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Amit Singh
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जबलपुर का एक होटल जिसका नाम है "सुकून",
उस होटल में दो मुस्लिम युवकों के साथ एक हिंदू महिला पकड़ी गई है...
बजरंगदल ने पुलिस के साथ छापामारी किया था...
महिला दोनों युवकों के साथ आपत्तिजनक हालत में थी... उसके बाद बजरंगदल के लोगों ने महिला को जमकर डांट फटकार लगाया...
दोनों युवकों का फोन जांच हुआ तो उसी महिला की पुरानी वीडियो थी उन दोनों के साथ अश्लील हरकत करते हुए...
उस वीडियो में दोनों युवक महिला के साथ बारी बारी से संबंध बनाते दिख रहे हैं...
दोनों युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उनके मोबाइल का गहनता पूर्वक जांच चल रहा है...

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Twisha Sharma Case ने सभी के हृदय को झकझोर दिया है,,,
आज मेरे पापा ने मुझे ये वीडियो भेजा 👇👇
और लिखा,,,
बेशक ससुराल तुम्हारा घर है तुम वहाँ बहुत ख़ुश हो,,
लेकिन मायका पराया नहीं है,,अगर वहाँ सम्मान ना मिले और आत्मसम्मान टूटने लगे तो बिना डरे घर वापस आ जाना ❤️❤️
आज पापाजी की ममता ने खूब रुलाया 😘🥲🥲
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पैसों के लालच में पति ने अपनी ही पत्नी का भाई बनकर किया कन्यादान —
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में एक पति ने अपने ही पत्नी की कन्यादान करके दूसरे से शादी करवा दी।
पति ने लुट के इरादे से अपने पत्नी की शादी करवाई थी लेकिन जिससे शादी हुई थी उसको समय रहते इस षडयंत्र का पता चल गया।
दरअसल झांसी के रहने वाले रजत शर्मा शादी के लिए लड़की की तलाश कर रहे थे वो एक निजी हॉस्पिटल में लीडर है ये बात रजत के पड़ोसी को पता चली तो उसने रजत के साथ फ्राड करने के लिए पूरा षडयंत्र रच दिया।
रजत के पड़ोसी सोनू ने अपने दोस्त की बहन बता के लड़की से भेट करवाया और जब लड़की पसंद आ गई तो उसके पति से ही उसका कन्यादान करवा दिया ।
लेकिन शादी के बाद भी रजत की पत्नी व्हाट्सअप पर लगातार चैट करती रहती थी जिससे रजत को शक हो गया और जब उसने चैट पढ़ा तो उसे सारी सच्चाई का ही पता चल गया।
आजकल इंसान पैसों के लिए इतना नीचे गिर गए हैं कि अपनी पत्नी का कन्यादान करके उसे विदा कर दे रहे हैं?


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कुंभ में एक कांटो वाले बाबा, अपनी योग साधना से
कांटो पर लेटा करते थे। लोग आते थे, देखते थे और
कुछ दक्षिणा देकर चले जाते थे.......
फिर आई यह मोटे से पेंगुइन जैसी शक्ल वाली लड़की,
इसने न सिर्फ बाबा का अपमान किया बल्कि उन्हें इतनी
खरी खोटी सुनाई की बेचारे रोने लगे और कुंभ मेला छोड़कर जाने को मजबूर हो गए......
ये मोटी गैंडी इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर थी, और शायद गैर हिंदू थी।
ये गैंडी गैर हिन्दू होकर हमारे साधू संतो पर अपमानित करने वाला वीडियो बनाकर फालोवर बढ़ाने के लिए आयी थी....!!!
ऋषि मुनि जब पुराने समय में यज्ञ किया करते थे तो राक्षस आकर हड्डियां,खून,मांस फेंककर विघ्न पैदा करते थे...
ये वही राक्षस हैं।
आखिर कर इस गैंडी का गिरफ्तारी का वारेंट निकल हि गया था...
पता नहीं फिर इसका क्या हुआ....

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घर लौटते वक्त मुझे सड़क किनारे खड़ी दो लड़कियों ने हाथ देकर रोका, तो मुझे लगा कि शायद उन्हें कहीं जाना होगा...
इसलिए मैने गाड़ी रोककर उनसे पूछा कि कहा जाना है...
तभी उनमें से एक लड़की बोली जहां आप ले जाना चाहे वहीं चल देंगे, मुझे उसका जवाब कुछ अटपटा लगा...
मैंने फिर से पूछा कि घर कहा है तुम्हारा, तो अब दूसरी बोली आज रात जहां आप ले जा सको वहीं चल देंगे...
उसका इतना बोलते ही अब मैं समझ गया था कि वो कोई मदद नहीं मांग रही थी, ये तो जेब हल्का करवाना चाहती है...
मैने अब उनसे पूछा कि कितने रुपए लेती हो, तो एक लड़की तुरंत बोली कि 5000 हजार...
मैने बोला कि 5 हजार में तुम दोनों...???
तब उनमें से बड़ी लड़की बोली कि 5 हजार तो मेरा रेट है, ये मेरी छोटी बहन है, इसको काम सिखाना है तो इसलिए इसको आज साथ लेकर आई हूं, कुछ दिन साथ रहेगी टू कस्टमर से डील करना सीख जाएगी...
उसके इतना बोलते ही मैने अपनी गाड़ी आगे बढ़ा दी, वे लड़की पीछे से 4 तो कभी 3 हजार की आवाज देकर पुकारती रही, लेकिन मैं आगे बढ़ता चला गया...



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सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब रात का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक चलते ट्रक के पीछे से ₹500 के नोटों की बारिश होती दिखाई दे रही है,
सूखी घास से भरा यह ट्रक अंधेरी हाईवे सड़क पर दौड़ता नजर आता है, जबकि पीछे चल रही कार के windshield की तरफ हवा में उड़ते नोट पूरे scene को किसी फिल्म जैसा बना देते है
वीडियो को और entertaining बना रहा है बैकग्राउंड में बजता पंजाबी गाना, जो इस dramatic moment के साथ बिल्कुल perfect बैठ रहा है जैसे-जैसे नोट हवा में उड़ते दिखते हैं, लोग सोच में पड़ गए हैं कि यह असली घटना है या फिर AI editing और visual effects का कमाल 🤯 इंटरनेट यूज़र्स इस वीडियो पर जमकर reactions दे रहे हैं। कुछ लोग इसे “सीधा फिल्म का scene” बता रहे हैं, तो कुछ मज़ाक में कह रहे हैं कि उन्हें भी उस ट्रक के पीछे गाड़ी चलानी है चाहे वीडियो असली हो या AI-generated, इसने सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा छेड़ दी है
ViralVideo MoneyRain TruckVideo AINews PunjabiSong
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जो कभी गंदगी और बदबू की पहचान थी,अब
वही मुनक नहर क्षेत्र अब विकास और सौंदर्य का नया केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व में आधुनिक रिवरफ्रंट और भव्य छठ घाट का निर्माण तेजी से जारी है,जो शालीमार बाग को स्वच्छता,पर्यटन और नई पहचान देगा।भाजपा का संकल्प स्वच्छ,सुंदर और विकसित दिल्ली
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😀US - मेमोरियल डे 😀
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“सरहद पर जाने वाले-जो लौट के घर न आए “
शहीदों को नमन
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
अमेरिका में मेमोरियल डे (Memorial Day) हर साल मई के आखिरी सोमवार को मनाया जाता है। यह दिन उन अमेरिकी सैनिकों को याद करने और श्रद्धांजलि देने के लिए समर्पित है, जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
को
राष्ट्रीय अवकाश का इतिहास और इसकी विकास यात्रा
1. गृहयुद्ध (Civil War) और इसकी शुरुआत
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मेमोरियल डे की जड़ें अमेरिकी गृहयुद्ध (1861–1865) से जुड़ी हैं। इस युद्ध में करीब 6,20,000 से अधिक सैनिकों की जान गई थी, जो उस समय अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय क्षति थी। युद्ध समाप्त होने के बाद, देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने स्वतःस्फूर्त रूप से मृत सैनिकों की कब्रों पर फूल चढ़ाना और उन्हें सजाना शुरू कर दिया।
2. 'डेकोरेशन डे' (Decoration Day) के रूप में जन्म
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पहली आधिकारिक घोषणा: 5 मई, 1868 को केंद्रीय सैनिकों के संगठन (Grand Army of the Republic) के नेता जनरल जॉन ए. लोगान ने आधिकारिक तौर पर "डेकोरेशन डे" की घोषणा की।
30 मई की तारीख क्यों चुनी गई?: इस दिन को इसलिए चुना गया क्योंकि इस समय तक पूरे देश में वसंत के फूल पूरी तरह खिल जाते थे, जिससे कब्रों को सजाना आसान होता था।
पहला बड़ा आयोजन: 30 मई, 1868 को आर्लिंगटन नेशनल सिमेट्री (Arlington National Cemetery) में पहला बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहां लगभग 5,000 लोगों ने हिस्सा लिया और करीब 20,000 संघ (Union) और परिसंघ (Confederate) दोनों पक्षों के सैनिकों की कब्रों को फूलों से सजाया।
3. पहले राज्यव्यापी मान्यता और दक्षिण का मतभेद
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न्यूयॉर्क 1873 में इस दिन को कानूनी अवकाश के रूप में मान्यता देने वाला पहला राज्य बना। 1890 तक सभी उत्तरी राज्यों ने इसे अपना लिया था।
हालांकि, दक्षिण के कई राज्यों ने गृहयुद्ध के घावों के कारण इस दिन को मनाने से इनकार कर दिया और अपने मृत सैनिकों के लिए अलग से 'कॉन्फेडरेट मेमोरियल डे' मनाना जारी रखा।
4. 'मेमोरियल डे' का विस्तार और राष्ट्रीय अवकाश
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प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव: प्रथम विश्व युद्ध (World War I) के बाद इस दिन के मायने बदल गए। अब यह केवल गृहयुद्ध के सैनिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सभी अमेरिकी युद्धों में मारे गए सैनिकों को शामिल कर लिया गया। इसके बाद से दक्षिण के राज्यों ने भी इसमें भाग लेना शुरू किया।
नाम में बदलाव: धीरे-धीरे 'डेकोरेशन डे' की जगह 'मेमोरियल डे' नाम अधिक लोकप्रिय हो गया, जिसे 1967 में संघीय कानून द्वारा आधिकारिक नाम घोषित किया गया।
सोमवार की छुट्टी (1971):
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1968 में अमेरिकी कांग्रेस ने 'यूनिफॉर्म मंडे हॉलिडे एक्ट' पारित किया। इसके तहत 1971 से मेमोरियल डे को 30 मई के बजाय मई के आखिरी सोमवार को मनाना तय किया गया, ताकि नागरिकों को तीन दिन का लंबा वीकेंड (Long Weekend) मिल सके।

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🚨 IPL में श्रेयस अय्यर की कप्तानी 🫡🔥
🏏 दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल तक पहुंचाया
🏆 KKR को ट्रॉफी जिताई
🔥 पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाया
📊 कप्तान रहते हुए 3096 रन, 142.4 स्ट्राइक रेट
जहां भी गए, टीम की तस्वीर बदल दी 💯
श्रेयस अय्यर सिर्फ बल्लेबाज़ नहीं, एक ऐसे कप्तान हैं जो टीम की किस्मत बदलना जानते हैं 👑🔥
IPL इतिहास के सबसे बेहतरीन कप्तानों में से एक!

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