Rahul Parcha Bhartiya

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@PaarchaRahul

सूरज कितना ही गर्म हो, समुद्र को सुखा नहीं सकता।

भारत Katılım Şubat 2017
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Rahul Parcha Bhartiya
Rahul Parcha Bhartiya@PaarchaRahul·
@ThePushprajX याह सब फोटो वीर हैं जनता को दिखाते कुछ है और होता कुछ है कुछ तो इतने चिकने होते हैं सब कुछ सामने दिख रहा है नेता खाली दिखावे के लिए रिक्शे में बैठ कर जा रहा है गाड़ियों को काफिला पीछे चल रहा है फिर भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता जनता क्या सोचेगी ?
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Pushpraj sharma
Pushpraj sharma@ThePushprajX·
सिंगरोली बीजेपी नेता का 2 गलापन देखिए..... खुद ई रिक्शा में बैठ के जा रहा है ताकि लोगों में सादगी भरी तस्वीरें वायरल हो और एक अच्छी छवि बने नेताजी की.... लेकिन उसी नेता के पीछे 200 कारों का काफिला चल रहा है उसी ई रिक्शा के पीछे.... वाह मतलब जनता को तो ये नेता सूतिया समझ रहे है....
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
पर्दे के पीछे की रणनीतियों को समझने वाले ही सफल होते हैं राजनीति में। राजनीति केवल मंच पर दिए गए भाषणों और भीड़ की तालियों का खेल नहीं है। असली राजनीति वहाँ होती है जहाँ कैमरे नहीं पहुँचते, पर्दे के पीछे, रणनीतियों के स्तर पर। मेरे 20 वर्षों के राजनीतिक प्रशिक्षण के अनुभव ने मुझे एक बात बहुत स्पष्ट सिखाई है: जो व्यक्ति केवल दिखाई देने वाली राजनीति को समझता है, वह सीमित सफलता तक ही पहुँच पाता है; लेकिन जो पर्दे के पीछे की चालों, समीकरणों और मनोविज्ञान को समझ लेता है, वही स्थायी और प्रभावशाली नेता बनता है। राजनीति में हर निर्णय का एक दृश्य पक्ष होता है और एक अदृश्य पक्ष। उदाहरण के लिए, कोई नेता अचानक किसी मुद्दे पर बोलता है या चुप रहता है, यह केवल संयोग नहीं होता। इसके पीछे गहरी रणनीति, समय की समझ और भविष्य के परिणामों का आकलन छिपा होता है। सफल नेता वही होता है जो इन संकेतों को पढ़ सके और अपने कदम उसी अनुसार तय कर सके। मेरे अनुभव में, राजनीति में सफलता के लिए तीन मुख्य गुण आवश्यक हैंः- अवलोकन (Observation), विश्लेषण (Analysis) और धैर्य (Patience)। अवलोकन आपको यह सिखाता है कि कौन क्या कर रहा है और क्यों कर रहा है। विश्लेषण आपको यह समझने की क्षमता देता है कि इन कार्यों का भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा। और धैर्य आपको सही समय का इंतजार करना सिखाता है, क्योंकि राजनीति में जल्दबाज़ी अक्सर नुकसानदायक होती है। पर्दे के पीछे की रणनीतियाँ केवल विरोधियों को हराने के लिए नहीं होतीं, बल्कि अपने संगठन को मजबूत करने के लिए भी होती हैं। एक सफल नेता हमेशा अपने कार्यकर्ताओं की सोच, जनता की भावनाओं और विपक्ष की कमजोरियों को समझता है। वह जानता है कि कब आक्रामक होना है और कब शांत रहकर स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ना है। राजनीति में कई बार ऐसा होता है कि जो दिख रहा होता है, वह सच्चाई नहीं होती। मीडिया, बयानबाज़ी और सार्वजनिक घटनाएँ केवल एक कहानी का हिस्सा होती हैं। असली कहानी उन बैठकों में लिखी जाती है जहाँ निर्णय लिए जाते हैं, जहाँ गठबंधन बनते और टूटते हैं, और जहाँ भविष्य की दिशा तय होती है। इसलिए, एक प्रशिक्षित राजनीतिक व्यक्ति हमेशा सतह से नीचे जाकर सोचता है। मैंने अपने प्रशिक्षण में हमेशा यह सिखाया है कि राजनीति को शतरंज की तरह देखें, हर चाल का एक उद्देश्य होना चाहिए और हर निर्णय का एक दीर्घकालिक लक्ष्य। यदि आप केवल वर्तमान में उलझे रहेंगे, तो आप दूसरों की चालों का शिकार बनेंगे और अंततः राजनीति के भी शिकार ही बनकर रह जाएँगे। लेकिन यदि आप दो-तीन कदम आगे सोचेंगे, तो आप खेल को नियंत्रित कर पाएंगे। राजनीति में सफलता केवल लोकप्रियता से नहीं, बल्कि समझदारी से आती है। जो व्यक्ति पर्दे के पीछे की रणनीतियों को समझ लेता है, वह न केवल परिस्थितियों को पहचानता है, बल्कि उन्हें अपने पक्ष में मोड़ने की क्षमता भी विकसित कर लेता है। यही क्षमता उसे भीड़ से अलग करती है और उसे एक सच्चा नेता बनाती है। इसलिए, यदि आप राजनीति में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो केवल मंच पर बोलना नहीं सीखें, बल्कि मंच के पीछे की खामोशी को भी समझना सीखें, यहीं से असली नेतृत्व की शुरुआत होती है।
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
“राजनीति में जो कहा जाता है वो किया नहीं जाता और जो किया जाता है वो कहा नहीं जाता” यह केवल एक वाक्य,केवल एक व्यंग्य नहीं है बल्कि सत्ता की असल कार्यशैली का गूढ़ सिद्धांत है। 20 वर्षों के राजनीतिक प्रशिक्षक के अनुभव से मैं यह कह सकता हूँ कि जो इस सत्य को समझा है वही राजनीति की बिसात पर टिक पाया है। राजनीति शतरंज की तरह है, जहाँ हर चाल दिखाने के लिए नहीं, जीतने के लिए चली जाती है। आम जनता जो देखती है, वह सिर्फ “बयान” होता है; लेकिन असली खेल “निर्णय” में छिपा होता है। यहीं पर चाणक्य नीति बहुत प्रासंगिक हो जाती है, याद रखिए कि “कार्य सिद्धि के लिए गुप्तता अनिवार्य है।” आचार्य चाणक्य ने स्पष्ट कहा था कि “जो राजा अपनी योजनाओं को उजागर कर देता है, वह स्वयं अपने विनाश का मार्ग खोल देता है” आज के राजनीतिक परिदृश्य में नेता मंच से कुछ कहते हैं, विकास, न्याय, समानता की बात करते हैं लेकिन पर्दे के पीछे समीकरण कुछ और ही बनते हैं। जातिगत समीकरण, धार्मिक समीकरण,गठबंधन, ध्रुवीकरण, रणनीति, संसाधनों का प्रबंधन और विरोधियों की चालों का पूर्वानुमान, ये सब वे क्षेत्र हैं जहाँ असली राजनीति खेली जाती है। एक कुशल राजनेता वही होता है जो अपनी वास्तविक रणनीति को धुंध में छुपाकर रखे और विरोधियों को भ्रम में रखे। एक राजनीतिक प्रशिक्षक के रूप में मैं अपने विद्यार्थियों को हमेशा यह सिखाता हूँ कि “बयान और निर्णय में अंतर समझना सीखो, जनता के लिए नेता का बयान ज़रूरी है, लेकिन सत्ता प्राप्ति और उसे बनाए रखने के लिए निर्णय महत्वपूर्ण होते हैं। यदि आप हर योजना को पहले ही उजागर कर देंगे, तो विरोधी आपकी चालों को समझ जाएँगे और आपको हरा देंगे। इसलिए आचार्य चाणक्य की तरह “साम, दाम, दंड, भेद” का सही प्रयोग करना सीखो, पर्दे पर नहीं पर्दे के पीछे की रणनीतियों को सीखो, जानों की किस तरह राजनीति की छुपी रणनीतियों का उपयोग अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने और सफलता पाने में किया जाता है। राजनीति में आपको विश्वास और भ्रम दोनों का संतुलन बनाए रखना पड़ता है। जनता को विश्वास दिलाना होता है, विश्वास में लेना होता है और विरोधियों में भ्रम पैदा करना होता है। यही कारण है कि कई बार जो कहा जाता है, वह केवल एक परत होती है, अंदर कई और परतें होती हैं, जिनमें असली योजना छिपी होती है। कुछ लोग कह सकते हैं कि फिर तो राजनीति केवल छल कपट का ही नाम है, नहीं, ऐसा नहीं है, राजनीति एक कला है, समय, परिस्थिति और लक्ष्य के अनुसार स्वयं को ढालने की कला। एक परिपक्व नेता वही होता है जो सही समय पर सही बात कहे और सही समय पर सही काम करे। जनता में भ्रम पैदा करके और विरोधियों में विश्वास जगाकर भी कई बार सत्ता में पहुँचा जा सकता है। सफल राजनेता अपने विरोधियों से भी काम लेना जानते हैं। यह कला भी आसानी से सीखी जा सकती है बस शर्त यही है कि कहने की जगह करने पर विश्वास किया जाए, जो कहा जा रहा है वह किया जाए यह ज़रूरी नहीं है और जो किया जाए वह कहा भी जाए यह भी ज़रूरी नहीं है।
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
राजनीति के हर व्यक्ति को जाननी चाहिए यह बात। बहुत कम लोग जानते हैं कि Rajiv Gandhi अपनी सुरक्षा के तामझाम और दिखावे से काफी असहज महसूस करते थे। राजीव के पास एक जोंगा जीप थी—Nissan Jonga। वे उसे खुद चलाते थे, अक्सर अपने परिवार के साथ। जब वे 1985 में प्रधानमंत्री बने, तब उनकी उम्र लगभग 40 साल थी। उनके बच्चे छोटे थे, और वे उन्हें अक्सर ड्राइव पर ले जाते थे। एक बार वे अपने परिवार के साथ Nainital गए। आप कल्पना कर सकते हैं कि इससे कैसी हलचल मच गई—प्रधानमंत्री शहर में हों! पूरे राज्य की पुलिस तैनात हो गई और शहर एक किले में बदल गया। राजीव को यह सब अटपटा लगा। उन्होंने अधिकारियों को बुलाकर कहा: “मैं फलां समय पर शहर में निकलूंगा। मुझे कोई तामझाम नहीं चाहिए। हम सामान्य तरीके से घूमेंगे।” “जी सर।” लेकिन सुरक्षा “ब्लू बुक” और आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, वे जोखिम कैसे ले सकते थे? जब राजीव बाहर निकले, तो उन्होंने हर मोड़ पर पुलिस और गाड़ियां देखीं। वे तुरंत गुस्से में आ गए। “यहां इंचार्ज कौन है?” कोई भी नाराज़ प्रधानमंत्री के सामने आने को तैयार नहीं था। हालांकि डीजी, आईजी और डीआईजी मौजूद थे, लेकिन जिला एसपी को आगे कर दिया गया। उन्होंने सलाम किया। बातचीत कुछ इस तरह हुई: राजीव: “क्या मैंने साफ नहीं कहा था कि मुझे इतनी सुरक्षा नहीं चाहिए?” एसपी: “जी सर।” राजीव: “फिर भी आपने मेरी बात अनसुनी कर दी?” एसपी: “जी सर।” राजीव: “क्या प्रधानमंत्री के आदेश की कोई कीमत नहीं?” एसपी: “सर…” आईपीएस अधिकारी Vikram Singh के अनुसार उन्होंने कहा: “निर्देशों के अनुसार हम आपकी सुरक्षा के लिए जो आवश्यक है, वही कर रहे हैं। इस मामले में ‘प्रोटेक्टी’ के अधिकार भी सीमित होते हैं। आपको अपनी सुरक्षा हटवाने का अधिकार नहीं है।” राजीव चौंक गए। “अगर आपका काम मेरा दिन खराब करना है, तो आप इसमें पूरी तरह सफल हुए हैं,” उन्होंने गुस्से में कहा और सीधे वापस लौट गए। वह कार्यक्रम रद्द हो गया। अगला कार्यक्रम था Bhimtal जाना। उन्होंने केवल डीएम और एसपी को एक अलग गाड़ी में पीछे आने की अनुमति दी। पुलिस के लिए इतना ही काफी था। कई सिविल गाड़ियों और मैटाडोर में सादे कपड़ों में हथियारबंद पुलिसकर्मी बैठाए गए, जो आगे चलते रहे लेकिन प्रधानमंत्री की नजर से दूर। डीएम और एसपी जीप में पीछे थे, जबकि राजीव अपने परिवार के साथ जोंगा में बैठे— और जोंगा देखते ही देखते गायब हो गई। उस दौर में जब एंबेसडर और जीपें मुश्किल से 60–65 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ पाती थीं, जोंगा 120 किमी/घंटा से ज्यादा की स्पीड से दौड़ सकती थी। किसी तरह सब लोग Bhimtal पहुंच गए। राजीव पहले से वहां थे। वे भुट्टा खा चुके थे और आराम से घूम भी आए थे। यह यात्रा बहुत सुखद रही। वापसी से पहले, उन्होंने फिर से अधिकारी को बुलाया। एसपी आए। राजीव ने उन्हें चाय ऑफर की और कहा: “माफ कीजिए। कल मैंने आप पर गुस्सा किया।” उन्होंने एसपी से कहा कि अपने परिवार को भी लाएं और सबके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। राजीव के पांच साल शानदार रहे। कंप्यूटर क्रांति के अलावा, उनकी विरासत पर उतनी चर्चा नहीं होती: पंचायती राज, विदेश नीति, इंदिरा आवास योजना, जवाहर रोजगार योजना, नवोदय विद्यालय, आर्थिक उदारीकरण और कर सुधार। उन्होंने हर गेंद पर चौका मारा। राजीव एक बेहतरीन प्रशासक थे, लेकिन एक अनुभवहीन राजनेता। वह भारत के लिए एक स्वर्णिम दौर था। जब भी इस दौर की बात होती है, तो अक्सर शाह बानो, तुष्टिकरण या बोफोर्स जैसे विवादों की धूल में दबा दिया जाता है। लेकिन जिन्होंने वह समय देखा है, वे जानते हैं कि देश किस दिशा में जा रहा था। अगर उन्हें पांच साल और मिले होते, तो देश आज से 25 साल आगे होता। उन जैसा प्रधानमंत्री फिर कभी नहीं आया। अगर वे होते, तो देश इतना विभाजित या अंदर से कमजोर नहीं होता। उनमें सबको साथ लेकर चलने की क्षमता थी। लेकिन समय कम था। अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाही के कारण उन्होंने सिर्फ अपने परिवार को ही नहीं, बल्कि भारत के उस बड़े वर्ग को भी अकेला छोड़ दिया, जो बौद्धिक, शांतिप्रिय और विकास के लिए उत्सुक था।
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
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राजनीति के लिए ज़रूरी सबक “लोगों को यह न बताएँ कि आप कितने वीर हैं।” राजनीति में 20 वर्षों के अनुभव के बाद मैं एक बात पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ—कि यहाँ शब्दों रा नहीं, बल्कि कामों का महत्व होता है। यहाँ आपकी पहचान आपके द्वारा किए गए कामों से बनती है, न कि आपके द्वारा किए गए दावों से। बहुत से कार्यकर्ता और नेता एक गलती बार-बार करते हैं कि वे अपनी “वीरता” को खुद ही बताने लगते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि असली नेतृत्व कभी खुद की प्रशंसा नहीं करता, बल्कि लोग उसके कामों की गवाही देते हैं। राजनीति में वीरता का अर्थ सिर्फ साहस दिखाना नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना, जनता के साथ खड़ा रहना और अपने वचनों पर अडिग रहना है। यदि आप हर मंच पर यह बताते रहेंगे कि आपने कितना बड़ा संघर्ष किया है या आप कितने निडर हैं, तो धीरे-धीरे लोगों के मन में आपकी विश्वसनीयता कम होने लगती है। जनता सुनने से ज्यादा देखने पर विश्वास करती है। एक सफल नेता वही होता है जो अपने काम को बोलने देता है। जब आप बिना शोर किए, बिना प्रचार के, लोगों की समस्याओं को हल करते हैं—तब आपकी छवि अपने आप बनती है। यह छवि ज्यादा मजबूत और स्थायी होती है, क्योंकि इसे आपने नहीं, बल्कि समाज ने बनाया होता है। राजनीति में “इमेज” बनाना आसान है, लेकिन “विश्वास” बनाना बहुत कठिन है। मेरे अनुभव में, जो नेता लगातार अपनी वीरता का बखान करते हैं, वे अक्सर असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि यदि वे अपनी उपलब्धियों को बार-बार नहीं दोहराएंगे, तो लोग उन्हें भूल जाएंगे। लेकिन यह सोच गलत है। असली काम कभी छिपता नहीं है। अगर आपने ईमानदारी से काम किया है, तो लोग खुद आपके बारे में बात करेंगे। राजनीति में संयम और विनम्रता सबसे बड़ी ताकत होती है। जब आप अपने काम को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताते, बल्कि शांत रहकर आगे बढ़ते हैं, तो लोग आपको एक गंभीर और भरोसेमंद नेता के रूप में देखते हैं। यह गुण आपको भीड़ से अलग बनाता है। अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि राजनीति में “वीर” बनने की कोशिश मत कीजिए, बल्कि “जिम्मेदार” बनिए। वीरता दिखाने की नहीं, निभाने की चीज़ है। जब आप जनता के लिए सच्चे मन से काम करेंगे, तो आपकी पहचान खुद-ब-खुद बन जाएगी। याद रखिए, नेता वही बड़ा होता है, जिसकी तारीफ वह खुद नहीं, बल्कि जनता करती है। जय हिन्द, जय भारत
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राजनीति के क़िस्से। ओवर स्मार्टनेस राजनीति में कभी नहीं चलती। अजीत जोगी के पास सब कुछ था। आईएएस और अपना मीठा रूप दिखाकर किसी को भी लुभा लेने की कला। अर्जुन सिंह को इसीलिए लुभा पाए। वे ही इंदौर कलेक्टर से इस्तीफा दिलाकर राजनीति में लाए थे। मध्य प्रदेश में इंदौर कलेक्टर का मतलब होता है मुख्यमंत्री का सबसे खास और राज्य का सबसे पावरफुल कलेक्टर। कहते हैं कि वह वास्तव में वहां कलेक्शन का ही काम करता है। मुख्यमंत्री के लिए। खैर! अजीत जोगी ने बहुत तरक्की की।‌ इन्नोसेंट (भोले ) चेहरे वाले जिस तरह हर क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं वैसे ही वे बढ़े। राजीव गांधी और सोनिया गांधी के भी बहुत नजदीक आ गए थे। ‌ लेकिन जो स्वभाव होता है कि मैं कुछ भी कर सकता हूं वह ऐसे लोगों को एक सीमा से आगे नहीं जाने देता। 2003 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद जब उन्होंने विधायक तोड़ने की कोशिश की और इसके लिए सोनिया गांधी की परमिशन है का नाम लिया तो वही ओवर स्मार्टनेस थी। और फिर वहीं से उनका राजनीतिक पतन शुरू हो गया। इस समय दिलीप सिंह जूदेव का स्टिंग ऑपरेशन कराया मगर वह भी उनके फेवर में नहीं गया। भाजपा ने उनका मुकाबला करने के लिए अरुण जेटली को रायपुर भेज दिया था जो उनसे भी ज्यादा इन दांव पेंचों में माहिर थे। ज्यादा चतुरता में आदमी कुछ भी करने लगता है सोचता है सब मैनेज कर लूंगा। फोन टेप कराना जासूसी कराना राजनीति में अच्छी बातें नहीं मानी जातीं। अपने 3 साल के मुख्यमंत्री काल में उन्होंने विद्या चरण शुक्ल, मोतीलाल वोरा बाद में मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ के सारे कांग्रेसी नेताओं को बदनाम करने की मुहिम चला रखी थी। इस सब षड्यंत्र नुमा माहौल में एनसीपी के नेता और विद्या चरण शुक्ल के बहुत नजदीकी रामावतार जग्गी की हत्या हुई थी। जिसमें उनके बेटे अजीत जोगी का नाम आया था। और उस समय बरी हो जाने के बाद अब हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक योग्य पढ़ा लिखा अफसर और नेता भी सिर्फ जरूरत से ज्यादा चतुराई के चक्कर में सब कुछ गंवा देता है। बच्चों का भविष्य भी। ‌ राजनीति के भी अपने उसूल होते हैं जो भी इससे बहुत ज्यादा इधर-उधर जाता है उसका परिणाम कभी अच्छा नहीं होता।
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राहुल गांधी जी यदि प्रधानमंत्री होते तो ऐसे नहीं होते देश के हालात? #rahulgandhi #congress youtu.be/LaUbjbIYaJI सुनिए लोकसभा सांसद धर्मवीर गांधी जी के साथ भारत के पहले और एकमात्र राजनीति के ट्रेनर श्री शाहनवाज चौधरी की राजनैतिक विषयों और वर्तमान राजनीति पर चर्चा। आप भी सुनें और देश के हर नागरिक तक पहुंचाएं।
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
आप भी सुनें और क़र्ज़े के कारण परेशान हर व्यक्ति तक पहुँचाएँ। #कर्जामुक्ति
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
*जय हिन्द, जय भारत* केवल एक नारा नहीं है बल्कि यह एक राष्ट्रीय भावना है। भारत केवल कोई एक जमीन का टुकड़ा नहीं है यह 140 करोड़ दिलों की धड़कन है और जब हम “जय हिन्द, जय भारत” कहते हैं तो यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं होता, बल्कि यह उस सोच की अभिव्यक्ति होती है जो हमें जोड़ती है, बाँधती है और हमें एक साझा पहचान देती है, भारतीय होने की पहचान, भारतीयता की शपथ को पालन करने का अहसास और स्वयं से आगे देश को रखने की भावना। और इसी भावना के साथ आज से 10 वर्ष पहले आज ही के दिन मैंने (शाहनवाज़ चौधरी भारतीय) अपने 10 शिष्यों के साथ इस नारे को संबोधन के रूप में स्वीकार किया था कि जब भी हम एक दूसरे से मिलें या अलग हों तो नमस्कार, सलाम, आदाब, Good Morning, Good Evening या बाकी धार्मिक और जातिगत संबोधनों की जगह “ जय हिन्द, जय भारत” कहकर एक दूसरे का स्वागत करेंगे और विदा लेगें। यहां तक की फ़ोन पर भी Hello और Bye की जगह “ जय हिन्द, जय भारत” कहने का चलन शुरू किया। आज 10 वर्ष में देश में फैले मेरे लाखों शिष्य और अनुयायी अपने हर संवाद से पहले “जय हिन्द, जय भारत” कहते हैं। उस समय जब समाज को धर्म, जाति, भाषा और प्रांतों के नाम पर बाँटने की कोशिश की जा रही थी तब मैने अपनी टीम के साथ मिलकर भारतीयता की शपथ और “जय हिन्द, जय भारत” के नारे को लाकर समाज को जोड़ने की पहल की और आज इन 10 वर्षों में जय हिंद, जय भारत” का नारा केवल एक नारा नहीं रह गया है बल्कि एक साझा अभिवादन बन गया है। एक ऐसी पुकार जो हर सच्चे भारतीय के दिल से निकलती है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। जैसे कोई नमस्ते कहता है, कोई सलाम करता है, कोई सत् श्री अकाल बोलता है या कोई राम -राम , वैसे ही “जय हिन्द, जय भारत” ऐसा संबोधन बन गया है जो हम सबको जोड़ने का काम करता है। यह नारा हमें बाबा साहब के उस नारे की भी याद दिलाता है जिसमें उन्होंने कहा था कि शुरुआत और अंत में हम केवल भारतीय हैं। हमारी विविधता हमारी शक्ति है, कमजोरी नहीं। यह देश मंदिरों की घंटियों से भी गूंजता है, मस्जिदों की अज़ान से भी, गुरुद्वारों के कीर्तन और गिरजाघरों की घंटियों से भी। इन सबके बीच एक ऐसी आवाज़ है जो किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की है, हर भारतीय कि है वह आवाज़ है “जय हिन्द, जय भारत” के नारे की आवाज़। जब कोई भारतीय इस नारे से किसी का अभिवादन करता है, तो वह कहता है कि मैं तुम्हें तुम्हारे धर्म, जाति या भाषा से नहीं, बल्कि तुम्हारे भारतीय होने से पहचानता हूँ। यह एक ऐसी सोच है जो कहती है कि “हम सबका पहला धर्म इंसानियत है, और हमारी सबसे पहला प्राथमिकता भारत की एकता है।” “जय हिन्द, जय भारत” एक ऐसी भावना है जो धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा और लिंग की सीमाओं को मिटाती है।इसलिए जब भी हम किसी से “जय हिन्द, जय भारत” कहें, तो यह केवल औपचारिक अभिवादन न हो, बल्कि एक एहसास हो कि हम सब एक हैं, हमारी एक सोच, हम सभी को एक जैसा मानते हैं, हम किसी से भेदभाव नहीं करते हैं, हम एक देश के नागरिक हैं। आज जरूरत है कि यह नारा हर स्कूल में, हर गली में, हर मंच पर गूंजे। बच्चे-बच्चे के होंठों पर यह आवाज़ हो *जय हिन्द, जय भारत* Note:- यदि आपको लगता है कि यह मुहीम अच्छी है और हमें इससे जुड़ना चाहिए तो आज से ही किसी से भी मिलते समय और बिगड़ते समय, कोई भी संबोधन शुरू करते और अंतर करते समय, फ़ोन उठाते और रखते समय Hello और Bye की जगह “ जय हिन्द, जय भारत” कहना शुरू करिए और अपने बच्चों और रिश्तेदारों को भी प्रेरित करिए। *जय हिन्द, जय भारत।*
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
आप भी सुनें और अपने बच्चों को भी सिखाएँ सफलता का यह नियम। #success
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
क़र्ज़े के कारण परेशान हर व्यक्ति तक यह जानकारी पहुंचाई जा रही है कि उनकी क़र्ज़ा मुक्ति के लिए निःशुल्क क़र्ज़ा मुक्ति अभियान चल रहा है। जो लोग भी क़र्ज़े के कारण परेशान हैं उन सभी को 31 October को क़र्ज़ा मुक्ति के प्रमाण पत्र दिए जाएँगे ताकि कोई भी बैंक वाला, रिकवरी वाला, साहूकार आपको कर्जा वापसी के लिए परेशान न कर सके। जिन लोगों ने फार्म नहीं भरा है वे website पर जाकर फार्म भर दें या हमारे क़र्ज़ा मुक्ति के कार्यालय पर आकर फार्म भर सकते हैं। Website karzmuktbharat.co.in कार्यालय का पता Head Office 3-4-5 First floor, Shri Krishna center, Navrangpura, Ahmedabad, Gujarat 9825069651, 9924998363 Branch office Naranbhai makwana. 9426517976 B-2, sahaj residency Near shiv shakti school, Snehplaza , I.o.c.road Chandkheda, Ahmedabad
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Rahul Parcha Bhartiya
Rahul Parcha Bhartiya@PaarchaRahul·
कितने लोग हैं जो सोनम वांगचुक को देशभक्त मानते हैं जिन्हे लगता है कि सोनम वांगचुक ने भारत का नाम विश्व में रोशन किया है अपनी राय ज़रूर रखे. #SonamWangchuk #BJP4IND #Modi #RahulGandhi
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
आप भी सुनें और क़र्ज़े के कारण परेशान हर व्यक्ति तक पहुँचाएँ। #कर्जमुक्तभारत
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
क़र्ज़े के कारण परेशान हर व्यक्ति तक पहुँचाइये यह जानकारी। जिन लोगों ने अभी तक फार्म नहीं भरा है वे अपना फार्म online website karzmuktbharat.co.in पर भर सकते हैं या फिर कार्यालय आकर भी फार्म भर सकते हैं। 3-4-5 First floor, Shri Krishna center, Near Mithakhali six road Navrangpura, Ahmedabad, Gujarat 9825069651, 9924998363 Last Date 30 September 2025 #कर्जमुक्तभारत
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
जब सरकार ने सोनम वांगचुक जी जैसे अहिंसक समाज सुधारक व्यक्ति को जेल में डाल दिया है तब पिछले साल उनसे लद्दाख भवन पर किए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के समय मुलाक़ात का यह वीडियो आप सभी से साझा कर रहा हूँ। यह सरकार की तानाशाही है, हर सही सवाल करने वाली आवाज़ को यह कहकर दबा देना कि वह देशद्रोही है आखिर कहाँ तक सही है? आप भी सुनें और हर व्यक्ति तक पहुंचाएं। मेरी और मेरी टीम की पूरी सहानुभूति और समर्थन सोनम वांगचुक जी के साथ है।
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
आप भी हर व्यक्ति तक पहुँचाइये यह जानकारी। जिन लोगों ने अभी तक फार्म नहीं भरा है वे अपना फार्म online website karzmuktbharat.co.in पर भर सकते हैं या फिर कार्यालय आकर भी फार्म भर सकते हैं। 3-4-5 First floor, Shri Krishna center, Near Mithakhali six road Navrangpura, Ahmedabad, Gujarat 9825069651, 9924998363 #कर्जमुक्तभारत
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SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya
SHAHNAWAZ CHAUDHARY Bhartiya@shahbhartiya·
क़र्ज़ा मुक्ति फार्म भरने के अंतिम तिथि 30 September 2025 है। जिन लोगों ने अभी तक फार्म नहीं भरा है वे अपना फार्म online website karzmuktbharat.co.in पर भर सकते हैं या फिर कार्यालय आकर भी फार्म भर सकते हैं। 3-4-5 First floor, Shri Krishna center, Near Mithakhali six road Navrangpura, Ahmedabad, Gujarat 9825069651, 9924998363 #कर्जमुक्तभारत
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