parul shukla (ब्राह्मण )

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parul shukla (ब्राह्मण )

@Parul94

✨ ✨ Dreamer | Believer | Achiever ✨ 📍 Jaipur vibes 💫 Living my story, one post at a time🌹 In love with sunsets & silent vibes 📖 No🚫DM

Jaipur rajasthan.. INDIA Katılım Şubat 2011
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Himanshuu Mishra
Himanshuu Mishra@erhimanshumi29·
मोदी जी आपका मना करने से पहले भी हम लोग गोल्ड नहीं खरीद पा रहे थे। गोल्ड का भाव सुन कर ही हम लोगों का गांव फटा जा रहा था अब क्या ही लेंगे, अब तो आपने मना भी कर दिया है तो और नहीं लेंगे अब।
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Nirbhay Singh
Nirbhay Singh@menirbhay93·
मोदी जी ये अखबार वाले सोना खरीदने का ऑफर दे रहे थोड़ा इनको समझाइये 1 साल ऐसे विज्ञापन ना दें
Nirbhay Singh tweet media
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रावण
रावण@raavan_india·
अगले एक साल तक, नेताओं की बड़ी रैलियां ना हों, नेताओं के विदेशी दौरे ना हो, नेताओं की लक्जरी गाड़ियां हटा दी जाएं, नेताओं के झूठ बोलने पर रोक लगे, नेताओं के सूट बूट पहनने पर रोक लगे, नेताओं के बेटा बेटियों की शाही शादी पर रोक लगे, नेताओं को मिलने वाला पेट्रोल और डीजल का पैसा रोका जाए, नेताओं के PR पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाए। जो छूट गया हो, वो आप बता दीजिए।
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Satyam Giri 🇮🇳
Satyam Giri 🇮🇳@satyamgiri143·
@Parul94 @raavan_india इस विषय में थोड़ा कच्चा है। इतना समझदार ही होते हैं तो क्यों पूछते। डरने का नहीं बता दो 🤪
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रावण
रावण@raavan_india·
बकलोल • मंदबुद्धि • भकचोन्हर • मूर्ख • भकुआ • अज्ञानी • एकदमै बोका • जड़ • बेलुरा • बेवकूफ • लक्षणहीन • अल्पबुद्धि • चिरकुट • नासमझ • ढोंठ • मतिहीन • हबुआ • बुद्धिहीन • चट-बुड़बक • गंवार • अड़बैंग • बावला • मुसड़ • अक्लहीन • बौराह • डफर • बुड़बक • अनाड़ी ऐसे शब्दों का प्रयोग किसी नेता के लिए करने का मन हो रहा, तो भी मत करिएगा वरना नेता जी एफ•आई• आर • करवा देंगे।
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
मेरा हमेशा से ये विश्वास रहा है कि कोई भी सरकार तभी सफल हो सकती है, जब समाज स्वयं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाता है। स्वच्छ भारत अभियान जैसे अनेक कार्यक्रम इसके बड़े उदाहरण हैं।
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Narendra Modi
Narendra Modi@narendramodi·
सेवा ही हमारे समाज का स्वाभाविक चरित्र है। पीढ़ी दर पीढ़ी यह हमें प्रेरित करने के साथ ही ऊर्जावान बनाता आया है। Art of Living के हर प्रयास में इसी भावना का प्रतिबिंब नजर आता है।
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Shree Somnath Temple
Shree Somnath Temple@Somnath_Temple·
1000 वर्षों के विध्वंस और नवनिर्माण की अमर गाथा: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का भव्य शंखनाद ! सनातन धर्म के अडिग विश्वास का प्रतीक श्री सोमनाथ मंदिर आज 'स्वाभिमान पर्व' के उल्लास मे डूबा है। मध्य प्रदेश से पधारे 1000+ शिवभक्तों ने इस 3-दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के प्रथम दिन महादेव का महाअभिषेक किया। 3D लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से सोमनाथ की शौर्यगाथा देखकर हर भक्त की आँखें भावविभोर हो उठीं।
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Satyam Giri 🇮🇳
Satyam Giri 🇮🇳@satyamgiri143·
@raavan_india कोई ऐसे नेता का नाम बताएं जिस पर यह सभी गुण मौजूद हो।
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Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav@yadavakhilesh·
अच्छी तो ये बात नहीं नमस्ते का जवाब नहीं
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Smriti Z Irani
Smriti Z Irani@smritiirani·
क्यों इतना परेशान हैं, क्या कोई इम्तिहान है?
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EWS ARMY
EWS ARMY@ews_army·
CM Vijay ने मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने आज ही तीन बड़े ऐलान कर दिया 200 यूनिट बिजली फ्री महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नशीली दवाओं के खिलाफ टास्कफोर्स तामिलनाडु को लेजेंड CM विजय के रूप में मिला है। मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के तुरंत बाद ही CM Vijay फ़िल्मों की तरह एक्शन मोड में आ गए जैसे आपने उन्हें मूवी में देखा था।.
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parul shukla (ब्राह्मण )
*🌷मातृत्व दिवस🌷* हमारी प्राचीन गौरवशाली सनातन संस्कृति में वैसे तो "मां" आदि काल से पूजनीय रही है उसके लिए हमको "मातृ दिवस" के एक दिन इंतजार करना आवश्यक नहीं है क्योंकि- *नास्ति मातृसमा छाया,* *नास्ति मातृसमा गतिः।* *नास्ति मातृसमं त्राण,* *नास्ति मातृसमा प्रिया।। '* लेकिन पश्चिम के प्रभाव के चलते अब भारत में भी प्रत्येक वर्ष मातृ दिवस जोर-शोर से मनाया जाने लगा है, चलो कैसे भी मां को प्रेम व सम्मान दिया जाए उतना अच्छा है। क्योंकि "मां" ही तो है जो विधाता की रची इस दुनिया को फिर से अपने ढंग से रचने वाली विधाता है, "मां" इस लघु शब्द में प्रेम की विराटता समग्रता निहित है। अनु- परमाणुओं को संगठित करने वाली अगिनत नक्षत्रों, लोक- लोकान्तरों देव- दनुज- मनुज तथा कोटि-कोटि जीव प्रजातियों को मां ने ही जन्म दिया है। "मां" के अंदर प्रेम की पराकाष्ठा है, या यूं कहें कि "मां" ही प्रेम की पराकाष्ठा है। इस प्रेममयी "मां" शब्द में संपूर्ण सृष्टि का बोध होता है, मां के शब्द में वह आत्मीयता एवं मीठास छिपी होती है जो अन्य किसी शब्दों में नहीं होती, 'मां' नाम है संवेदना, भावना और एहसास का। सही मायने में सभी प्रकार के प्रेम का आदि उद्गम स्थल मातृत्व ही तो है, और प्रेम के सभी रूप इसी मातृत्व में समाहित हो जाते हैं। प्रेम गहन अपूर्व अनुभूति है, और संतान के प्रति मां का प्रेम एक स्वर्गीय अनुभूति है। "मां" की ममता और आंचल की महिमा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता अतः अपने शब्दों को विराम देते हुए आज मातृ दिवस पर मैं दुनिया की सभी माताओं को उसके अंनूठे- अनमोल मातृ- बोध की बधाई देता हूं और उन्हें सादर कोटि-कोटि नमन वंदन करता हूं। *दुनिया में साक्षात नजर आने वाली ईश्वर का रूप "मां" को सादर वंदन🙏💐* 🕉️
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Maa BaglaMukhi Mandir
Maa BaglaMukhi Mandir@baglamukhipuja·
जहाँ विश्वास है, वहाँ माँ बगलामुखी का आशीर्वाद है। उनकी साधना से साहस, आत्मबल और सफलता प्राप्त होती है।
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parul shukla (ब्राह्मण )
आज राजनीति का मतलब सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप लगाना बनकर रह गया है। हर पार्टी खुद को सही और दूसरी पार्टी को गलत साबित करने में लगी हुई है, लेकिन असली मुद्दों पर काम बहुत कम दिखाई देता है। जनता हर दिन जिन समस्याओं से जूझ रही है, उन पर बहस कम और भाषण ज्यादा होते हैं। आज न हवा साफ है, न पानी साफ है। शहरों में लोग प्रदूषण से परेशान हैं, सांस लेना तक मुश्किल होता जा रहा है। नदियाँ गंदी हैं, पीने का पानी तक सुरक्षित नहीं है। हर साल सफाई के बड़े-बड़े वादे होते हैं, लेकिन सड़कों, गलियों और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी आज भी वैसे ही पड़ी रहती है। देश में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास रहने के लिए अच्छा घर नहीं है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन राजनीतिक भाषणों में असली समाधान कम सुनाई देता है। हर पार्टी सिर्फ पिछले सरकार की गलतियाँ गिनाने में लगी रहती है। सबसे दुख की बात यह है कि खाने तक में मिलावट हो रही है। दूध, मसाले, तेल, मिठाइयाँ, सब्जियाँ, हर चीज़ में मिलावट की खबरें आती रहती हैं। यह सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा मुद्दा है, लेकिन इस पर उतनी गंभीर चर्चा नहीं होती जितनी होनी चाहिए। सवाल यह नहीं है कि कौन-सी पार्टी सही है और कौन-सी गलत। सवाल यह है कि आम इंसान की जिंदगी बेहतर कब होगी। लोगों को साफ हवा चाहिए, साफ पानी चाहिए, सुरक्षित खाना चाहिए, रोजगार चाहिए और रहने के लिए सम्मानजनक जीवन चाहिए। राजनीति अगर सिर्फ आरोपों तक सीमित रह जाएगी, तो असली समस्याएँ कभी खत्म नहीं होंगी। देश को भाषणों से ज्यादा काम की जरूरत है। जनता अब सिर्फ वादे नहीं, बदलाव देखना चाहती है। पारुल शुक्ला
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