड़े धर्मस्थली, जहां माँ गंगा के सानिध्य में स्वयं त्रिपुरारी ध्यानमग्न हैं, जिस पवित्र माँ गंगा और नगरी वाराणसी के गाथाओं के बिना कोई पुराण, ग्रन्थ पुरा ना हुआ हो, उस नगरी में माँ भागीरथी के गोद में बैठकर इफ्तार कर रहें हैं, मांस भक्षण कर रहें हैं, बचे अवशेष माँ गंगा में फेंक रहें हैं. ये अनजाने में हुआ कृत्य नहीं है। ये पुरी प्लानिंग के साथ किया गया है। जगह सबसे पवित्र स्थान को चुना गया, नदी सबसे पवित्र चुना गया, बाकायदा रील बनाया गया, अपलोड किया गया, ये सब यूँ हीं अचानक नहीं, बल्कि पुरे सनातन धर्म को चिढ़ाने के लिए किया गया, चुनौती देने के लिए किया गया। यहीं इनके मस्जिदों से जब राम नवमी की शुभ यात्राएँ निकलती हैं तो इसी देश के उनके रहनुमा नेता लोग चैनल पर गला फाड़ फाड़ चिल्लाते हैं कि हिन्दुओँ को जरूरत क्या है उनके इलाके में यात्रा निकालने की,, याद कीजियेगा नूह वाली घटना को.. हम उनके मस्जिद के आगे से गुजरे भी नहीं और वो माँ गंगा में इफ्तार करें, मांस फेंके, जिस गंगा में करोड़ों हिन्दू श्रद्धालु स्नान कर पूजन कर ईश्वर उपासना करते हैं। आखिर इनको इतनी शक्ति मिल कहां से रही है? कौन प्रश्रय दे रहा है? इसमें वास्तव में बहुत बड़ा खेल रचा जा रहा है मौजूदा उत्तरप्रदेश सरकार के खिलाफ.. माहौल बिगड़े और इल्जाम थोप किनारे किया जाए..
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
अँधेरे का डर दिखाकर टॉर्च बेचने का धंधा तो ऐसे आम है राजनीति में.. मगर ताज़ा अपडेट है कि खुलम्म खुला संविधान की शपथ खाने वाले नेताओं के द्वारा खुले मंच से एक वर्ग को खुश करने के लिए अन्य वर्गो को धमकियाया जा रहा है कि सुनो - हम हैं तो आप हैं, ग़र हम नहीं रहेंगे तो आपको एक समुदाय छील कर रख देगा.. बड़े पैमाने पर मौजूदा केंद्रीय सरकार ने भी यहीं दिखाया डर आमजन को कि, अब्दुल को हम हीं रोकेंगे, हम हीं भगाएंगे, हम हीं जेल में डालेंगे, हम हीं बुलडोजर चलाएंगे.. इसलिए अगर चाहते हो कि भारत में अब्दुल डरे, भारत से डर कर अब्दुल शबनम भागे तो वोट बीजेपी को दो। इसी का नया नया संस्करण आया है एक राज्य के मुखियाईन द्वारा.. अब स्थिति ये है कि जिंदा रहना है तो उन्हें हीं चुनना है वरना घसीटे जाओगे। उनका मन भी नहीं होगा घसीटने का तो इशारा किया जायेगा कि इन्हें घसीटो, डरावो ताकि हमें छोड़ किसी और को आगे से वोट करने की जुर्रत ना करे। लोकतंत्र की जय हो 🙄
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
लोकतंत्र में रहना है तो ये होशियारी जरूरी है, रोजा रखे ना रखे, पर इफ्तार पार्टी जरूरी है.. और लोग इनको सारण में खोज रहें हैं। 🙄
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
कल लोग बाग बड़े उत्साहित थे, कई बड़े बड़े हैंडलों ने धन्यवाद मोई जी, धन्यवाद फणनवीस जी लिखने लगे, और कई तो धन्यवाद भागवत जी भी लिखे.. कारण ये था कि महाराष्ट्र के किसी मंत्री ने थोड़ा मंत्री होने का फील लिया और भाव में बहकर कह दिया कि हमने ST SC Act में हल्का सा बदलाव कर रहें हैं और इसमें अब FIR होने पर जाँच कमिटी बैठेगी, जाँच करेगी, और जब लगेगा कि वाकई अत्याचार केस बनता है तब केस दर्ज होगा, गिरफ़्तारी होगी, वरना FIR रद्द होगा। अब जैसे हीं ये खबर एयर हुआ.. धमाल हो गया.. GC वर्ग पुनः मोदी मोदी मोदी मोदी गाने लगा। पुष्पवर्षा होने लगा। शिकवे शिकायत धूल गए. नयनों से प्रेम के अश्रु धार फूट पड़े। कई हैंडल तो घाघरा उठा के नाचने भी लगे.. मगर हमें हुआ डाउट.. डाउट ये कि अभी एक महीना बाद हीं 5 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव है.. सरकार कदम फूँक फूँक कर रख रही है.. और इस माहौल में मोदी सरकार की इतनी हिम्मत की ST SC Act को टच भी कर दे। महाराष्ट्र का मंत्री पगला गया है क्या? मैं कन्फर्म था कि गलती से मिस्टेक हुआ है, मंत्री की जबान लड़खड़ा गयी है, वो तुरंत माफ़ी मांगता फिरेगा.. एकदम नाक रगड़ेगा.. और वो हुआ..केंद्र से गाली खाने के बाद एक दिन बाद हीं मंत्री और सरकार दोनों ने फैलाये रायते को समेटते हुए, थूके को बड़े इत्मीनान से चाटते नज़र आये,, कहे - अजी गलती से मिस्टेक हुई गवा है. हम कोई संसोधन नहीं कर रहें हैं माफ़ी दई दो 🙄 मैंने पहले भी कहा है, आज भी दोहरा रहा हूँ :- "भारत में किसी भी राजनीतिक पार्टी के गान में इतना दम नहीं कि वो आरक्षण और ST SC Act को हाथ भी लगा दे, हाँ इसमें और धाराएं जोड़ी जरूर जा सकती है, कम नहीं होगी "
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
मिस्टर सिन्हा, आपको ये तो पता कि हरमन सिंह कपूर जो कि लंदन में रंगरेज नामक रेस्टोरेंट चलाते हैं, पिछले कई सालों से। अपने रेस्टोरेंट के बाहर बोर्ड लगाया बड़े शान से कि "मैं हलाला मीट नहीं बेचता हूँ, इसके लिए मुझे गर्व है " इसपर इनके रेस्टोरेंट पर पथराव हुआ,, तब इन्होंने कहा कि यहां की सरकार हमारी मदद नहीं करेगी इसलिए हमें अपने साथ कृपाण रखना होगा,, बस केस दर्ज हुआ और पुल्स ठा ले गयी.. यहां तक तो ठीक है.. मगर ये कौन बताएगा सिन्हा कि यह वहीं शख्स है जिसने खालिस्तानीयों को अपने होटल से डंडे मार मार कर भगाया था, तीन साल पहले.. और एलान किया था कि कोई खालिस्तान समर्थक मेरे रेस्टोरेंट में नहीं आएगा.. बस यहीं कारण था कि हरमन सिंह मुस्लिम और भारत विरोधियों के निशाने पर आ गए.. सेम हालात है यहां सवर्णों के.. वहाँ जैसे हरमन सिंह का सुनने वाला कोई नहीं, यहां सवर्णों का सुनने वाला कोई नहीं.. मगर तुमको लंदन दीख गया.. भारत में नहीं दीख रहा. कितना लेगा भाई.. अब तो रुक जा..
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लंकेश@Observer4s·
गुड इवनिंग सर..आइये आइए सर, आइए प्लीज! स्वागत है.. ह ह ह ह.. गुड इवनिंग जी सभी को. (बुके सम्हालते हुए) अजी इसकी क्या जरूरत थी, ह. ह. ह. ह और सर.. आने में कोई परेशानी, दिक्क़त..? आपके होते क्या हीं परेशानी.. (संयुक्त रुप से) ह ह ह ह.. (औपचारिकताओं के बाद ) कब का प्लान है आपलोगों का? मतलब किस तारीख़ को करना है वेर्डिक्ट..? देखिये सर.. अगला चुनाव तो साल 2024 में होगा अप्रैल मई में.. तारीख़?? अब तारीख़ तो आयोग जाने. हम क्या हीं बताएँगे. अजी आपके इशारे के बिना आयोग कब से तारीख़ तय करने लगा चुनाव का (संयुक्त रूप से) ह ह ह ह.. खैर, वो तो है, मगर औपचारिकता भी तो कोई चीज है। देखिये सर, अब आपसे क्या हीं छिपाना। लग रहा हैं कि राम मंदिर के फैसले का वक्त अब आ गया है। अच्छा! लेकिन अगला चुनाव तो 5 साल बाद 2024 में है, फिर इतनी जल्दी क्यों? जी,,ये अक्टूबर है 2019 का,, और आप तो जानते हीं हैं कि हमारी तैयारी कुछ अलग किस्म की होती है. अभी से माहौल बनाना पड़ेगा. जी जी.. देखिये, फैसला आने के बाद एक दो माह में बोर्ड का गठन होगा.. फिर महीनों बाद अधिग्रहण होगा,और फिर शिलान्यास भी होगा..अगर तेजी से भी काम चलेगा कई महीनों लग जाएंगे, और अगले आचार संहिता के पहले उद्घाटन भी तो करना है जी.. ह ह ह ह.. 🙏🏻 ओ हो.. पुरा प्लान तैयार है आपका. हम तो ऐसे हीं है, आपके क्रूपा से.. वो तो ठीक है, फैसला तो आ हीं जायेगा आपके पक्ष में, ड्राफ्ट तैयार है,.. बोलिये,, रुक क्यों गए? अब... क्या हीं कहूं ह. ह. ह. आप निश्चिन्त रहें जी, आपका आजीवन ख्याल रखा जायेगा.. ये सब हमारे ऊपर छोड़िये.. ह.. ह.. ह.. और वैसे भी इन चुनावों के लिए हीं तो इस फैसले को रोक कर रखा गया था.. जी बिल्कुल. अच्छा अब इजाजत चाहूंगा. ज्यादा देर रुकना यहां ठीक नहीं.. नमस्कार 🙏🏻 नमस्कार 🙏🏻🙏🏻.. फिर आया 9 नवम्बर 2019..राममंदिर पर सुनियोजित फैसला.. बिना वोट के एक सांस भी नहीं लेते साहेब, एक कदम भी नहीं चलते साहेब, एक शब्द भी नहीं बोलते साहेब, यहां तक कि वोटो को ख्याल करके हीं कपड़े भी पहनते हैं साहेब। इनका कोई भी कार्य निःस्वार्थ नहीं।.. 🙏🏻
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
कभी कभी तो लगता है कि वो आया हीं है राजनीति में हिसाब चुकता करने। क्योंकि अब्दुल की चूड़ी टाइट करने का वादा करके कब सवर्णों की शिखाओं, कलावा, जनेयु पर कैंची चलाने लगा, पता हीं नहीं चला।
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लंकेश
लंकेश@Observer4s·
ये हैं राजीव प्रताप रुढ़ी, माननीय सांसद सारण। इनको जब फर्स्ट वोटर बच्चियों से वोट लेना था तो लक्सरी बसों में बिठा लड़कियों को स्कूल से मैदान में लाकर बकायादा उनका अभिवादन कर रहें हैं.. लेकिन इन्हीं लड़कियों में से एक बच्ची का कल अस्मत लूट कुंए में फेंक दिया गया तो ये फेंकू के चेले, उस गरीबनी माँ के आंसू पोंछने जाने के बजाये, एक्स पर गेम गेम का ट्वीट कर रहें हैं। नेताओं के लिए वोटर यूज़ एंड थ्रो के अलावा कुछ नहीं, चाहे नेता कोई भी हो, किसी दल का हो।
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